रविवार 21 अप्रैल 2019 को सबसे पवित्र दिनों में से एक “ईस्टर डे” (“Easter Day“) जिसे ईसाई धर्म में त्यौहार माना जाता है। सारे ईसाई चर्च में अर्थात परमात्मा के दरबार में बैठकर उसी से सुख की प्रार्थना कर रहे थे, तभी अचानक जानलेवा हमला हुआ और 10 भारतीय 38 विदेशियों सहित 321 लोगों की मौत हो गई, तथा 500 से भी अधिक लोग घायल हो गए।

आज हर व्यक्ति यह सोचने पर मजबूर है कि चर्च में अर्थात परमात्मा के दरबार में बैठकर उसी से प्रार्थना करते हुए लोगों की जान गई, आखिर क्यों?
क्यों जीसस अपने भक्तों की रक्षा नहीं कर पाए?

ईसाइयों का God कहो, मुस्लिमों का अल्लाह कहो, चाहे हिंदुओं का भगवान कहो, अपनी भूख मिटाने वाला यह श्रापित काल (ज्योति निरंजन/ब्रह्म) जिसे नित्य एक लाख मानव शरीर धारी प्राणियों को खाने व सवा लाख रोज पैदा करने का श्राप लगा है, लोगों की जान लेकर अपनी मजदूरी बखूबी निभा रहा है। इस बार भी इस निर्दयी भगवान के मुँह का निवाला “श्री लंका” देश बन गया।
अविनाशी, मृत्युंजय, भगवान सदाशिव जिन्हें महाकाल भी कहा जाता है, अपनी नरसंहार प्रक्रिया पर अनवरत संलग्न है। जिसके चलते विश्व के सुप्रसिद्ध देश “श्री लंका” से एक और नया हादसा उभर कर सामने आया है।

“श्री लंका के कोलंबो में सिलसिलेवार बम धमाकों में 321 लोगो की मौत

“Sri Lanka Bomb Blast”
श्रीलंका में सिलसिलेवार 8 बम धमाकों में 10 भारतीय 38 विदेशियों सहित 321 लोगों की मौत हो गई, तथा 500 से भी अधिक लोग घायल हो गए। “श्री लंका में बम धमाका कैसे हुआ” “किसने किया श्री लंका में बम ब्लास्ट” “श्री लंका बम धमाका” किसकी साजिश? इस तरह के अनेकों प्रश्न आगामी कई दिनों तक जनता के लिए चर्चा का विषय बना रहेगा। पुलिस प्रवक्ता रूवन गुनासेखरा ने बताया कि, यह विस्फोट स्थानीय समयानुसार आठ बजकर 45 मिनट पर ईस्टर प्रार्थना सभा के दौरान कोलंबो के सेंट एंथनी, पश्चिमी तटीय शहर नेगेम्बो के सेंट सेबेस्टियन चर्च और बट्टिकलोवा के एक चर्च में हुआ। वहीं तीन अन्य विस्फोट पांच सितारा होटलों – शंगरीला, द सिनामोन ग्रांड और द किंग्सबरी में भी हुआ, होटल में हुए विस्फोट में घायल विदेशी और स्थानीय लोगों को कोलंबो जनरल हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया।

