Muharram Festival 2019 पर जानिए क्या मुहर्रम एक मनमाना आचरण है?

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मुहर्रम इस्लाम धर्म में विश्वास करने वाले लोगों के लिए बहुत विशेष और महत्वपूर्ण है। मुहर्रम कोई त्यौहार नहीं बल्‍‍िक हजरत इमाम हुसैन और उनके परिवार वालों की शहादत को याद करने का दिन है।

Content.

  • मुहर्रम भारत में कब है ? Mharram 2019 date in India
  • Muharram 2019 Festival | Islamic Calendar के अनुसार मुहर्रम 2019 में कब है?
  • मुहर्रम का इतिहास (History of Muharram) व Tajiya Muharram क्या है?
  • क्यों मनाया जाता है मुहर्रम? (Why is Muharram Celebrated?)
  • मुस्लिम समुदाय के लोग मोहर्रम कैसे मनाते है?
  • इमाम हुसैन के बारे में कुछ तथ्य (Facts about imam hussain).
  • इस मोहर्रम 2019 पर जानिए शास्त्र-अनुकूल साधना क्या है?-
  • अल्लाह खुश कैसे होता है? Muharram Observances.
  • True Muharram quotes in Hindi.
  • इस मुहर्रम जानिए आखिर पवित्र कुरान के मुताबिक क्या है सच्ची भक्ति.
  • Muharram 2019: वह बाखबर (पूर्ण संत) कौन है?
  • Conclusion of Muharram 2019.

मुहर्रम भारत में कब है ? Mharram 2019 date in India

आप में से ऐसे बहुत से लोग है जो यह जानना चाहते है की मुहर्रम भारत में कब है ? Mharram 2019 date in India. तो आप को बता की  इस्लामिक केलिन्डर के अनुसार इस वर्ष मोहर्रम 10 सितम्बर 2019 को मनाया जाएगा।

Muharram 2019 Festival | Islamic Calendar के अनुसार मुहर्रम 2019 में कब है?

इस्लामिक कैलेंडर  (Islamic Calendar) के अनुसार मुहर्रम Festival हिजरी संवत का प्रथम मास है। मुहर्रम (Muharram) इस्लामी साल का पहला महीना होता है। इसे हिजरी भी कहा जाता है । इस  महीने की 10 तारीख को रोज-ए-आशुरा भी कहा जाता है। इतना ही नहीं इस्लाम के चार पवित्र महीनों में इस महीने को भी शामिल किया जाता है। अल्लाह के रसूल हजरत मुहम्मद (सल्ल.) ने इस मास को अल्लाह का महीना कहा है।

मुहर्रम का इतिहास (History of Muharram) व Tajiya Muharram क्या है?

आइये अब मुहर्रम का इतिहास (History of Muharram) पर प्रकाश डालते  है और जानते है की Tajiya Muharram क्या है?

12वीं शताब्दी में ग़ुलाम वंश के पहले शासक क़ुतुबुद्दीन ऐबक के समय से ही दिल्ली में इस मौके पर ताज़िये (मोहर्रम का जुलूस) निकाले जाते रहे हैं। उनके बाद जिस भी सुल्तान ने भारत में राज किया, उन्होंने ‘ताज़िये की परंपरा’ को चलने दिया। हालांकि वो मुख्य रूप से सुन्नी थे, शिया नहीं थे।

  • ये शिया मुस्लिमों का अपने पूर्वजों को श्रद्धांजलि देने का एक तरीका है।
  • मुहर्रम के दस दिनों तक बांस, लकड़ी का इस्तेमाल कर तरह तरह से लोग इसे सजाते हैं और ग्यारहवें दिन इन्हें बाहर निकाला जाता है।
  • इसके बाद लोग इन्हें सड़कों पर लेकर पूरे नगर में भ्रमण करते हैं जिसमे सभी इस्लामिक लोग इसमें इकट्ठे होते हैं। इसके बाद इन्हें इमाम हुसैन की कब्र बनाकर दफनाया जाता है।
  • एक तरीके से 60 हिजरी में शहीद हुए लोगों को एक तरह से यह श्रद्धांजलि दी जाती है।

शिया यानी हजरत अली के समर्थक। इसके विपरीत सुन्नी वे लोग हैं, जो चारों खलीफाओं यानी प्रमुख नेताओं के चुनाव को सही मानते हैं।

क्यों मनाया जाता है मुहर्रम? (Why is Muharram Celebrated?)

