राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले की नोहर तहसील के गांव रामगढ़ में 9 अक्टूबर 2026 को गौ सेवा और सामाजिक सहयोग की एक ऐसी तस्वीर देखने को मिली, जिसने पूरे गांव के माहौल को उत्साह से भर दिया। कहीं ढोल-नगाड़ों की गूंज सुनाई दे रही थी, तो कहीं माताएं-बहनें हाथों में फूलों से सजी थालियां लेकर स्वागत के लिए खड़ी थीं। ग्रामीणों के चेहरों पर खुशी थी और गौशाला से जुड़े लोगों के मन में लंबे समय से चली आ रही चारे की समस्या से राहत मिलने की उम्मीद थी। अवसर था संत रामपाल जी महाराज की ओर से संचालित गौ सुरक्षा अभियान के तीसरे चरण के अंतर्गत श्री राधा कृष्ण गौशाला में 600 क्विंटल सूखा चारा पहुंचने का।
गांव की इस गौशाला में करीब 500 गोवंश को आश्रय मिला हुआ है। गोवंश के लिए नियमित चारे की व्यवस्था करना समिति के सामने एक बड़ी जिम्मेदारी थी। ग्रामीणों के सहयोग से गौशाला का निर्माण तो हुआ, लेकिन पशुओं के लिए हर महीने पर्याप्त सूखा चारा जुटाना आसान नहीं था। ऐसे में 600 क्विंटल सूखा चारा मिलने से गौशाला समिति को बड़ी राहत मिली। समिति के सदस्यों ने बताया कि चारे की व्यवस्था के लिए संत रामपाल जी महाराज के समक्ष प्रार्थना रखी गई थी। इसके बाद सर्वे टीम ने गौशाला का निरीक्षण किया और जरूरत को देखते हुए सहायता उपलब्ध करवाई गई।
गांव रामगढ़ में उत्सव जैसा माहौल, ढोल-नगाड़ों और पुष्पवर्षा के साथ हुआ स्वागत
रामगढ़ में चारा पहुंचने का दिन गौशाला से जुड़े लोगों के लिए किसी उत्सव से कम नहीं था। जैसे ही चारे से भरे वाहन गांव में पहुंचे, ग्रामीणों में खुशी की लहर दौड़ गई। ढोल-नगाड़े बजने लगे और माताएं-बहनें पारंपरिक वेशभूषा में हाथों में फूलों की थालियां लेकर स्वागत के लिए आगे आईं। कई ग्रामीणों ने पुष्पवर्षा करके इस सेवा कार्य से जुड़े सेवादारों का अभिनंदन किया। इस दौरान छोटे बच्चे भी कार्यक्रम में शामिल हुए। गांव के लोगों की भागीदारी देखकर साफ महसूस हो रहा था कि यह सहायता केवल गौशाला समिति तक सीमित नहीं थी, बल्कि पूरे गांव के लिए खुशी का अवसर बन गई थी। आसपास के गांवों से भी गौ भक्त और ग्रामीण इस मौके पर पहुंचे।
गौशाला में चारा पहुंचने के साथ ही लोगों के बीच इस बात की चर्चा होने लगी कि नियमित चारे की व्यवस्था से गोवंश की देखभाल में काफी मदद मिलेगी। गौशाला चलाने वाले लोगों के लिए पशुओं के खाने का इंतजाम रोज की चिंता होती है। चारा खरीदने के लिए धन जुटाना, उसकी उपलब्धता बनाए रखना और समय पर पर्याप्त मात्रा में चारा पहुंचाना लगातार प्रयास मांगता है। ऐसे में एक साथ 600 क्विंटल सूखा चारा मिलना समिति के लिए महत्वपूर्ण सहयोग था।
करीब 500 गोवंश की देखभाल की जिम्मेदारी, चारे का इंतजाम बना हुआ था बड़ी चुनौती
श्री राधा कृष्ण गौशाला रामगढ़ का निर्माण ग्रामीणों के सहयोग से हुआ है। गौशाला समिति के सदस्यों के अनुसार, गांव में लंबे समय तक गौशाला निर्माण का विषय अटका रहा। अलग-अलग कारणों से काम आगे नहीं बढ़ पा रहा था। बाद में ग्रामीणों, गौ भक्तों और आसपास के सहयोगियों के प्रयासों से गौशाला का निर्माण संभव हो पाया। आज इस गौशाला में करीब 500 गोवंश आश्रित हैं। इनकी देखभाल करना केवल एक संस्था का काम नहीं, बल्कि लगातार मेहनत और संसाधनों की मांग करने वाली जिम्मेदारी है। पशुओं के लिए चारा, पानी, रहने की जगह और नियमित देखभाल जैसी जरूरतें हर दिन सामने आती हैं। इनमें सूखे चारे की व्यवस्था सबसे महत्वपूर्ण जरूरतों में से एक है।
