तालिबान के कब्जे से अफगानिस्तान गृह युद्ध के मुहाने पर!

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15 अगस्त, 2021 को अफगानिस्तान को हिंसा के दम पर दबाने वाले तालिबान ने मंगलवार यानी 17 अगस्त को पहली प्रेस कांफ्रेंस की। तालिबान ने कहा हम इस्लामी कानून के तहत महिलाओं के अधिकारों का सम्मान करने का वादा करते हैं और सुरक्षित अफगानिस्तान सुनिश्चित करने की घोषणा करते है। यह घोषणा विश्व के नेताओं और डरे हुए लोगों को यह दिखाने का प्रयास है कि तालिबान अब बदल गया है। तालिबानी नेता मुजाहिद ने यह भी कहा कि तालिबान चाहता है कि निजी मीडिया ”स्वतंत्र रहे”, लेकिन उसने इस बात को विशेष तौर पर रेखांकित किया कि पत्रकारों को ‘देश के मूल्यों के खिलाफ काम नहीं करना चाहिए। ‘तालिबान के प्रवक्ता का कहना है कि अफगानिस्तान के लोगों को डरना नहीं चाहिए हम सभी लोगों की रक्षा और उनकी संपत्ति की सुरक्षा की जिम्मेदारी लेते हैं।

Table of Contents

तालिबान के अफगानिस्तान पर पूर्ण कब्जे के बाद की अपडेट्स:

  • अफगानिस्तान की सत्ता हथिया लेने के बाद तालिबान ने की पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस
  • तालिबानी कब्ज़े के बाद अफगानिस्तान छोड़कर भागने को मजबूर हो रहे हैं अफगानी लोग
  • अफगानिस्तान के दो पड़ोसी देशों ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान में तालिबान को लेकर खलबली मच गई है
  • अमेरिका, भारत, फ्रांस, ब्रिटेन, न्यूजीलैंड समेत अन्य देश भी अफगानिस्तान से अपने लोगों को निकालने में युद्ध स्तर पर जुटे हैं 
  • अमेरिका ने हाल ही में अपने लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए 5000 सैनिकों को भेजने के बाद 1000 अतिरिक्त सैनिकों को भेजा है
  • भारतीय वायुसेना का विमान सी-17 ग्लोबमास्टर भारतीय राजदूत समेत करीब 120 से अधिक अधिकारियों को लेकर काबुल से गुजरात के जामनगर एयरपोर्ट पर पहुंचा था
  • हवाई जहाज से गिरकर मरने वाला एक युवक अफगान अंडर 19 फुटबॉल टीम का खिलाड़ी था
  • मिलिट्री या पुलिस के लिए काम करने वाले लोगों की तलाश कर रहा है तालिबान
  • अफगानी नेताओं के दल ने तालिबान को चेताया कि जबरन शासन नहीं कर सकते। इस दल का नेतृत्व अफगान संसद के अध्यक्ष मीर रहमान रहमानी कर रहे हैं
  • ब्रिटेन के रक्षा सचिव बेन वालेस ने अफगानिस्तान संकट पर चेतावनी दी और कहा कि तालिबान द्वारा ऐसे कब्जा करने से आतंकी संगठन को प्रेरणा मिलेगी जो कि खतरनाक है
  • अफगान संकट पर UN ने तोड़ी चुप्पी, कहा- अफगानिस्तान पर पूरी दुनिया हो एकजुट
  • पहचानिए कौन है अल्लाह और क्या है अल्लाह के बनाए कानून? 

क्यों राष्ट्रपति अशरफ गनी को रातोंरात छोड़ना पड़ा अफगानिस्तान?