आइये अब जानते है की क्यों मनाया जाता है मुहर्रम? (Why is Muharram Celebrated?) दरअसल, इराक में यजीद नामक जालिम बादशाह था जो इंसानियत का दुश्मन था। हजरत इमाम हुसैन ने जालिम बादशाह यजीद के विरुद्ध जंग का एलान कर दिया था। मोहम्मद-ए-मस्तफा के नवासे हजरत इमाम हुसैन को कर्बला नामक स्‍थान में परिवार व दोस्तों के साथ शहीद कर दिया गया था। इसी महीने में इस्लाम धर्म के संस्थापक हजरत मुहम्मद साहब के छोटे नवासे इमाम हुसैन और उनके 72 अनुयायियों का कत्ल कर दिया गया था।

जिस महीने में हुसैन और उनके परिवार को शहीद किया गया था वह मुहर्रम का ही महीना था। उस दिन 10 तारीख थी, जिसके बाद इस्‍लाम धर्म के लोगों ने इस्लामी कैलेंडर का नया साल मनाना छोड़ दिया। बाद में मुहर्रम का महीना गम और दुख के महीने में बदल गया। 680 ई. से शुरू हुआ सिलसिला आज भी जारी है।

मुस्लिम समुदाय के लोग मोहर्रम कैसे मनाते है?

  1. शिया समुदाय के लोग मुहर्रमके दसवें दिन जुलूस निकालकर सभी शहीदों के लिए मातम मनाते हैं।
  2. इस दिन सभी औरतें, बच्चे, बूढ़े तथा बड़े काले कपड़े पहनते हैं। सड़कों पर जुलूस निकाला जाता है और मातम मनाया जाता है।
  3. काले बुर्के पहने खड़ीं महिलाएं छाती पीट-पीटकर रो रही होती हैं और मर्द मातम मनाने के लिए खुद को कोड़ों और तलवारों या खंजरों से पीट पीटकर खून में लतपत हो जाते हैं।
  4. सड़कों पर सब जगह खून ही खून दिखाई देता है जो किसी का भी दिल दहला दे और इस जलूस से एक ही आवाज़ सुनाई दे रही होती है- “या हुसैन, हम ना हुए”. इसका मतलब होता है.

इमाम हुसैन  के बारे में कुछ तथ्य (Facts about imam hussain).

  • “हमें दुख है इमाम हुसैन साहब कि कर्बला की जंग में हम आपके लिए जान देने को मौजूद न थे”। कुश समुदाय के लोग इस दिन रोज़ा भी रखते हैं फिर शाम को मांस का सेवन कर रोज़ा खोलते हैं।
  • इस दौरान लोग बांस पर एक मकबरे के आकार का मंडप ले जाते हैं। इसे कब्र के रूप में मानते हैं जिसे ताजिया कहा जाता है। इसके आगे मातम मनाया जाता है। ग्यारहवें दिन जलूस के साथ ले इसे दफन कर देते हैं। 

इस मोहर्रम 2019 पर जानिए शास्त्र-अनुकूल साधना क्या है?

