चूरू, राजस्थान (विशेष संवाददाता)। राजस्थान के चूरू जिले की राजगढ़ तहसील के अंतर्गत आने वाले गांव बिल्यूबास रामपुरा (रामपुरा बेरी) स्थित गोवर्धन गौशाला समिति में अकाल और आर्थिक अभाव के कारण उत्पन्न हुए चारे के गंभीर संकट को दूर करते हुए संत रामपाल जी महाराज ने दूसरी बार 500 क्विंटल सूखा चारा निशुल्क उपलब्ध कराया है। इससे पूर्व 21 अगस्त को भी संत रामपाल जी महाराज द्वारा इसी गौशाला को 500 क्विंटल चारा भेजा गया था। राज्य में पड़े सूखे और सरकारी या बाहरी अनुदान न मिलने के कारण यह गरीब गौशाला बंद होने के कगार पर पहुंच चुकी थी और गायें भूखी मरने की स्थिति में थीं। ग्रामीणों और गौशाला समिति द्वारा हरियाणा के धनाना धाम में जाकर की गई प्रार्थना के मात्र दो दिन के भीतर संत रामपाल जी महाराज ने अपने स्तर पर ट्रकों के परिवहन भाड़े सहित उच्च गुणवत्ता वाला सूखा चारा सीधे गौशाला के गोदाम तक पहुंचाकर गौवंश के जीवन की रक्षा की है।
चारे के संकट और अकाल के बीच ग्रामवासियों एवं गौशाला समिति ने धनाना धाम पहुंचकर संत रामपाल जी महाराज से मांगी सहायता
राजस्थान के चूरू क्षेत्र में अकाल पड़ने के कारण पशुओं के चारे की भारी किल्लत हो गई थी। गांव रामपुरा बेरी की गोवर्धन गौशाला समिति एक गरीब गौशाला थी, जिसे कहीं से भी अनुदान प्राप्त नहीं होता था। चारे के अभाव में गौशाला लगभग बंद हो चुकी थी। इस विकट परिस्थिति में गौवंश को भूख से बचाने के लिए गोवर्धन गौशाला समिति के प्रधान, कमेटी के सदस्यों और गांव के गणमान्य व्यक्तियों ने हरियाणा स्थित धनाना धाम में संत रामपाल जी महाराज के चरणों में पहुंचकर सहायता की गुहार लगाई।
ग्रामीणों के अनुसार, उन्होंने पिछले महीने 18 और 25 तारीख को तथा वर्तमान खेप के लिए दो दिन पूर्व (25 और 26 तारीख को) धनाना धाम जाकर अपनी समस्या रखी और बताया कि गौशाला में चारा समाप्त होने वाला है तथा गायों के भूखे मरने की नौबत आ गई है। संत रामपाल जी महाराज ने ग्रामीणों की प्रार्थना को तुरंत स्वीकार करते हुए न केवल तत्काल 500 क्विंटल चारा भेजने का आदेश दिया, बल्कि ग्रामीणों को यह आश्वासन भी दिया कि किसी भी गाय को भूखा नहीं मरने दिया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि जब यह एक महीने का चारा समाप्त हो जाए, तो ग्रामवासी पुनः आकर बताएं, उन्हें अगले महीने के लिए तीसरी बार भी चारा उपलब्ध करा दिया जाएगा। प्रार्थना करने के मात्र दो दिन के भीतर चारे से भरे ट्रक गांव रामपुरा की गौशाला में पहुंच गए।

गौशाला को प्राप्त कुल सहायता एवं आर्थिक मूल्यांकन का विस्तृत विवरण
संत रामपाल जी महाराज द्वारा गोवर्धन गौशाला समिति, गांव बिल्यूबास रामपुरा बेरी को अब तक दो चरणों में कुल 1000 क्विंटल सूखा चारा (तड़ी) प्रदान किया जा चुका है। 1100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से भी यदि इस चारे का मूल्यांकन किया जाए, तो केवल चारे की कीमत लाखों रुपये में होती है। इसके अतिरिक्त, चारे को ट्रकों में भरकर गांव रामपुरा तक पहुंचाने का संपूर्ण मालभाड़ा (किराया) भी संत रामपाल जी महाराज द्वारा ही वहन किया गया है। ग्रामीणों को स्वयं वाहन किराए पर लेकर चारा लाने की आवश्यकता नहीं पड़ी, बल्कि संत रामपाल जी महाराज ने सीधे गौशाला के द्वार और गोदाम तक यह सामग्री पहुंचाई है।