राष्ट्रपति अशरफ गनी (Ashraf Ghani) ने अपने देश छोड़ने की वजह अपने फेसबुक पोस्ट में लिखी कि वह इसलिए अफगानिस्तान से भागे ताकि लोगों को ज्यादा खून-खराबा न देखना पड़े।

अशरफ गनी (Ashraf Ghani) ने अपनी फेसबुक पोस्ट (Facebook Post) में लिखा है कि अगर वह अफगानिस्तान में रुके रहते तो बड़ी संख्या में लोग देश के लिए लड़ने आते। ऐसे में वहां असंख्य लोगों की जान जाती। साथ ही काबुल शहर पूरी तरह से बर्बाद हो जाता इसलिए उन्होंने देश छोड़ने का फैसला लिया। गनी ने आगे कहा कि अब तालिबान जीत चुका है। वह अफगान लोगों के सम्मान, संपत्ति और सुरक्षा के लिए जिम्मेदार है। 

अफगानिस्तान छोड़ने के बाद राष्ट्रपति अशरफ गनी कजाकिस्तान शरण लेने गए, किंतु कजाकिस्तान में उनका विमान अपनी जमीन पर नहीं उतरने दिया। कयास लगाए जा रहे हैं अभी वह ओमान में है।

कौन होगा अफगानिस्तान का अगला राष्ट्रपति? 

तालिबान ने मुल्ला अब्दुल गनी बरादर को अफगानिस्तान का नया राष्ट्रपति घोषित किया है। जिसे जब अमेरिका में ट्रंप की सरकार थी, के कहने पर पाक की जेल से रिहा किया गया था । अब्दुल गनी बरादर अखुंद एक अफगान आतंकवादी है जो अफगानिस्तान में तालिबान के संस्थापकों में से एक था, और इसके नेता मोहम्मद उमर का डिप्टी था। उमर ने उसे ‘बरादार’ उपनाम दिया, जिसका अर्थ है ‘भाई’, या मुल्ला भाई।

15 अगस्त के दिन काबुल एयरपोर्ट पर था डरावना मंजर

अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जे के बाद से अफरातफरी का माहौल है। लोग देश छोड़कर किसी तरह जान बचाना चाहते हैं। काबुल एयरपोर्ट से अफगानी लोगों को लेकर उड़ान भरने वाला विमान जो खचाखच लोगों की भीड़ से भरा था उस पर से चार यात्री नीचे गिर गए। ये यात्री विमान के अंदर नहीं घुस सके थे और विमान के बाहर ही लटके हुए थे। 

तालिबान ने विदेशी दूतावासों की सुरक्षा की गारंटी ली 

तालिबानी प्रवक्ता ने कहा हम सभी दूतावासों और राजनयिकों को सुरक्षित माहौल मुहैया कराएंगे। अन्य देशों में हमारे दूतावासों के बारे में सरकार बनने के बाद तय किया जाएगा।’  दुनिया के सभी देशों के साथ सहयोग करना हमारी नीति है। तालिबान का दावा है कि वह ‘देश के पुनर्निर्माण और राष्ट्रीय एकता पर भी ध्यान देगा।’

पाकिस्तान ने तालिबान का स्वागत किया

पाकिस्तान के पीएम इमरान खान ने सोमवार को तालिबान के अफगानिस्तान की सत्ता पर काबिज होने का स्वागत किया। यही नहीं उन्होंने तालिबान की वापसी को ‘दासता की जंजीरों को तोड़ने वाला’ बताया।

खतरनाक तालिबान का चीन और ईरान ने भी स्वागत किया

एक तरफ चीन ने उम्मीद जताई है कि तालिबान का शासन स्थायी होगा तो वहीं ईरान का कहना है कि अमेरिका की हार से स्थायी शांति की उम्मीद जगी है। अफ़ग़ानिस्तान में चल रहे गृह युद्ध पर अमेरिका और यूरोपीय संघ के प्रतिनिधियों के साथ भारत और चीन समेत 12 देशों ने फ़ैसला किया है कि वे अफ़ग़ानिस्तान में बंदूक के सहारे आने वाली किसी भी सरकार को मान्यता नहीं देंगे।

क्षेत्रीय सम्मेलन कर अफ़ग़ानिस्तान की स्थिति पर हुई चर्चा

अफ़ग़ानिस्तान में बिगड़ते सुरक्षा हालात पर क़तर की राजधानी दोहा में एक क्षेत्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया, जिसमें अमेरिका, क़तर, संयुक्त राष्ट्र, चीन, उज़्बेकिस्तान, पाकिस्तान, ब्रिटेन, यूरोपीय संघ, जर्मनी, भारत, नॉर्वे, ताजिकिस्तान, तुर्की और तुर्कमेनिस्तान के प्रतिनिधि शामिल हुए थे।

जानिए कि आखिर अमेरिका अफगानिस्तान से अपने सैनिक लगातार क्यों हटा रहा था?

