आज के इस मतलबी दौर में, जहाँ हर कोई सिर्फ अपने स्वार्थ के लिए जी रहा है, वहाँ अगर किसी के आँसू पोंछने और दर्द बांटने वाला कोई मिल जाए, तो वह किसी भगवान से कम नहीं होता। जब लोग हरियाणा, पंजाब, मध्य प्रदेश और राजस्थान के अलग-अलग कोनों से आए लोगों की संत रामपाल जी महाराज से हुई मुलाकातों को देखते हैं, तो उनका दिल भर आता है। संत रामपाल जी महाराज जी का दरबार अब केवल ज्ञान और सत्संग का केंद्र नहीं रह गया है; यह तो इंसानियत का वो खुला आंगन बन चुका है जहाँ बेजुबान गायों से लेकर खेतों में पसीना बहाने वाले किसानों और बीमारी से टूट चुके लाचार परिवारों को एक नई जिंदगी मिल रही है।
हर वर्ग और हर तबके के लोग आ रहे हैं महाराज जी की शरण में
जब आप संत रामपाल जी महाराज के दरबार में नजर दौड़ाते हैं, तो वहाँ किसी भी प्रकार का कोई भेदभाव या ‘वीआईपी (VIP) कल्चर’ नजर नहीं आता। वहाँ पंजाब के विधायक (MLA), हरियाणा के जाट धर्मशाला के प्रधान, रोहतक के अखाड़ा संचालक (कोच) और मध्य प्रदेश से आए परमहंस पंथ के संत—सभी एक ही कतार में हाथ जोड़े खड़े दिखाई देते हैं।
इनके साथ ही पानीपत, चूरू और सिरसा जैसे जिलों के गौशाला प्रधान भी नम आँखों से महाराज जी का धन्यवाद करने पहुँचे हैं। कोई अपनी उजड़ती हुई खेती को बचाने की गुहार लेकर आया है, तो कोई अपने गाँव के एक गरीब बीमार बच्चे के इलाज की आस लेकर। ये सभी वो लोग हैं जो हर तरफ से थक-हार चुके थे, और अब उन्हें केवल संत रामपाल जी महाराज में ही अपना सच्चा तारणहार नजर आ रहा है।
संत रामपाल जी महाराज से मिलने आए लोगों के अनुभव
आइए जानते है उन लोगों की जुबानी जिन्होंने भारी मन और कृतज्ञता के साथ महाराज जी के सामने रखी अपनी कहानियाँ।
| हस्ती | बयान | वीडियो स्रोत |
| प्रधान, जाट धर्मशाला (हिसार, हरियाणा) | “आपने भोजराज गाँव में पाइपलाइन बिछाकर सूखती फसलें बचाईं। गरीब, किसान और मजदूर की जो मदद करे, वही भगवान का रूप है, और जाट समाज आपको परमात्मा मानता है।” | वीडियो देखें |
| गौशाला प्रधान (अधमी, पानीपत, हरियाणा) | “गौशाला में इतना कीचड़ था कि इंसान खड़ा नहीं हो सकता था। आपने चारा भिजवाया और अब मिट्टी डलवा रहे हैं, हम पूरे गाँव की तरफ से आपका धन्यवाद करते हैं।” | वीडियो देखें |
| विधायक (MLA) (फाजिल्का, पंजाब) | “जब भी आपके दर्शन करने आते हैं, तो मन को बहुत शांति मिलती है। इसी शांति और सुकून की तलाश में हम बार-बार आपके दर्शन करने चले आते हैं।” | वीडियो देखें |
| सरपंच के भाई (नहला, फतेहाबाद, हरियाणा) | “आपने हमारे गाँव के 6 परिवारों को उजड़ने से बचाया। अब गाँव के एक गरीब वाल्मीकि लड़के के इलाज के लिए 6 लाख चाहिए थे, जो आपने देने की कृपा की है।” | वीडियो देखें |
| परमहंस पंथी संत (भिंड/शिवपुरी, म.प्र.) | “हमने यहाँ आकर ही असली सत्य को देखा है। अब हम आपकी शरण ग्रहण कर लेंगे।” | वीडियो देखें |
