February 5, 2026

खाबड़ा कला जलभराव संकट: 2013 से चली आ रही किसानों की पीड़ा को संत रामपाल जी महाराज ने मिटाया 

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हरियाणा के फतेहाबाद जिले की भट्टू कला तहसील का गांव खाबड़ा कला बीते एक दशक से भी अधिक समय से गंभीर जलभराव और सेमग्रस्त समस्या से जूझ रहा है। वर्ष 2013 से लगातार बढ़ते जलस्तर ने गांव की करीब 2000 एकड़ उपजाऊ कृषि भूमि को बंजर बना दिया। खेतों में महीनों तक पानी भरा रहने से फसलें नष्ट होती रहीं, जिससे किसानों की आय समाप्त हो गई।

हालात इतने भयावह हो चुके थे कि सरकार द्वारा लगाए गए ट्यूबवेल और ड्रेनेज योजनाएं भी पूरी तरह नाकाफी साबित हुईं। खेती रुकने से गांव में बेरोजगारी बढ़ी, कर्ज का बोझ बढ़ा और कई किसान परिवार मानसिक तनाव के कारण पलायन व आत्मघाती कदमों की कगार तक पहुंच गए।

प्रशासनिक असफलता के बाद गांव वालों की प्रार्थना

जब वर्षों तक सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने और ज्ञापन देने के बाद भी कोई ठोस समाधान नहीं निकला, तब ग्राम पंचायत और गांव के लोगों ने सामूहिक रूप से एक अलग मार्ग चुना। गांव वालों ने अपनी पीड़ा और जरूरतों को विस्तार से लिखते हुए संत रामपाल जी महाराज के चरणों में एक प्रार्थना पत्र भेजा। इस प्रार्थना में स्पष्ट किया गया कि यदि समय रहते जल निकासी की व्यवस्था नहीं हुई, तो आने वाली फसलों की बुआई भी असंभव हो जाएगी और गांव का भविष्य पूरी तरह अंधकारमय हो जाएगा।

प्रार्थना के बाद त्वरित सर्वे और स्वीकृति

प्रार्थना पत्र मिलते ही संत रामपाल जी महाराज के निर्देश पर पूरे क्षेत्र का त्वरित सर्वे कराया गया। गांव के प्रभावित रकबे, जलभराव की गहराई और आवश्यक संसाधनों का आकलन किया गया। रिपोर्ट तैयार होते ही बिना किसी देरी के स्वीकृति दी गई। यह प्रक्रिया इतनी तेज और व्यवस्थित थी कि ग्रामीणों को वर्षों की निराशा के बाद पहली बार उम्मीद दिखाई दी। महज सात दिनों के भीतर राहत सामग्री गांव तक पहुंचाने की योजना को अमल में लाया गया।

सात दिनों में रिकॉर्ड स्तर की राहत सामग्री

गांव की विशाल समस्या को देखते हुए संत रामपाल जी महाराज ने अभूतपूर्व सहायता भेजी। इसके तहत खाबड़ा कला के लिए 20,000 फुट लंबी 8 इंची पाइपलाइन और तीन शक्तिशाली 20 एचपी की मोटरें भेजी गईं। यह सहायता केवल मुख्य उपकरणों तक सीमित नहीं रही, बल्कि पूरी व्यवस्था के साथ दी गई। पाइपलाइन जोड़ने के लिए आवश्यक नट-बोल्ट, जॉइंट, फ्लैंज, स्टार्टर और फेविकोल जैसी छोटी-से-छोटी सामग्री भी साथ भेजी गई, ताकि ग्राम पंचायत को बाजार से कुछ भी खरीदने की जरूरत न पड़े और कार्य तुरंत शुरू हो सके।

क्रमांकश्रेणीसामग्री / व्यवस्थामात्रा / विवरण
1पाइपलाइन8 इंच व्यास की पाइप20,000 फुट
2मोटर पंप20 एचपी मोटर3 यूनिट
3मोटर एक्सेसरीस्टार्टरपूर्ण सेट
4फिटिंग सामग्रीनट-बोल्टपूर्ण सेट
5कनेक्टिविटीजॉइंट / फ्लैंजपूर्ण सेट
6सीलिंग सामग्रीफेविकोलआवश्यक मात्रा

