राजस्थान के जिला हनुमानगढ़ स्थित गांव करोती की श्री गोविंद शरणार्थी गौशाला में 600 गायों के लिए संत रामपाल जी महाराज ने किया 100×40 फीट शेड का निर्माण कार्य शुरू

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राजस्थान राज्य के हनुमानगढ़ जिले के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत दीपलाना के गांव करोती स्थित श्री गोविंद शरणार्थी गौशाला समिति में एक ऐतिहासिक राहत कार्य का शुभारंभ हुआ है। भीषण परिस्थितियों से जूझ रही इस गौशाला में 600 से अधिक गायों के लिए विश्व के सबसे बड़े दानवीर, संत रामपाल जी महाराज के सौजन्य से 100×40 फीट के एक विशाल शेड का निर्माण कार्य विधिवत रूप से शुरू हो चुका है। इससे पूर्व उनके द्वारा इस गौशाला को लगभग 10-15 लाख रुपये की लागत का 1000 क्विंटल सूखा चारा (तूड़ा) पूर्णतः निशुल्क उपलब्ध करवाया गया था। बिना किसी सरकारी सहायता या चंदे के, करोड़ों रुपये का यह विशाल सेवा कार्य पूर्ण रूप से संत रामपाल जी महाराज के निर्देशानुसार किया जा रहा है।

ग्रामीण मदद के लिए संत रामपाल जी महाराज के पास कैसे पहुंचे

श्री गोविंद शरणार्थी गौशाला समिति, दीपलाना कोई छोटी गौशाला नहीं है, बल्कि यह पांच गांवों (दीपलाना, करोती, सोती, 14ानी चक और परलीका) की एक संयुक्त और बहुत बड़ी गौशाला है, जिसमें 600 से अधिक गाएं आश्रित हैं। इस विशाल गौशाला में चारे और गायों के छिपने के लिए शेड की भारी कमी उत्पन्न हो गई थी। संसाधनों के अभाव में इतनी बड़ी संख्या में गायों का पालन करना गौशाला प्रबंधन के लिए एक गंभीर संकट बन चुका था।

जब हर तरफ से निराशा हाथ लगी, तो गौशाला समिति को संत रामपाल जी महाराज के बारे में पता चला। पहली बार 29 अगस्त को गौशाला के प्रधान श्री भूप सिंह जी जोशी और अन्य सम्मानित ग्रामवासी संत रामपाल जी महाराज के आश्रम पहुंचे। वहां पहुंचकर उन्होंने गौशाला की गंभीर स्थिति का विवरण दिया और कुछ सूखे चारे तथा एक विशाल शेड के निर्माण की मार्मिक प्रार्थना (एप्लीकेशन) लगाई। ग्रामवासियों को यह जानकर अत्यंत आश्चर्य और प्रसन्नता हुई कि संत रामपाल जी महाराज ने उनकी प्रार्थना को एक मिनट से भी कम समय में स्वीकार कर लिया। बिना किसी शर्त या आर्थिक सहयोग की मांग के, उन्होंने तुरंत गौशाला की पूरी जिम्मेदारी अपने कंधों पर ले ली।

यह भी पढ़े :अकाल पीड़ित क्षेत्रों और गौशालाओं के संबल बने संत रामपाल जी महाराज: ग्रामीणों ने व्यक्त किया आभार

संत रामपाल जी महाराज द्वारा दी गई अभूतपूर्व सहायता का विवरण

संत रामपाल जी महाराज द्वारा सहायता पहुंचाने की गति ने पूरे गांव को आश्चर्यचकित कर दिया है। आश्रम से लौटने के मात्र दो-तीन दिन बाद (1-2 तारीख को) 1000 क्विंटल सूखा चारा गौशाला में पहुंच गया, जिसे संत रामपाल जी महाराज के सेवादारों ने स्वयं खाली करवाया। चारे की आपूर्ति के लगभग 20-25 दिन बाद ही शेड के निर्माण की भी अंतिम स्वीकृति आ गई और अब टीम ने गांव पहुंचकर 100×40 फीट के शेड की नींव रख दी है।