अमेरिकी राष्‍ट्रपति जो बाइडन ने जनता से कहा है कि, अगर अफगानी सैनिक नहीं लड़ते तो मैं कितनी पीढ़ियों तक अमेरिकी बेटे-बेटियों को वहा भेजता रहूं। उन्‍होंने कहा कि मेरा जवाब साफ है। मैं वो गलतियां नहीं दोहराऊंगा जो हम पहले कर चुके हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने अफगानिस्तान से अमेरिकी सेना को वापस बुलाने के फैसले का बचाव करते हुए अफगान नेतृत्व को बिना किसी संघर्ष के तालिबान को सत्ता सौंपने के लिए जिम्मेदार ठहराया और साथ ही तालिबान को चेतावनी दी कि अगर उसने अमेरिकी कर्मियों पर हमला किया या देश में उनके अभियानों में बाधा पहुंचायी, तो अमेरिका जवाबी कार्रवाई करेगा।

अफगानिस्तान में 21 साल बाद फिर सत्ता काबिज़ हुई तालिबान सरकार

करीब 21 सालों के बाद अफगानिस्तान में एक बार फिर से तालिबान का साम्राज्य कामय हुआ है और काबुल में दाखिल होने के साथ ही अफगानिस्तान सरकार ने तालिबान के आगे घुटने टेक दिए।

काबुल में तालिबान के आते ही अब इस बात पर मुहर लग चुकी है कि सुपर पावर अमेरिका को तालिबान ने बुरी तरह से धूल चटा दी है। करीब 20 सालों में अरबों-खरबों डॉलर खर्च करने के बाद भी तालिबान को शिकस्त देने में सुपर पावर अमेरिका पूरी तरह से नाकाम रहा है। 

■ Read in English: Taliban Afghanistan Conflict Updates: Taliban Fully Captures Afghanistan, President Ashraf Ghani Flees Afghanistan

2001 में जब अफगानिस्तान में अमेरिका ने कदम रखा था तो उसने दावा किया था वो तालिबान को जड़ से खत्म कर देगा, अलकायदा को उखाड़ फेंकेगा। लेकिन, अमेरिका के दावे झूठे निकले। तालिबान 20 सालों तक शांत जरूर रहा, लेकिन वो ज्वालामुखी की तरह धरती के नीचे दबा रहा।

वियतनाम युद्ध के बाद अमेरिका की ये दूसरी सबसे बड़ी नाकामी है

अमेरिकी रक्षा विशेषज्ञ और लॉंग वॉर जर्नल के संपादक बिल रोग्गियो ने सीधे तौर पर अफगानिस्तान में हार के लिए अमेरिकी सेना के कमांडर को जिम्मेदार ठहराया है।

अफगानिस्तान के लोग खासकर महिलाएं क्यों डरती हैं तालिबान से? 

अफगानिस्तान के लोगों ने 20 साल पहले तालिबान का भयंकर रूप देखा है जिसमें किसी भी छोटी गलती पर सरेआम सर काट देना या कोई अंग भंग कर देना और महिलाओं पर अत्याचार यह सब शामिल था। 

तालिबानी नियमों के हिसाब से महिलाएं सार्वजनिक तौर पर कई काम नहीं कर सकती हैं। इन नियमों के हिसाब से महिलाएं सार्वजनिक तौर पर मस्ती मजाक नहीं कर सकती हैं और उनके काम पर जाने पर भी बैन है। साथ ही उनके अकेले बाहर जाने पर भी मनाही होती है और उनके साथ पुरुष होना आवश्यक है। साथ ही कपड़ों पर तो कई बैन होते हैं और उन्हें खुद को पूरी तरह से ढ़ककर रखना होता है। महिलाएं कॉस्मेटिक का भी इस्तेमाल नहीं कर सकती हैं। महिलाओं का इलाज महिला डॉक्टर्स ही करती हैं।

