भारत (29 जनवरी 2026): जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज के सानिध्य में आज परमेश्वर कबीर बंदी छोड़ जी का 508वां निर्वाण दिवस पूरे विश्व में अत्यंत श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। इस विशेष अवसर पर भारत और नेपाल के विभिन्न सतलोक आश्रमों में विशाल समागमों का आयोजन किया गया। यह आयोजन न केवल आध्यात्मिक दृष्टि से बल्कि सामाजिक सेवा की दृष्टि से भी मील का पत्थर साबित हुआ।
निर्वाण दिवस का ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व
कबीर परमेश्वर आज से लगभग 508 वर्ष पूर्व, माघ महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मगहर (उत्तर प्रदेश) की पावन धरती से अपने अनुयायियों और तत्कालीन राजाओं (बिजली खां पठान और बीर देव सिंह बघेल) के सामने सशरीर सतलोक (निजधाम) प्रस्थान कर गए थे। उस समय वहां केवल सुगंधित पुष्प मिले थे, जिसे हिंदू और मुस्लिम दोनों ने आपस में बांट लिया था।
इसी ऐतिहासिक दिन की स्मृति में जगतगुरु संत रामपाल जी महाराज के मार्गदर्शन में यह समागम आयोजित किया गया, ताकि दुनिया को पूर्ण परमात्मा की जानकारी और सत्य भक्ति का मार्ग मिल सके।
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विशाल आध्यात्मिक सत्संग का आयोजन
समागम के दौरान तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज के मंगल प्रवचन एल.ई.डी. स्क्रीन्स के माध्यम से प्रसारित किए गए। सत्संग में बताया गया कि कबीर साहिब ही पूर्ण ब्रह्म हैं और उनका मगहर से सशरीर गमन करना इस बात का प्रमाण है कि वे काल के जाल से मुक्त अविनाशी परमात्मा हैं। संत जी ने पवित्र वेदों, गीता, कुरान और बाइबल से प्रमाणित किया कि मनुष्य जन्म का मुख्य उद्देश्य पूर्ण परमात्मा की भक्ति कर मोक्ष प्राप्त करना है।
अखंड पाठ और विशाल भंडारा
इस उपलक्ष्य में सभी आश्रमों में ‘अमर ग्रंथ साहिब’ का अखंड पाठ किया गया। साथ ही, समागम में आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के लिए विशाल भंडारे की व्यवस्था की गई थी। शुद्ध देसी घी से तैयार लड्डू, बूंदी और अन्य प्रसादों का वितरण 24 घंटे निशुल्क चलता रहा। अनुशासन ऐसा था कि लाखों की भीड़ के बावजूद कहीं भी अव्यवस्था देखने को नहीं मिली।
विदेश में भी मनाया गया कबीर परमेश्वर निर्वाण दिवस
कबीर परमेश्वर निर्वाण दिवस दुनिया भर के 15 देशों में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। यह पर्व यूनाइटेड किंगडम (United Kingdom), संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) (विशेषकर टेक्सास, कैलिफोर्निया और इंडियाना में), और कनाडा (Canada) में मनाया गया। इसके अतिरिक्त, यूरोप में इटली (Italy), बेल्जियम (Belgium) और नीदरलैंड (Netherlands) (हेग सहित) में भी इसका आयोजन हुआ। एशियाई और मध्य-पूर्वी देशों में यह दिवस नेपाल (Nepal), पाकिस्तान (Pakistan), कतर (Qatar) और संयुक्त अरब अमीरात (UAE – दुबई) में भी मनाया गया।
समाज सेवा का अनूठा उदाहरण: रक्तदान और देहदान
संत रामपाल जी महाराज का नारा है कि “जीव हमारी जाति है, मानव धर्म हमारा”। इसी भावना को करते हुए श्रद्धालुओं ने भारी संख्या में रक्तदान किया। विभिन्न आश्रमों से प्राप्त 28 जनवरी 2026 की रिपोर्ट निम्नलिखित है:
| क्रमांक | आश्रम का नाम | रक्तदान (यूनिट) | रमैनी (दहेज मुक्त विवाह) | देहदान संकल्प |
| 1 | सतलोक आश्रम, बैतूल (Betul) | 283 | 35 | 3585 |
| 2 | सतलोक आश्रम, किठोदा इंदौर (Indore) | 79 | 14 | 84 |
| 3 | सतलोक आश्रम, धूरी (Dhuri) | 81 | 00 | — |