| अखाड़ा संचालक / कोच (रनैकपुरा, रोहतक, हरियाणा) | “हमारे अखाड़े में बेटियां ज्यादा हैं, एक 9 साल की बेटी 3 बार की गोल्ड मेडलिस्ट है। हम हर जगह से थक-हार कर आपके पास आशीर्वाद और मदद के लिए आए हैं।” | वीडियो देखे |
| गौशाला अध्यक्ष (राजगढ़, चूरू, राजस्थान) | “गौ माताओं के लिए चारे की कमी है और कुत्तों से बचाव के लिए 1500 मीटर की चारदीवारी की सख्त जरूरत है। आप ही हमारी आखिरी आस हैं।” | वीडियो देखे |
| किसान (गुरेरा, भिवानी, हरियाणा) | “आज हमारी धरती धन्य हो गई है। आप जैसे किसान मसीहा ने हमारी बहुत मदद की है, गरीब किसान के लिए आप फरिश्ता बनकर आए हैं।” | वीडियो देखे |
| कमल राणा (नेता) (माजरी, झज्जर, हरियाणा) | “हम विशेष रूप से आपके दर्शन करने के लिए आए हैं।” | वीडियो देखे |
| सरपंच व पंचायत सदस्य (दौलतपुर, हिसार, हरियाणा) | “पिछले साल भी आपने हमारी बहुत मदद करी थी जी। अब एक समस्या है, गाँव के 5-6 किसानों के खेतों में पानी भर गया है, मिट्टी डलवानी है।” (जिस पर महाराज जी ने तुरंत उन्हें मदद का पूरा आश्वासन दिया।) | वीडियो देखे |
| श्रद्धालु (गोहाना, सोनीपत, हरियाणा) | “हम 30 साल से व्यास राधा स्वामी पंथ में थे। आज आपकी दया हुई मालिक, जो हमने आपसे नाम दीक्षा ले ली। आपने हम पर बहुत मेहर कर दी है, हमें बस अपनी भक्ति का दान दे दो।” | वीडियो देखे |
| गौशाला प्रधान व सरपंच (चूरू, राजस्थान) | “गुरु जी, मैंने खुद को बहुत भाग्यशाली माना कि आपके साक्षात् दर्शन हो गए। मैं गायों के वास्ते आया हूँ, चारे की कमी है और गाँव थोड़ा कमजोर है।” | वीडियो देखे |
| गौशाला प्रधान (फतेहपुरिया नियामत खां, सिरसा, हरियाणा) | “गौशाला की मदद और जरूरतों के लिए महाराज जी को लिखित मांग सौंपी।” | वीडियो देखे |
विशेष प्रतिक्रियाएँ: जब छलक उठा लोगों का दर्द और दिखी असीम करुणा
इन मुलाकातों में कई ऐसे भावुक पल आए, जिन्होंने वहाँ मौजूद हर इंसान की आँखें नम कर दीं।
गरीब के इलाज के लिए खोला खजाना
फतेहाबाद के नहला गाँव से आए सरपंच प्रतिनिधि ने बताया कि उनके गाँव का एक गरीब वाल्मीकि लड़का बहुत बीमार है और PGI चंडीगढ़ में भर्ती है। डॉक्टरों ने उसके इलाज का खर्च 5-6 लाख रुपये बताया है, जो उस गरीब परिवार के लिए असंभव था। इस पर संत रामपाल जी महाराज ने एक पल सोचे बिना कहा— “तू चिंता मत कर बेटे, 6 लाख क्या, अगर 50 लाख की भी जरूरत पड़ेगी तो हम देंगे।” यह सुनकर पूरे दरबार में मौजूद लोगों का हृदय भर आया।
किसानों का रहनुमा और बेजुबानों का साथी
हिसार से आए जाट धर्मशाला के प्रधानों ने महाराज जी को साक्षात परमात्मा का दर्जा दिया। उन्होंने याद किया कि कैसे जब भोजराज गाँव में पानी के बिना फसलें मर रही थीं और सरकार ने हाथ खड़े कर दिए थे, तब महाराज जी ने पाइप और मोटरें भिजवाकर उन किसानों को उजड़ने से बचाया था। वहीं, पानीपत की गौशाला के प्रधान ने बताया कि गायें दलदल और कीचड़ में खड़ी रहने को मजबूर थीं; महाराज जी ने न सिर्फ उनके लिए हरा चारा भेजा, बल्कि अपने खर्चे पर वहां मिट्टी डलवाने का काम भी शुरू करवा दिया।
