Sawan Shivratri 2020: पूरा विश्व कोविड-19 महामारी से जूझ रहा है। कई देशों के साथ भारतवर्ष भी अग्रिम पंक्ति में खड़ा है और लगातार कोरोनावायरस की स्थिति भयावह होती जा रही है। कोविड-19 के कारण उत्तराखंड राज्य ने कांवड़ यात्रा स्थगित कर दी है इस कारण शिवभक्त इस शिवरात्रि पर गंगोत्री, ऋषिकेश और हरिद्वार से पवित्र गंगाजल नहीं ला पा रहे हैं । आज पाठक जानेंगे शिवरात्रि के बारे में कई सत्य और पूर्ण मोक्ष मुमुक्षु जानेंगे सही भक्ति विधि ।

Sawan Shivratri 2020-मुख्य बिन्दु

  • कोविड-19 के कारण उत्तराखंड राज्य ने कांवड़ यात्रा की स्थगित
  • शिवभक्त गंगोत्री, ऋषिकेश और हरिद्वार से पवित्र गंगाजल नहीं ला पाए
  • कुछ स्थानों पर 30 रुपये में 250 मिलीलीटर गंगाजल उपलब्ध
  • कुछ संस्थाएं कर रही हैं टैंकरों से गंगाजल का प्रबंध
  • सावन और फाल्गुन महीनों में है शिवरात्रि का विशिष्ट महत्व
  • तीनों देव न सर्वेसर्वा हैं और न ही नित्य हैं
  • त्रिदेव स्वयं जन्म मृत्यु के चक्र में है तो साधकों को कैसे मुक्त करवाएंगे
  • मोक्ष मुमुक्षु को तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज की शरण में आना चाहिए
  • #MustKnow_RealAgeOfGods ने आज ट्विटर पर एक नंबर पर ट्रेंड किया

Coronavirus Impact on Shivratri 2020

पूरा विश्व कोविड-19 महामारी से जूझ रहा है। कई देशों के साथ भारतवर्ष भी अग्रिम पंक्ति में खड़ा है और लगातार कोरोनावायरस की स्थिति भयावह होती जा रही है। भारतवर्ष में अब तक पुष्टि की गई कुल संक्रमण संख्या 10.4 लाख जिनमें 6.54 लाख ठीक हो गए हैं और 26,273 मौतें हो चुकी हैं । जब कि पूरे विश्व में पुष्टि की गई कुल संक्रमण संख्या 1.42 करोड़ हैं जिनमें 79.8 लाख ठीक हो गए हैं और अब तक 6 लाख मौतें हो चुकी हैं । कोविड-19 के कारण उत्तराखंड राज्य ने कांवड़ यात्रा स्थगित कर दी है इस कारण शिवभक्त इस शिवरात्रि पर गंगोत्री, ऋषिकेश और हरिद्वार से पवित्र गंगाजल नहीं ला पाएंगे ।

शिवभक्तों को उपलब्ध कराया जा रहा है बोतल में गंगाजल

सावन के महीने में निर्मल गंगाजल का विशिष्ट महत्व है, महादेव के भक्तों को शिवरात्रि के दिन शिवलिंग पर पवित्र गंगाजल चढ़ाकर अभिषेक करना होता है। समस्या है तो कोई हल खोज लिया जाता है, शिवभक्तों को कुछ स्थानों पर 30 रुपये में 250 मिलीलीटर गंगाजल उपलब्ध कराया जा रहा है। बताया जा रहा है कि अभी तक गंगाजल की कई बोतलें खरीदी जा चुकी हैं। कुछ संस्थाएं टैंकरों से गंगाजल का प्रबंध कर रहे हैं ।

सावन शिवरात्रि का महत्व

सावन और फाल्गुन महीनों में आने वाली शिवरात्रि का विशिष्ट महत्व होता है। सावन के पूरे महीने में भगवान शिव की अर्चना की जाती है और शिवरात्रि का महत्व अत्यधिक बढ़ जाता है। सावन शिवरात्रि पर भगवान शिव का जलाभिषेक किया जाता है। ऐसा मानते हैं कि सावन की शिवरात्रि पर जल चढ़ाने से भगवान शिव अधिक फल देते हैं।

Sawan Shivratri 19 July 2020-शिवरात्रि कब है?