तालिका 1: गोवर्धन गौशाला समिति, रामपुरा बेरी (चूरू) को प्राप्त चारा सहायता का विवरण
| क्रम संख्या | विवरण / मापदंड | तथ्यात्मक जानकारी (ट्रांसक्रिप्ट के अनुसार) |
| 1 | लाभार्थी संस्था का नाम | गोवर्धन गौशाला समिति |
| 2 | स्थान का विवरण | गांव बिल्यूबास रामपुरा (रामपुरा बेरी), तहसील राजगढ़, जिला चूरू, राजस्थान |
| 3 | सहायता प्रदानकर्ता | संत रामपाल जी महाराज |
| 4 | प्रथम खेप की तिथि एवं मात्रा | 21 अगस्त (एक माह पूर्व) — 500 क्विंटल सूखा चारा |
| 5 | द्वितीय खेप की मात्रा | 500 क्विंटल सूखा चारा (प्रार्थना के 2 दिन भीतर प्राप्त) |
| 6 | कुल प्राप्त चारा | 1000 क्विंटल उच्च गुणवत्ता वाला सूखा चारा |
| 7 | अनुमानित दर संदर्भ | 1100 रुपये प्रति क्विंटल की दर का उल्लेख |
| 8 | परिवहन एवं भाड़ा व्यवस्था | ट्रकों का संपूर्ण भाड़ा संत रामपाल जी महाराज द्वारा निशुल्क प्रदत्त |
| 9 | भविष्य का आश्वासन | चारा समाप्त होने पर हर महीने निरंतर चारा देने का वचन |
चारे की गुणवत्ता और गौशाला पर पड़ा सकारात्मक प्रभाव
गौशाला के प्रधान और ग्रामवासियों ने प्राप्त हुए सूखे चारे की गुणवत्ता की पुष्टि करते हुए बताया कि दोनों बार भेजा गया चारा अत्यंत उत्तम और साफ-सुथरा है। इस चारे को खाकर गौशाला की गायें पूर्णतः स्वस्थ और संतुष्ट हैं ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि संत रामपाल जी महाराज की इस सहायता से पूर्व गौशाला की आर्थिक स्थिति इतनी दयनीय थी कि वह बंद होने की स्थिति में आ गई थी, परंतु संत रामपाल जी महाराज के आशीर्वाद से यह गौशाला पुनः संचालित हो सकी है। पिछले दो महीनों से लगातार मिल रहे 500-500 क्विंटल चारे के कारण पूरी गौशाला समिति अब पूरी तरह से चिंतामुक्त (टेंशन फ्री) हो गई है। जब यह दूसरी खेप गांव में पहुंची, तो कुछ गाड़ियां गौशाला परिसर में खड़ी कर खाली कराई गईं और शेष चारा सुरक्षित रूप से गोदाम में रखवा दिया गया।
शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि एवं धर्मशाला निर्माण में संत रामपाल जी महाराज के प्रत्यक्ष परोपकारी कार्य
गांव बिल्यूबास रामपुरा बेरी के निवासियों ने जब धनाना धाम की यात्रा की, तो उन्होंने वहां संत रामपाल जी महाराज द्वारा किए जा रहे अन्य सामाजिक, स्वास्थ्य और कृषि संबंधी सहायता कार्यों को भी प्रत्यक्ष रूप से देखा। ग्रामीणों ने अपने आंखों देखे अनुभव साझा करते हुए बताया कि वहां किसी से कुछ लिया नहीं जाता, बल्कि हर जरूरतमंद की झोली भरी जाती है।
ग्रामवासियों द्वारा देखे और बताए गए प्रमुख राहत कार्यों का विवरण निम्नलिखित है:
