बादली (झज्जर): संत रामपाल जी महाराज ने अन्नपूर्णा मुहिम के तहत हरियाणा के झज्जर जिले के बादली तहसील स्थित गांव कुकड़ोला में एक ऐसा ऐतिहासिक कार्य संपन्न किया है, जिसने आधुनिक सरकारों और बड़ी औद्योगिक इकाइयों की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। पिछले चार वर्षों से जलभराव की गंभीर त्रासदी झेल रहे इस गांव की पुकार जब प्रशासन और रिलायंस जैसी दिग्गज कंपनियों के कानों तक नहीं पहुँची, तब संत रामपाल जी महाराज ने एक मसीहा के रूप में सामने आकर ग्रामीणों के जीवन में खुशहाली की नई फसल बोने का मार्ग प्रशस्त किया।
कुकड़ोला के ग्रामीण सुभाष जी और प्रधान कपूर सिंह के नेतृत्व में पूरे गांव ने इस सहायता को ईश्वर का साक्षात आशीर्वाद माना है। संत रामपाल जी महाराज ने मानवता की सेवा का जो उदाहरण प्रस्तुत किया है, वह आज समूचे प्रदेश में चर्चा का विषय बना हुआ है।
विकास के दावों की विफलता और कुकड़ोला का संकट
गांव कुकड़ोला की स्थिति पिछले कई वर्षों से अत्यंत दयनीय बनी हुई थी। ग्रामीण सुभाष जी के अनुसार, पिछले तीन चार सालों से उनके उपजाऊ खेत गंदे पानी में डूबे हुए थे। यह समस्या केवल आर्थिक नहीं, बल्कि एक गहरी सामाजिक और मानसिक पीड़ा का कारण बन गई थी।
किसान अपनी ही जमीन पर बेबस खड़े थे क्योंकि बिजाई के लिए कोई रास्ता नहीं बचा था। स्कूलों और सार्वजनिक स्थानों पर पानी भरा होने के कारण बच्चों की शिक्षा पूरी तरह बाधित हो गई थी और पशुओं के लिए चारे का भी भीषण संकट खड़ा हो गया था। जलभराव के कारण गांव की डिस्पेंसरी तक बंद हो गई थी, जिससे स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गईं। विकास के तमाम सरकारी दावे इस गांव की सीमा पर आकर दम तोड़ रहे थे और ग्रामीण खुद को असहाय महसूस कर रहे थे।
रिलायंस और सरकार की बेरुखी: ग्रामीणों का संघर्ष
ग्रामीणों ने अपनी व्यथा बताते हुए कहा कि उन्होंने सहायता के लिए रिलायंस जैसी बड़ी कंपनी और सरकार के कई चक्कर काटे। महीनों तक धक्के खाने के बाद भी उन्हें केवल खोखले आश्वासन ही मिले। रिलायंस कंपनी और प्रशासनिक अधिकारियों की विफलता ने ग्रामीणों के मन में व्यवस्था के प्रति गहरा असंतोष भर दिया था।
गांव के खेतों में पानी खड़ा होने से न केवल वर्तमान फसल बर्बाद हो रही थी, बल्कि भविष्य की फसलों पर भी संकट के बादल मंडरा रहे थे। जब मदद के सारे भौतिक और राजनीतिक दरवाजे बंद हो गए, तब कुकड़ोला के निवासियों ने एक अंतिम उम्मीद के साथ संत रामपाल जी महाराज के दरबार में अपना प्रार्थना पत्र भेजा। ग्रामीणों का यह संघर्ष उनकी जीविका और अस्तित्व की रक्षा के लिए था।
संत रामपाल जी महाराज की अभूतपूर्व पहल और सहायता
ग्रामीणों की करुण पुकार सुनते ही संत रामपाल जी महाराज ने त्वरित कार्रवाई का आदेश दिया। ग्रामीणों ने अपनी अर्जी में मात्र 10 एचपी की दो मोटरें मांगी थीं ताकि वे किसी तरह खेतों से पानी बाहर निकाल सकें।
परंतु संत रामपाल जी महाराज ने समस्या की गंभीरता और गांव के क्षेत्रफल को देखते हुए मांगी गई क्षमता से दोगुनी ताकत वाली, यानी 20 एचपी की दो विशाल मोटरें और 5400 फुट लंबा 8 इंची पाइप गांव भिजवाया। संत रामपाल जी महाराज ने यह सुनिश्चित किया कि सहायता में तकनीकी रूप से कोई कमी न रहे, इसलिए नट बोल्ट, स्टार्टर, बैंड और पैकिंग जैसी छोटी से छोटी सामग्री भी निःशुल्क उपलब्ध कराई गई। इस सहायता के जरिए यह स्पष्ट संदेश दिया गया कि सेवा में किसी प्रकार की कंजूसी नहीं होनी चाहिए।
भव्य स्वागत और ट्रैक्टरों का काफिला: एक ऐतिहासिक दृश्य
राहत सामग्री का काफिला जब कुकड़ोला की सीमा पर पहुँचा, तो वहां का दृश्य किसी बड़े धार्मिक उत्सव जैसा प्रतीत हो रहा था। संत रामपाल जी महाराज के प्रति सम्मान प्रकट करने के लिए पूरा गांव ट्रैक्टरों और ढोल नगाड़ों के साथ सड़कों पर उमड़ पड़ा।
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ग्रामीणों ने संत रामपाल जी महाराज के स्वरूप पर फूलों की वर्षा की और श्रद्धापूर्वक नमन किया। गांव की महिलाओं और बुजुर्गों ने भी इस स्वागत समारोह में बढ़ चढ़कर भाग लिया। यह केवल मशीनों का आना नहीं था, बल्कि कुकड़ोला के ग्रामीणों के टूटे हुए विश्वास की बहाली थी। संत रामपाल जी महाराज के सेवादारों का स्वागत फूल मालाओं से किया गया और पूरे गांव में एक अभूतपूर्व उत्साह का संचार देखा गया।
