Muharram 2020 Hindi: माह-ए-मोहर्रम, 2020: अल्लाहु अकबर, आशादू अल्लाह इलाहा इल्लल्लाह ‘माह-ए-मोहर्रम ‘ इस्लामिक कैलेंडर के पहले महीने का नाम है। इसी महीने से इस्लाम का नया साल शुरू होता है। इस महीने की 10 तारीख को रोज-ए-आशुरा (Day Of Ashura) कहा जाता है, इसी दिन को अंग्रेजी कैलेंडर में मोहर्रम कहा गया है।

मुहर्रम/ मोहर्रम इस्लामिक कैलेंडर का पहला महीना है, जिसे बहुत ही पवित्र महीना माना जाता है। आज से करीब 1337 साल पहले मुहर्रम की 10 तारीख को पैगंबर मोहम्मद के नाती हज़रत हुसैन का कत्ल किया गया था, इस्लाम में मोहर्रम के इस महीने को शिया और सुन्नी मुसलमानों द्वारा मातम के रूप में मनाया जाता है।

Muharram 2020 Hindi: मुहर्रम 2020 में कब है?

इस साल मोहर्रम 30 अगस्त, दिन रविवार को है। ईद का चांद नज़र आने के साथ ही मोहर्रम 21 अगस्त से शुरू हुआ, मुहर्रम के नौवें और दसवें दिन को मुसलमान रोजे़ रखते हैं तथा मस्जिद और घरों में अल्लाह की इबादत करते हैं। मुहर्रम इस्लामिक वर्ष का पहला महीना होता है। इस महीने का दसवाँ दिन मातम के रूप में मनाया जाता है। इस्लाम धर्म के प्रवर्तक पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब के नवासे हज़रत इमाम हुसैन की शहादत के ग़म में मुहर्रम का दिन याद किया जाता है।

मुहर्रम को शिया मुसलमानों के समुदाय द्वारा हज़रत इमाम हुसैन की शहादत को याद करने और शोक मनाने के लिए याद किया जाता है। मुहर्रम यह एक त्यौहार नहीं है, बल्कि मुसलमानों के हिजरी वर्ष का य़ह पहला महीना है। जिसे शहादत का महीना कहा जाता है।

Muharram History in Hindi-मुहर्रम से जुड़ा इतिहास

इस्लामिक मान्यताओं के अनुसार मोहर्रम की 10 तारीख को पैगंबर हज़रत मोहम्मद के नाती हज़रत इमाम हुसैन एक धर्मयुद्ध में शहीद हो गए थे। कर्बला जोकि आज इराक में है, जहां वह अपने वर्चस्व को पूरे अरब में फैलाना चाहते थे। इमाम हुसैन अपने परिवार के साथ मदीना से इराक के शहर कुफा जा रहे थे। लेकिन रास्ते में यजीद की फौज ने कर्बला के रेगिस्तान पर इमाम हुसैन के काफिले को रोक दिया। उस दिन मुहर्रम का दिन था, जब हुसैन का काफिला कर्बला के तपते रेगिस्तान पर रुक गया।

Muharram History in Hindi: पूरा काफिला प्यास से व्याकुल था। तब उन्होंने देखा कि फराच नदी ही पानी का एकमात्र ज़रिया था। जिस पर यजीद की फौज ने हुसैन के काफिले पर पानी के लिए रोक लगा दी थी। इसके बावजूद भी इमाम हुसैन झुके नहीं और आखिर में दोनों सेनाओं ने युद्ध का एलान कर दिया।

Muharram History in Hindi
Muharram History in Hindi

मुहर्रम के दसवें दिन तक हुसैन अपने भाइयों और अपने साथियों के शवों को दफनाते रहे और अंत में अकेले युद्ध किया फिर भी दुश्मन उन्हें मार नहीं सके। किन्तु एक बार शाम के समय नमाज़ पढ़ते वक्त उन्हें मौका देखकर मार दिया गया और हुसैन की इसी शहादत की याद में मुहर्रम मातम के रूप में मनाया जाने लगा। किसी भी त्यौहार को मनाना मनमुखी साधना है जिससे न सुख हो सकता है और न ही मोक्ष प्राप्त हो सकता है क्योंकि यह कुरान में वर्णित विधि नहीं है।

Muharram in Hindi: मोहर्रम के दिनों में आशुरा क्या है?