ये (मुहर्रम) जो परम्परा सदियों से चली आ रही है बिल्कुल शास्त्र विरूद्ध है। कहीं भी क़ुरान शरीफ में मोहम्मद साहेब जी ने ऐसा करने के आदेश नहीं दिए कि मातम मनाकर, जलूस निकालकर किसी को याद किया जाए और ना मांस खाने के आदेश दिए हैं। क़ुरान शरीफ में प्रमाण है कि अल्लाह ने छह दिन में सृष्टि रची और सातवें दिन तख्त पर जा विराजे। वह अल्लाह और कोई नहीं परमात्मा कबीर साहेब जी है। जिसको हर बांग में मुस्लिम अल्लाह हु अकबर कहकर याद करते हैं। अल्लाह का आकार है, ना कि वे बेचून है। अगर इमाम साहेब उस अल्लाह कबीर की सच्ची भगति करते तो ये सब परमात्मा टाल देते।

आखिर क्यों कर्बला की जंग एक मातम में बदल गई? क्यों मोहम्मद साहेब तब नहीं आए अपने नवासे, बच्चों बूढों को बचाने। सर कलम किए जाने के बाद भी इमाम हुसैन के ऊपर से घोड़े दौड़ाए गए। इससे साफ जाहिर होता है कि वह सच्ची भक्ति नहीं करते थे। इतना कहर तभी बरपता है जब कोई पूर्ण सतगुरु की शरण में ना हो।

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यहीं सब ख़त्म नहीं होता, मातम मनाए जाने के बाद सब खाने में मांस का आहार करते हैं। आखिर ये कैसा दुख जताना हुआ। एक तरफ तो इमाम हुसैन की याद में मातम मनाना वो भी शास्त्र विरूद्ध साधना, दूसरी तरफ किसी बेजुबान जीव की हत्या करना।

अल्लाह खुश कैसे होता है? Muharram Observances.

अल्लाह तभी खुश होता है जब उसके बताए मार्ग पर चले जो कि हमारे धर्म ग्रंथों में बताया गया है। मातम मनाना और जानवरों की हत्या कर उनके मांस का सेवन करना एक क्रूर निर्दयतापूर्ण कार्य है जिससे कभी अल्लाह/भगवान/ईश्वर प्रसन्न नहीं हो सकता। और यही असली Muharram observances है।

कुरान शरीफ सुरा-अल-बकरा आयत 22 में अल्लाह ने पृथ्वी, पेड़-पौधे और छोटे-बड़े हर प्रकार के जीव-जन्तुओं पर मनुष्य को अधिकार रखने को कहा है। जैसे कि हम गाय, भैंस, तोते, मछलियों को पालते हैं। परमेश्वर ने पशु पक्षियो को पालने और सेवा करके पुण्य कमाने को कहा है। ना कि खाने को, अधिकार रखना खाना नही होता। अल्लाह का कही भी जीव हत्या करना, बकरे की कुर्बानी देकर खाने का आदेश नहीं है।

Spiritual Leader

True Muharram quotes in Hindi

कबीर, दिनको रोजा रहत हैं, रात हनत हैं गाय।
यह खून वह बंदगी, कहुं क्यों खुशी खुदाय।।
कबीर- मुर्गे से मुल्ला भया, मुल्ला से भया मुर्ग।
दोजक(नरक) धक्के खायेगा, तूझे पावे नही स्वर्ग।।

  • कबीर साहेब ने इन वाणियों में कहा है की आज तू मुर्गे को काट रहा है कल तुझे यही मुर्गा मुल्ला बनकर काटेगा, मांस खाने वालों को कभी जन्नत नसीब नहीं हो सकती।

इस मुहर्रम जानिए आखिर पवित्र कुरान के मुताबिक क्या है सच्ची भक्ति ?

परमात्मा कबीर जी कहते है कि मुस्लिम दिन में तो रोजा रखते है और रात में गाय का मांस खाते है। यह तो एक जीव हत्या है यह अल्लाह की बन्दगी नही है।

  • अल्लाह के बनाये जीवों को ही मार कर खा जाने जैसा आदेश या सहमती कभी खुदा की नहीं हो सकती।
  • जीव हत्या करने से व मास खाने से कभी अल्लाह खुश नहीं हो सकता।
  • कुरान शरीफ सुरत फुर्कानि संख्या 25 आयत 52 से 59 में जिस कबीर अल्लाह का विवरण है वह पूर्ण परमात्मा है।