- सेन धर्मशाला एवं निर्धन व्यक्तियों को तत्काल नकद सहायता: एक प्रत्यक्षदर्शी ग्रामीण ने बताया कि धनाना धाम में उनकी आंखों के सामने संत रामपाल जी महाराज द्वारा सेन धर्मशाला के लिए मात्र दो सेकंड के भीतर हाथों-हाथ 5 लाख रुपये की राशि प्रदान कर दी गई। इसी प्रकार, वहां आए गरीब प्राणियों को भी मात्र दो मिनट के भीतर क्रमशः 2 लाख रुपये और 3 लाख रुपये के नकद बंडल हाथों-हाथ सहायता स्वरूप दिए गए
- छोटे किसानों के लिए निशुल्क कृषि सामग्री: पिछले महीने 18 और 25 तारीख को धनाना धाम गए एक ग्रामीण ने बताया कि संत रामपाल जी महाराज शिक्षा और स्वास्थ्य के साथ-साथ किसानों के उत्थान के लिए भी कार्य कर रहे हैं। ढाई एकड़ जमीन g के साथ उस बीमार लड़के की सहायता के लिए संत रामपाल जी महाराज के चरणों में प्रार्थना पत्र दिया, तो मात्र दो दिन के भीतर (25 और 26 तारीख को) जांच और पूछताछ के लिए गांव में प्रतिनिधि पहुंच गए। ग्रामीणों ने विश्वास जताया कि सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद उस बीमार युवक को भी संत रामपाल जी महाराज द्वारा निश्चित रूप से चिकित्सा सहायता प्राप्त होगी।
तालिका 2: ग्रामीणों द्वारा प्रत्यक्ष देखे गए संत रामपाल जी महाराज के अन्य राहत कार्य
| सहायता का क्षेत्र | लाभार्थी श्रेणी / प्रकरण | प्रदान की गई सहायता / की गई कार्रवाई |
| सामाजिक भवन निर्माण | सेन धर्मशाला (चैन धर्मशाला) | ग्रामीणों के सामने हाथों-हाथ 5 लाख रुपये की राशि प्रदान की गई। |
| निर्धन आर्थिक सहायता | धनाना धाम में आए गरीब व्यक्ति | दो मिनट के भीतर 2 लाख रुपये और 3 लाख रुपये के बंडल हाथों-हाथ दिए गए। |
| कृषि सहयोग | ढाई एकड़ भूमि वाले छोटे किसान | खाद, बीज और दवाई पूर्णतः निशुल्क उपलब्ध कराई गई। |
| गंभीर चिकित्सा सहायता | गांव रामपुरा का लड़का (दोनों किडनी खराब) | प्रार्थना पत्र देने के बाद 25-26 तारीख को गांव में आकर पूछताछ संपन्न की गई। |
| समग्र गौ सुरक्षा अभियान | राजस्थान एवं विश्व की गौशालाएं | प्रार्थना लेकर जाने वाले किसी भी गौशाला प्रधान को खाली हाथ नहीं लौटाया जाता। |
ग्रामवासियों द्वारा भव्य स्वागत एवं प्रत्यक्षदर्शियों के कथन
जब चारे से लदे वाहनों का काफिला दूसरी बार गांव रामपुरा बेरी की गोवर्धन गौशाला पहुंचा, तो पूरे गांव में अत्यंत उत्साह और प्रसन्नता का वातावरण देखा गया। सभी ग्रामवासियों ने एकत्रित होकर संत रामपाल जी महाराज के स्वरूप (चित्र) पर जोरदार पुष्प वर्षा की और फूलों की मालाएं अर्पित कर अपना सम्मान व आभार प्रकट किया।
इस अवसर पर गौशाला के प्रधान और गांव के बुजुर्गों व नागरिकों ने अपने विचार निम्नलिखित शब्दों में व्यक्त किए:
- गौशाला प्रधान का कथन: “संत रामपाल जी महाराज ने एक महीने पहले 500 क्विंटल चारा दिया था और आज दूसरी बार फिर 500 क्विंटल बहुत ही बढ़िया चारा दे दिया है। हमारी गरीब गौशाला थी, पहले कोई अनुदान नहीं मिलता था, लेकिन अब दो महीने से हम पूरी तरह टेंशन फ्री (चिंतामुक्त) हो गए हैं। गायें बहुत खुश और स्वस्थ हैं। हम पूरे गांव की तरफ से संत रामपाल भगवान जी का तहे दिल से धन्यवाद करते हैं, हमारे लिए तो वे साक्षात भगवान हैं।”