  • मोहर्रम के आरम्भिक 10 दिनों को इस्लाम में आशुरा कहा जाता है।
  • मोहर्रम के दसवें दिन को इस्लाम में सबसे पवित्र मानकर रोज़ा रखते हैं।
  • पैगंबर मुहम्मद के नाती इमाम हुसैन, हुसैन इब्न और उनके साथियों की शहादत को याद किया जाता है।
  • यह भी कहा जाता है कि इसी महीने मुहम्मद जी मक्के से मदीने गए थे।
  • हालांकि स्पष्ट रूप से इसका कोई महत्व नहीं बताया है क्योंकि अल्लाह की इबादत के लिए कोई खास दिन, माह या वर्ष नहीं होता।
  • प्राचीन घटनाओं को याद करके त्यौहार मनाना भी मनमुखी साधना ही है।

Muharram 2020 Hindi-हिजरी वर्ष की शुरुआत

Muharram 2020 Hindi: कहा जाता है कि हिजरी वर्ष की शुरुआत इसी माह के साथ होती है इस महीने को इस्लाम के पवित्र चार महीनों में शामिल किया गया है जिसमें 2 महीने तो मोहर्रम से पहले और दो मोहर्रम के बाद आते हैं।

muharam photo hindi

कबीर, दिन को रोज़ा रहत हैं और रात हनत हैं गाय |
यह खून वह बन्दगी, कहूं क्यों खुशी खुदाय ||

कबीर साहेब कहते हैं-

अर्थात दिन भर रोज़ा रहने और शाम को मांस भक्षण करने से अल्लाह कभी प्रसन्न नहीं होता। रोज़ा रखने से अल्लाह की प्राप्ति नहीं हो सकती। अल्लाह की प्राप्ति के लिए तो बाख़बर द्वारा बताई साधना ही ज़रिया हो सकती है।

Muharram 2020 Hindi: क्या मुहर्रम अल्लाह की इबादत करने का महीना है?

Muharram 2020 Hindi: मुसलमानों का यह मानना है कि मोहर्रम के इस माह में अल्लाह की खूब इबादत करनी चाहिए। पैगंबरों ने इस माह में खूब रोजे़ रखे और अपने साथियों का भी ध्यान इस तरफ आकर्षित किया। इस बारे में कई हदीसें मौजूद हैं। जानकारी के लिए बता दें कि अल्लाह की बन्दगी तो आठों पहर और सोते जागते करनी चाहिए। अल्लाह की बन्दगी का कोई महीना विशेष या दिन विशेष नहीं होता है। अल्लाह की बन्दगी पूर्ण तत्वदर्शी सन्त जिसे कुरान के सूरत अल फुरकान 25:59 में बाख़बर कहा है, के द्वारा बताई साधना विधि से की जा सकती है।

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Muharram पर जानें किसे हुआ अल्लाह का दीदार

आज हम आपको मुहर्रम (Muharram) के अवसर पर बताएँगे की किन किन महापुरुषो को हुआ अल्लाह का दीदार

हज़रत मुहम्मद

hazrat muhammad

हज़रत मुहम्मद को भी कबीर परमेश्वर जिंदा महात्मा के रूप में मिले थे एवं ज्ञान समझाया था लेकिन हज़रत मुहम्मद जी ने जिब्राइल फ़रिश्ते के डर से ज्ञान नहीं समझा और वे सतलोक जाकर भी वहां से वापस आ गए।

हम मुहम्मद को सतलोक ले गया |इच्छा रूप वहाँ नहीं रहयो ||
उलट मुहम्मद महल पठाया | गुज बीरज एक कलमा लाया ||
रोजा , बंग ,नमाज दई रे | बिस्मिल की नहीं बात कही रे ||

