यह कहानी है उस भरोसे की, जिसने महज 4 दिन में पूरे गांव की तकदीर बदल दी। हरियाणा के झज्जर जिले की मातनहेल तहसील का गांव कोयलपुर बीते दिनों जलप्रलय जैसी स्थिति का सामना कर रहा था। बाढ़ भी ऐसी भयानक कि खेतों से लेकर घरों तक, सरकारी स्कूलों, हस्पताल आदि बिल्डिंग में, कई फुट पानी भरा हुआ था। खेतों में किसानों की खून पसीने की मेहनत से सींची गई फसल डूब चुकी थी और कई फुट तक पानी भरने की वजह से अगली फसल की बिजाई नामुमकिन नजर आ रही थी। सरकारी दफ्तरों में चप्पल घिसने और प्रशासन से गुहार लगाने के बाद भी जब केवल निराशा हाथ लगी, तब गांव ने एक दरवाजा खटखटाया।
कोयलपुर बाढ़ राहत अभियान एक नजर में
- प्रशासन ने असमर्थता जताई, गांव भगवान भरोसे छूटा
- संत रामपाल जी महाराज को भेजी गई प्रार्थना स्वीकार हुई
- 4 दिनों के भीतर राहत सामग्री गांव पहुंची
- 15 HP की दो मोटरें और 5000 फुट 8 इंच पाइप निःशुल्क मिले
- किसानों को परमानेंट समाधान मिला, भविष्य की फसल सुरक्षित हुई
ग्रामीणों को अपने हाल पर छोड़ दिया गया !
सरपंच और अन्य ग्रामीणों के अनुसार, गांव का एक बड़ा हिस्सा और सैकड़ों एकड़ उपजाऊ भूमि जलमग्न थी। SA NEWS की टीम ने भी ड्रोन की सहायता से जब गाँव के ऊपर से नजारा देखा तो सचमुच गाँव ने जलाशय का रूप ले रखा था। खेतों से लेकर रिहायशी बस्ती तक पानी भरा हुआ था। ऐसी विकट परिस्थिति में अधिकारियों ने स्पष्ट कह दिया कि वर्तमान संसाधनों में पानी निकालना संभव नहीं है। ग्रामीणों को उनके हाल पर छोड़ दिया गया था। आम जनमानस के पास प्रशासन के अलावा कोई विकल्प नहीं होने की वजह से वो बहुत ज्यादा निराश हो गए। हर जगह से थक हार के बैठ जाने के बाद उन्होंने उम्मीद छोड़ दी । लेकिन कहते हैं ना,
करै करावै साइयाँ मन में लहर उठाए,
दादू सिर धरे जीव के, आप बगल हो जाए
निराशा के इस माहौल में गांव को संत रामपाल जी महाराज की ‘निःशुल्क सेवा’ के बारे में पता चला।
मात्र चार दिन में पहुंची वो चीज, जिसकी इस वक्त सबसे ज्यादा जरूरत थी !
ग्रामीणों ने संत रामपाल जी महाराज के समक्ष एक अर्जी लगाई। इस अर्जी में उन्होंने अपनी समस्या लिखी और मदद के तौर पर 2 मोटर और 5000 फुट पाइप की माँग की। आमतौर पर सरकारी फाइलों को तो खिसकने में महीनों लगते हैं, लेकिन यहाँ अर्जी लगाने के मात्र 4 दिनों के भीतर राहत सामग्री का एक विशाल काफिला कोयलपुर की गलियों में पहुंच गया।
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सेवादारों ने बताया कि संत रामपाल जी महाराज जी का सख्त आदेश था कि देरी के कारण किसानों की अगली फसल (गेहूं) खराब नहीं होनी चाहिए। इसी आदेश का पालन करते हुए संत रामपाल जी महाराज के शिष्य राहत सामग्री लेकर गाँव में पहुंचे। संत रामपाल जी महाराज का ये आश्वासन भी गाँव वालों तक पहुंचाया कि इस सामान के अतिरिक्त भी अन्य किसी सामान की आवश्यकता पड़े तो बेझिझक माँग लेना, सामान तुरंत प्रभाव से मिलेगा। लेकिन अगली फसल की बिजाई होनी चाहिए ।
राहत सामग्री में क्या क्या सामान आया ?