Shivratri 2020 kab hai : सावन शिवरात्रि 19 जुलाई, रविवार को है। हर साल सावन शिवरात्रि श्रावण माह में कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को सावन शिवरात्रि पड़ती है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन व्रत रखने और श्रद्धा भाव से पूजा-पाठ करने से भगवान शिव सारे कष्ट दूर करते हैं, जबकि वास्तविकता कुछ और है। इस बार शिवलिंग पर जलाभिषेक का शुभ समय 19 जुलाई रविवार की प्रातः 5 बजकर 40 मिनट से 7 बजकर 52 मिनट तक रहेगा। प्रदोष काल में जलाभिषेक करना अच्छा मानते हैं। प्रदोष काल 19 जुलाई सायं 7 बजकर 28 मिनट से रात्रि 9 बजकर 30 मिनट तक जलाभिषेक का समय है।

Maha Shivratri Special Shivratri Katha

ऐसी मान्यता है कि सावन महीने में समुद्र मंथन के दौरान विष निकला था। मानव समुदाय को बचाने के लिए भगवान शिव ने स्वयं विष को पी लिया था। विष सेवन करने से भगवान शिव के शरीर में जलन हो गई । जलन कम करने के लिए देवताओं ने शिव पर जल अर्पित किया । ऐसा करने से भगवान शिव के शरीर में ठंडक पड़ी और उन्हें विष से राहत मिली। तभी से यह परपरा प्रारंभ हुई और प्रत्येक सावन महीने में शिव भक्तों द्वारा शिवजी पर जल चढ़ाया जाने लगा। कुछ ऐसा भी मानते हैं कि सर्वप्रथम भगवान परशुराम ने कांवड़ से गंगाजल भगवान शिवजी पर चढ़ाया था और यह परंपरा शुरू हो गई।

Sawan Shivratri 2020: क्या भगवान शिव की भी मृत्यु होती है?

Sawan Shivratri 2020: रजगुण ब्रह्मा, सतगुण विष्णु और तमगुण शिव जी श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 15 श्लोक 1 में दिए संसार रूपी वृक्ष के अनुसार केवल भाग्य का लिखा देने और संसार को चलायमान रखने की भूमिका में हैं। श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 7 श्लोक 12 से 15 में तीन गुणों की साधना को गीता ज्ञान दाता ने पूर्ण मुक्ति के लिए श्रेय कर नहीं बताया है। इन तीनों गुणों के देवों के ऊपर इनके पिता काल ब्रह्म एवं माता आदि शक्ति हैं । ये तीनों देव न सर्वेसर्वा हैं और न ही नित्य हैं। श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 18 श्लोक 6 के अनुसार काल ब्रह्म के लोक तक सभी लोक पुनरावृत्ति में हैं अर्थात एक निश्चित समय के बाद पुण्य कर्म क्षीण होने पर पुनः जन्म लेंगे।

Sawan Shivratri 2020 Special Video-SA News Channel

श्रीमद्देवीभागवद पुराण के तीसरे स्कन्द अध्याय 5 में स्वयं विष्णु जी आदिशक्ति से कहते हैं कि ब्रह्मा, विष्णु और शिव नित्य नहीं हैं। इनका आविर्भाव (जन्म) व तिरोभाव (मृत्यु) होती है। पाठकों को ध्यान देना चाहिए कि ये त्रिदेव हमें जन्म मृत्यु के चक्र से कैसे मुक्त करवा पाएंगे। पूर्ण अविनाशी परमात्मा तो कविर्देव हैं जिनके विषय मे वेदों में वर्णन है और जिन तक पहुँचने का रास्ता केवल तत्वदर्शी सन्त बता सकते हैं ।

ट्विटर पर #MustKnow_RealAgeOfGods ने किया आज नंबर 1 पर ट्रेंड

आज ट्विटर पर #MustKnow_RealAgeOfGods ने एक नंबर पर ट्रेंड किया । पाठकों को जानकर प्रसन्नता होगी कि इस हैशटैग के माध्यम से अनेकों लोगों ने ट्विटर पर सभी देवी देवताओं की उम्र के बारे में जानकारी साझा की।

twitter trends real age of Gods
  • एक कल्प की आयु : एक कल्प वर्ष की आयु 1008 चतुर्युग के बराबर होती है और एक चतुर्युग 4320000 वर्ष का होता है
  • इंद्र देव की आयु: इंद्र देव का शासन काल 72 चतुर्युग (चतुर्युग मतलब चार युगों का समूह) का होता है। अर्थात 72 चतुर्युग के बाद इंद्र देव की मृत्यु हो जाती है।
  • ब्रह्मा जी के एक दिन और रात में 28 इंद्र की मौत हो जाती है और इस तरह से बने दिन के हिसाब से उनकी उम्र 100 साल की है।
  • विष्णुजी की आयु ब्रह्मा जी की आयु से 7 गुना अधिक
  • शिवजी की आयु विष्णुजी की आयु से 7 गुना अधिक
  • ऐसे सत्तर हजार शिव के मरने के बाद ज्योति निरंजन (काल ब्रह्म) मरता है।
  • काल ब्रह्म की आयु जितना एक युग परब्रह्म का होता है। ऐसे एक हजार युग का परब्रह्म का एक दिन होता है। परब्रह्म के एक दिन के समापन के पश्चात् काल ब्रह्म के इक्कीस ब्रह्मण्डों का विनाश हो जाता है तथा काल व प्रकृति देवी (दुर्गा) की मृत्यु होती है।

Shravan Shivratri 2020: क्या व्रत उपवास करना शास्त्र सम्मत है?