  • बलख बुखारे शहर के मुस्लिम बादशाह अब्राहिम सुल्तान अधम और दिल्ली के बादशाह सिकंदर लोधी को परमेश्वर मिले उनको तत्वज्ञान से परिचित करवाया, उसके बाद सुल्तान अधम ने राज त्याग दिया और अल्लाह की इबादत करके मोक्ष की प्राप्ति की।
  • मुस्लिम धर्म के एक सुप्रसिद्ध साधक शेखफरीद जब बारह वर्ष से कुएं में उल्टा लटक कर तपस्या कर रहे थे तब उनको अल्लाह कबीर जी मिले । उन्हें आध्यात्मिक ज्ञान से परिचित करवाया और उनको मोक्ष का रास्ता दिखाया।
  • राबिया (Rabia Basri) नाम की एक साध्वी थी उसे भी परमेश्वर कबीर ने दर्शन दिए थे। राबिया उस समय 12 वर्ष की थी जब उसे अल्लाह कबीर जी मिले थे। उसने 4 वर्ष तक कबीर जी द्वारा बताई साधना की थी। फिर अपने मुसलमान धर्म वाली मनमानी/ गलत साधना करने लगी थी जो व्यर्थ थी। फिर इसका जन्म बांसुरी नाम की लड़की के रूप में हुआ। इसने मक्के में अपना शरीर भी काटकर अर्पित कर दिया था। अगले जन्म में इसे वैश्या का जीवन मिला।
  • कबीर साहेब द्वारा बताई गई भक्ति करने के कारण इसे जन्म मनुष्य के जन्म मिलते रहे थे। अब इसका कोई मानव जीवन शेष नहीं था। पशु की योनि में जाना था। उसी समय परमेश्वर कबीर जी धर्मराज के पास गए और इसे वहां से छुड़ाकर लाए और मानव शरीर में प्रवेश कर दिया। कबीर जी की कृपा से इसे फिर से मानव जीवन मिला और इसका नाम कमाली रखा। कबीर जी ने कमाली को बेटी की तरह पाला और अपने घर पर रखा।

तैमूरलंग

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तैमूरलंग और उसकी मां बेहद गरीब थे। कबीर परमेश्वर ने तैमूर लंग को सात पीढ़ी का राज वरदान में दिया था। कबीर साहेब जी ज़िंदा बाबा के रूप में आकर तैमूर लंग और उसकी मां से मिले। रोटी खाकर कबीर जी ने बकरी बाँधने की सांकल (बेल) लेकर उसको तैमूर लंग की कमर में सात बार मारा। फिर लात मारी तथा मुक्के मारे। माई ने पूछा कि बाबा जी! बच्चे ने क्या गलती कर दी। माफ करो, बच्चा है।

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परमात्मा बोले कि माई इस एक रोटी के बदले तेरे पुत्र को सात पीढ़ी का राज्य का वरदान दिया है जो सात बार बेल (सांकल) मारी है। जो लात तथा मुक्के मारे हैं, बाद में इसका राज्य टुकड़ों में बँट जाएगा। ऐसा ही हुआ। बाबर तैमूरलंग का तीसरा पोता था। बाबर का पुत्र हमायूं था। हमायूं का अकबर, अकबर का जहांगीर, जहांगीर का शाहजहां, शाहजहां का पुत्र औरंगज़ेब हुआ। सात पीढियों ने भारत पर राज्य किया। फिर औरंगजेब के बाद राज्य टुकड़ों में बँट गया।

बहन शिमली और भाई मंसूर

कबीर अल्लाह समसतरबेज के रूप में शिमली और मंसूर से आकर मिले थे और उन्हें यथार्थ आध्यात्मिक ज्ञान समझाया था। मंसूर ने अनल हक का नारा लगाया था।

कौन है अल्लाह एवं कैसा है उसका स्वरूप?

