​जब नकलोई की उम्मीदें डूब रही थीं, तब सतगुरु रामपाल जी महाराज बने सहारा | अन्नपूर्णा मुहिम 

Published on

spot_img

हरियाणा के सोनीपत जिले की खरखौदा तहसील का गाँव नकलोई बाढ़ के पानी में अपनी पहचान खो रहा था। लगभग 100 एकड़ ज़मीन जलमग्न थी, जिसमें बाजरा और धान की फसल पूरी तरह नष्ट हो चुकी थी। किसानों ने अपने स्तर पर ट्रैक्टर और पंप लगाकर पानी निकालने की बहुत कोशिश की, लेकिन कुदरत के आगे उनकी एक न चली। प्रशासन सुध नहीं ले रहा था और किसान खून के आंसू रोने को मजबूर थे।

​सतगुरु के दरबार में अर्जी और तत्काल सुनवाई

​जब कोई रास्ता नहीं बचा, तो ग्राम पंचायत और मौजीज लोगों ने सतगुरु रामपाल जी महाराज के चरणों में अर्जी लगाई। उनकी पुकार को अनसुना नहीं किया गया। एक ग्रामीण ने गदगद होकर बताया, “कल टीम सर्वे करने आई थी और आज भगवान की मेहर हो गई।” सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने की बजाय, यहाँ सिर्फ एक प्रार्थना ने काम कर दिया।

राहत सामग्री: दया का महासागर

​सतगुरु रामपाल जी महाराज का आदेश पाते ही सेवादारों का काफिला नकलोई पहुंचा। मदद इतनी सटीक और विशाल थी कि सब देखते रह गए:

  • 4,400 फीट पाइप: ताकि पानी को खेतों से दूर निकाला जा सके।
  • 2 बड़ी मोटरें (10 एचपी): जो दिन-रात पानी फेंककर ज़मीन को सुखा सकें।
  • पूरा साजो-सामान: स्टार्टर, तार, बैंड, नट-बोल्ट और फेविकोल तक साथ भेजा गया ताकि किसान का एक रुपया भी खर्च न हो।

​ग्रामीणों ने बताया कि इस मदद से केवल नकलोई ही नहीं, बल्कि भशेरी और नरछान जैसे 4 आसपास के गाँवों का पानी भी निकल जाएगा।

नंगे पैर स्वागत: देखी अद्भुत श्रद्धा

​जब राहत सामग्री गाँव पहुंची, तो नज़ारा किसी तीर्थस्थल जैसा हो गया। गाँव के बड़े-बुजुर्गों से लेकर छोटे बच्चों तक ने अपने जूते-चप्पल उतार दिए। नंगे पैर होकर उन्होंने संत रामपाल जी महाराज के चित्र पर फूल-मालाएं अर्पित कीं। यह सम्मान किसी नेता के लिए नहीं, बल्कि उस रक्षक के लिए था जिसने उन्हें विनाश से बचाया।

Also Read: ​हरियाणा के झज्जर जिले के गाँव डाबोदा कलाँ में संत रामपाल जी महाराज ने दूर किया किसानों का 10 साल का दर्द

​पंचायत ने सेवादारों को शॉल और गुलदस्ता भेंट कर उनका सम्मान किया। एक ताऊ जी ने कहा, “ये काम तो प्रधानमंत्री भी नहीं कर सके, जो हमारे गुरुजी ने कर दिया। सरकार वोट मांगती है, लेकिन गुरुजी बिना मांगे जान बचाते हैं।”

​ग्रामीणों की भावनाएं: “हरि धरती पर आ गए”

​पूरा गाँव ‘सत साहेब’ और ‘संत रामपाल जी महाराज की जय’ के उद्घोष से गूंज उठा।

  • ​एक किसान ने कहा, “हमारी फसल तो गई थी, लेकिन अब अगली फसल (गेहूं) की उम्मीद जाग गई हैं। यह मदद परमानेंट है, अब हम भविष्य में भी सुरक्षित हैं।”
  • ​महिलाओं ने कहा, “गरीब का सहारा तो बस भगवान ही होता है, और हमारे लिए तो संत रामपाल जी ही भगवान बनकर आए हैं।”

​अनुशासन और सेवा का संकल्प

​राहत सामग्री के साथ-साथ सतगुरु जी का संदेश भी दिया गया कि सामान का सदुपयोग हो और जल्द से जल्द पानी निकालकर बिजाई की जाए। सेवादारों ने निस्वार्थ भाव से सब कुछ सौंप दिया। गाँव वालों ने संकल्प लिया कि वे इस मदद को व्यर्थ नहीं जाने देंगे।

​मानवता की सच्ची सेवा: एक मिसाल

​नकलोई की यह घटना सिर्फ बाढ़ राहत की कहानी नहीं है, यह उस भरोसे की कहानी है जो बताता है कि सच्चा संत वही है जो दूसरों के दुख को अपना समझ ले। 4,400 फीट पाइप केवल प्लास्टिक नहीं, बल्कि दया की वो धारा है जिसने सैकड़ों घरों में चूल्हा जलने की उम्मीद जगा दी।

​भक्ति और खुशहाली का नया सवेरा

​नकलोई से अब बाढ़ का पानी भी उतर रहा है, और साथ ही श्रद्धा का सागर भी उमड़ रहा है। जो गाँव कल तक मायूस था, आज वहां उत्सव जैसा माहौल है। किसान अपने खेतों की ओर लौट रहे हैं, इस विश्वास के साथ कि जब तक सतगुरु रामपाल जी महाराज का हाथ उनके सिर पर है, कोई भी मुसीबत उन्हें हरा नहीं सकती। गाँव की हर ज़ुबान पर आज एक ही बात है, “धन्य हैं वो सतगुरु जिन्होंने हमें उबार लिया।”

Latest articles

World Art Day 2026: Unveil the Creator of the beautiful World

World Art Day 2026: Ever wondered which is the World's biggest art? It's the...

लुदास की जीत: बाढ़ के कहर से खेतों की हरियाली तक का सफर

हिसार जिले का लुदास गांव आज एक ऐसी विजय गाथा लिख रहा है जिसे...

आदुपुर की ऐतिहासिक जीत: जब 20 साल बाद खेतों में लौटा अनाज

पलवल जिले का आदुपुर गांव आज एक ऐसी विजय का जश्न मना रहा है...

खैरमपुर की बाढ़, किसानों की बेबसी और एक उम्मीद की दस्तक

हरियाणा के हिसार जिले की मंडी आदमपुर तहसील में स्थित छोटा-सा गांव खैरमपुर पिछले...
spot_img

More like this

World Art Day 2026: Unveil the Creator of the beautiful World

World Art Day 2026: Ever wondered which is the World's biggest art? It's the...

लुदास की जीत: बाढ़ के कहर से खेतों की हरियाली तक का सफर

हिसार जिले का लुदास गांव आज एक ऐसी विजय गाथा लिख रहा है जिसे...

आदुपुर की ऐतिहासिक जीत: जब 20 साल बाद खेतों में लौटा अनाज

पलवल जिले का आदुपुर गांव आज एक ऐसी विजय का जश्न मना रहा है...