सत्य के आगे झुके दूसरे पंथ के संत
एक बहुत ही अद्भुत नजारा तब देखने को मिला जब मध्य प्रदेश से ‘परमहंस पंथ’ के एक साधु महाराज जी के दर्शन करने पहुँचे। उन्होंने भरे दरबार में स्वीकार किया कि उन्होंने अपना पूरा जीवन दूसरे पंथ में लगा दिया, लेकिन सच्चा ज्ञान उन्हें यहीं आकर मिला। वे भावुक होकर महाराज जी के चरणों में गिर पड़े और वहीं आश्रम में रहकर सेवा करने की इच्छा जताई। महाराज जी ने भी उन्हें गले लगाकर अपनी शरण में ले लिया।
युगदृष्टा संत रामपाल जी महाराज: इंसानियत के सच्चे मसीहा
आज के इस घोर कलयुग और स्वार्थी युग में, जब सगे रिश्तेदार भी मुसीबत के समय मुँह फेर लेते हैं, तब भारत के सबसे बड़े दानवीर संत रामपाल जी महाराज एक सच्चे पिता और रहनुमा की तरह समाज के हर बेसहारा इंसान का हाथ थाम रहे हैं। उनकी जितनी भी महिमा गाई जाए, वह कम है। महाराज जी केवल आज की भूख नहीं मिटा रहे, बल्कि समाज के आने वाले कल को भी संवार रहे हैं।
उन्होंने अपने ज्ञान से एक ऐसी आंधी ला दी है जहाँ बिना एक रुपया दहेज दिए बेटियों की शादियाँ (रमैणी) हो रही हैं और नशे में डूबे हुए नौजवान हमेशा के लिए शराब-तंबाकू छोड़कर अपने घरों को स्वर्ग बना रहे हैं। खेतों में डूबती फसलों को बचाना हो, बेजुबान गायों का पेट भरना हो या गरीबों की बीमारी का लाखों का खर्च उठाना हो—संत रामपाल जी महाराज जी ने हर उस जगह अपना हाथ बढ़ाया है जहाँ सरकारें और समाज हार मान चुके थे। उनका यह अगाध प्रेम, उनकी ईश्वरीय करुणा और समाज सेवा का यह बेमिसाल जज्बा यह साबित करता है कि वे कोई साधारण संत नहीं, बल्कि इस धरती पर साक्षात् परमात्मा का रूप हैं।
कलयुग के अंधकार से सतयुग की एक नई और सुनहरी सुबह की ओर
जब हर तरफ से उम्मीदें टूट जाती हैं और इंसान मुसीबतों से घिर जाता है, तब संत रामपाल जी महाराज का दरबार ही वह इकलौता आसरा बनता है, जहाँ से कभी कोई खाली हाथ नहीं लौटता।
सूखती फसलों तक पानी पहुँचाने से लेकर, गरीब बेटियों को खेल के मैदान में आगे बढ़ाने और बेसहारा मरीजों को नया जीवन देने तक—संत रामपाल जी महाराज जी के ये नि:स्वार्थ उपकार अनेकों लोगों की जिंदगियाँ बदल रहे हैं। मुसीबत के वक्त अगर कोई सिर्फ कंधे पर हाथ रख दे, तो इंसान की आधी पीड़ा वैसे ही खत्म हो जाती है; लेकिन संत रामपाल जी महाराज जी तो बेसहारा लोगों को गले लगाकर उनका पूरा दर्द ही हर लेते हैं।
आज इन हजारों-लाखों लोगों के चेहरों पर सुकून की जो सच्ची मुस्कान है, वह इस बात की गवाही दे रही है कि संत रामपाल जी महाराज के रूप में इस समाज को एक ऐसा सच्चा मसीहा मिल गया है, जिसने न सिर्फ इंसानियत को फिर से जिंदा किया है, बल्कि एक नई और सुनहरी सुबह की शुरुआत भी कर दी है।



