Mulayam Singh Yadav Death News [Hindi] | नहीं रहे मुलायम सिंह यादव ‘नेता जी’ 82 वर्ष की आयु में निधन

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समाजवादी पार्टी के संस्थापक और पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव का निधन (Mulayam Singh Yadav Death News) हो गया है। समाजवादी पार्टी की नींव रखने वाले दिग्गज नेता मुलायम सिंह यादव ने पिछले 10 दिनों से मेदांता हॉस्पिटल में जीवन और मृत्यु के बीच संघर्ष करते हुए सोमवार सुबह अंतिम सांस ली। मुलायम सिंह यादव एक सफल राजनेता के साथ-साथ एक कर्तव्यनिष्ठ तथा धार्मिक व्यक्ति थे। अपने कुशल नेतृत्व के आधार पर उन्होंने समाजवादी पार्टी की स्थापना की तथा तीन बार मुख्यमंत्री रहे मुलायम सिंह आज हमारे बीच नहीं रहे।

Mulayam Singh Yadav Death News [Hindi] | मुख्य बिंदु

  • मेदांता अस्पताल में हुआ निधन
  • नेताजी का रहा सफल राजनीतिक जीवन
  • किताबों में नेताजी 
  • मन नेकी कर ले दो दिन का मेहमान

गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में निधन

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 नेताजी को यूरिन संक्रमण, ब्लड प्रेशर की दिक्कत और सांस लेने में तकलीफ की वजह से 2 अक्टूबर को मेदांता हॉस्पिटल में भर्ती किया गया था। तभी से उनकी हालत नाजुक बनी हुई थी। उनके कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया था। 9 दिनों तक मेदांता हॉस्पिटल के आईसीयू और सीसीयू में जिंदगी और मौत से जूझने के बाद सोमवार सुबह 8:16 बजे अंतिम सांस ली।

82 साल की उम्र में सोमवार सुबह उसका निधन हो गया।

मुलायम सिंह यादव का जन्म 22 नवंबर 1939 को इटावा जिले के सैफई गांव (उत्तर प्रदेश) में एक किसान परिवार में हुआ था। उनकी माता का नाम मूर्ति देवी तथा पिता सुघर सिंह यादव था। नेताजी पांच भाई बहनों में दूसरा नंबर पर आते हैं। इनके पिताजी सुघर सिंह यादव इनको पहलवान बनाना चाहते थे। किंतु पहलवानी में अपने राजनीतिक गुरु चौधरी नत्थू सिंह को मैनपुरी में एक कुश्ती प्रतियोगिता कार्यक्रम में प्रभावित करने के पश्चात उन्होंने नत्थू सिंह के परंपरागत विधानसभा क्षेत्र जसवंतनगर से अपना राजनीतिक सफर शुरू किया।

मुलायम सिंह यादव का राजनीतिक जीवन (Political Life of Mulayam Singh Yadav)

मुलायम सिंह यादव ने अपने जीवन में सफल रूप से राजनीतिक सफलता पाई थी जिसमें वे तीन बार प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे हैं, 8 बार विधायक रहे हैं तथा तीन बार रक्षामंत्री के पद पर रह चुके। राजनीति में आने के पूर्व मुलायम सिंह यादव जी आगरा विश्वविद्यालय से राजनीतिक विज्ञान में स्नातकोत्तर (MA.) और बी.टी. करने के पश्चात इंटर कॉलेज में प्रवक्ता नियुक्त हुए। और राजनीति में सक्रिय होने पर उन्होंने अपने पद से त्यागपत्र दे दिया। 

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एक साधारण किसान परिवार में जन्में मुलायम सिंह यादव ने अपने राजनीतिक कैरियर की शुरुआत उत्तर प्रदेश में विधायक पद से किया। बहुत ही कम समय में उन्होंने अपना प्रभाव पूरे उत्तर प्रदेश में बना लिया था। मुलायम सिंह जी ने उत्तर प्रदेश के अन्य पिछड़ा वर्ग समाज का सामाजिक स्तर को ऊपर करने में महत्वपूर्ण योगदान किया। 

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मुलायम सिंह सन् 1967 मेंं पहली बार विधानसभा के सदस्य चुने गए और मंत्री बने। 1992 में उन्होंने समाजवादी पार्टी बनाई। वे तीन बार क्रमशः 5 दिसंबर  1989 से 24 जनवरी 1991 तक, 5 दिसंबर 1993 से 3 जून 1996 तक, और 29 अगस्त 2003 से 11 मई 2007 तक उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे। इसके अतिरिक्त वे केंद्र सरकार में रक्षा मंत्री भी रह चुके हैं। उत्तर प्रदेश में यादव समाज के सबसे बड़े नेता के रूप में मुलायम सिंह जी की  पहचान हैं।

CM Yogi ने की उत्तरप्रदेश में तीन दिवसीय राजकीय शोक की घोषणा 

मुलायम सिंह यादव के निधन पर उत्तर प्रदेश राज्य में तीन दिवसीय राजकीय शोक घोषित किया गया है। उत्तरप्रदेश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अनुसार उनका अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया जायेगा। प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने मुलायम सिंह यादव की मृत्यु पर गहरा शोक व्यक्त किया एवं उन्हें लोकतंत्र का सैनिक बताया। उनके अंतिम संस्कार में कई बड़े नेता सम्मिलित होंगे तथा आज शरीर पंचतत्व में विलीन हो जायेगा। समाजवादी पार्टी ने ट्विटर के माध्यम से सूचना दी है कि मुलायम सिंह यादव का पार्थिव शरीर सैफई के मेला ग्राउंड में रखा जाएगा। दोपहर 3 बजे उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। जिले के व्यापारिक संगठनों ने अपने नेताजी के सम्मान में स्वेच्छा से आज बाजार बंद रखा है।