समिति के लोगों ने बताया कि गौशाला में गोवंश की संख्या को देखते हुए हर महीने बड़ी मात्रा में चारे की आवश्यकता पड़ती है। यदि समय पर चारा उपलब्ध न हो, तो व्यवस्था बनाए रखना मुश्किल हो जाता है। ग्रामीणों के सहयोग से गौशाला का संचालन किया जा रहा था, लेकिन लगातार बढ़ती जरूरतों के बीच अतिरिक्त सहायता की आवश्यकता महसूस हो रही थी। ऐसे समय में 600 क्विंटल सूखा चारा मिलने से समिति को अपनी व्यवस्था संभालने में मदद मिली। गौशाला के सदस्यों ने बताया कि गोवंश की जरूरतों के अनुसार सहायता मिलना उनके लिए राहत की बात है। उनके अनुसार, यह सहयोग गौशाला की नियमित व्यवस्था को मजबूत करने में सहायक हो सकता है।
प्रार्थना से सर्वे तक और फिर गौशाला पहुंचा 600 क्विंटल सूखा चारा
गौशाला समिति के प्रतिनिधियों ने बताया कि चारे की समस्या को लेकर संत रामपाल जी महाराज के समक्ष प्रार्थना रखी गई थी। इसके लिए समिति के कुछ सदस्य धाना धाम पहुंचे और गौशाला की जरूरतों के बारे में जानकारी दी। समिति का कहना था कि गोवंश की संख्या अधिक होने के कारण हर महीने चारे की पर्याप्त व्यवस्था करना चुनौतीपूर्ण हो रहा था। प्रार्थना मिलने के बाद सर्वे टीम ने गौशाला का निरीक्षण किया। वहां गोवंश की संख्या और चारे की जरूरत को ध्यान में रखते हुए रिपोर्ट तैयार की गई। इसके बाद 600 क्विंटल सूखा चारा उपलब्ध करवाने का निर्णय लिया गया। कार्यक्रम के दौरान सेवादारों ने बताया कि गौशाला समिति को सहायता सौंप दी गई है।
समिति के एक सदस्य ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि वे कुछ साथियों के साथ सहायता की मांग लेकर गए थे। उनके अनुसार, वहां से लौटने के थोड़े ही समय बाद उन्हें फोन पर चारे की व्यवस्था की सूचना मिल गई। इस तेजी से हुई प्रक्रिया को उन्होंने गौशाला के लिए बड़ी राहत बताया।
यह पूरा घटनाक्रम बताता है कि किसी जरूरतमंद संस्था की समस्या को समझने, उसकी वास्तविक आवश्यकता का आकलन करने और फिर सहायता पहुंचाने में सर्वे तथा समन्वय की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण होती है। गौशाला के लिए चारा तभी उपयोगी साबित होता है, जब वह जरूरत के समय उपलब्ध हो और उसकी मात्रा गोवंश की वास्तविक आवश्यकता के अनुरूप हो।
गौशाला समिति ने जताया आभार, ग्रामीणों ने कहा—यह सहयोग हमारे लिए बड़ी राहत है
कार्यक्रम के दौरान गौशाला समिति के सदस्यों ने संत रामपाल जी महाराज और उनके साथ पहुंचे सेवादारों के प्रति आभार व्यक्त किया। समिति के प्रतिनिधियों ने बताया कि गौशाला निर्माण में गांव के लोगों ने अपनी क्षमता के अनुसार सहयोग दिया है। आसपास के कुछ गांवों के लोगों और अन्य सहयोगियों ने भी योगदान किया, लेकिन नियमित चारे की जरूरत लगातार बनी हुई थी।
समिति के एक प्रतिनिधि ने भावुक होकर कहा, “हमारी गौशाला में चारे की समस्या लंबे समय से थी। ग्रामीणों ने मिलकर गौशाला का निर्माण करवाया और अब करीब 500 गोवंश यहां आश्रित हैं। ऐसे में 600 क्विंटल सूखा चारा मिलना हमारे लिए बहुत बड़ा सहयोग है। हम संत रामपाल जी महाराज का धन्यवाद करते हैं।”
