HomeNewsक्या मां सिद्धिदात्री पूजा (Maa Siddhidatri Puja) शास्त्र सम्मत है?

क्या मां सिद्धिदात्री पूजा (Maa Siddhidatri Puja) शास्त्र सम्मत है?

Date:

प्रचलित मान्यताओं के अनुसार हिन्दू नवरात्रों के अंतिम एवं नौवें दिन देवी दुर्गा के नवें स्वरूप मां सिद्धिदात्री की पूजा अज्ञानवश करते हैं। मां सिद्धिदात्री की पूजा प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष आश्विन मास के शुक्लपक्ष की अष्टमी तिथि अर्थात 14 अक्टूबर 2021, गुरुवार को की जाएगी। शारदीय नवरात्र की इस नवमीं को महानवमी भी कहा जाता है। मान्यताओं के अनुसार महानवमी को मां सिद्धिदात्री की पूजा करने से सभी प्रकार के भय, रोग और शोक समाप्त हो जाते हैैं। 

वास्तविकता यह है कि शास्त्रों में ऐसी मान्यताओं का कोई वर्णन नहीं है। पवित्र सद्ग्रन्थों में जिस प्रभु की महिमा का बखान है, जो वास्तविक पूर्ण मोक्ष दायक प्रभु है वो तो कोई और है। सतज्ञान के अभाव के कारण साधक समाज उससे अब तक अनभिज्ञ है। तो आइये विस्तार से जानते हैं ऐसे ही छुपे हुए गूढ़ रहस्यों को जिन्हें जानने के लिए पाठकजन अत्यंत व्याकुल हैं।

मां सिद्धिदात्री पूजा (Maa Siddhidatri Puja): मुख्य बिंदु

  • 14 अक्टूबर 2021, गुरुवार को होगी देवी दुर्गा के नवम स्वरूप मां सिद्धिदात्री की पूजा
  • हिन्दू पंचांग के अनुसार आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को महानवमी भी कहा जाता है
  • दो तिथियों के एक ही दिन के संयोग से इस बार नवरात्र 9 दिन के न होकर 8 दिन में सम्पन्न हो जाएंगे, जिस कारण नौवें दिन के स्थान पर आठवें दिन होगी मां सिद्धिदात्री की पूजा
  • देवी पुराण के अनुसार देवी दुर्गा ने पर्वत राज हिमालय को अपनी साधना करने से मना किया हुआ है
  • गीता ज्ञान दाता ने भी देवी दुर्गा सहित त्रिदेवों व अन्य देवी-देवताओं को पूजने वाले साधकों को अज्ञानी की संज्ञा दी है
  • पवित्र सद्ग्रन्थों के अनुसार पूर्ण परमेश्वर कविर्देव जी ही सर्व के रक्षक व उत्पादक तथा पूर्ण मोक्षदायक प्रभु हैं
  • वर्तमान में संत रामपाल जी महाराज ही शास्त्रानुकूल साधना प्रदत्त करने वाले एकमात्र तत्वदर्शी संत।

कब है महानवमी 2021 (Maha Navami 2021 Date)

हिन्दू धर्म में प्रचलित मान्यताओं के अनुसार नवरात्र के अंतिम दिन अर्थात नौवें दिन देवी दुर्गा के नवम स्वरूप मां सिद्धिदात्री की पूजा अर्चना की जाती है। हिन्दू पंचांग के अनुसार आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को महानवमी भी कहा जाता है, इस बार नवमी तिथि 13 अक्टूबर 2021, बुधवार को रात 08 बजकर 07 मिनट से प्रारंभ होकर 14 अक्टूबर 2021, बृहस्पतिवार (गुरुवार) को शाम 06 बजकर 52 मिनट पर समाप्त होगी। अत: भूलवश नवमी का पूजन 14 अक्टूबर 2021, दिन गुरुवार को किया जाएगा।

मां सिद्धिदात्री के नाम से जुड़ी पौराणिक कथा (Maa Siddhidatri Story)