- धनाना धाम से लौटे प्रथम ग्रामवासी का कथन: “हम कल-परसों ही प्रार्थना करने गए थे और मात्र दो ही दिन में तड़ी (सूखा चारा) गांव में आ गई। अगर हम खुद किराए पर साधन लेकर जाएं तो भी दो दिन में ऐसी व्यवस्था नहीं बन सकती, लेकिन संत रामपाल जी महाराज यह भी नहीं कहते कि आकर ले जाओ, बल्कि वे स्वयं सारा चारा घर और गौशाला तक पहुंचाकर दे रहे हैं। संसार में बहुत से गुरु हैं, लेकिन धनाना धाम में संत रामपाल जी महाराज ऐसे हैं जो किसी से लेते नहीं, केवल देते ही देते हैं।”
- द्वितीय ग्रामवासी का कथन: “संत श्री रामपाल जी भगवान के चरणों में पूरे ग्रामवासियों की तरफ से कोटि-कोटि नमन है। हमारी गौशाला बंद होने के कगार पर थी, उनके आशीर्वाद से ही दोबारा शुरू हुई है। उन्होंने वचन दिया है कि गायों को भूखा नहीं मरने देंगे और चारा खत्म होने पर फिर से एक महीने का चारा दे देंगे। केवल रामपुरा गौशाला ही नहीं, पूरे राजस्थान से जितने भी गौ सेवक वहां जाते हैं, कोई खाली हाथ नहीं आता।”
- तृतीय वरिष्ठ ग्रामवासी का कथन: “हिंदुस्तान में बड़े-बड़े आश्रम और पैसे वाले डेरे बहुत हैं, लेकिन गांव की गरीब गौशालाओं की तरफ किसी का ध्यान नहीं है, वे केवल लेने के लिए हैं। हमने सतयुग के भगवान और राम के बारे में केवल बुजुर्गों से सुना था, लेकिन आज धरातल (ग्राउंड) पर कलयुग में सतयुग वाले राम के रूप में संत रामपाल जी महाराज को देख लिया। इतना बड़ा दान और परोपकार कोई आम इंसान नहीं कर सकता, यह कार्य केवल पूर्ण संत और भगवान ही कर सकते हैं।”
कलयुग में सतयुग की स्थापना करने वाले महादानी एवं जगत उद्धारक हैं संत रामपाल जी महाराज
संत रामपाल जी महाराज द्वारा जिस निस्वार्थ भाव, त्वरित गति और विशाल स्तर पर समाज के प्रत्येक वर्ग और मूक पशुओं की सेवा की जा रही है, वह उन्हें एक अद्वितीय और परम दयालु महापुरुष के रूप में स्थापित करती है। बिना किसी जान-पहचान के, केवल एक प्रार्थना मात्र पर सैकड़ों किलोमीटर दूर राजस्थान के चूरू जिले के गांव रामपुरा बेरी की गौशाला में अपने खर्च पर 1000 क्विंटल सूखा चारा पहुंचाना इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि संत रामपाल जी महाराज दया के सागर हैं।
जहां आज के समय में अन्य संस्थाएं केवल धन संग्रह करने में लगी रहती हैं, वहीं संत रामपाल जी महाराज का स्पष्ट आदेश है कि किसी भी प्रकार का लोक दिखावा न करके सीधे जमीनी स्तर पर ठोस कार्य किया जाए। चाहे अकाल से जूझती गौशालाओं को लाखों रुपये का चारा देना हो, ढाई एकड़ वाले गरीब किसानों को मुफ्त खाद-बीज देना हो, किडनी की गंभीर बीमारी से पीड़ित को सहारा देना हो, या धर्मशालाओं और निर्धनों को लाखों रुपये की तत्काल सहायता देनी हो—संत रामपाल जी महाराज तन, मन और धन से समाज को ऊपर उठाने का ऐतिहासिक कार्य कर रहे हैं। उनके इन्हीं अद्वितीय और दिव्य परोपकारी कार्यों के कारण आज जनमानस उन्हें इस सदी और संपूर्ण विश्व के त्राता तथा कलयुग में सतयुग लाने वाले साक्षात परमात्मा के रूप में नमन कर रहा है। संत रामपाल जी महाराज द्वारा संचालित यह राहत अभियान आगे भी निरंतर जारी रहेगा।