उन्होंने आगे कहा कि गांव के लोगों ने मिलकर गौशाला को खड़ा किया है और अब इसकी व्यवस्था को आगे बढ़ाने के लिए सभी का सहयोग जरूरी है। उनके अनुसार, चारे की यह सहायता समिति को गोवंश की देखभाल पर अधिक ध्यान देने में मदद करेगी।
ग्रामीणों ने भी कहा कि गौशाला केवल पशुओं के रहने की जगह नहीं है, बल्कि गांव के लोगों की साझा जिम्मेदारी है। इसकी व्यवस्था बेहतर होगी, तो गोवंश की देखभाल भी अधिक व्यवस्थित तरीके से हो सकेगी। इस अवसर पर लोगों ने गौशाला के लिए आगे भी सहयोग बनाए रखने की बात कही।
सेवानिवृत्त कैप्टन हरि सिंह ने गौ सेवा के प्रयास की सराहना की
कार्यक्रम में गांव रामगढ़ के सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी कैप्टन हरि सिंह भी मौजूद रहे। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने करीब 30 वर्ष सामाजिक गतिविधियों में बिताए हैं। गौशाला के लिए इतनी बड़ी मात्रा में चारा पहुंचने को उन्होंने महत्वपूर्ण सहयोग बताया। कैप्टन हरि सिंह ने कहा कि गौशाला में करीब 500 गोवंश आश्रित हैं और उनके लिए नियमित चारे की व्यवस्था करना जरूरी है। उन्होंने 600 क्विंटल सूखा चारा उपलब्ध करवाने के लिए संत रामपाल जी महाराज के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि गौ सेवा के साथ-साथ समाज के जरूरतमंद लोगों की सहायता करना भी महत्वपूर्ण है। उनके विचार में सेवा का उद्देश्य किसी एक व्यक्ति या संस्था तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि जहां भी जरूरत हो, वहां सहयोग की भावना से आगे आना चाहिए।
कैप्टन हरि सिंह ने गौशाला की जमीन से जुड़ी समस्या का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि गौशाला के पास लगभग 10 बीघा जमीन है, लेकिन उपलब्ध जगह को लेकर कुछ कठिनाइयां हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि यदि आसपास के लोग अपनी इच्छा से अतिरिक्त जमीन उपलब्ध करवाने में सहयोग करें, तो गौशाला की व्यवस्था और बेहतर हो सकती है। उनकी बातों से यह भी सामने आया कि गौशाला के संचालन में चारे के साथ-साथ पर्याप्त जगह और आधारभूत सुविधाएं भी महत्वपूर्ण हैं। पशुओं की संख्या को देखते हुए भविष्य में इन जरूरतों पर ध्यान देना आवश्यक होगा।
चारे के साथ शेड निर्माण की उम्मीद, आगे की जरूरतों पर भी रखी जाएगी प्रार्थना
रामगढ़ गौशाला समिति की ओर से चारे के अतिरिक्त एक शेड निर्माण की मांग भी रखी गई थी। कार्यक्रम में समिति के सदस्यों और सेवादारों ने बताया कि इस विषय पर भी प्रार्थना की गई है। समिति के एक प्रतिनिधि के अनुसार, प्रस्तावित शेड का आकार लगभग 100×50 फुट बताया गया है और इसकी अनुमानित लागत 15 से 20 लाख रुपये के बीच हो सकती है।
गौशाला समिति के सदस्यों ने यह भी कहा कि आगे यदि चारे या अन्य आवश्यक सुविधाओं की जरूरत पड़ती है, तो वे प्रार्थना रखेंगे। सेवादारों की ओर से भी जरूरत के अनुसार गौशालाओं की समस्याएं सामने रखने की बात कही गई।
