संत रामपाल जी महाराज ने दी बाढ़ में डूबे खेदड़ गांव को 24 घंटे में करोड़ों की मदद, किसानों के चेहरों पर लौटी मुस्कान

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हिसार, हरियाणा: जहाँ एक ओर पूरा हरियाणा भीषण बाढ़ की चपेट में है, वहीं दूसरी ओर सरकारी तंत्र की धीमी प्रतिक्रिया से निराश किसानों के लिए संत रामपाल जी महाराज भगवान बनकर सामने आए है। हिसार जिले की बरवाला तहसील के खेदड़ गांव में, जहाँ हजारों एकड़ भूमि जलमग्न हो चुकी थी और अगली फसल की उम्मीदें धूमिल पड़ गई थीं, संत रामपाल जी महाराज ने मात्र 24 घंटों के भीतर करोड़ों रुपये की राहत सामग्री पहुंचाकर एक अनूठी मिसाल पेश की है। यह केवल एक सहायता अभियान नहीं, बल्कि डूबते हुए गांवों को जीवनदान देने का एक महायज्ञ है, जिसने निराशा के अंधकार में आशा का नया सवेरा ला दिया है।

बाढ़ की विभीषिका और प्रशासनिक उदासीनता

खेदड़ गांव पिछले कई दिनों से बाढ़ की एक भयावह त्रासदी झेल रहा था। गांव की लगभग 5000 एकड़ कृषि भूमि दो से तीन फीट पानी में पूरी तरह डूब चुकी थी। धान की फसलें नष्ट हो चुकी थीं, ग्रामीणों के घरों और ढाणियों में कमर तक पानी भर गया था, जिससे आम जन-जीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया था। पशुओं के लिए चारे का संकट खड़ा हो गया था और बच्चों का स्कूल जाना भी बंद हो गया था।

इस विकट परिस्थिति में, ग्रामीणों ने प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों से मदद की गुहार लगाई, लेकिन उन्हें कोरे आश्वासनों के सिवा कुछ नहीं मिला। सरपंच प्रतिनिधि जयपाल के अनुसार, “जितने भी एमएलए, एमपी, मिनिस्टर हैं, वे आते हैं, आश्वासन देते हैं और फाइलें चलती रहती हैं। अगर समय पर जल निकासी नहीं हुई, तो हमारे लिए वह मदद किस काम की?” इस प्रशासनिक उदासीनता के कारण ग्रामीणों, विशेषकर किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें गहरी हो गई थीं, क्योंकि गेहूं की बिजाई का समय निकलता जा रहा था और उन्हें अपना भविष्य अंधकारमय नजर आ रहा था।

अखबार की एक खबर बनी उम्मीद की किरण

जब चारों ओर से निराशा हाथ लग रही थी, तब दैनिक जागरण अखबार में छपी एक खबर खेदड़ गांव के लिए उम्मीद की किरण बनकर आई। गांव के एक निवासी, सुभाष ने अखबार में पढ़ा कि संत रामपाल जी महाराज की संस्था ने बाढ़ से प्रभावित आस-पास के गांवों, गुराना और बधावड़ में, पानी निकासी के लिए मोटरें और पाइप पहुंचाकर बड़ी मदद की है।]

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इस खबर ने खेदड़ के ग्रामीणों में एक नई आशा का संचार किया। उन्होंने आपस में चर्चा की और तत्काल संत रामपाल जी महाराज के अनुयायियों से संपर्क साधा। ग्राम पंचायत ने एकजुट होकर एक प्रार्थना पत्र तैयार किया, जिसमें गांव की दयनीय स्थिति का वर्णन करते हुए तत्काल सहायता की मांग की गई थी। यह प्रार्थना पत्र लेकर सरपंच प्रतिनिधि, गौशाला प्रधान और अन्य पंच-मेंबर बरवाला स्थित आश्रम पहुंचे और संत जी के चरणों में अपनी अर्जी लगाई।

अर्जी स्वीकार, 24 घंटे के भीतर पहुंची करोड़ों की राहत

खेदड़ ग्राम पंचायत की प्रार्थना को संत रामपाल जी महाराज ने अभूतपूर्व तत्परता से स्वीकार किया। अर्जी मिलने के कुछ ही घंटों के भीतर उन्होंने राहत सामग्री भेजने का आदेश जारी कर दिया। उनके सेवादारों ने दिन-रात एक करके मात्र 24 घंटों के भीतर वह सब कुछ खेदड़ गांव पहुंचा दिया, जिसकी ग्रामीणों ने मांग की थी। राहत सामग्री का सामान इतना विशाल था कि उसे लाने के लिए 10 से 12 पिकअप ट्रकों का काफिला गांव पहुंचा।