शिवरात्रि पर और श्रावण मास में प्रत्येक सोमवार को शिवजी का व्रत रखा जाता है। श्रीमद्भगवद्गीता के अध्याय 6 श्लोक 16 में गीता ज्ञान दाता ने अर्जुन से कहा है कि परमात्मा से मिलने का योग न तो बहुत अधिक खाने वालों का सिद्ध होता है और न ही बिल्कुल न खाने वालों का सिद्ध होता है। अतएव स्पष्ट है कि व्रत रखकर साधक शास्त्रविरुद्ध साधना करते हैं।

Shravan Shivratri 2020 पर साधक को अवश्य जानना चाहिए कि मुक्ति कैसे सम्भव है?

कबीर साहेब कहते हैं- “गौरीशंकर और गणेशा, तिनहुँ लीन्हा गुरु उपदेशा” अर्थात शिव पार्वती और गणेश ने स्वयं गुरु धारण कर दीक्षा उपदेश लिया है। गुरु के बिना किसी भी यज्ञ, धर्म, नियम, दान आदि का कोई फल नहीं मिलता है। व्रत और मूर्तिपूजा से भी कोई लाभ नहीं मिलता है । यदि केवल मंदिर जाने से मुक्ति मिलती तो भला शास्त्रों में क्यों लिखा होता कि सच्चे नामजाप दीक्षा उपदेश लेने से भक्ति के लाभ मिल सकते हैं । शास्त्रानुकूल साधना ही सर्वोत्तम है जो सतगुरु की कृपा से ही सम्भव है।

गुरु बिन वेद पढ़े जो प्राणी, समझे न सार रहे अज्ञानी।

सतगुरु की पहचान

साथ ही पूर्ण गुरु की पहचान अनेकों शास्त्रों में बताई गई है। ऋग्वेद मंडल 8, सूक्त 1, मन्त्र 9 व यजुर्वेद अध्याय 19 मन्त्र 25, 26 में लिखा है कि पूर्ण तत्वदर्शी सन्त वेदों के सांकेतिक रहस्यों को उजागर करके तीन समय की पूजा विधि देता है। वह सभी देवताओं की स्तुति भी करवाता है। कबीर साहेब ने कहा है-

सतगुरु के लक्षण कहूँ, मधुरे बैन विनोद |
चार वेद षट शास्त्र, कहे अठारह बोध ||

अर्थात पूर्ण गुरु अथवा सच्चे सन्त को इन सभी शास्त्रों का भली प्रकार ज्ञान होता है। श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 17 श्लोक 23 में ओउम् तत् सत् सांकेतिक मन्त्रों का उल्लेख मिलता है । पूर्ण तत्वदर्शी सन्त उपरोक्त मंत्रों के अनुसार तीन बार में नामदीक्षा की प्रक्रिया पूरा करता है। वर्तमान में परम ब्रह्म कबीर साहेब की गुरु प्रणाली के सन्त रामपाल जी महाराज ही एकमात्र पूर्ण तत्वदर्शी सन्त हैं। वे परमात्मा कबीर साहेब के द्वारा बताई गई सतभक्ति विधि के अनुसार नामदीक्षा देते हैं एवं ब्रह्मा, विष्णु और शिवजी की सही साधना बताते हैं जो वास्तव में पूर्ण मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग है ।

Sawan Shivratri 2020 Hindi Quotes

तीन देव की जो करते भक्ति उनकी कदे न होवे मुक्ति

तीन देव की भक्ति में, ये भूल पड़ो संसार |
कहें कबीर निज नाम बिना, कैसे उतरो पार |

अक्षर पुरुष एक पेड़ है, निरजंन वाकी डार |
तीनो देवा शाखा हैं, पात रूप संसार |

धरै शिव लिंगा बहु विधि रंगा, गाल बजावै गहले |
जे लिंग पूजें शिव साहिब मिले, तो पूजो क्यों न खैले |

तज पाखण्ड सतनाम लौ लावै, सोई भव सागर से तरियां | कहें कबीर मिले गुरु पूरा, स्यों परिवार उधरियाँ |

मुमुक्षु को तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज की शरण में आना चाहिए

मोक्ष प्राप्ति के सच्चे मुमुक्षु को सत भक्ति करने के लिए जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज की शरण में आकर नाम दीक्षा लेना चाहिए । सतगुरु के बताए अनुसार भक्ति और मर्यादा में रहकर भक्त ना केवल सभी सांसारिक सुखों को प्राप्त करेगा अपितु पूर्ण मोक्ष को प्राप्त होकर सतलोक जाएगा जहां जाने के बाद पुनर्जन्म नहीं होता ।