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4 दिन शेष-8 सितम्बर अवतार दिवस: धर्म की स्थापना के लिए “धरती पर अवतार”

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8 सितम्बर अवतार दिवस: 8 सितम्बर 1951 को विश्व के तारणहार महापुरुष सन्त रामपाल जी महाराज ने हरियाणा की पावन “धरती पर अवतार” लिया था। अवतरण दिवस के केवल 4 दिन शेष रह गए हैं। जगतगुरु तत्वदर्शी सन्त रामपाल जी महाराज जी पांच नदियों वाले तत्कालीन राज्य पंजाब (वर्तमान हरियाणा) में अवतरित हुए अधर्म के नाश और धर्म की विजय हेतु। किन्तु यहां अधर्म और धर्म का अभिप्राय बिल्कुल अलग हैं। यहाँ धर्म से तात्पर्य है शास्त्र विरुद्ध साधना कर रहे लोगों को जगाकर तत्वज्ञान से परिचित कराना और अज्ञानी धर्मगुरुओं, जिन्होंने भोली जनता को अपने अज्ञान से भ्रमित कर रखा है उस अंधविश्वास, पाखण्ड और शास्त्र विरुद्ध आचरण रूपी अधर्म को समाप्त करना है।

वास्तविक अवतार से क्या तात्पर्य है?

हर युग में पूर्ण परमात्मा अवतार लेते हैं। लेकिन लोक में प्रचलित काल ब्रह्म के द्वारा भेजे गए लोगों को भी अवतार कहा जाने लगा। ऐसे लोग जिन्होंने थोड़ा भी चमत्कार किया उन्हें भोली जनता ने ईश्वर का अवतार मानकर परमात्मा की श्रेणी में रखकर उनकी पूजा आराधना करनी प्रारंभ कर दी। परंतु पाठकों को यह भेद समझना चाहिए कि पूर्ण परमात्मा परम अक्षर ब्रह्म सत्पुरुष जब स्वयं “धरती पर अवतार” लेते हैं या अपने प्रतिनिधि को सतज्ञान सतभक्ति देने के लिए भेजते हैं वही वास्तविक रूप में परमात्मा के “धरती पर अवतार” हैं।

8 सितम्बर अवतार दिवस: वर्तमान में पूरे विश्व में पूर्ण परमात्मा परम अक्षर ब्रह्म सत्पुरुष के “धरती पर अवतार” एकमात्र तत्वदर्शी सन्त रामपाल जी महाराज हैं। तत्वदर्शी सन्त की पहचान पवित्र सदग्रन्थों में दी गई है। शास्त्रों के विवेकपूर्ण अध्ययन करने से यह भली भांति समझ आ जाएगा कि सत्यता क्या है। ये आश्चर्यजनक तथ्य जो वेदों से लिये गए हैं ये अक्षरशः सत्य हैं। कबीर परमेश्वर की वाणी है-

वेद कतेब झूठे नहीं भाई । झूठे हैं जो समझे नाहीं ||
कबीर, वेद मेरा भेद है, मैं ना वेदन के माहि|
जौन वेद से मैं मिलूँ , वो वेद जानते नाही||

8 सितम्बर अवतार दिवस: कैसे पहचानें तत्वदर्शी संत को?

पूर्ण ब्रह्म सत्पुरुष कबीर साहेब अपने प्रिय शिष्य धर्मदास को अपनी वाणी द्वारा समझा रहे हैं कि जो मेरा संत सत भक्ति मार्ग को बताएगा उसके साथ सभी संत व महंत झगड़ा करेंगे। ये उसकी पहचान होगी।

जो मम संत सत उपदेश दृढ़ावै (बतावै),
वाके संग सभि राड़ बढ़ावै।

तत्वदर्शी संत की दूसरी पहचान है कि वह संत सभी धर्म ग्रंथों का पूर्ण जानकार होता है। इस बारे में सतगुरु गरीबदास जी ने अपनी वाणी में बताया है

सतगुरु के लक्षण कहूं, मधूरे बैन विनोद।
चार वेद षट शास्त्र, कहै अठारा बोध।।

वेदों द्वारा तत्वदर्शी संत की पहचान कैसे की जाए?