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  • पवित्र कुरान शरीफ सूरत फुर्कानी 25 आयत नंबर 52 से 59 में स्पष्ट लिखा है कि इस संपूर्ण कायनात की रचना करने वाला वह अल्लाह ताला कबीर है जिसने 6 दिन में सारी कायनात की रचना की और सातवें दिन तख्त पर जा विराजा, वही अल्लाह इबादत के योग्य है और सातवें दिन तख्त पर जा विराजा, वही परमेश्वर पूजा के योग्य है।
  • हज़रत मोहम्मद जी को भी वही अल्लाह कबीर परमेश्वर जी सतलोक से आकर मिले थे और उनको सतलोक भी दिखाया था।
  • पवित्र कुरान शरीफ में लिखा है कि जिस परमेश्वर ने 6 दिन में सारी कायनात की रचना की वह अल्लाह कबीर बड़ा रहमान है । उस अल्लाह की सच्ची इबादत जानने के लिए पवित्र कुरान शरीफ का ज्ञानदाता किसी बाखबर संत (इल्म़ वाले) की शरण में जाने का संकेत कर रहा है।

Muharram 2020 पर जानिए कौन है कुरान का बाखबर?

पवित्र कुरान शरीफ के अनुसार वह बाखबर तत्वदर्शी संत जगतगुरु रामपाल जी महाराज हैं, जिन्होंने अल्लाह की सच्ची इबादत को खोजा है। पवित्र कुरान शरीफ का ज्ञान दाता भी कहता है कि अल्लाह के वास्तविक ज्ञान को समझने के लिए किसी इल्म़ वाले तत्वदर्शी बाखबर संत की तलाश कर वह बाखबर संत तुझे उस अल्लाह की इबादत करने के गूढ़ रहस्य से रूबरू करवाएगा तथा अल्लाह की प्राप्ति का सच्चा मार्ग बताएगा।

आयत 25:59

“अल्ल्जी खलकस्समावाति वल्अर्ज व मा बैनहुमा फी सित्तति अय्यामिन् सुम्मस्तवा अलल्अर्शि अर्रह्मानु फस्अल् बिही खबीरन्(कबीरन्)।।59।।”

हज़रत मुहम्मद को कुरान शरीफ बोलने वाला प्रभु कह रहा है कि वह कबीर प्रभु वही है जिसने जमीन तथा आसमान के बीच में जो भी विद्यमान है सर्व सृष्टी की रचना छः दिन में की तथा सातवें दिन अपने सत्यलोक के सिंहासन पर विराजमान हो गया।
उस सर्वोच्च अल्लाह कबीर को प्राप्त करने की विधि तथा वास्तविक ज्ञान तो किसी तत्वदर्शी संत (बाखबर) से पूछो।

Muharram 2020 Hindi: पवित्र फ़ज़ल-ए-अमल में अल्लाह कबीर

● फज़ाइल-ए-ज़िक्र, आयत 1 में लिखित है कि अल्लाह कबीर है। वह पूर्ण परमात्मा/सर्वशक्तिमान कबीर ही हैं। ‘वल्लत कबीर बुल्लाह आला माह दकूबवला अल्लाह कुमदर गुरु’

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हिंदी- तुम कबीर अल्लाह की बढ़ाई बयां करो l इस बात पर तुम को हिदायत फरमाए ताकि अल्लाह ताला का शुक्र कर सको l वह कबीर अल्लाह तमाम पोशीदा और जाहिर चीजों को जानने वाला है l वह कबीर आलीशान रुतबे वाला है l कबीर गुनाहों से बचाने वाला है l

● “अल्लाहु अकबर, आशादू अल्ला इलाहा इल्लल्लाह”

भगवान की शान सभी से अधिक होती है, मैं इस बात का गवाह हूं कि उस अल्लाह कबीर के सिवा कोई भगवान नहीं है।