जिसे अल्लाहु अकबर(अकबीरू) कहते हो। कुरान शरीफ  का ज्ञान दाता अल्लाह किसी अन्य कबीर नामक अल्लाह की महिमा का गुणगान कर रहा है। आयत सं. 52 से 58 तथा 59 में हजरत मुहम्मद जी को कुरान शरीफ के ज्ञान दाता प्रभु ने कहा है कि हे नबी मुहम्मद ! जो कबीर नामक अल्लाह है उसने सर्व  ब्रह्मण्डों की रचना की है। वही सर्व पाप नाश (क्षमा) करने वाला है तथा सर्व के पूजा करने योग्य है (इबादही कबीरा अर्थात् पूजा के योग्य कबीर)। उसी ने जमीन तथा आसमान के मध्य जो कुछ भी है, सर्व की रचना छः दिन में की है तथा सातवें दिन आसमान में तख्त पर जा विराजा।

काफिर लोग उस कबीर प्रभु (अल्लाहु अकबर) को सर्व शक्तिमान प्रभु नहीं मानते। आप उनकी बातों में मत आना। उनका कहा मत मानना। मेरे द्वारा दिए कुरान शरीफ की दलीलों पर विश्वास रखना तथा अहिंसा के साथ कबीर अल्लाह के लिए संघर्ष (जिहाद) करना, लड़ाई नहीं करना(सूरत फुर्कानि आयत 52)। उस परमात्मा कबीर (अल्लाहु अकबर) की भक्ति विधि तथा उसके विषय में पूर्ण ज्ञान मुझे नहीं है। उस सर्वशक्तिमान, सर्व ब्रह्मण्डों के रचनहार, सर्व पाप नाशक, सर्व के पूजा योग्य कबीर अल्लाह की पूजा के विषय में किसी तत्त्वदर्शी (बाखबर) संत से पूछो।

Muharram 2019: वह बाखबर (पूर्ण संत) कौन है?

Muharram 2019:

हजरत मोहम्मद जी की जीवनी में उन्होंने ये ज़िक्र किया है कि मैंने जन्नत (स्वर्ग) में सब आदमियों के पिता बाबा आदम जी को देखा। उन्होंने बताया कि ऊपर के लोकों में मुझे हजरत दाऊद, हजरत मूसा तथा हजरत ईशा जी तथा अन्य नबियों की जमात (मण्डली) मिली। मैंने उनको नमाज पढ़ाई। फिर नीचे लाकर बुराक नामक जानवर छोड़कर चला गया।
हजरत मुहम्मद जी के इस आँखों देखे प्रकरण को मुसलमान सत्य मानते हैं। इसलिए उनका यह सिद्धांत गलत सिद्ध हुआ कि मृत्यु के पश्चात प्रलय (कयामत) तक बाबा आदम, हजरत दाऊद, मूसा, ईशा आदि-आदि को जन्नत की बजाय कब्रों में होना चाहिए था जिनको हजरत मुहम्मद जी ने जन्नत में देखा।

 

कुरान का ज्ञानदाता भी हजरत मोहम्मद को बाखबर को ढूंढने के लिए बोल रहा है। वास्तव में यही बाखबर हमको अल्लाह तक पहुंचा सकता है जिसके बारे में खुद हजरत मोहम्मद भी अनभिज्ञ थे। वह और कोई नहीं तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज हैं जो सब ग्रंथों से प्रमाण दिखा रहे हैं कि पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब हैं। इसका प्रमाण हर धर्म ग्रंथ में है। जो आज तक किसी ने नहीं बताया। पूर्ण संत की शरण में आने से हर बला टल जाती है। कबीर साहेब की वाणी है:

सतगुरु शरण में आने से आई टले बला,
जो मस्तक में सूली हो, वो कांटे में टल जा।

Conclusion: Muharram 2019 का निष्कर्ष यही है की केवल संत रामपाल जी अल्लाह कबीर जी के भेजे हुए बाखबर ही उस अल्लाह को पाने का सच्चा सही रास्ता जानते हैं। इन मनमाने आचरण को छोड़ कर बाखबर संत रामपाल जी महाराज की शरण में आएं और अपना कल्याण करवाएं।

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