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National Science Day 2022: राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर जाने सबसे बड़ा विज्ञान क्या है?

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Last Updated on 28 February 2022, 9: 53 PM IST: राष्ट्रीय विज्ञान दिवस (National Science Day in Hindi) 2022 प्रतिवर्ष 28 फरवरी के दिन को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस (National Science Day) के रूप में मनाया जाता है। वैज्ञानिक सर सीवी रमन (Sir CV Raman) ने 28 फरवरी 1928 को “रमन प्रभाव (Raman Effect)” की खोज की थी जिसे याद रखने और बच्चों में विज्ञान के प्रति रुचि बढ़ाने के उद्देश्य से हर साल राष्ट्रीय विज्ञान दिवस मनाया जाता है।

विज्ञान और नई नई तकनीकों की खोज से मनुष्य ने अपने जीवन को आसान बना लिया है। वहीं विज्ञान की मदद से असंभव लगने वाली चीजें भी संभव हो गई हैं जैसे कि आज मनुष्य मंगल ग्रह, चाँद, अंतरिक्ष तक पहुंच चुका है, रोबोट, कंप्यूटर, मोबाइल आदि के आविष्कार से बहुत से जटिल काम सुगम हो गए हैं। यही वजह है कि आज विज्ञान हमारे जीवन में बहुत महत्व रखता है। वहीं भारत ने भी विज्ञान के क्षेत्र में अहम योगदान दिया है। भारत में जन्में कई महान वैज्ञानिकों ने अपने अपने आविष्कारों से विज्ञान के क्षेत्र में भारत को मान्यता दिलाने के साथ-साथ दुनिया भर में एक अलग स्थान दिलाया है।

Table of Contents

राष्ट्रीय विज्ञान दिवस (National Science Day) 2022: राष्ट्रीय विज्ञान दिवस का इतिहास

सन् 1986 में, नेशनल काउंसिल फॉर साइंस एंड टेक्नोलॉजी कम्युनिकेशन (NCSTC) ने भारत सरकार के सामने 28 फरवरी को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस (National Science Day in Hindi) के रूप में मनाने के लिए प्रस्ताव रखा, जिसे मानते हुए भारत सरकार ने 28 फरवरी को प्रतिवर्ष राष्ट्रीय विज्ञान दिवस (National Science Day) के रूप में मनाने की घोषणा की। पहला विज्ञान दिवस (Science Day) 28 फरवरी 1987 को मनाया गया था, इसी अवसर पर NCSTC ने विज्ञान और संचार के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रयासों को मान्यता देने के लिए राष्ट्रीय विज्ञान लोकप्रियकरण पुरस्कार की घोषणा की।

राष्ट्रीय विज्ञान दिवस (National Science Day) 2022 : साइंस डे से जुड़ी कुछ खास बातें

  • भारत में सन् 1987 से प्रतिवर्ष 28 फरवरी को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस (National Science Day in Hindi) के रूप में मनाया जा रहा है।
  • आज ही के दिन सन् 1928 में सर सी. वी. रमन के द्वारा “रमन प्रभाव” की खोज की गई थी।
  • प्रोफेसर सी. वी. रमन (चंद्रशेखर वेंकट रमन) द्वारा की गई यह खोज 28 फरवरी 1930 को प्रकाश में आई थी। 
  • सी. वी. रमन के इस प्रयास को याद रखने के लिए NCSTC के प्रस्ताव पर भारत सरकार ने 28 फरवरी के दिन को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस घोषित किया। 
  • रमन प्रभाव के लिए सन् 1930 में वेंकटरमन को नोबेल पुरस्कार दिया गया था। 
  • वेंकटरमन नोबेल पुरस्कार से सम्मानित होने वाले एशिया के पहले वैज्ञानिक थे।
  • राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर भारत सरकार द्वारा विज्ञान के क्षेत्र में अहम योगदान देने वाले वैज्ञानिकों को सम्मानित किया जाता है।
  • विज्ञान से संबंधित शिक्षण सामग्री में योगदान और विज्ञान शिक्षा में प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने के लिए विक्रम साराभाई सामुदायिक विज्ञान केंद्र को 2009 में सर्वोच्च पुरस्कार दिया गया था।
  • राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के मौके पर राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा स्कूलों, कॉलेजों, वैज्ञानिक संस्थानों, प्रयोगशालाओं, अकादमियों तथा प्रशिक्षण संस्थानों में वैज्ञानिक गतिविधियों से संबंधित विभिन्न प्रोग्रामों का आयोजन करवाया जाता है।
  • इस वर्ष 36वां राष्ट्रीय विज्ञान दिवस मनाया जाएगा।
  • राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर जानिए क्यों हो रहा है विज्ञान से नाश?

