हरियाणा के जिला झज्जर की बहादुरगढ़ तहसील स्थित मातन गांव ने हाल के वर्षों में ग्रामीण क्षेत्रों की सबसे भयावह बाढ़ त्रासदियों में से एक को झेला। महीनों तक खेतों में भरा रुका हुआ पानी न केवल कृषि भूमि को बर्बाद कर गया, बल्कि आजीविका के सभी साधन छीनते हुए कई परिवारों को भूख की कगार पर ला खड़ा किया।
जब प्रशासनिक स्तर पर हर प्रयास विफल हो गया, तब गांववासियों ने संत रामपाल जी महाराज की ओर आशा भरी दृष्टि से देखा। अन्नपूर्णा मुहिम के अंतर्गत उनके समय पर हस्तक्षेप ने मातन गांव को केवल राहत ही नहीं दी, बल्कि एक स्थायी समाधान भी प्रदान किया। उनके मार्गदर्शन में भेजे गए बाढ़ राहत उपकरणों ने निराशा को विश्वास और स्थिरता में बदल दिया। आइए, इस अद्भुत राहत कार्य को विस्तार से समझते हैं।
महीनों तक जलमग्न रहा मातन गांव
लगभग 2 से 3 महीनों तक मातन गांव के कृषि खेत बाढ़ के पानी में डूबे रहे। धान, बाजरा, ज्वार और कपास जैसी फसलें पूरी तरह नष्ट हो गईं, जिनमें धान की फसल को लगभग 60–70% तक नुकसान पहुंचा। इस कृषि तबाही ने किसानों की आय पूरी तरह समाप्त कर दी और पशुओं के लिए चारे तक की भारी कमी पैदा हो गई।
स्थिति इतनी भयावह थी कि गांववाले कैमरे के सामने फूट-फूटकर रो पड़े। एक बुजुर्ग महिला ने बताया कि हालात ऐसे बन गए थे कि खाने के लिए भीख मांगना मजबूरी बन गया था। मातन गांव मानवीय संकट की दहलीज पर खड़ा था।
गांववासियों की अंतिम आशा बने संत रामपाल जी महाराज
सरपंच और ग्रामीणों ने लगभग एक महीने तक सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाए, लेकिन कहीं से कोई सहायता नहीं मिली। भूख और तबाही के साए में, गांववालों ने आखिरकार अपनी अंतिम गुहार लगाने का निर्णय लिया।
आशा के सहारे सरपंच और गांव के प्रतिनिधि बरवाला पहुंचे और ट्रस्ट कार्यालय के माध्यम से अपनी पीड़ा संत रामपाल जी महाराज के समक्ष रखी। उनकी मांग अत्यंत साधारण, परंतु जीवनदायी थी:
- 15 एचपी के 4 मोटर
- 8 इंच की 14,500 फीट पाइपलाइन
संत रामपाल जी महाराज ने बिना किसी विलंब के इस अपील को स्वीकार किया। यही वह क्षण था, जिसने मातन गांव की तकदीर बदल दी।
संत रामपाल जी महाराज द्वारा अद्भुत बाढ़ राहत सहायता
सिर्फ चार दिनों के भीतर, अन्नपूर्णा मुहिम के अंतर्गत संत रामपाल जी महाराज ने मातन गांव के लिए ऐतिहासिक बाढ़ राहत सामग्री भेज दी। यह सहायता पूर्ण, सुव्यवस्थित और दूरदर्शी योजना का परिणाम थी।
उपलब्ध कराई गई बाढ़ राहत सामग्री:
- 15 एचपी के 4 हैवी-ड्यूटी मोटर
- 8 इंच की 14,500 फीट उच्च गुणवत्ता वाली पाइपलाइन
- स्टार्टर, हैंडी, बैंड, वाल्व
- नट-बोल्ट, पाइप जॉइंट और एसआर कनेक्टर
संत रामपाल जी महाराज द्वारा करवाई गई व्यवस्था इतनी संपूर्ण थी कि किसानों को बाहर से एक कील तक खरीदने की आवश्यकता नहीं पड़ी। दर्जनों ट्रक और वाहन यह सामग्री सीधे गांव तक लेकर पहुंचे, जिससे तुरंत कार्य शुरू किया जा सका।