एक पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान शिव ने मां सिद्धिदात्री की कठोर तपस्या कर आठों सिद्धियों को प्राप्त किया था। साथ ही मां सिद्धिदात्री की कृपा से भगवान शिव का आधा शरीर देवी का हो गया था और वह अर्धनारीश्वर कहलाए। मां दुर्गा का यह अत्यंत शक्तिशाली स्वरूप है। मान्यताओं के अनुसार, देवी दुर्गा का यह स्वरूप सभी देवी-देवताओं के तेज से प्रकट हुआ है। कहते हैं कि दैत्य महिषासुर के अत्याचारों से परेशान होकर सभी देवतागण भगवान शिव और विष्णु के पास गुहार लगाने गए थे। तब वहां मौजूद सभी देवतागण से एक तेज उत्पन्न हुआ। उस तेज से एक दिव्य शक्ति का निर्माण हुआ। जिन्हें मां सिद्धिदात्री के नाम से जाते हैं। 

जैसा कि इस कथा में वर्णित है भगवान शिव ने सिद्धियां प्राप्त करने के लिए तप किया, परन्तु तप के विषय में गीता ज्ञान दाता ने श्री मद्भगवत गीता अध्याय 17 श्लोक 5-6 में बताया है कि जो मनुष्य शास्त्रविधि रहित घोर तप को करते हैं, अहंकार और दम्भ (पाखण्ड) से युक्त कामना, आसक्ति और बल के अभिमान से युक्त हैं, (गीता 17-5) वे शरीर रुप में स्थित कमलों में स्थित प्राणियों के प्रधान देवताओं को और शरीर के अन्दर अन्तःकरण में स्थित मुझ ब्रह्म को भी कृश करने वाले हैं। उन अज्ञानियों को तू आसुर (राक्षस) स्वभाव वाले जान। (गीता 17-6) भावार्थ है कि जो ध्यान हठ योग के माध्यम से ऋषि लोग क्रिया करते थे, वह किसी वेद या श्रीमद्भगवत गीता में करने को नहीं कहा है। 

सिद्धियाँ प्राप्त करना मनमाना आचरण है। इससे परमात्मा प्राप्ति नहीं है क्योंकि गीता अध्याय 16 श्लोक 23-24 में कहा है कि शास्त्र विधि को त्यागकर जो मनमाना आचरण करते हैं उनको न तो सुख प्राप्त होता है, न कोई कार्य की सिद्धि होती है, न उनकी गति (मोक्ष) होती है अर्थात् यह साधना व्यर्थ है। (गीता 16-23) इससे तेरे लिये अर्जुन कर्तव्य और अकर्तव्य की व्यवस्था में शास्त्र ही प्रमाण हैं। उपरोक्त उल्लेख से स्पष्ट हुआ है कि शिव जी द्वारा किया गया ध्यान अर्थात तप शास्त्रविधि रहित होने से व्यर्थ है। इससे यह भी स्पष्ट होता है त्रिदेवों को भी शास्त्रों का पूर्ण ज्ञान नहीं, फिर उनके साधकों की तो बात ही क्या है।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार मां सिद्धिदात्री को प्राप्त हैं अष्ट सिद्धियां

पौराणिक मान्यता के अनुसार मां सिद्धिदात्री के पास अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व और वशित्व सिद्धियां प्राप्त हैं। जबकि पूर्ण परमात्मा कविर्देव जी की भक्ति करने वाले साधक को 24 सिद्धियां प्राप्त हो जाती हैं, परन्तु ये सिद्धियां साधक के मोक्ष मार्ग की सबसे बड़ी बाधक होती हैं जिस कारण सत्यसाधक इन सिद्धियों का उपयोग भूलकर भी नहीं करता है और पूर्ण मोक्ष की प्राप्ति करता है।

शबद महल में सिद्ध चौबीसा, हंस बिछोड़े बिस्वे बीसा।

क्या है मां सिद्धिदात्री पूजा विधि (Maa Siddhidatri Puja Vidhi) की सच्चाई?

मानते हैं मां दुर्गा को खीर, मालपुआ, मीठा हलुआ, पूरणपोठी, केला, नारियल और मिष्ठाई बहुत पसंद है। 

▪️Also Read: माँ महागौरी पूजा (Maa Mahagauri Puja) पर जानें शास्त्र सम्मत मोक्षदायिनी भक्तिविधि?