राष्ट्रीय विज्ञान दिवस (National Science Day Hindi) 2022 : विज्ञान दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य

  • राष्ट्रीय विज्ञान दिवस मनाने का उद्देश्य, विज्ञान के क्षेत्र में हो रहे प्रयासों और उपलब्धियों के प्रति लोगों को सजग बनाना है।
  • राष्ट्रीय विज्ञान दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को विज्ञान के प्रति आकर्षित करना और विज्ञान के प्रति जागरूकता पैदा करना है।
  • विज्ञान से दिन प्रतिदिन हो रहे लाभों से लोगों को अवगत कराना है।
  • राष्ट्रीय विज्ञान दिवस (NSD), बच्चों को वैज्ञानिक बनकर मानव कल्याण के लिए नई खोज करने के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से भी मनाया जाता है।

National Science Day in Hindi: राष्ट्रीय विज्ञान दिवस 2022 की थीम

इस वर्ष राष्ट्रीय विज्ञान दिवस की थीम ‘Integrated Approach in S&T for Sustainable Future (दीर्घकालिक भविष्य के लिए विज्ञान व प्रौद्योगिकी में एकीकृत दृष्टिकोण)’ रखी गई है।

राष्ट्रीय विज्ञान दिवस (National Science Day) 2022 : रमन प्रभाव (Raman Effect) क्या है ?

सरल शब्दों में कहें तो “रमन प्रभाव” या “रमन प्रकीर्णन”, प्रकाश के बिखराव या फैलाव की एक प्रक्रिया है जो माध्यम के कणों के कारण होता है। यह माध्यम ठोस, द्रव या गैसीय हो सकता है। “रमन प्रभाव” के अनुसार जब कोई प्रकाश किसी पारदर्शी माध्यम से गुजरता है तो माध्यम के अणु प्रकाश को फैला देते हैं जिससे प्रकाश की तरंगदैर्ध्य या वेवलेंथ में बदलाव आ जाता है। यह रासायनिक यौगिकों की आंतरिक संरचना समझने के लिए भी महत्वपूर्ण है।

राष्ट्रीय विज्ञान दिवस (National Science Day) 2022 : सर सीवी रमन का संक्षिप्त परिचय

प्रोफेसर चंद्रशेखर वेंकटरमन जी का जन्म तत्कालीन मद्रास प्रसिडेंसी (तमिलनाडु) में एक तमिल ब्राह्मण के घर हुआ। उन्होंने सन् 1907 से 1933 तक इंडियन एसोसिएशन फॉर द कल्टिवेशन ऑफ साइंस और कलकत्ता विश्वविद्यालय में भौतिकी के अनेकों विषयों पर शोध किया था। जिनमें से एक शोध “रमन प्रभाव” है। जोकि विज्ञान के क्षेत्र में अविस्मरणीय खोज है और भारत के इतिहास में विज्ञान के क्षेत्र में सबसे बड़ी खोज मानी जाती है।

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डॉ. सी वी रमन द्वारा जीते गए पुरुस्कार : रॉयल सोसाइटी के फेलो (1924), नाइट बैचलर (1929), भौतिकी में नोबेल पुरस्कार (1930), भारत रत्न (1954), लेनिन शांति पुरस्कार (1957)।

राष्ट्रीय विज्ञान दिवस (National Science Day) 2022 पर जानिए सबसे बड़ा विज्ञान क्या है?