तत्वदर्शी सन्त वह होता है जो वेदों के सांकेतिक शब्दों को पूर्ण विस्तार से वर्णन करके बताता है जिससे पूर्ण परमात्मा की प्राप्ति होती है।

यजुर्वेद अध्याय 19 मन्त्र 25 सन्धिछेदः-

अर्द्ध ऋचैः उक्थानाम् रूपम् पदैः आप्नोति निविदः।
प्रणवैः शस्त्राणाम् रूपम् पयसा सोमः आप्यते।(25)

अर्थात, जो सन्त वेदों के सांकेतिक शब्दों को पूर्ण करके बताता करता है, श्लोक के आंशिक विवरण को पूर्ण रूप से समझता और समझाता है जैसे शस्त्रों को चलाना जानने वाला उन्हें पूर्ण रूप से प्रयोग करता है ऐसे पूर्ण सन्त औंकारों अर्थात् ओम्-तत्-सत् मन्त्रों को पूर्ण रूप से समझ व समझा कर नीर क्षीर विवेक से तत्व ज्ञान प्रदान करता है जिससे अविनाशी परमात्मा को प्राप्त किया जा सकता है। वह वेद को जानने वाला तत्वदर्शी संत कहा जाता है।

वेदों द्वारा प्रमाणित साधना विधि क्या है?

पूर्ण सन्त दिन में 3 तीन बार साधना करने को कहता है। सुबह पूर्ण परमात्मा की पूजा, मध्यान्ह को सर्व देवताओं के सत्कार के लिए तथा शाम को संध्या आरती आदि को अमृत वाणी के द्वारा कराकर वह सर्व संसार का उपकार करने वाला होता है।

यजुर्वेद अध्याय 19 मन्त्र 26 सन्धिछेद:-

अश्विभ्याम् प्रातः सवनम् इन्द्रेण ऐन्द्रम् माध्यन्दिनम् वैश्वदैवम् सरस्वत्या तृतीयम् आप्तम् सवनम् (26)

अर्थात, वह पूर्ण सन्त तीन समय की साधना बताता है। सूर्य के उदय-अस्त से बने एक दिन के आधार से प्रथम श्रेष्ठता से सर्व देवों के मालिक पूर्ण परमात्मा की पूजा तो प्रातः काल, मध्य में सर्व देवताओं के सत्कार सम्बधित अमृतवाणी द्वारा साधना तथा तीसरी पूजा शाम को अर्थात् जो तीनों समय की साधना भिन्न-2 करने को कहता है वह जगत का उपकारक सन्त है।

वेदों में प्रमाणित गुरु शिष्य व्यवहार कैसा होता है?

पूर्ण सन्त उसी व्यक्ति को शिष्य बनाता है जो सदाचारी रहे। अभक्ष्य पदार्थों का सेवन व नशीली वस्तुओं का सेवन न करने का आश्वासन देता है। पूर्ण सन्त उसी से दान ग्रहण करता है जो उसका शिष्य बन जाता है फिर गुरू देव से दीक्षा प्राप्त करके फिर दान दक्षिणा करता है उस से श्रद्धा बढ़ती है। श्रद्धा से सत्य भक्ति करने से अविनाशी परमात्मा की प्राप्ति होती है अर्थात् पूर्ण मोक्ष होता है।

यजुर्वेद अध्याय 19 मन्त्र 30 सन्धिछेदः-

व्रतेन दीक्षाम् आप्नोति दीक्षया आप्नोति दक्षिणाम्।
दक्षिणा श्रद्धाम् आप्नोति श्रद्धया सत्यम् आप्यते (30)

अर्थात, दुर्व्यसनों भांग, शराब, मांस तथा तम्बाखु आदि के सेवन से संयम रखने वाला साधक पूर्ण सन्त से दीक्षा को प्राप्त होता है अर्थात वह पूर्ण सन्त का शिष्य बनता है। पूर्ण सन्त दीक्षित शिष्य जो उस से नाम ले लेता है उसी से दक्षिणा लेता है। इसी प्रकार विधिवत गुरूदेव द्वारा बताए अनुसार जो दान-दक्षिणा से धर्म करता है उस से श्रद्धा को प्राप्त होता है श्रद्धा से भक्ति करने से सदा रहने वाले सुख व परमात्मा अर्थात अविनाशी परमात्मा को प्राप्त होता है।

क्या संत रामपाल जी वेद प्रमाणित विधि से ज्ञान भक्ति देते हैं?