इस प्रकार की साधना का वर्णन किसी भी सद्ग्रन्थ में नहीं है यह सिर्फ लोगों द्वारा बनाई गई मनमुखी साधना है अर्थात मनमाना आचरण और श्रीमद्भगवत गीता में गीता ज्ञान दाता का स्पष्ट निर्देश है कि मनमाने आचरण से न तो कोई सिद्धि प्राप्त होती है और न ही गति अर्थात यह साधना व्यर्थ है। भोले साधकों को यह भी विचार करना चाहिए कि भगवान तो भाव का भूखा होता है, पकवानों का नहीं। पूर्ण परमात्मा को सिर्फ और सिर्फ पूर्ण संत के द्वारा दिए गए सत्यनाम के जाप से ही प्रसन्न किया जा सकता है। 

व्रत साधना के विषय में क्या कहते हैं सद्ग्रन्थ ?

श्रीमद् भागवत गीता अध्याय 6 श्लोक 16 में परमात्मा प्राप्ति के मार्ग में उपवास व्रत को सख्ती से प्रतिबंधित किया गया है। गीता अध्याय 4 श्लोक 25-31 में कहा गया है कि सभी साधक गलती से अपनी धार्मिक प्रथाओं को पापनाशक मानते हैं और इन व्यर्थ प्रथाओं को करते रहते हैं।

इसलिए, इस तरह की धार्मिक प्रथाएं भक्तों के मन में एक प्रश्न चिन्ह उठाती हैं। क्या यह भक्ति की सही विधि है? क्या इस भक्ति विधि से भगवान प्राप्त होंगे? आइए हम एक महान संत के प्रवचनों से समझने की कोशिश करें।

महान संत गरीबदास जी अपनी अमृत वाणी में कहते हैं जो उन्हें सर्वशक्तिमान कविर्देव जी ने बताया था

ग़रीब, प्रथम अन्न जल संयम रखें,

योग युक्त सब सतगुरु भाखे।

भावार्थ है कि व्यक्ति को अपने खान-पान में संयम बनाए रखना चाहिए। भक्ति का यह तरीका मुझे मेरे सतगुरु ने बताया है। इससे सिद्ध होता है कि हठ योग और व्रत पूजा का तरीका सही नहीं है।

देवी पुराण में माता दुर्गा ने अपनी पूजा को व्यर्थ बताया है

नवदुर्गा की सभी देवियां दुर्गा माता का ही स्वरूप हैं उनका ही अंश है और माता दुर्गा ने “देवी महापुराण के सातवें स्कंध पृष्ठ 562-563 में राजा हिमालय को उपदेश देते हुए कहा है कि हे राजन, अन्य सब बातों को छोड़कर, मेरी भक्ति भी छोड़कर केवल एक ऊँ नाम का जाप कर, “ब्रह्म” प्राप्ति का यही एक मंत्र है। यह केवल ब्रह्म तक ही सीमित है। जबकि सर्वश्रेष्ठ परमात्मा कोई और है। भक्तों को माता की आज्ञा पर विचार करके पवित्र सद्ग्रन्थों का अध्ययन कर वास्तविकता को जानना चाहिए, जिस साधना में वे लीन हैं  क्या वह वास्तविक रूप से शास्त्र विरुद्ध तो नहीं है। यदि सत्य ज्ञात हो तो शास्त्र विरुद्ध साधना को त्याग कर शास्त्र सम्मत साधना ही करनी चाहिए।

सर्व लाभ व पूर्ण मोक्ष देने में सामर्थ्यवान प्रभु कौन है?

आइए जानते हैं कि वह प्रभु कौन है जो सर्व के पूजा के योग्य, सर्व लाभ व पूर्ण मोक्ष देने में सामर्थ्यवान है

  • ऋग्वेद मंडल 9 सुक्त 86 मंत्र 17, 18 ,19 और 20 में प्रमाण है कि वह एक परमात्मा सबका मालिक एक कबीर साहेब जी हैं जिन्होंने सबकी रचना की है।
  • पवित्र सामवेद संख्या 359 अध्याय 4 खंड 25 श्लोक 8 में प्रमाण है कि जो (कविर्देव) कबीर साहिब तत्वज्ञान लेकर संसार में आता है वह सर्वशक्तिमान सर्व सुखदाता और सर्व के पूजा करने योग्य हैं।