मनुष्य की शक्ति और सामर्थ्य की तुलना में भगवान को सर्वशक्तिमान माना जाता है और इसीलिए संकट में उसे याद भी किया जाता है। भगवान से सुखों की कामना की जाती है। तरह-तरह की पूजा, उपासना, साधना, जप-तप, व्रत-उपवास तथा तीर्थ स्थलों की परिक्रमा की जाती है ताकि जीवन में कोई दुख ना हो। अकाल मृत्यु ना हो। परिवार में कोई हानि ना हो। हर संकट से भगवान हमें बचा सके। क्योंकि समर्थ और शक्तिशाली भगवान उसे कहा जाता है, जो हर संकट में अपने भक्त की रक्षा कर सके। तो फिर पिछले कुछ वर्षों में जो प्राकृतिक और आक्रामक घटनाएं घटित हुईं, उन्हें देख ऐसा क्यों लगता है कि, भक्त जिस भगवान को पूजते हैं या दर्शनार्थ जाते हैं वही भगवान भक्षक बन अपने ही भक्तों की मौत देखकर खुश है, या यूं कहें कि तीर्थ स्थानों पर जाना भी एक व्यर्थ की क्रिया है। अन्यथा आस्था और श्रद्धा से दर्शनार्थ गए भक्तों के साथ यह अनहोनी नहीं होना चाहिए थी। श्रद्धालुजन ठंड, गर्मी, बरसात, आंधी-तूफान सहकर भी तीर्थस्थानों पर दर्शनार्थ जाते हैं और अपनी जान से हाथ धो बैठते हैं। दोस्तों सावन के महीने में शिव जी के दर्शनार्थ हिन्दू धर्म के लोग अमरनाथ जाते हैं और हर साल किसी न किसी संकट में पड़कर मृत्यु को प्राप्त हो जाते हैं लेकिन वहां कोई भी भगवान रक्षा के लिए नहीं पहुँचता। चूंकि सद्ग्रन्थों में भगवान के गुण बताए गए हैं कि पूर्ण परमात्मा अपने भक्त पर कभी संकट नही आने देता और अगर आये भी तो पूर्ण परमात्मा अपनी सामर्थ्य से उसे टाल देता है, तो फिर कौन है, वह समर्थ और शक्तिशाली भगवान जो वास्तव में पूजनीय है? जिन भगवानों की शरण मे जाकर लाखो लोगो की जाने चली गई, ऐसे नाशवान भगवानों की पहचान कैसे हो तथा इनसे कैसे बचा जाए ?

Easter Day – यहां ईसाइयों को समझना होगा कि जिस चर्च में भगवान से रक्षा की याचना की जाती है, उसी जगह पर मौत को गले लगाना पड़ा। ईसाइयों की मान्यता अनुसार जिस जगह GOD विराजमान है उसी चर्च में यह बम धमाका हुआ और सैकड़ों लोग मौत के घाट उतर गए। आखिर क्यों God को इसकी भनक भी नहीं लगी ?
ईसाइयों का भगवान (God) अपने भक्तों की रक्षा करने की बजाय क्यों आंखें मूंदे अपने बच्चों की मौत का तमाशा देखता रहा? कहीं ऐसा तो नहीं कि ईसाई असली पूर्ण परमात्मा को पूजना छोड़ उससे विपरीत क्रिया करके प्रभु की मूर्ति के आगे सीर पीटते रहे ? कहीं ऐसा तो नहीं कि चर्च में प्रभु है इसी भ्रम में गलत भक्तिमार्ग पर आरूढ़ होकर सर्व ईसाई भक्त अपना अनमोल मनुष्य जीवन बर्बाद कर रहे हों?

न्यूजीलैंड मस्जिद – न्यूजीलैंड की मस्जिदों में शुक्रवार 15 मार्च 2019 को एक जबरजस्त बंदूकधारी आतंकी हमला हुआ। बताया जाता है कि हमलावर एक ईसाई था। हमले में करीब 50 लोग मारे गए। न्यूजीलैंड की प्रधानमंत्री जैसिंडा अर्डर्न ने इस गोलीबारी को ‘‘न्यूजीलैंड के सबसे काले दिनों में से एक’’ बताया।
मस्जिदों में दोपहर को जब हमला हुआ, उस समय लोगों की भीड़, वहां जुम्मे की नमाज के लिए एकत्रित हुई थी।
इस भारी संकट में मुस्लिम भाइयों के उस अल्लाह ने क्यों मदद नहीं की, जिस अल्लाह को खुश करने के लिए मुस्लिम भाई नमाज पढ़ रहे थे ?

केदारनाथ दो साल पहले केदारनाथ समेत उत्तराखंड में आई आपदा हिमालय के इतिहास में सबसे भयानक त्रासदी थी।
सन 2013 में उत्तराखंड में स्थित तीर्थस्थल जिसे केदारनाथ के नाम से जाना जाता है, लाखों श्रद्धालु श्री शिव जी के दर्शनार्थ गए हुए थे, अचानक भारी वर्षा हुई, बाढ़ आई जिसकी चपेट में हजारों भक्तो की जाने चली गयी। आखिर क्यों शिव जी अपने भक्तो को नहीं बचा सके ? इतना ही नहीं बल्कि पिछले ही कुछ वर्षों में ऐसी हजारों घटनाएं घट चुकी हैं जिसने श्रद्धा, भक्ति, विश्वास और आस्था की धज्जियां उड़ाकर रख दी। क्योंकि वर्तमान में लोग भगवान की सही परिभाषा ही भूल चुके हैं। हिन्दू, मुस्लिम, सिक्ख या चाहे ईसाई हो, आपको समझना होगा कि आप जो भक्ति कर रह हैं कहीं ये शास्त्र के विरुद्ध अर्थात गलत भक्ति तो नहीं है ?