क्र.सं.सहायता का विवरणवर्तमान स्थितिसंत रामपाल जी महाराज का योगदान
1.1000 क्विंटल सूखा चारा (तूड़ा)गौशाला में सफलतापूर्वक पहुंचाया गया (लागत लगभग 10-15 लाख)पूर्णतः निशुल्क
2.100×40 फीट का विशाल टीन शेडनिर्माण कार्य (मंगलाचरण) प्रारंभ (लागत लगभग 15 लाख)पूर्णतः निशुल्क (श्रम और उत्तम क्वालिटी सामग्री सहित)

इस 100×40 फीट के शेड के निर्माण में कम से कम 15 लाख रुपये का खर्च आने का अनुमान है। गौशाला के ‘नौ नंबर नोरा’ में इसका निर्माण किया जा रहा है। निर्माण में उच्च गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा गया है, जिसमें टाटा या जिंदल जैसी कंपनियों के एक नंबर के लोहे का उपयोग किया जा रहा है। इस पूरी प्रक्रिया में गांव वालों या गौशाला समिति को कोई शारीरिक या आर्थिक मेहनत नहीं करनी पड़ रही है। सामग्री, कारीगर, और सारा खर्च संत रामपाल जी महाराज की ओर से उठाया जा रहा है।

प्रत्यक्षदर्शियों और गौशाला प्रबंधन की भावुक प्रतिक्रियाएं

इतनी त्वरित और विशाल सहायता पाकर पांचों गांवों के लोग संत रामपाल जी महाराज के प्रति नतमस्तक हैं। गौशाला के प्रधान श्री भूप सिंह जी जोशी ने बताया कि जब वे पहली बार आश्रम गए, तो उनका भव्य स्वागत किया गया और उनकी मांग तुरंत पूरी कर दी गई। उन्होंने कहा कि जो काम सरकारें नहीं कर सकतीं, वह संत रामपाल जी महाराज कर रहे हैं।

गौशाला समिति के अन्य सदस्यों ने अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि इस कार्य में तीन-चार महीने लगेंगे, लेकिन यह काम इतनी जल्दी हो गया कि उन्हें खुद विश्वास नहीं हो रहा है। एक ग्रामवासी ने संत रामपाल जी महाराज की महिमा का बखान करते हुए कहा, “इनके बारे में कहने को शब्द ही नहीं बचे हैं।  ये परमात्मा के बराबर हैं। परमात्मा से मांगो तो शायद छह महीने लग जाएं, लेकिन इन्होंने तो तीन दिन में सामान भेज दिया।”

एक अन्य बुजुर्ग ग्रामीण ने कहा, “हमने इतिहास में बहुत से दानवीरों के बारे में सुना है, पर इस युग में संत रामपाल जी महाराज जो कर रहे हैं, उनका कोई मुकाबला नहीं है। वे भगवान के अवतार ही हैं, बिल्कुल भगवान स्वरूप हैं।”

कलयुग के सच्चे तारणहार: संत रामपाल जी महाराज

संत रामपाल जी महाराज ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया है कि वे केवल ज्ञान के ही नहीं, बल्कि दया और करुणा के भी असीम सागर हैं। पांच गांवों की 600 गायों के लिए इतनी विशाल व्यवस्था करना, वह भी बिना किसी चंदे या दिखावे के, इस बात का साक्षात प्रमाण है कि वे ही कलयुग के असली तारणहार हैं। जब समाज में पशुओं की दुर्दशा पर लोग केवल मूक दर्शक बने रहते हैं, तब संत रामपाल जी महाराज ने करोड़ों रुपये का बजट पास करके गौ रक्षा का सच्चा उदाहरण प्रस्तुत किया है। 

1000 क्विंटल चारा और 100×40 फीट का शेड देना केवल एक सहायता नहीं, बल्कि यह उन बेजुबान जीवों के प्रति ईश्वरीय प्रेम का प्रकटीकरण है। संत रामपाल जी महाराज का यह निस्वार्थ महाअभियान पूरे विश्व के लिए एक बहुत बड़ी प्रेरणा है। उनके द्वारा किए जा रहे इन महान कार्यों की जितनी भी सराहना की जाए, वह कम है। संपूर्ण मानवता उनके इस अद्वितीय परोपकार के लिए सदैव उनकी ऋणी रहेगी।

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