साथ ही महिलाएं पुरुष से हाथ नहीं मिला सकती हैं और ज्यादा जोर से हंस भी नहीं सकती हैं। महिलाओं के हाई हिल्स पहनने पर बैन है। महिलाएं टैक्सी में सफर नहीं कर सकती हैं। इसके अलावा बाइक, साइकिल चालना, खेलकूद में हिस्सा लेना भी महिलाओं के लिए बैन हैं। यहां तक कि नदी में महिलाएं कपड़े भी नहीं धो सकती हैं और ना ही महिलाएं बालकनी और खिड़कियों से बाहर देख सकती हैं। महिलाओं की फोटो क्लिक करने पर भी बैन है, यहां तक कि विज्ञापनों में भी महिलाएं नहीं होंगी।

महिलाओं के साथ पुरुषों के लिए भी कड़े नियम हैं, महिलाओं के साथ पुरुषों के म्यूजिक सुनने पर भी बैन है और कोई भी सार्वजनिक तौर पर टीवी, फिल्में आदि नहीं देख सकता है और पुरुषों को दाढ़ी बढ़ाना आवश्यक हो गया है। तालिबान कठोर शरिया कानून का हिमायती है जो वाकई में चिंता का विषय है।

अफगानिस्तान में तालिबान के आने  से कौन-कौन से देश चिंतित हैं?

चीन, रूस,भारत, पाकिस्तान, उज़्बेकिस्तान, तजाकिस्तान, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान और कुछ यूरोपियन देश भी तालिबान से परेशान हैं। भले ही ऊपर से इनके बयान अलग-अलग हैं किंतु अंदर से सभी जानते हैं कि तालिबान का कोई भरोसा नहीं है तालिबान के कट्टरपंथी रवैये की वजह से कोई भी बड़ी जंग हो सकती है यदि ऐसा होता है तो पड़ोसी देश भी इससे अछूते नहीं रहेंगे।

क्या हो सकती है तालिबान की आगे की प्लानिंग? 

तालेबान के चरित्र, सोच, और फिलहाल में उठाए कदमों, की मानें तो अभी तालिबान शांत रहेगा जब तक उसे मान्यता प्राप्त नहीं हो जाती। एक बार जब अच्छे से पैर जमाने पर अफगानिस्तान के पड़ोसी देश उसका अगला टारगेट हो सकते हैं क्योंकि एक तालिबानी कमांडर ने यह बात कही थी कि वह पूरे विश्व में शरिया कानून लाएंगे और कहीं ना कहीं तालेबान और अन्य चरमपंथी मुस्लिमों का मानना है कि हमें पूरे दुनिया में इस्लाम को फैलाना है और शरिया कानून लागू करना है और यही उनके जीवन का उद्देश्य है।

किंतु हालातों को मध्य नजर रखते हुए फ़िलहाल तालिबान अपने आप को मजबूत करेगा, और इसका अगला टारगेट उसका कोई पड़ोसी देश ही होगा संभवत यह चीन, पाकिस्तान या भारत भी हो सकता है।

वर्तमान में तालिबान को लेकर क्या है हिंदुस्तान के कदम?

हिंदुस्तान पहले ही यह कह चुका है कि अगर तालिबान बंदूक के दम पर खून खराबा करके अफगानिस्तान पर कब्जा करता है तो तालिबान को कोई भी देश अभी मान्यता नहीं देगा। अभी तालिबान को मान्यता नहीं दी जाएगी कम से कम हम कुछ साल इंतजार करेंगे और यह देखेंगे कि तालिबान आतंकवाद को बढ़ावा देता है या नहीं, और लगभग सभी यूरोपियन देश भी इस बात से सहमत हैं।

तालिबान के प्रवक्ता का भारत के लिए बयान

तालिबान के प्रवक्ता शाहीन सुहैल का कहना है कि संगठन उम्मीद करता है कि भारत अपना रुख बदलेगा और तालिबान का समर्थन करेगा। 

तालिबान और भारत के संबंध

भारत का तालिबान के साथ बात न करने का एक और बड़ा कारण ये भी रहा है कि ऐसा करने से अफ़ग़ान सरकार के साथ उसके रिश्तों में दिक्क़त आ सकती थी लेकिन अब स्थिति बदल गई है।

अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जे के बाद भारत के कूटनीतिक गलियारे में गंभीर चिंता नजर आ रही है। सबसे बड़ा सवाल तालिबान के चरित्र को लेकर है। आशंका जताई जा रही है कि तालिबान का पूर्ण शासन भारत सहित पूरे इलाके के लिए आतंकवाद की बड़ी चुनौती पेश कर सकता है। इसके अलावा भारतीय व्यापार व निवेश पर भी प्रतिकूल असर पड़ सकता है।