संत रामपाल जी महाराज की ओर से दी गई मदद तकनीकी रूप से पूर्ण थी:
| सामग्री का विवरण | मात्रा | विशेषता |
| विशाल मोटर | 2 | 15 HP की उच्च क्षमता वाली मोटरें |
| पाइप | 5000 फुट | 8 इंच मोटाई वाली हैवी ड्यूटी लाइन |
| एक्सेसरीज | पूर्ण सेट | स्टार्टर, बैंड, नट-बोल्ट, केबल और अन्य उपकरण |
| गाँव वालों की तरफ से खर्च | ₹0 | सारा खर्च संत रामपाल जी महाराज द्वारा वहन |
सरपंच ने चकित होकर कहा, “हमारा एक रुपया भी खर्च नहीं हुआ। महाराज जी ने लाखों का सामान हमारे आंगन में लाकर रख दिया।”
मंगलाचरण करने के बाद सुपुर्द किया गया सामान
गांव में प्रवेश करने से पहले सेवादारों ने स्कूल के समीप मंगलाचरण किया। यह उनकी परंपरा है कि किसी भी शुभ कार्य या जनसेवा से पहले परमात्मा की स्तुति की जाए। इसके पश्चात, सम्मानपूर्वक सारा सामान ग्राम पंचायत को सौंप दिया गया। इस मौके पर गाँव के लोगों ने अपने अपने विचार रखे। हर कोई संत रामपाल जी महाराज के शान में कसीदे पढ़ रहा था। संत रामपाल जी महाराज का पगड़ी देकर गाँव का सबसे बड़ा सम्मान भी दिया गया। ग्रामीणों ने उन्हे भगवान कहकर संबोधित किया। मीडिया से रूबरू होते हुए बहुत सारे किसानों और महिलाओं ने संत रामपाल जी महाराज का तहे दिल से धन्यवाद किया और इस बार पर बार बार जोर दिया कि संत रामपाल जी महराज ने उनकी ऐसे समय में मदद की है जब सरकार भी नाकाम हो चुकी थी।
अपने और पराए का पता समय आने पर ही चलता है
संत रामपाल जी महाराज ने ये साबित कर दिया कि वो किसानों के हमदर्द हैं। किसान उनके अपने हैं, गरीब मजदूर परिवार भी उनके अपने हैं, बल्कि सम्पूर्ण मानव जाति को उन्होंने शास्त्रों का सतज्ञान देकर जो उपकार किया है उससे ये साबित होता है कि उनके अंदर असली वसुधैव कुटुंबकम की भावना है। सम्पूर्ण विश्व उनके लिए एक परिवार की तरह है। ठीक वैसे ही जैसे परमात्मा के लिए सारी धरती के जीव एक समान हैं, उसी प्रकार सतगुरु के लिए सारे जीव एक समान है।
सतगुरु की महिमा बताते हुए कबीर साहेब जी कहते हैं,
गुरु गोविंद दोऊ खड़े काके लागूं पांय ।
बलिहारी गुरु आपने गोविंद दियो बताय । ।
संत रामपाल जी महाराज की महानता और उदारता को शब्दों में पिरोना असंभव हैं । लेकिन कोयलपुर के ग्रामीणों की भावना समझने के लिए ये काफी है।
भविष्य का निर्माण
यह मुहिम केवल आज की बाढ़ निकालने तक सीमित नहीं है। सेवादारों ने स्पष्ट किया कि ये मोटर और पाइप अब गांव की स्थायी संपत्ति हैं। भविष्य में भी जब बारिश ज्यादा होगी, गांव वाले तुरंत पानी निकाल सकेंगे। हालांकि, इसके साथ एक जिम्मेदारी भी दी गई:
- ड्रोन निगरानी: सेवादारों ने राहत से पहले के जलभराव की ड्रोन फुटेज ली है।
- शर्त: यदि निर्धारित समय में पानी नहीं निकाला गया और फसल की बिजाई नहीं हुई, तो भविष्य में कोई सहायता नहीं दी जाएगी।
- पारदर्शिता: फसल लहलहाने के बाद की वीडियो भी बनाई जाएगी ताकि संगत को पता चले कि उनके दान के पैसे से कितने परिवारों को ‘जीवनदान’ मिला।
ग्रामीणों की प्रतिक्रिया: “दीपावली जैसा माहौल”
गांव के बुजुर्गों और युवाओं में भारी उत्साह दिखा। राकेश कुमार नामक ग्रामीण ने भावुक होकर कहा, “सरकार ने तो हमारी सुध नहीं ली, लेकिन महाराज जी ने तो ब्याह (शादी) जैसा प्रबंध कर दिया। ऐसा लग रहा है जैसे साक्षात भगवान ने आकर संकट हर लिया हो।” गांव की ओर से कृतज्ञता प्रकट करते हुए संत रामपाल जी महाराज के नाम पगड़ी भेंट की गई, जिसे हरियाणा की संस्कृति में सर्वोच्च सम्मान माना जाता है।
300 से अधिक गांवों में जारी है सेवा
कोयलपुर अकेला ऐसा गांव नहीं है। अन्नपूर्णा मुहिम के तहत अब तक 300 से अधिक बाढ़ प्रभावित गांवों में करोड़ों रुपये की राहत सामग्री बांटी जा चुकी है। यह मुहिम बताती है कि यदि आध्यात्मिक संस्थाएं निस्वार्थ भाव से आगे आएं, तो समाज का कोई भी व्यक्ति खुद को असहाय महसूस नहीं करेगा।



