राजस्थान के डीग जिले की कामा तहसील में स्थित नंगला दादू गाँव पिछले 66 वर्षों से एक भयानक त्रासदी झेल रहा था। जहाँ सरकारी तंत्र और राजनेता इस गाँव को पूरी तरह भूल चुके थे, वहीं संत रामपाल जी महाराज एक रक्षक और मसीहा बनकर सामने आए।
उन्होंने अपनी असीम करुणा से इस गाँव को जलभराव के डरावने सपने से बाहर निकाला और छह दशकों से बंजर पड़े खेतों में फिर से खुशहाली की फसल लहरा दी। यह कहानी केवल पानी निकालने की नहीं, बल्कि एक उजड़े हुए गाँव को दोबारा बसाने की है।
गाँव की स्थिति: छह दशकों का दर्द और पलायन
सन 1958 से नंगला दादू गाँव में जलभराव की गंभीर समस्या शुरू हुई थी। पिछले 66 सालों से स्थिति इतनी बदतर थी कि गाँव के किसानों ने अपनी उपजाऊ जमीन पर फसल का एक दाना तक नहीं देखा था। खेतों में 7 फुट गहरा सड़ा हुआ पानी जमा था।
इस बेबसी के कारण, जिस गाँव में कभी 150 खुशहाल परिवार रहते थे, वहाँ केवल 20 से 25 घर ही बचे थे। बाकी सभी ग्रामीण अपनी पुश्तैनी जमीन छोड़कर कोसी, होड़ल और पलवल जैसे शहरों में मजदूरी करने के लिए पलायन कर चुके थे। नेताओं और मंत्रियों के सामने झोलियां फैलाते-फैलाते पीढ़ियां गुजर गईं, लेकिन किसी ने इस मरते हुए गाँव की सुध नहीं ली।
आखिरी उम्मीद: संत रामपाल जी महाराज के चरणों में अर्जी
जब सरकारी व्यवस्था ने नंगला दादू को पूरी तरह बेसहारा छोड़ दिया, तब गाँव की पंचायत ने एक आखिरी उम्मीद के साथ संत रामपाल जी महाराज के चरणों में अपनी अर्जी लगाई।
ग्रामीणों को इस मुहिम की जानकारी पड़ोसी गाँव ‘ऐचवाड़ा’ से मिली थी, जहाँ संत रामपाल जी महाराज ने पहले ही पाइपलाइन बिछाकर जलभराव की समस्या का समाधान किया था। इसी से प्रेरित होकर नंगला दादू के ग्रामीणों ने उनसे मदद की गुहार लगाई।
त्वरित समाधान और ऐतिहासिक सहायता
अर्जी मिलने के बाद संत रामपाल जी महाराज ने बिना समय गंवाए ऐतिहासिक तत्परता दिखाई। अर्जी देने के मात्र 3 दिनों के भीतर राहत का एक विशाल काफिला नंगला दादू की सीमा पर खड़ा था। गाँव को इस त्रासदी से बाहर निकालने के लिए उन्होंने अपने संसाधनों का खजाना खोल दिया।
संत रामपाल जी महाराज ने गाँव के लिए निम्नलिखित सामग्रियां तुरंत उपलब्ध करवाईं:
- 13,000 फुट लंबी 8-इंची मजबूत पाइपलाइन (लगभग 2 किलोमीटर लंबी डबल पाइपलाइन जिसे गुड़गांव कैनाल तक जोड़ा गया)।
- दो विशाल 20 हॉर्स पावर (HP) की मोटरें और कपलिंग सेट।
- बिजली का पूरा विकल्प: जब उन्हें पता चला कि गाँव में बिजली सिर्फ 3-4 घंटे ही आती है, तो उन्होंने तुरंत मशीनों को चलाने के लिए बड़े जनरेटर और उसमें लगने वाले हजारों लीटर डीजल के पूरे खर्च की जिम्मेदारी खुद ली।