| 4 | सतलोक आश्रम, खमाणों (Khamanon) | 127 | 03 | — |
| 5 | सतलोक आश्रम, धनाना धाम (Dhanana) | 243 | 21 | — |
| 6 | सतलोक आश्रम, भिवानी (Bhiwani) | 21 | 04 | — |
| 7 | सतलोक आश्रम, कुरुक्षेत्र (Kurukshetra) | 155 | 04 | — |
| 8 | सतलोक आश्रम, शामली (Shamli) | 52 | 07 | — |
| 9 | सतलोक आश्रम, सीतापुर (Sitapur) | 65 | 16 | — |
| 10 | सतलोक आश्रम, सोजत (Sojat) | 163 | 17 | 53 |
| 11 | सतलोक आश्रम, धवलपुरी (Dhawalpuri) | 366 | 08 | 00 |
| 12 | सतलोक आश्रम, मुंडका (Mundka) | 00 | 10 | — |
| 13 | सतलोक आश्रम, धनुषा (Nepal) | 57 | 07 | — |
| कुल | 1692 | 146 | 3722 |
दहेज मुक्त भारत: 17 मिनट में रमैनी (विवाह)
समागम का मुख्य आकर्षण ‘रमैनी’ रही। संत रामपाल जी महाराज के शिष्यों ने बिना किसी दान-दहेज, बैंड-बाजे या फिजूलखर्ची के मात्र 17 मिनट के असुर निकंदन रमैनी के साथ विवाह संपन्न किए। यह पहल समाज में कैंसर की तरह फैली दहेज प्रथा को जड़ से खत्म करने का एक सशक्त संदेश है।
नशा मुक्ति और बुराई त्याग का संकल्प
सत्संग सुनकर हजारों युवाओं और लोगों ने बीड़ी, सिगरेट, शराब, मांस और अन्य नशीले पदार्थों को हमेशा के लिए त्यागने का संकल्प लिया। संत जी के अनुयायी न केवल नशा मुक्त जीवन जीते हैं, बल्कि किसी भी प्रकार की रिश्वतखोरी या चोरी जैसी बुराइयों से भी दूर रहते हैं।
आध्यात्मिक प्रदर्शनी बनी विशेष आकर्षण
तीन दिवसीय समागम में आयोजित आध्यात्मिक प्रदर्शनी श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रही। आमतौर पर विज्ञान प्रदर्शनियों या संग्रहालयों जैसी अवधारणा से जुड़ी प्रदर्शनियों के विपरीत, संत रामपाल जी महाराज के आश्रमों में लगाई गई यह प्रदर्शनी धार्मिक ग्रंथों और शास्त्रों पर आधारित प्रमाणों को प्रस्तुत करती दिखी। प्रदर्शनी में वेदों सहित विभिन्न धर्मग्रंथों के माध्यम से पूर्ण परमात्मा कबीर साहिब से जुड़े संदर्भ प्रदर्शित किए गए। इस अवसर पर संत रामपाल जी महाराज को मिले विभिन्न सम्मानों, पगड़ियों, प्रतीक चिन्हों और तस्वीरों की विस्तृत प्रस्तुति भी की गई, साथ ही हाल के महीनों में आयोजित सम्मान समारोहों की झलक दिखाई गई। प्रदर्शनी में सृष्टि रचना से जुड़े विवरण, हरियाणा में बाढ़ के दौरान की गई सहायता से संबंधित चित्रण और संत रामपाल जी महाराज द्वारा संचालित अन्नपूर्णा मुहिम की जानकारी भी दर्शाई गई, जिसे देखकर बड़ी संख्या में आगंतुक अचंभित नजर आए।
आध्यात्मिक प्रदर्शनी के साथ साथ दाँत और नेत्र चिकित्सा शिविर भी लगाया गया जिसमे कई लोगों ने पूरी तरह बिना शुल्क के स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठाया।
एक नए युग की शुरुआत
परमेश्वर कबीर बंदी छोड़ जी का यह 508वां निर्वाण दिवस केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज सुधार का एक बड़ा आंदोलन बनकर उभरा है। संत रामपाल जी महाराज समाज सुधार और अध्यात्म के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। उन्होंने शास्त्र-आधारित भक्ति का प्रचार कर अंधविश्वासों को दूर करने का प्रयास किया है। समाज को नशा-मुक्त और दहेज-मुक्त बनाने के लिए उन्होंने ‘रमैनी’ (दहेज रहित विवाह) की अनूठी पहल शुरू की है। उनके सत्संगों के माध्यम से लाखों लोग नैतिक जीवन जीने और सामाजिक बुराइयों को त्यागने के लिए प्रेरित हुए हैं। संत रामपाल जी महाराज के नेतृत्व में एक ऐसे समाज का निर्माण हो रहा है जहाँ भक्ति के साथ-साथ भाईचारा, मानवता और नैतिकता सर्वोपरि है। अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए विज़िट करे jagatgururampalji.org वेबसाइट पर।