उत्तर पश्चिमी कश्मीर में भारत अफगानिस्तान के साथ 106 किमी. सीमा साझा करता है। कश्मीर में पाकिस्तान तालिबान और उसके सहयोगी आतंकवादी संगठनों के माध्यम से गंभीर समस्याएं उत्पन्न कर सकता है वैसे पाकिस्तान तालिबान के माध्यम से हर संभव प्रयास करेगा कि कश्मीर में विद्रोह हो और कश्मीर अशांत रहे।

वैसे कुछ सालों में भारत सरकार ने अफ़ग़ानिस्तान में पुनर्निर्माण से जुड़ी परियोजनाओं में लगभग तीन अरब अमेरिकी डॉलर का निवेश किया है। संसद से लेकर सड़क और बाँध बनाने तक कई परियोजनाओं में सैकड़ों भारतीय पेशेवर काम कर रहे हैं। आगे आना वाला समय ही यह तय करेगा कि तालिबान भारत के साथ कैसा व्यवहार करता है उसी के हिसाब से भारत के तालिबान के साथ रिश्ते बनेंगे।

अल्लाह- अल्लाह हू अकबर के नाम का नारा ज़रूर लगाते हैं परंतु काम शैतानों वाले करते हैं

अल्लाह की राह पर चलने वाले हथियारों से दूसरों की जान लेते नहीं हैं बल्कि दूसरों की जान बचाने के लिए स्वयं की जान दे देते हैं। तालिबान जिस राह पर है वह अल्लाह का दिखाया मार्ग नहीं है वह तो शैतान की दी तालिमों पर अमल करते हैं और हिंसक पशु की तरह मानव कौम को तबाह कर रहे हैं। तालिबान, को साफ शब्दों में कहें तो वह अल्लाह का गुनहगार है।

पवित्र कुरान शरीफ सूरत फुरकान 25 आयत नंबर 52, 58, 59 से यह स्पष्ट होता है कि कुरान की इन आयतों पर जो अमल करता है वही सच्चा मुसलमान है, यह भी स्पष्ट है कि जिसने 6 दिन में सारी सृष्टि रची और सातवें दिन तख्त पर जा बैठा वह बड़ा अल्लाह कबीर साकार है, अर्थात – उसका हम दीदार कर सकते हैं, उस अल्लाह की सच्ची इबादत कोई बाखबर ही बता सकता है, और उसके द्वारा दी गई इबादत की विधि के माध्यम से हम अविनाशी जन्नत प्राप्त कर सकते हैं। शरिया कोई ऐसा कानून नहीं है जिसे अल्लाह ने मानवता के उद्धार के लिए लिखा या बोला हो यह तो मुस्लिम समाज के मूट्ठी भर लोगों द्वारा बनाए गए कठोर कानून हैं जिनसे किसी का कोई खास भला नहीं हो सकता। अल्लाह के बनाए गए कानून और संविधान बताने में अल्लाह खुद समर्थ है। उस अल्लाह के संविधान को उसके भेजे बाखबर से पूछ देखो।

उस अल्लाह की सच्ची इबादत किसी बाखबर, इल्मवाला, तत्वदर्शी संत ही बता सकता है, और उसके द्वारा दी गई इबादत की विधि के माध्यम से हम अविनाशी जन्नत प्राप्त कर सकते हैं। वर्तमान में वह बाखबर, अल्लाह का रसूल, अंतिम पैगंबर, अल्लाह का भेजा हुआ फरिश्ता जगतगुरु, तत्वदर्शी, “संत रामपाल जी महाराज” जी ही हैं जो हिंदुस्तान की पावन भूमि पर मौजूद हैं। सभी मुसलमान भाईयों से करबद्ध निवेदन है कि आप जहां भी हैं यूट्यूब पर जाकर “सतलोक आश्रम” चैनल देखें (“Satlok Ashram”) जिससे आपको असली अल्लाह के संविधान और महिमा का यथार्थ ज्ञान हो सके क्योंकि किसी को मारकर हम कुछ देर तो शासन कर सकते है पर अंत में जन्नत तो दूर दोजख की आग में जलना पड़ता है।

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