वेदों में दी गई तत्वदर्शी संत की पहचान, साधना विधि और शिष्य दीक्षा के बारे में जो वेदों में वर्णन किया है, तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज बिल्कुल इन्हीं विधियों से नाम दीक्षा देकर, अपने भक्त को पूरी गुरु मर्यादा में रखकर तीनों समय साधना कराकर पूर्व जन्मों के पाप संस्कारों को नष्ट कराकर सर्वसुख दिलाते है और पूर्ण मोक्ष सुनिश्चित करते हैं। एक बार जो उनकी शरण में आ जाता है वह भवसागर से पार उतर कर सुखसागर सतलोक पा लेता है।

समाज में व्याप्त बुराईओं को किया समाप्त

सन्त रामपाल जी महाराज पूर्ण परमात्मा के “धरती पर अवतार हैं जो इस पृथ्वी पर होने वाले हाहाकार को समाप्त करने में जुटे हैं। अगले 1000 वर्ष पृथ्वी पर कलियुग में सतयुग साबित करने वाले हैं। पृथ्वी को स्वर्ग समान बनाएंगे और धर्म की स्थापना करेंगे। एक झंडा, एक देश और एक पन्थ होगा। मांसाहार निषेध, नशावृत्ति उन्मूलन, दहेज प्रथा समाप्ति, सामाजिक समता इत्यादि पर संत रामपाल जी के भक्त प्रतिबद्ध हैं और सतगुरु के द्वारा दिए गए दिशानिर्देशों का अक्षरशः पालन कर रहे हैं।

स्पष्ट है तत्वदर्शी संत रामपाल जी वेद प्रमाणित “धरती पर अवतार” है

समझदार प्राणी वेदों के प्रमाण के आधार पर यह भली भांति समझ गए हैं कि सन्त रामपाल जी महाराज ने इस जगत में फंसी आत्माओं को काल ब्रह्म व माया के जाल से छुड़ाकर अपने लोक सतलोक वापिस ले जाने के विशेष उद्देश्य से “धरती पर अवतार” लिया है। परमात्मा के अद्भुत तत्वज्ञान को अकाट्य तर्कों के साथ पेश करने वाले एकमात्र तत्वदर्शी सन्त हैं जिनके समक्ष सभी धार्मिक गुरुओं को पराजित होना पड़ा है। एक नए युग का प्रवर्तन सन्त रामपाल जी महाराज ही कर रहे हैं।

सन्त रामपाल जी महाराज के अवतरण दिवस के 4 दिन शेष

“धरती पर अवतार” तत्वदर्शी सन्त रामपाल जी महाराज के 8 सितंबर अवतरण दिवस के पवित्र अवसर पर जानें और सभी अपने सद्ग्रन्थों को सतगुरु की सहायता से पढ़ें और मिलाएं वही ज्ञान जिससे अब तक नकली धर्मगुरुओं ने वंचित कर रखा था। “सतलोक आश्रम यूट्यूब चैनल” पर परम संत के सत्संग श्रवण करें और “धरती पर अवतार” पुस्तक पढ़ें। सत्य और असत्य के भेद को स्वयं विवेक का इस्तेमाल करते हुए जाने। तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज से नाम दीक्षा लें और अपने जीवन का कल्याण करवाएं क्योंकि बिन सतगुरु कहीं ठौर ठिकाना नहीं है। पूर्ण ब्रह्म सत्पुरुष के “धरती पर अवतार” तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज के अवतरण दिवस 8 सितंबर को साधना टीवी चैनल पर प्रातः 9 बजे से 12 बजे तक विशेष आध्यात्मिक सत्संग श्रवण करें और आत्मिक लाभ उठायें।

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