पगड़ी सम्मान: प्रधान कपूर सिंह और ग्राम पंचायत का आभार
कुकड़ोला ग्राम पंचायत और आरडब्ल्यूए के प्रधान कपूर सिंह ने संत रामपाल जी महाराज के प्रति गहरा आभार व्यक्त करते हुए उनके सेवादारों को पगड़ी पहनाकर सम्मानित किया। कपूर सिंह जी ने भावुक स्वर में कहा कि इस धरती पर पहली बार किसी संत ने वास्तविक रूप में किसानों और 36 बिरादरी का दर्द समझा है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि जो कार्य अरबों का टर्नओवर रखने वाली कंपनियां और सरकारें वर्षों में नहीं कर सकीं, वह संत रामपाल जी महाराज ने मात्र एक सप्ताह के भीतर कर दिखाया। गांव के बुजुर्गों ने इसे एक ऐतिहासिक दिन बताया और संत रामपाल जी महाराज को भगवान का रूप करार दिया। ग्रामीणों के अनुसार यह सहायता उनके लिए जीवनदान के समान है।
मुनीन्द्र धर्मार्थ ट्रस्ट का उत्तरदायित्व और ड्रोन निगरानी
संत रामपाल जी महाराज के मार्गदर्शन में संचालित मुनीन्द्र धर्मार्थ ट्रस्ट ने ग्रामीणों को एक विशेष संदेश पत्र भी सौंपा। इसमें स्पष्ट किया गया कि संत जी के सख़्त आदेश हैं कि सामग्री का उपयोग पूरी निष्ठा से केवल जल निकासी और फसल बिजाई के लिए किया जाना चाहिए। अगर निर्धारित समय में पानी नहीं निकलता हैं तो आगे से संत जी द्वारा कोई सहायता नहीं दी जाएगी।
पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए गांव की वर्तमान स्थिति का ड्रोन से वीडियो बनवाया गया है। आदेश दिया गया है कि पानी निकलने के बाद और फसल लहलहाने पर पुनः वीडियो बनाया जाए, ताकि दानदाताओं को उनके पैसे का सदुपयोग दिखाया जा सके। यह भी चेतावनी दी गई कि यदि इस सहायता के बाद भी फसल की बिजाई नहीं हुई, तो भविष्य में कोई अन्य सहायता नहीं दी जाएगी। यह कड़ा अनुशासन सेवा की गंभीरता को दर्शाता है।
अन्नपूर्णा मुहिम: मानवता और किसान कल्याण का वैश्विक मॉडल
संत रामपाल जी महाराज ने अन्नपूर्णा मुहिम की शुरुआत इस संकल्प के साथ की है कि समाज में कोई भी व्यक्ति भूखा न सोए और कोई भी किसान आर्थिक तंगी के कारण आत्महत्या न करे। मुनीन्द्र धर्मार्थ ट्रस्ट के माध्यम से अब तक देशभर के 300 से अधिक बाढ़ प्रभावित गांवों में इसी प्रकार की सहायता पहुँचाई जा चुकी है।
इस मुहिम के अंतर्गत केवल जल निकासी ही नहीं, बल्कि शिक्षा, चिकित्सा और आवास की सुविधाएं भी जरूरतमंदों को प्रदान की जा रही हैं। संत रामपाल जी महाराज का मानना है कि सच्चा अध्यात्म और मानवता की सेवा ही ईश्वर की वास्तविक भक्ति है। यह अभियान आज देश के लिए एक प्रेरणा स्रोत बन चुका है।
सच्ची सेवा और सामाजिक संदेश
इस सहायता के माध्यम से उन कथावाचकों को भी आईना दिखाया गया है जो धर्म के नाम पर केवल धन संचय करते हैं। संत रामपाल जी महाराज ने सिद्ध किया है कि भक्तों से प्राप्त दान का एक एक पैसा समाज के उत्थान और संकटग्रस्त लोगों की सहायता में खर्च होना चाहिए।
पड़ोसी गांव के निवासी सतीश ने भी इस कार्यप्रणाली की सराहना करते हुए कहा कि किसानों के लिए इससे बड़ा पुण्य का कार्य कोई दूसरा नहीं हो सकता। यह भी स्पष्ट किया गया कि यह सेवा राजनीति या वोट बैंक के लिए नहीं, बल्कि निस्वार्थ भाव से राष्ट्र हित और मानव सेवा के लिए है।
निष्कर्ष: कुकड़ोला के भविष्य की नई शुरुआत
अंततः संत रामपाल जी महाराज द्वारा दी गई यह सहायता कुकड़ोला के किसानों के लिए एक वरदान सिद्ध हुई है। गांव वालों ने संकल्प लिया है कि वे आपसी सहयोग से दिन रात काम करके खेतों से पानी बाहर निकालेंगे, ताकि अगली फसल की बिजाई समय पर हो सके।
इस पहल ने न केवल गांव की आर्थिक स्थिति को सुधारा है, बल्कि समाज में एकता और सेवा का नया संचार भी किया है। कुकड़ोला की सड़कों पर बज रहे ढोल और ग्रामीणों के चेहरों की मुस्कान इस बात की गवाह है कि जब व्यवस्था हार जाती है, तब संत रामपाल जी महाराज जैसे महापुरुष ही समाज का संबल बनते हैं। यह सेवा गाथा आने वाली पीढ़ियों के लिए मानवता का एक अमर दस्तावेज रहेगी।