इस्लाम में अल्लाहु अकबर (भगवान) केवल कबीर ही है

सातवीं शताब्दी ईसवी में अरब में पैगंबर मुहम्मद द्वारा फैलाया गया इस्लाम, अल्लाह को एकमात्र ईश्वर के रूप में देखता है और वे मानते हैं कि वह दुनिया का निर्माता, नियंत्रक और संयोजक है। वे कुरान शरीफ/मज़ीद को सबसे पवित्र ग्रंथ मानते हैं जो अल्लाह ने अपने पैगंबर मुहम्मद को दिया था। इस्लाम में पैगम्बर की प्रथा को समझने के लिए आदम, नूह, अब्राहम, मूसा और सुलेमान का उल्लेख करना अनिवार्य है। हज़रत मुहम्मद इस श्रृंखला में अंतिम स्थान पर आते हैं तो हम हज़रत मुहम्मद पर उतारी गई कुरान के अंश लेते हैं जहां बताया है कि अल्लाह कबीर है।

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  1. कुरान शरीफ- सूरत फुरकान 25:55 लेकिन वे अल्लाह के अलावा किसी और की बन्दगी करते हैं। जो ना तो उनका नफ़ा कर सकता है और ना ही नुकसान और काफिर अपने रब के खिलाफ पुश्त पनाही करने वाला है। ऐसा कहा जाता है कि काफिर , अल्लाह कबीर के अलावा, किसी और की पूजा करते हैं, जो न तो उन्हें कोई लाभ प्रदान कर सकता है और न ही उन्हें नुकसान पहुंचा सकता है और काफिर हम सबके मालिक से दूर हो गए हैं, अर्थात अल्लाह कबीर से विमुख हो चुके हैं अर्थात अल्लाह कबीर के अतिरिक्त अन्य किसी भी देवी देवता की या पैगम्बर की पूजा करना शिर्क यानी पाप है।
  2. कुरान शरीफ – सूरत फुरकान 25:56 में कहा है कि मुहम्मद आपको और कोई काम नहीं दिया, सिवाय अच्छी ख़बर देने और एक आगाह करने वाले के। भावार्थ– क़ुरान शरीफ का ज्ञान दाता कह रहा है कि ओ-पैगंबर मैंने आपको अच्छी खबरें और उन्हें कर्मफल की चेतावनी देने के लिए भेजा है।
  3. कुरान शरीफ – सूरत फुरकान 25:57 – उन्हें कहो कि इसके लिए मैं तुमसे कोई अजर नहीं मांगता, मगर जो शख्स चाहे अपने रब तक रास्ता इख़्तियार कर ले। भावार्थ- उन्हें बताओ कि मैं उस अल्लाह के आदेश के लिए कोई शुल्क नहीं मांगता लेकिन जिसे भी अल्लाह चाहिए उन्हें एक रास्ता तो अपनाना ही पड़ेगा। इससे स्पष्ट हो गया है कि इस्लाम में अल्लाहु अकबर (ईश्वर) कबीर है।

अल्लाह कबीर की प्राप्ति कैसे हो सकती है?

अल्लाह कबीर की प्राप्ति रोज़े रखने या जीव हत्या करने से नहीं होगी। बल्कि जीव हत्या से अल्लाह रुष्ट होता है। अल्लाह कबीर के बारे में केवल बाख़बर यानी तत्वदर्शी सन्त ही बता सकता है। सूरत अल फुरकान 25:59 में कहा है कि छः दिन में सृष्टि रचकर सातवें दिन तख्त पर जा विराजने वाला कोई और नहीं बल्कि अल्लाह कबीर ही है उसके बारे में किसी इल्मवाले या बाख़बर से पूछो।

मुस्लिम / इस्लाम धर्म के सभी अनुयायियों से अनुरोध है कि हम सभी यहां काल के लोक में फंसे हुए हैं हमारे पास यहां मातम करने के अलावा कोई चारा भी नहीं है। कबीर अल्लाह को पहचान लो। बाखबर संत रामपाल जी महाराज जी वास्तविक बाख़बर हैं जो तत्व को जानने वाले हैं। उन्हें पैगम्बर समझो या अल्लाह का रूप दोनो एक ही बातें हैं उनकी शरण मे आओ और अपना कल्याण करवाओ।