पवित्र सद्ग्रन्थों में दिए गए प्रमाणों से प्रिय पाठकगण यह तो जान चुके हैं कि वह पूर्ण परमात्मा कविर्देव है जो कि सर्व के पूजा के योग्य है, आइये अब जानते हैं कि उस पूर्ण परमात्मा कविर्देव को प्राप्त करने की भक्तिविधि क्या है, जिससे वह पूर्ण परमात्मा प्रसन्न होकर अपने साधक को सर्व लाभ व पूर्ण मोक्ष प्रदान करता है।

पूर्ण संत की पहचान क्या है?

पवित्र गीता अध्याय 15 के श्लोक 1 से 4 में गीता ज्ञान दाता ने कहा है कि जो संत इस उल्टे लटके हुए संसार रूपी वृक्ष के मूल से लेकर पत्तों तक ठीक-ठीक बता देगा वह तत्वदर्शी संत होता है। पूर्ण परमात्मा कविर्देव जी की मोक्षदायिनी भक्तिविधि प्रदत्त करने वाला तत्वदर्शी संत सभी वेद पुराणों सहित पांचवें वेद यानी सूक्ष्मवेद का पूर्ण ज्ञाता होता है। पूर्ण परमात्मा के पूर्ण जानकार और कृपा पात्र एकमात्र तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज हैं जिनकी शरण में जाकर ही यथार्थ का भान होता है।

पूर्ण संत रामपाल जी महाराज का सतज्ञान कैसे जानें?

पूर्ण संत रामपाल जी महाराज पूर्णतया शास्त्रानुकूल भक्तिविधि प्रदान करते हैं जिससे साधकों को यथा समय सर्व लाभ तो प्राप्त होते ही हैं साथ ही पूर्ण परमात्मा की प्राप्ति भी होती है। संत रामपाल जी महाराज द्वारा रचित अनमोल पवित्र पुस्तक जीने की राह अवश्य पढ़ें। सतलोक आश्रम यूट्यूब चैनल पर सत्संग श्रवण करें और सतज्ञान को पैना कर अज्ञान रूपी अन्धकार को छांटकर शाश्वत प्रकाश ग्रहण करें। ब्रह्म के जन्म मृत्यु के चक्र से और देवी दुर्गा के मायाजाल से छुटकारा पाकर मानव जन्म को सार्थक करने का यही एकमात्र उपाय है।

जानें, कैसे अपना उद्धार कराएं?

भारत को संतों की भूमि कहा जाता है और वर्तमान समय में संतों की लंबी श्रृंखला भी दिखाई पड़ती है। परन्तु पूर्ण संत की बात की जाए तो वर्तमान में केवल संत रामपाल जी महाराज ही एकमात्र ऐसे अद्वितीय संत हैं जिनके द्वारा दिए गए अनमोल ज्ञान का ही पवित्र शास्त्रों से ताल-मेल बैठता है और जिनके द्वारा दी गयी सतभक्ति से जीव का उद्धार हो सकता है। इसलिए आज ही शास्त्र विरुद्ध साधनाओं का परित्याग कर पूर्ण संत रामपाल जी महाराज से निःशुल्क नाम दीक्षा प्राप्त कर आजीवन मर्यादा में रहकर स्वयं के लिए मोक्ष मार्ग प्रशस्त करें।

About the author

Website | + posts

SA News Channel is one of the most popular News channels on social media that provides Factual News updates. Tagline: Truth that you want to know

SA NEWS
SA NEWShttps://news.jagatgururampalji.org
SA News Channel is one of the most popular News channels on social media that provides Factual News updates. Tagline: Truth that you want to know

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

13 − one =

Share post:

Subscribe

spot_img
spot_imgspot_img

Popular

More like this
Related

World Soil Day 2022: Let’s become Vegetarian and Save the Earth! Indian Navy Day 2022: Know About the ‘Operation Triumph’ Launched by Indian Navy 50 Years Ago अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव 2022 (International Gita Jayanti Mahotsav) पर जाने गीता जी के अद्भुत रहस्य