चारों धर्मों के इतिहास में जो भगवान खुद सुखी नहीं वह साधक को सुख कैसे देगा ?

हिन्दू धर्म श्री राम जी को आजीवन कष्ट सहने पड़े थे। श्री कृष्ण जी का तो सम्पूर्ण जीवन ही संघर्ष करते-करते बीत गया, कभी कोई राक्षस मारने पर उतारू है तो कभी राधा का वियोग, कभी सुदामा से बिछोह तो कभी ऋषि दुर्वासा के श्राप से पाँव में श्री कृष्ण जी को तीर लगना और फिर तड़प-तड़प कर प्राण त्यागना। शिव जी को कभी पत्नी सती के मोह में विलाप करना पड़ा, तो कभी भस्मासुर से भागना पड़ा। यहां तक की स्वयं दुर्गा जी को भी द्रोपदी बनकर भरी सभा में जलील व लज्जित होना पड़ा और अंत में तप करके हिमालय में अपना शरीर गलाना पड़ा। उपरोक्त भगवान अगर खुद की रक्षा नहीं कर सके, खुद अपने ऊपर आये संकटों से नहीं बच सके तो फिर भक्तजन इनसे रक्षा या सुख की उम्मीद कैसे करें ?

मुस्लिम धर्म मुस्लिम भाई हजरत मोहम्मद जी की जीवनी उठाकर देखें उनका पूरा जीवन जिस भक्ति को करके बीत गया उस भक्ति से उन्हें क्या लाभ हुआ, उनका पूरा जीवन संघर्ष से जूझता रहा तथा उनकी आंखों के सामने उनके पुत्र कटकर मर गए, लेकिन अपने धर्म अनुसार भक्ति का उन्हें वह लाभ (मोक्ष) नहीं मिला। जिसके लिए उन्होंने प्रयास किया था। विपरीत इसके उन्होंने मुस्लिमों को यह संदेश दिया था कि उस “अल्लाह ताला” (पूर्ण परमात्मा) कि खबर किसी बाख़बर (तत्वदर्शी संत) से पूछ देखो।

सिक्ख धर्म समाज को भी यह नहीं भूलना चाहिए कि गुरुनानक जी ने एक जन्म राजा अम्बरीष का बिताया, फिर राजा जनक बनकर आये और भक्ति की लेकिन मोक्ष नहीं हुआ फिर गुरु नानक बनकर आये और सौभाग्य था कि पूर्ण परमात्मा मिल गए। गुरु नानक जी ने जिस पूर्ण परमात्मा की तरफ इशारा किया है वह पूर्ण परमात्मा ही जीवन मे सुख प्रदान कर सकता है तथा जीवन में आने वाले संकटों से बचा सकता है, और पूर्ण मोक्ष भी प्रदान कर सकता है।

ईसाइ धर्म को इस सच्चाई को नहीं भुलाना चाहिए की प्रभु यीशु जिन्हें God कहा जाता है, उनको सूली पर चढ़ा दिया गया था। जो भगवान खुद अपने प्रारब्ध को नहीं काट पाया, जिसे प्रताड़ित किया गया और फिर सूली पर टांग दिया गया। वह खुद की रक्षा नही कर पाया, आज ईसाई भक्त उसी यीशु से किस आधार पर रक्षा की उम्मीद करते हैं ????

तो फिर कौन है वह पूर्ण परमात्मा जो सर्व शक्तिमान है, असली रक्षक है?

वेद-शास्त्र, गुरुग्रंथ साहेब, कुरान शरीफ व बाईबल में प्रमाण है कि “कबीर साहेब भगवान है” यही वह सर्व शक्तिमान भगवान है जो असम्भव को भी सम्भव कर सकता है। अपने भक्त के ऊपर आये संकटों से उसकी रक्षा करने में सक्षम तो है ही बल्कि साधक के सारे पाप क्षमा करके उसे आजीवन सुख प्रदान कर पूर्ण मोक्ष भी प्रदान कर सकता है। तो आइए सर्व सद्ग्रन्थ (वेद-शास्त्र, कुरान, बाईबल, गुरुग्रंथ) से जानते हैं कि वास्तव में भक्ति करने योग्य अल्लाह ताला, God, परमेश्वर कौन है ?