- छोटे-बड़े उपकरण: उन्होंने स्टार्टर्स, सुंडिया और हर छोटा-बड़ा नट-बोल्ट खुद पहुँचाया ताकि गाँव की पंचायत को ₹1 का भी खर्च न करना पड़े।
चमत्कारी प्रभाव: खेतों में मुस्कुराई हरियाली
संत रामपाल जी महाराज द्वारा भेजी गई इन शक्तिशाली मशीनों ने दिन-रात काम करके उस दशकों पुराने पानी को गाँव की सीमाओं से बाहर खदेड़ दिया। लगभग डेढ़ से दो महीने तक लगातार पंप सेट चले।
इसके निम्नलिखित दूरगामी प्रभाव सामने आए:
- भूमि का पुनरुद्धार: गाँव की कुल 300 बीघा जमीन में से 200 बीघा जमीन से पानी पूरी तरह निकाल दिया गया और वहाँ गेहूं की बुवाई की गई (बाकी 100 बीघा जमीन सबसे नीची होने और लेट पता चलने के कारण इस सीजन में नहीं बोई जा सकी, जिसमें ग्रामीण अगली बार धान लगाएंगे)।
- बंपर पैदावार: 66 साल बाद पहली बार खेतों में ट्रैक्टर चले और फसल लहराई। हाल ही में हुई कटाई में मात्र 3 बीघा जमीन से 70 मन गेहूं की पैदावार हुई है, जो लगभग 23 मन प्रति बीघा का बेहतरीन औसत है।
- पलायन पर रोक और आर्थिक मजबूती: अब गाँव के युवाओं को अच्छी शिक्षा और किताबें मिल सकेंगी। सरपंच प्रतिनिधि शिवराम और अन्य युवाओं का कहना है कि जो लोग गाँव छोड़कर चले गए थे, वे अब वापस लौट रहे हैं क्योंकि संत रामपाल जी महाराज के आशीर्वाद से मिट्टी ने फिर से सोना उगलना शुरू कर दिया है।
कृतज्ञ ग्रामीणों के भावुक उद्गार
मदद मिलने के बाद गाँव के बुजुर्गों, महिलाओं और युवाओं की आँखें भर आईं।
गाँव के एक बुजुर्ग ने बेहद मार्मिक बात कही:
“जैसे द्वापर युग में श्री कृष्ण जी ने उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठाकर ब्रज को बचाया था, वैसे ही आज महाराज जी ने हमारे खेतों से पानी निकालकर हमारी जान बचा ली है। हमारे लिए तो वह साक्षात नारायण हैं।”
गाँव की महिलाओं (सुखमन, शशि, संजू) ने कहा कि जहाँ सरकार ने कुछ नहीं किया, वहाँ संत रामपाल जी महाराज ने मात्र तीन दिन में हमारी सुध ली और हमारे बच्चों का भविष्य सुरक्षित कर दिया।
ग्रामीणों ने यह भी माना कि जो काम तमाम दलों की सरकारें 66 सालों में नहीं कर पाईं, वह मसीहा के एक आदेश पर चंद दिनों में मुमकिन हो गया। जहाँ नेता सिर्फ वोट के लिए आते हैं, वहाँ एक संत ने जेल में रहकर भी हमारे चूल्हे जलने की चिंता की है।
अन्नपूर्णा मुहिम
नंगला दादू के हजारों परिवारों के लिए संत रामपाल जी महाराज आज साक्षात भाग्यविधाता के रूप में उभरे हैं। जहाँ व्यवस्था ने उन्हें उनके हाल पर छोड़ दिया था, वहाँ उन्होंने एक पिता की तरह हाथ थामकर गाँव की लाज बचा ली।
आज नंगला दादू का हर घर उनकी उस संजीवनी बूटी जैसी नि:स्वार्थ मदद के लिए नतमस्तक है, जिसने न केवल उनके खेतों को बचाया बल्कि उनकी उजड़ती हुई दुनिया को फिर से खुशहाल और आबाद कर दिया।



