हरियाणा के रोहतक जिले की ऐतिहासिक नगरी सांपला पिछले 3-4 महीनों से जलभराव की भयंकर त्रासदी झेल रही थी। खेतों में 4-4 फुट पानी खड़ा था, जिसके कारण खरीफ की फसल पूरी तरह से बर्बाद हो चुकी थी। किसानों के माथे पर चिंता की गहरी लकीरें थीं क्योंकि खेतों में पानी होने के कारण अगली फसल (गेहूं) की बिजाई असंभव लग रही थी। केवल खेत ही नहीं, बल्कि शहर के वार्डों और बस्तियों में भी गंदा पानी घुस चुका था, जिससे बीमारियों का खतरा मंडरा रहा था।
जब सांपला नगर पालिका के प्रतिनिधियों और किसानों ने प्रशासन से मदद की गुहार लगाई, तो उन्हें निराशा ही हाथ लगी। प्रशासन का रटा-रटाया जवाब था कि “हमारे पास पर्याप्त मोटरें और पाइप नहीं हैं।” एक हताश किसान ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा, “सरकार ने तो गंदा पानी हमारी तरफ मोड़कर हमें डुबो दिया था, प्रशासन बस तमाशा देख रहा था।”
सतगुरु रामपाल जी महाराज के दरबार में अर्जी और तत्काल सुनवाई
जब हर तरफ से रास्ते बंद नज़र आए, तो नगर पालिका के सदस्यों और किसानों ने जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज के मुनिंदर धर्मार्थ ट्रस्ट, बरवाला स्थित आफिस में अर्जी लगाई। उन्होंने गुहार लगाई कि उनके शहर को डूबने से बचाया जाए।
संत रामपाल जी महाराज की दयालुता का आलम यह था कि अर्जी देने के कुछ ही दिनों के भीतर करोड़ों रुपये का राहत सामान सांपला की दहलीज़ पर पहुंच गया।
राहत सामग्री: ज़रूरत का हर छोटा-बड़ा सामान
यह मदद केवल कागज़ी या नाममात्र की नहीं थी, बल्कि एक मुकम्मल समाधान था। संत रामपाल जी महाराज ने सांपला को जलभराव से मुक्त करने के लिए भेजा:

- 6500 फुट लंबी 8 इंची पाइप: ताकि पानी को शहर से दूर निकाला जा सके।
- चार विशाल 15 हॉर्स पावर की मोटरें: जो लाखों लीटर पानी खींचने में सक्षम हैं।
- मुफ्त और सम्पूर्ण किट: मोटर, पाइप, स्टार्टर, केबल, बैंड, लोहे के नट-बोल्ट और यहाँ तक कि पाइप चिपकाने वाला फेविकोल (SR) भी साथ भेजा। किसानों ने खुशी-खुशी बताया, “हमें इस मशीनरी को चालू करने के लिए बाज़ार से 10 रुपये का एक नट भी नहीं खरीदना पड़ा।” यह सारा सामान सांपला को हमेशा के लिए ‘परमानेंट’ दे दिया गया है, ताकि भविष्य में कभी भी ऐसी आपदा आए तो किसान खुद अपना बचाव कर सकें।
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1.5 किलोमीटर लंबी भव्य ट्रैक्टर रैली से हुआ स्वागत
जब यह राहत सामग्री सांपला पहुंची, तो शहरवासियों और किसानों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। इस अभूतपूर्व मदद का स्वागत करने के लिए किसानों ने अपनी आन-बान-शान, यानी अपने ट्रैक्टरों को निकाला।
देखते ही देखते दर्जनों सजे हुए ट्रैक्टरों का एक विशाल काफिला तैयार हो गया। यह रैली 1.5 किलोमीटर लंबे फ्लाईओवर और शहर के मुख्य बाज़ारों से होकर गुज़री। ट्रैक्टरों पर संत रामपाल जी महाराज की तस्वीरें लगी थीं और स्पीकरों पर गुरुजी की महिमा के गीत गूंज रहे थे—”रोटी, कपड़ा, शिक्षा, चिकित्सा और मकान; हर गरीब को देगा कबीर भगवान।” रैली के आगे-आगे ढोल-नगाड़े बज रहे थे और शहर के लोग छतों पर खड़े होकर इस अद्भुत दृश्य को अपने मोबाइलों में कैद कर रहे थे।
कृतज्ञता और सम्मान: “वो हमारे लिए भगवान हैं”
सांपला नगर पालिका के चेयरमैन प्रतिनिधि विजेंद्र नंबरदार ने भावुक होकर कहा, “मैंने आज तक ऐसा कोई संत नहीं देखा जो सिर्फ देता हो। संत रामपाल जी महाराज ने हमारे शहर को जो अनमोल सौगात दी है, उसकी कोई कीमत नहीं चुकाई जा सकती।”
एक अन्य किसान ने कहा,
“अगर यह मोटरें नहीं आतीं, तो हमारी अगली फसल भी 100% मारी जाती। अब हमारी फसल बच जाएगी। गुरुजी ने हमारे लिए भगवान का काम किया है।”
इस असीम कृपा के प्रति अपना सम्मान प्रकट करने के लिए, पूरी सांपला पंचायत और बुजुर्गों ने सेवादारों को ‘पगड़ी’ भेंट की। हरियाणवी संस्कृति में पगड़ी भेंट करने का अर्थ है अपना शीश और अपना पूरा सम्मान किसी के चरणों में रख देना।
खुशहाली का नया सवेरा
सांपला की यह घटना सिर्फ बाढ़ राहत की कहानी नहीं है; यह उस ट्रैक्टर रैली की गूंज है जिसने यह साबित कर दिया कि जब रक्षक सच्चा हो, तो जनता उसे पलकों पर बिठा लेती है। जहां सरकारें और बड़े-बड़े उद्योगपति हाथ खड़े कर देते हैं, वहां संत रामपाल जी महाराज की ‘अन्नपूर्णा मुहिम’ उजड़ते हुए घरों और खेतों को फिर से बसा देती है।
सांपला में आज ट्रैक्टरों की गड़गड़ाहट और मोटरों की आवाज़ यह संदेश दे रही है कि जब तक संत रामपाल जी महाराज जैसे तारणहार धरती पर हैं, भारत का किसान कभी बेसहारा नहीं हो सकता।