पहुंचाई गई प्रमुख सामग्री:

  • पाइपलाइन: 44,000 फीट लंबी, 8-इंची मोटी पाइपलाइन।
  • मोटरें: पांच बड़ी, 15 हॉर्स पावर (HP) की शक्तिशाली मोटरें।
  • बिजली केबल: 600 मीटर लंबी हेवी-ड्यूटी बिजली की तार।
  • अन्य सामान: मोटरों को चलाने के लिए स्टार्टर, नट-बोल्ट, क्लिप, पाइप जोड़ने के लिए फेविकोल और फिटिंग का हर छोटा-बड़ा सामान।

यह त्वरित और व्यापक सहायता देखकर ग्रामीण आश्चर्यचकित और अभिभूत हो गए। उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी कि उनकी प्रार्थना पर इतनी जल्दी और इस पैमाने पर सुनवाई होगी।

मदद के साथ जिम्मेदारी का संकल्प पत्र

संत रामपाल जी महाराज की इस मुहिम की सबसे अनूठी बात यह थी कि उन्होंने केवल सामग्री देकर अपना कर्तव्य पूरा नहीं समझा, बल्कि यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी भी ली कि इस सहायता का सही उपयोग हो और गांव को बाढ़ से स्थायी निजात मिले। सामग्री के साथ उनके अनुयायियों ने ग्राम पंचायत को एक “निवेदन पत्र” भी सौंपा।

इस पत्र में स्पष्ट लिखा था कि, “सामान चाहे कितना भी लगे, लेकिन गांव से पानी निकलना चाहिए।” पत्र में यह भी कहा गया कि यदि दी गई सामग्री से निर्धारित समय पर पानी नहीं निकलता है और अगली फसल की बिजाई नहीं हो पाती है, तो इसमें गलती ग्रामीणों की मानी जाएगी और भविष्य में ट्रस्ट उनके गांव की कोई मदद नहीं करेगा। साथ ही, यह आश्वासन भी दिया गया कि यदि और सामान की आवश्यकता पड़ती है, तो वे निसंकोच दोबारा प्रार्थना कर सकते हैं।

इस पहल को पूरी तरह पारदर्शी बनाने के लिए, ट्रस्ट ने ड्रोन से तीन वीडियो बनाने की योजना भी बताई: पहली, पानी से भरे गांव की; दूसरी, पानी निकलने के बाद की; और तीसरी, जब खेतों में फसलें लहलहा रही होंगी। इन वीडियो को सभी सत्संगों और समागमों में दिखाया जाएगा, ताकि दानदाताओं को विश्वास हो कि उनके पैसे का सदुपयोग हो रहा है।

किसानों ने जताया आभार, बोले – “संत नहीं, भगवान हैं”

इस अभूतपूर्व मदद को पाकर खेदड़ गांव के लोगों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उन्होंने संत रामपाल जी महाराज और उनकी पूरी टीम का तहे दिल से धन्यवाद और अभिनंदन किया। एक ग्रामीण ने भावुक होकर कहा, “हम बहुत खुश हैं। रामपाल जी महाराज से जैसा काम कोई नहीं करता। सरकार तो आश्वासन देकर चली जाती है, लेकिन काम नहीं करती।”

सरपंच प्रतिनिधि ने कहा, “परसों हमने अर्जी लगाई थी और आज हमारे गांव में पूरा सामान लेकर टीम पहुंच चुकी है। गुरु जी किसी भगवान से कम नहीं हैं।” ग्रामीणों ने विश्वास दिलाया कि वे संत जी द्वारा दिए गए संकल्प पत्र पर 100% खरा उतरेंगे और दोगुनी मेहनत करके अपने गांव को बाढ़ से मुक्त कराएंगे ताकि गेहूं की अगली फसल समय पर बोई जा सके।

अंततः, खेदड़ गांव की यह घटना सिर्फ एक राहत कार्य का उदाहरण नहीं है, बल्कि यह इस बात का प्रमाण है कि सच्ची सेवा, सही इरादे और कुशल प्रबंधन से कैसे बड़ी से बड़ी आपदा पर भी विजय प्राप्त की जा सकती है। संत रामपाल जी महाराज की अन्नपूर्णा मुहिम ने न केवल एक गांव को भौतिक संकट से उबारा है, बल्कि लाखों किसानों के दिलों में यह विश्वास भी जगाया है कि मानवता और करुणा आज भी जीवित है।

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