पंजाब राज्य के रोपड़ जिले के अंतर्गत आने वाले सुक्खे माजरा गाँव में स्थापित गौशाला इस क्षेत्र की प्रमुख गौशालाओं में गिनी जाती है। इस गौशाला के संचालन और प्रबंधन के संबंध में स्थानीय सरपंच रामधन जी द्वारा विस्तृत विवरण प्रदान किया गया है। गौशाला के पास कुल बीस एकड़ भूमि दान में प्राप्त है, परंतु समुचित संसाधनों और वित्तीय सहायता के अभाव में इस भूमि पर हरा चारा उगाने की कोई व्यवस्था नहीं हो पा रही थी।
इसके अतिरिक्त, स्थानीय प्रशासनिक व्यवस्था के अंतर्गत मिलने वाला ‘काऊ सेस’ (Cow Cess) मात्र डेढ़ लाख रुपये वार्षिक था। यह राशि सैकड़ों गौवंश के दैनिक भरण-पोषण, चारे, कर्मचारियों के वेतन और चिकित्सा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अत्यंत अपर्याप्त थी। वित्तीय संकट के कारण गौशाला प्रबंधन गंभीर समस्याओं का सामना कर रहा था।
चारे के अभाव में गौवंश की दयनीय स्थिति और प्रशासनिक सीमाएँ
चारे के समुचित प्रबंध न होने के कारण सुक्खे माजरा गौशाला में पलने वाले सैकड़ों गौवंश की स्थिति अत्यंत शोचनीय हो गई थी। पर्याप्त पोषण न मिलने के कारण गायें कुपोषण और गंभीर शारीरिक कमजोरी का शिकार हो रही थीं। स्थिति इतनी बिगड़ चुकी थी कि भूख और अस्वस्थता के कारण जो गौवंश जमीन पर गिर जाते थे, उन्हें जीवित अवस्था में ही पक्षियों द्वारा नोचने की घटनाएँ सामने आ रही थीं।
एक ही दिन में कई-कई मवेशियों की मृत्यु हो रही थी। यद्यपि स्थानीय स्तर पर सरपंच, स्थानीय विधायक और कुछ समाजसेवियों द्वारा आपसी सहयोग से कुछ फौरी धन राशि जुटाई गई थी, परंतु यह उपाय अल्पकालिक और अपर्याप्त सिद्ध हो रहा था। गौशाला के निरंतर संचालन के लिए एक सुदृढ़ और स्थायी सहायता प्रणाली की आवश्यकता थी।
संत रामपाल जी महाराज द्वारा 100 क्विंटल चारे की निरंतर और अनवरत आपूर्ति
गौशाला की इस गंभीर एवं आपातकालीन स्थिति को देखते हुए स्थानीय प्रबंधन और ग्रामवासियों ने जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज के समक्ष अपनी समस्या रखी। संत रामपाल जी महाराज ने इस प्रार्थना पर त्वरित संज्ञान लेते हुए बिना किसी शर्त या कागजी विलंब के सुक्खे माजरा गौशाला के लिए हर महीने 100 क्विंटल सूखा चारा (तूड़ी) अनवरत रूप से प्रेषित करने का निर्देश जारी किया।
इस सहायता के अंतर्गत किसी भी प्रकार का सार्वजनिक चंदा या सरकारी अनुदान नहीं लिया गया। संत रामपाल जी महाराज द्वारा प्रदान की गई इस सहायता के परिणामस्वरूप प्रार्थना के अगले ही दिन ट्रकों के माध्यम से 100 क्विंटल चारे की पहली खेप गौशाला में पहुँच गई। इसी कड़ी में वर्तमान में इस गौशाला में तीसरी बार 100 क्विंटल चारे की खेप सफलतापूर्वक पहुँचाई जा चुकी है, जिससे गौवंश के चारे की समस्या का स्थायी समाधान हो गया है।
विभिन्न क्षेत्रों से पहुँचे प्रतिनिधियों और यूट्यूबरों द्वारा आभार प्रदर्शन
सुक्खे माजरा गौशाला में संत रामपाल जी महाराज द्वारा प्रदान की जा रही इस अभूतपूर्व और निरंतर सेवा कार्य से प्रभावित होकर देश के विभिन्न हिस्सों से विशिष्ट व्यक्ति और प्रतिनिधिगण सुक्खे माजरा पहुँच रहे हैं।
- फतेहाबाद, हरियाणा से यूट्यूबरों का दल सुक्खे माजरा गौशाला पहुँचा और संत रामपाल जी महाराज द्वारा संचालित इस नि:शुल्क सेवा कार्य के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की।
- बलम्भा, रोहतक, हरियाणा से किसान यूनियन के प्रधान भी सुक्खे माजरा गौशाला पहुँचे और संत रामपाल जी महाराज द्वारा किसानों तथा गौवंश के हित में किए जा रहे कार्यों की सराहना करते हुए आभार प्रकट किया।
- स्थानीय ग्रामवासियों और प्रबंधकों के अनुसार, इस प्रकार की व्यापक और आजीवन सहायता इससे पूर्व कभी नहीं देखी गई थी।
सुक्खे माजरा गौशाला सहायता वितरण विवरण तालिका
| विवरण बिन्दु | तथ्य एवं आँकड़े |
| स्थान एवं जिला | सुक्खे माजरा, रोपड़, पंजाब |
| दान प्राप्त भूमि | 20 एकड़ |
| पूर्ववर्ती काऊ सेस | 1.5 लाख रुपये |
| प्रेषित चारा मात्रा | 100 क्विंटल (प्रत्येक माह / तीसरी बार आपूर्ति) |
| प्रमुख आगंतुक प्रतिनिधि | फतेहाबाद से यूट्यूबर, बलम्भा (रोहतक) से किसान यूनियन प्रधान |
| सेवा प्रदाता | संत रामपाल जी महाराज |
सुक्खे माजरा गौशाला में चारे की निरंतरता और स्थायी समाधान का प्रभाव
संत रामपाल जी महाराज द्वारा सुक्खे माजरा गौशाला में की गई इस निरंतर सेवा के कारण वर्तमान में सभी गौवंश को भरपेट और उच्च गुणवत्ता वाला चारा मिल रहा है। चारे की कमी के कारण होने वाली गौवंश की मृत्यु पर पूर्ण विराम लग गया है।
किसी भी प्रकार के व्यावसायिक स्वार्थ या जटिल प्रशासनिक प्रक्रियाओं के बिना संचालित यह सेवा कार्य समाज के लिए एक व्यावहारिक उदाहरण बन गया है। विभिन्न क्षेत्रों से आ रहे प्रतिनिधियों और यूट्यूबरों की उपस्थिति यह सिद्ध करती है कि यह सहायता स्थानीय सीमाओं से परे राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन चुकी है।