ग्राम पंचायत की पारदर्शिता और जिम्मेदारी

लाखों रुपये मूल्य की इस राहत सामग्री को लेकर ग्राम पंचायत ने पूर्ण पारदर्शिता और जवाबदेही का उदाहरण प्रस्तुत किया। पंचायत ने निर्णय लिया कि सभी पाइप और मोटरें सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में सुरक्षित स्थान पर रखी जाएंगी। साथ ही यह संकल्प लिया गया कि स्थापना, जल निकासी और खेतों की स्थिति में सुधार की पूरी प्रक्रिया का वीडियो रिकॉर्ड किया जाएगा और समय-समय पर संत रामपाल जी महाराज तक भेजा जाएगा, ताकि यह स्पष्ट रहे कि दी गई सहायता का सही और ईमानदार उपयोग हो रहा है।

ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों की प्रतिक्रिया

सरपंच, पंचायत सदस्य, जिला परिषद प्रतिनिधि और गांव के बुजुर्ग किसानों ने इस सहायता को ऐतिहासिक बताया। ग्रामीणों का कहना था कि जहां वर्षों से सरकारी योजनाएं अधूरी पड़ी रहीं, वहां संत रामपाल जी महाराज के एक आदेश से सात दिनों में समाधान की दिशा तय हो गई। 

यह भी पढ़ें: संत रामपाल जी महाराज ने अन्नपूर्णा मुहिम के माध्यम से कलिंगा गांव को दी जल प्रलय से मुक्ति

कई किसानों ने भावुक होकर कहा कि यह केवल जलभराव से मुक्ति नहीं, बल्कि उनके आत्मसम्मान और जीवन की पुनः शुरुआत है। गांव के प्रतिनिधियों ने यह भी स्वीकार किया कि उन्होंने इससे पहले इतनी त्वरित और प्रभावी सहायता कहीं नहीं देखी।

किसानों के लिए स्थायी समाधान की नींव

यह राहत केवल तात्कालिक संकट तक सीमित नहीं है। 20,000 फुट पाइपलाइन को स्थायी रूप से जमीन में दबाकर भविष्य में भी जलभराव से निपटने की व्यवस्था की गई है। गांव वालों का विश्वास है कि अब चाहे कितनी भी बारिश हो, खेतों में पानी जमा नहीं होगा और समय रहते निकासी संभव होगी। इससे न केवल आने वाली गेहूं की फसल की बुआई संभव होगी, बल्कि आने वाले वर्षों में भी खेती सुरक्षित रहेगी और किसान आर्थिक रूप से मजबूत बन सकेंगे।

सेवा के साथ दायित्व और अनुशासन का संदेश

इस पूरी राहत प्रक्रिया के साथ संत रामपाल जी महाराज का स्पष्ट संदेश रहा कि सेवा तभी सफल मानी जाएगी, जब उसका सही उपयोग हो और अपेक्षित परिणाम सामने आएं। इसलिए गांव वालों को यह जिम्मेदारी भी दी गई कि वे समय पर पानी निकालें, खेत तैयार करें और अगली फसल की बुआई सुनिश्चित करें। यह दृष्टिकोण दिखाता है कि परमार्थ केवल सहायता देना नहीं, बल्कि समाज को आत्मनिर्भर बनाना है।

खाबड़ा कला की कहानी: उम्मीद से भविष्य तक

खाबड़ा कला की यह कहानी केवल 20,000 फुट पाइप और तीन मोटरों की नहीं है, बल्कि उस विश्वास और जवाबदेही की कहानी है, जिसने वर्षों से पीड़ित किसानों को नई दिशा दी। गांव वालों ने माना कि जब शासन-प्रशासन से समाधान नहीं मिला, तब संत रामपाल जी महाराज ने निस्वार्थ भाव से आगे बढ़कर अन्नदाता के आंसू पोंछे। यह राहत गांव के लिए केवल एक सुविधा नहीं, बल्कि एक नई सुबह, नया आत्मविश्वास और सुरक्षित भविष्य की ओर बढ़ता मजबूत कदम है।

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