Mulayam Singh Yadav Death News [Hindi] | सफल राजनेता के रूप में मुलायम सिंह यादव 

उत्तर प्रदेश में सामाजिक सद्भाव को बनाए रखने में मुलायम सिंह का साहसिक योगदान किया । मुलायम सिंह की पहचान एक धर्मनिरपेक्ष नेता की है। उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी को सबसे बड़ी पार्टी माना जाता है। उत्तर प्रदेश की सियासी दुनिया में मुलायम सिंह यादव जी को प्यार से नेता जी कहा जाता है।

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पूर्व मुख्यमंत्री व समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह जी को 28 मई 2012 को लंदन में “अंतरराष्ट्रीय जूरी पुरस्कार” से सम्मानित किया गया। इंटरनेशनल काउंसिल आप जूरिस्ट के जारी विज्ञप्ति में हाई कोर्ट ऑफ़ लंदन के सेवानिवृत्त न्यायधीश सर गाविन लाइटमेन ने बताया कि श्री यादव जी का इस पुरस्कार के लिए चयन बार और पीठ प्रगति में बेझिझक योगदान देना है। उन्होंने कहा कि यादव जी का विधि एवं न्याय क्षेत्र से जुड़े हुए लोगों में भाईचारा पैदा करने में सहयोग दुनिया भर में लाजवाब है।

किताबों में मुलायम सिंह यादव

Mulayam Singh Yadav Death News [Hindi] | मुलायम सिंह पर कई पुस्तकें लिखी जा चुकी है। इसमें पहला नाम “मुलायम सिंह यादव- चिंतन और विचार” का है। जिसे अशोक कुमार शर्मा ने संपादित किया था। इसके अतिरिक्त राम सिंह तथा अंशुमान यादव द्वारा लिखी गई “मुलायम सिंह- ए पोलिटिकल बायोग्राफी” अब तक की उनकी प्रमाणित जीवनी है। लखनऊ के पत्रकार डॉ नूतन ठाकुर ने भी मुलायम जी के सामाजिक सांस्कृतिक और राजनैतिक महत्व को रेखांकित करते हुए एक पुस्तक लिखने का कार्य किया है।

विवादों के घेरे में मुलायम सिंह

अपने भाषण के दौरान मुलायम सिंह यादव ने बलात्कार की घटना पर कहा कि लड़के गलतियां करते हैं। लोकसभा चुनाव 2009 के दौरान मुलायम सिंह ने अंग्रेजी और कंप्यूटर की शिक्षा समाप्त करने को कहा। इससे बेरोजगारी बढ़ती है। दिनांक 18 अगस्त 1915 में एक सभा में बलात्कार पर विवादित बयान किया। मुलायम सिंह यादव ने लखनऊ में रिक्शा वितरण समारोह में बलात्कार पर विचार व्यक्त करने पर महोबा जिले के स्थानीय कोर्ट ने अदालत में उपस्थित होने की समन जारी किया था।

निलंबित आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर को धमकाने के आरोप में सीजेएम सोमप्रभा मिश्रा ने समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव के विरुद्ध आईपीसी की धारा156(3) के अंतर्गत एफ आई आर दर्ज करने का आदेश दिया। इसके अतिरिक्त 30 अक्टूबर 1990 को हुए गोलीकांड को मुलायम सिंह यादव कई प्रकार से सही ठहराते रहे थे जिससे आलोचना के पात्र बने।

मन नेकी कर ले दो दिन का मेहमान

इस संसार में कितना भी राजपाट मिल जाए, कितना भी धन, यश और कीर्ति मिले यदि पूर्ण संत से नामदीक्षा लेकर सतभक्ति नहीं की गई तो 84 लाख योनियों में धक्के खाना तय ही है। यहां तक कि हमारे धर्मशास्त्र भी यही गवाही देते हैं। गीता अध्याय 15 श्लोक 4 के अनुसार तत्वदर्शी संत के प्राप्ति के पश्चात परमेश्वर के उस परम पद की खोज करनी चाहिए जहां जाने के पश्चात साधक फिर लौटकर संसार में नहीं आते।अर्थात उनका जन्म मरण कभी नहीं होता।

गीता ज्ञानदाता गीता अध्याय 18 श्लोक 62 में अपने से अन्य परमेश्वर की शरण में जाने को कह रहा है। तथा कहा है कि उसी परमेश्वर की कृपा से तू परम शांति एवं शाश्वत स्थान को प्राप्त होगा। विचार करें कि जब तक जन्म मरण है तब तक जीव को शांति नहीं हो सकती। कर्मों का कष्ट सदा बना रहेगा। इस जीवन में पापकर्म स्वतः ही बनते रहते हैं जबकि पुण्य कर्म बनाने मुश्किल होते हैं। जब जन्म मरण सदा के लिए समाप्त हो जाएगा। तब ही परम शांति को प्राप्त होती है। अधिक जानकारी के लिए देखें स्तलोक आश्रम यूट्यूब चैनल।

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