भक्तों द्वारा किया गया हर कार्य संत रामपाल जी महाराज के दिव्य मार्गदर्शन में हुआ, जिससे अनुशासन, गति और प्रभावशीलता सुनिश्चित हुई।
कृतज्ञता और विश्वास के साथ गांव ने किया राहत का स्वागत
जैसे ही राहत सामग्री गांव पहुंची, मातन गांव का माहौल पूरी तरह बदल गया। निराशा के आंसू अब आशा के आंसुओं में बदल गए।
- ढोल-नगाड़ों की गूंज
- जयघोष और भावुक अभिव्यक्तियां
ग्रामीणों ने खुलेआम संत रामपाल जी महाराज की प्रशंसा करते हुए उन्हें:
- किसानों का मसीहा
- ईश्वर का अवतार
- स्वयं परमात्मा
कहा।
वरिष्ठ किसानों ने उनकी तुलना सर छोटूराम से की और बताया कि बुजुर्गों से सुनी गई कथाएं आज साकार होती दिखीं। गांववासियों ने एक स्वर में कहा कि जो कार्य सरकार वर्षों में नहीं कर सकी, वह संत रामपाल जी महाराज ने कुछ ही दिनों में कर दिखाया।
जवाबदेही और पारदर्शिता का अनूठा उदाहरण
इस राहत कार्य की एक अत्यंत विशेष बात थी — जवाबदेही। राहत सामग्री के साथ-साथ संत रामपाल जी महाराज ने लिखित निर्देश भी भेजे:
- पानी सामूहिक रूप से निकाला जाएगा
- फसल समय पर बोई जाएगी
- ड्रोन रिकॉर्डिंग की जाएगी:
- पानी निकालने से पहले
- पानी निकालने के बाद
- फसल पूरी तरह तैयार होने पर
इन रिकॉर्डिंग्स के माध्यम से सहायता के सही उपयोग का पारदर्शी प्रमाण सुनिश्चित किया गया। यह भी स्पष्ट किया गया कि निर्देशों का पालन न होने पर भविष्य में सहायता नहीं दी जाएगी।
ग्राम पंचायत ने इन सभी शर्तों को औपचारिक रूप से स्वीकार किया।
क्यों संत रामपाल जी महाराज कहलाते हैं सच्चे किसान मसीहा और विश्व उद्धारक
आज पूरे भारत में जगतगुरू तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज को किसान मसीहा और विश्व उद्धारक के रूप में पहचाना जा रहा है। अन्नपूर्णा मुहिम के अंतर्गत अब तक 400 से अधिक गांवों में बाढ़ राहत सेवाएं पहुंचाई जा चुकी हैं, जहां किसानों को सभी आवश्यक मशीनें और उपकरण प्रदान किए गए हैं।
स्वयं एक किसान परिवार से होने के कारण वे ग्रामीण पीड़ा को गहराई से समझते हैं। उनका योगदान केवल प्रतीकात्मक दान नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर स्थायी समाधान प्रदान करने वाला है। प्राकृतिक आपदाओं के दौरान किसानों के लिए किए गए उनके अतुलनीय कार्यों के लिए उन्हें अनेक सम्मान और मान्यताएं प्राप्त हुई हैं।
इसके साथ ही, उनके द्वारा प्रदान किया गया सच्चा आध्यात्मिक ज्ञान उन्हें अलौकिक बनाता है और हमें उनमें एक तत्त्वदर्शी संत की पहचान कराता है। आज के तकनीकी युग में भी मानवता की गिरती स्थिति यह स्पष्ट करती है कि संसार को एक तत्त्वदर्शी संत की कितनी आवश्यकता है — और वह संत वर्तमान में संत रामपाल जी महाराज ही हैं।
उनके ज्ञानवर्धक आध्यात्मिक प्रवचनों को सुनने के लिए उनके यूट्यूब चैनल ‘Sant Rampal Ji Maharaj’ से जुड़ें, या उनकी पुस्तक “ज्ञान गंगा” की निःशुल्क प्रति प्राप्त करने के लिए www.jagatgururampalji.org पर विज़िट करें।