कुरान शरीफ:-
सुरत-फुर्कानि नं. 25 आयत नं. 52 से 59 (इन आयत नं. 52 से 59 में विशेष प्रमाण है) आयत 52:- फला तुतिअल् – काफिरन् व जहिद्हुम बिही जिहादन् कबीरा(कबीरन्)।52।
हजरत मुहम्मद जी का खुदा (प्रभु) कह रहा है कि हे पैगम्बर ! आप काफिरों (जो एक प्रभु की भक्ति त्याग कर अन्य देवी-देवताओं तथा मूर्ति आदि की पूजा करते हैं) का कहा मत मानना, क्योंकि वे लोग कबीर को पूर्ण परमात्मा नहीं मानते। आप मेरे द्वारा दिए इस कुरान के ज्ञान के आधार पर अटल रहना कि कबीर ही पूर्ण प्रभु है तथा कबीर अल्लाह के लिए संघर्ष करना (लड़ना नहीं) अर्थात् अडिग रहना।
यह अल्लाह कबीर वही है जिसने 6 दिन में सृष्टि रची और सातवें दिन तख्त पर जा विराजा। ये वही अल्लाह है, जिसने दो दरियाओं को मिलाया। एक का पानी प्यास बुझाने वाला मीठा और एक का पानी खारा, कड़वा बनाया उस अल्लाह को प्राप्त करने की विधि तो कोई ईल्म वाला अर्थात बाख़बर (तत्वदर्शी संत) ही जानता है।

गुरुग्रंथ साहिब :-
ग्रन्थ साहिब पृष्ठ 24 पर महला 1 में प्रमाण है कि :-

‘‘फाही सूरत मलूकी वेश, उह ठगवाड़ा ठगी देश,
खरा सिआणा बहुता भार धाणक रूप रहा करतार’’

भाई बाले वाली जन्म साखी पृष्ठ 189 (हिन्दी वाली) में कहा है कि:-

खालक आदम सिरजिया आलम बड़ा कबीर।
काईम दाइम कुदरती सिर पीरा दे पीर।।

भावार्थ है कि नानक जी एक काजी को बता रहे हैं कि जिस परमेश्वर ने आदम जी को उत्पन्न किया, वह बड़ा परमात्मा कबीर है। वह सब गुरुओं का गुरु अर्थात् जगत् गुरु है। उस सबसे बड़े परमात्मा कबीर जी की उपासना (भक्ति) करो।

यजुर्वेद :-
पूर्ण परमात्मा कविर्देव है, यह प्रमाण यजुर्वेद अध्याय 29 मंत्र 25 तथा सामवेद संख्या 1400 में भी है।
भावार्थ – जिस समय पूर्ण परमात्मा प्रकट होता है उस समय सर्व ऋषि व सन्त जन शास्त्र विधि त्याग कर मनमाना आचरण अर्थात् पूजा द्वारा सर्व भक्त समाज का मार्ग दर्शन कर रहे होते हैं। तब अपने तत्वज्ञान अर्थात् स्वस्थ ज्ञान का संदेशवाहक बन कर स्वयं ही कविर्देव अर्थात् कबीर प्रभु ही आता है और सतभक्ति प्रदान करता है।

बाईबल
पवित्र बाइबिल में लिखा है कि
Iyov 36:5 , see , El is kabir ( mighty ) , and despiseth not any ; He is Kabir in ko’ach lev ( strength of understanding ) .
पूजा के योग्य केवल कबीर प्रभु है, और दूसरा कोई भगवान पूजा के योग्य नहीं है।