बेशक विज्ञान की वजह से मनुष्य का जीवन सरल और सुगम हो गया है लेकिन विज्ञान हमें पूर्ण सुख और हरदम निरोगी काया प्रदान नहीं कर सकता आज भी बहुत से ऐसे रोग हैं जिनका इलाज विज्ञान के पास नहीं है। वहीं तत्वज्ञान, साइंस (विज्ञान) से भी बहुत आगे का ज्ञान है जिसके द्वारा जीवन को हमेशा के लिए सुखमय, निरोगी बना सकते हैं। तत्वज्ञान होने पर ही मनुष्य सतभक्ति करके जन्म-मृत्यु से मुक्ति पाकर सदा के लिए अमर हो सकता है।

तत्वज्ञान क्या है?

श्रीमद्भागवत गीता अध्याय 15 श्लोक 4 में गीता ज्ञान दाता ने कहा है कि तत्वदर्शी संत से तत्वज्ञान ग्रहण करके, उस तत्वज्ञान से अज्ञान को नाश करने के पश्चात परमेश्वर के उस परमपद की खोज करनी चाहिए जहां जाने के बाद साधक संसार में वापिस नहीं आता अर्थात जन्म-मृत्यु के चक्र से हमेशा के लिए मुक्त हो जाता है। तत्वज्ञान को जानने के लिए पवित्र पुस्तक “ज्ञान गंगा” पढ़ें

वर्तमान समय में संत रामपाल जी महाराज हैं तत्वदर्शी संत देखें प्रमाण

श्रीमद्भागवत गीता अध्याय 15 श्लोक 1 – 4 में कहा है कि यह संसार रूपी पीपल का वृक्ष मानो जिसकी ऊपर को जड़ तो पूर्णब्रह्म और नीचे को तीनों गुण रूपी शाखाएँ हैं। जो संत इस संसार रूपी वृक्ष के सभी अंगों को जानता है, वही तत्वदर्शी संत है।

इस समय सबसे बड़ा वैज्ञानिक कौन है?

बहुत से वैज्ञानिकों ने मानव जीवन को सुगम बनाने के लिए अनेकों खोजें कीं, किंतु संत रामपाल जी महाराज जी की विश्व कल्याण के लिए की गई आध्यात्मिक खोज के सामने सभी फीकी नज़र आती हैं क्योंकि वैज्ञानिकों की खोजों के बहुत से नकारात्मक पहलू देखने को मिलते हैं लेकिन संत रामपाल जी महाराज ने जो तत्वज्ञान विश्व पटल पर रखा है इससे रहस्ययुक्त बनी हुई दैवीय शक्तियों की जानकारी पूरे विश्व को लग रही है। लोगों के असाध्य रोग भी ठीक हो रहे हैं। साथ ही इस तत्वज्ञान से लोग सुख-शांति से जीवन जी रहे हैं और मोक्ष के अधिकारी भी हो रहे हैं। 

विज्ञान से हो रहा है नाश

वर्तमान समय में मनुष्य, तत्वज्ञान के अभाव में विज्ञान का बड़े स्तर पर नकारात्मक प्रयोग कर रहा है जो कि हमारे विनाश को दर्शाता हैं, जिसका जीता जागता प्रमाण रूस और यूक्रेन में छिड़ा युद्ध है। मनुष्य ने हाइड्रोजन बम, परमाणु बम, रासायनिक बम, मिसाइलें, रॉकेट आदि बना लिए जो कि समाज कल्याण के नहीं बल्कि विनाश को संकेत करते हैं। हमें शिक्षा, विज्ञान और तकनीक का प्रयोग मानव जीवन को सुगम बनाने और समाज के कल्याण के लिए करना चाहिए, ना कि विनाश के लिए। 

वैज्ञानिक उपकरण जैसे टीवी, मोबाइल, टैब, लैपटॉप इत्यादि का प्रयोग घर में बैठकर सत्संग देखने, सुनने के लिए करना चाहिए जिससे हम घर बैठे तत्वज्ञान प्राप्त करके सतभक्ति करके मोक्ष प्राप्त कर सकें तथा सभी बुराइयों से बच सकें। हमें मानवता को खत्म करने वाले उपकरणों की खोज करने और इनको बनाने में प्रतिबंध लगाना होगा तभी मानवता जिंदा रह पायेगी।

तत्वज्ञान में ही मानव का कल्याण और जीवन का मूल उद्देश्य समाहित है। संत रामपाल जी महाराज जी के सत्संग आप Satlok Ashram यूट्यूब चैनल पर सुनें व नाम दीक्षा लेकर अपना कल्याण करवायें

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