समिति के अनुसार, एक मजबूत शेड बनने से गोवंश को व्यवस्थित आश्रय देने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इसके लिए जमीन की उपलब्धता, निर्माण की योजना और आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था भी जरूरी होगी। फिलहाल 600 क्विंटल चारे की आपूर्ति ने गौशाला की तत्काल जरूरत को पूरा करने में सहयोग दिया है।
संत रामपाल जी महाराज की पहल: गौ सेवा के साथ जरूरतमंदों की सहायता का संकल्प
इस सेवा कार्य के दौरान संत रामपाल जी महाराज के अनुयायियों और सेवादारों ने गौशाला की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए चारा पहुंचाने की प्रक्रिया का विवरण साझा किया। उनके अनुसार, गौशाला समिति की प्रार्थना के बाद सर्वे किया गया और आवश्यकता के आधार पर 600 क्विंटल सूखा चारा उपलब्ध करवाया गया। संत रामपाल जी महाराज से जुड़े सेवा अभियानों में गौशालाओं के साथ-साथ जरूरतमंद परिवारों और अन्य सामाजिक आवश्यकताओं में सहयोग करने की बात भी कही जाती है। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने उनके सेवा कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि संकट या जरूरत के समय मिलने वाला सहयोग संबंधित लोगों का संबल बन सकता है।
गौ सेवा के संदर्भ में इस पहल का महत्व इसलिए भी है कि गोवंश की देखभाल के लिए नियमित संसाधनों की जरूरत होती है। जब किसी गौशाला को समय पर चारा मिलता है, तो समिति को पशुओं के भोजन की व्यवस्था करने में मदद मिलती है और वह अन्य आवश्यक कार्यों पर भी ध्यान दे सकती है।
संत रामपाल जी महाराज की ओर से किए गए इस सहयोग के लिए ग्रामीणों ने आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में उमड़ी भीड़, महिलाओं द्वारा किया गया स्वागत और समिति के सदस्यों के वक्तव्य इस बात को दर्शाते हैं कि गांव के लोगों ने इस सहायता को महत्वपूर्ण माना।
रामगढ़ में सेवा, सहयोग और उम्मीद की नई तस्वीर
श्री राधा कृष्ण गौशाला, रामगढ़ में 600 क्विंटल सूखा चारा पहुंचने से गांव के लोगों को एक साथ आने और गौ सेवा के प्रति अपनी भागीदारी दिखाने का अवसर मिला। ढोल-नगाड़ों की गूंज, फूलों की वर्षा और ग्रामीणों की खुशी के बीच यह कार्यक्रम संपन्न हुआ। गौशाला समिति के लिए यह सहायता नियमित चारे की व्यवस्था में महत्वपूर्ण सहयोग है। इस अवसर ने यह भी याद दिलाया कि पशुओं की देखभाल और गौशालाओं का संचालन समाज की साझा जिम्मेदारी है। ग्रामीणों का सहयोग, समिति की मेहनत और जरूरत के समय मिलने वाली सहायता मिलकर ऐसी व्यवस्थाओं को मजबूत बना सकती है।
600 क्विंटल चारे से रामगढ़ की गौशाला को राहत, सेवा और सहयोग ने जगाई नई उम्मीद
राजस्थान के रामगढ़ में गौ सुरक्षा अभियान के तीसरे चरण के अंतर्गत पहुंचा 600 क्विंटल सूखा चारा केवल एक सहायता सामग्री नहीं, बल्कि गौशाला की नियमित जरूरत को पूरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण सहयोग है। इस पहल से जुड़े लोगों ने भविष्य में भी जरूरतों के अनुसार प्रार्थना रखने की बात कही। अब ग्रामीणों की उम्मीद है कि चारे की व्यवस्था के साथ शेड और जमीन जैसी दूसरी समस्याओं का भी समाधान हो सकेगा, ताकि गौशाला में आश्रित गोवंश की देखभाल बेहतर तरीके से जारी रह सके। अधिक जानकारी हेतु आप Sant Rampal Ji Maharaj App डाउनलॉड करें।