सूक्ष्मवेद की सही जानकारी ना होने से ही भ्रमित हुआ पूरा भक्त समाज

सूक्ष्मवेद द्वारा बताई गई सृष्टि रचना के अनुसार कबीर जी पूर्ण परमात्मा हैं, तथा सतलोक में साकार (स-शरीर) एक सिंहासन पर विराजमान हैं। इसी सृष्टि रचना के अंतर्गत काल ब्रह्म (ज्योति निरंजन) को ब्रह्मा, विष्णु, महेश का पिता और प्रकृति दुर्गा को इनकी माता कहा गया है। काल ब्रह्म को एक लाख मानव शरीर धारी प्राणियों का नित्य आहार करने का श्राप लगा हुआ है। जिस वजह से काल ब्रह्म ने अपने तीनों पुत्रों ब्रह्मा, विष्णु, शंकर को जीव की उत्पत्ति, पालन व संहार का कार्य सौपा है। काल ब्रह्म इसी कारण से आये दिन उपद्रव करता है, कभी हजरत मोहम्मद जी के शरीर में प्रवेश करके मुस्लिम भाइयों को भ्रमित करता है , तो कभी श्री कृष्ण जी में प्रेतवत प्रवेश करके हिन्दुओं को भ्रमित करता है, इसी तरह सिक्खों तथा ईसाइयों को भी इसने भ्रमित करके अलग-अलग धर्मों की स्थापना करवा दी, विभिन्न सम्प्रदाय बनवा दिए तथा जातिवाद में उलझा कर मानव को गलत भक्तिमार्ग पर लगा दिया।

कबीर परमात्मा कहते है कि :-

कबीर – जाति नहीं जगदीश की, हरिजन की कहां से होए।
इस जाति पाति के चक्कर में, डूब मरो मत कोय।।

सन्त रामपाल जी महाराज कहते है:-

जीव हमारी जाति है, मानव धर्म हमारा।
हिन्दू मुस्लिम सिक्ख ईसाई, धर्म नहीं कोई न्यारा।।

कबीर परमात्मा ने ही आकर बताया कि आप सर्व आत्माएं सतलोक में रहती थीं। जो कि काल के साथ इन 21 ब्रह्मांडो में आकर फंस गईं और दुख भोग रही हैं। इस काल ब्रह्म से बचने व इसके अत्याचार अर्थात जन्म-मरण के रोग से छुटकारा पाने अर्थात अपने निज घर सतलोक गमन का एकमात्र उपाय है, शास्त्र अनुकूल सतभक्ति, जिसकी विधि गीता जी के अध्याय 17 श्लोक 23 में बताई है कि ओम्-तत्-सत् इति निर्देशः ब्रह्मणः त्रिविद्य स्मृतः ।।
भावार्थ है कि पूर्ण परमात्मा को प्राप्त करने का “ओम, तत्, सत्” यह तीन मन्त्र जाप स्मरण करने का निर्देश है जो कि सांकेतिक है इन्हें तत्वदर्शी संत से प्राप्त करो।

वर्तमान में कौन है तत्वदर्शी संत

तत्वदर्शी संत के विषय में गीता अध्याय 4 श्लोक नं. 34 में कहा है तथा गीता अध्याय नं. 15 श्लोक नं. 1 व 4 में तत्वदर्शी सन्त की पहचान बताई तथा कहा है कि तत्वदर्शी सन्त से तत्वज्ञान जानकर, उसके पश्चात् उस परमपद परमेश्वर की खोज करनी चाहिए। जहां जाने के पश्चात् साधक लौट कर संसार में नहीं आते अर्थात् पूर्ण मुक्त हो जाते हैं। उसी पूर्ण परमात्मा से संसार की रचना हुई है। संत रामपाल जी महाराज कबीर साहेब (पूर्ण परमात्मा) का स्वरूप हैं और वर्तमान में पूरी धरती पर वही एकमात्र ऐसे तत्वदर्शी संत हैं जो विश्वभर में हो रही घटनाओं पर अंकुश लगा सकते हैं, क्योंकि वह समर्थ हैं। आतंकवाद को भी सत्यज्ञान से ही समाप्त किया जा सकता है और इस समय पूरी धरती पर सत्यज्ञान और सतभक्ति संत रामपाल जी महाराज ही प्रदान कर सकते हैं, यही सच विरोधियों को हजम नहीं हुआ, और संत रामपाल जी महाराज के खिलाफ साजिशें रचने लगे। जिसके परिणाम स्वरूप वर्तमान में संत रामपाल जी महाराज जेल में रहकर भी अपने उद्देश्य पर कायम हैं।
उनकी शरण ग्रहण करो और अपना कल्याण कराओ।

अतः आप सभी से विनम्र प्रार्थना है कि मनुष्य जीवन अनमोल है जो हमें परमात्मा की सतभक्ति करके मोक्ष प्राप्त करने के लिए मिला है। इस मनुष्य जीवन को पाने के लिए देवता भी तरसते हैं क्योंकि, सभी देवी-देवता जन्म मृत्यु में हैं और मनुष्य जीवन प्राप्त किये बिना परमात्मा की प्राप्ति संभव नहीं है।

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