Mother’s day in Hindi: मदर्स डे क्यों मनाया जाता है? क्या है इसका महत्व!

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Last Updated on 10 May 2023, 6:14 PM IST | International Mother’s day in Hindi : मदर्स डे, हर साल के मई महीने के दूसरे रविवार को मनाया जाता है। जोकि इस साल 14 मई को मनाया जायेगा। इस अवसर पर जानिए यह दिवस क्या है तथा क्यों मनाया जाता है? मदर्स डे का महत्व क्या है? आदि। साथ ही, यह आर्टिकल केवल माँ के बारे में नहीं बल्कि एक अद्भुत ज्ञान से अवगत कराने के लिए भी है इसलिए आपको इसे आखिरी तक पढ़ना लाभकारी सिद्ध होगा, आइए Mother’s day के बारे में विस्तार से जानते है।

International Mother’s day Date in India [Hindi]

मदर्स डे प्रत्येक वर्ष मई महीने के दूसरे रविवार को मनाया जाता है। इस वर्ष 2023 को यह दिन 14 मई को मनाया जाएगा। इस दिन सन्तान अपनी माता के त्याग के प्रति आदर प्रकट करने के लिए उन्हें विशेष उपहार देते हैं। 

Importance of International Mother’s day in Hindi 

कहते हैं दुनिया में माँ की मोहब्बत का कोई वार पार नही है। जब दवा काम न आये तब नजर उतारती हैं, ये माँ हैं साहब हार कहाँ मानती हैं। मां का आँचल अपनी संतान के लिए कभी छोटा नहीं पड़ता। माँ का विश्वास और प्रेम अपनी संतान के लिए इतना गहरा और अटूट होता है कि माँ अपने बच्चे की खुशी के खातिर सारी दुनिया से लड़ सकती है। वो एक अकेली बहुत होती है बुरी नजरों और दुनिया के स्वार्थ से अपनी संतान  को बचाने के लिए।

International Mothers Day in Hindi: इतिहास से लेकर वर्तमान तक माँ की ममता के अंसख्यों किस्से गवाही देते हैं कि माँ का प्यार औलाद के लिए सबसे लड़ जाने और जान पर खेल कर भी सन्तान को सुख देने के लिए कभी पीछे नहीं हटा। विश्वप्रसिद्ध है कि बल्ब जैसी अद्भुत चीज़ों के आविष्कारक, थॉमस अल्वा एडिसन को स्कूल वालों ने मन्द बुद्धि कहकर निकाल दिया था। यह बात उनकी माँ ने उनसे हमेशा छुपाई और स्वयं घर पर उन्हें शिक्षित किया। वे इस बात को कभी नही जान पाये कि स्कूल से उन्हें क्यों निकाला गया था। बहुत समय पश्चात, कई आविष्कारों के बाद उन्हें स्कूल की डायरी मिली जिसमे लिखा था कि आपका बेटा मंदबुद्धि है वह हमारे स्कूल के लायक नहीं।

सन्त मार्ग में प्रसिद्ध सन्त गरीबदास जी महाराज ने अच्छी नारियों, जो उत्तम गुणयुक्त सन्तान उत्पन्न करती है जैसे प्रह्लाद, ध्रुव, मीराबाई आदि, के बारे में कहा है

गरीब नारी नारी क्या करै, नारी नर की खान|

नारी सेती उपजे नानक पद निरबान||

संत गरीबदास जी

अर्थात: नारी की क्या महिमा बताई जाए, नारी तो खान है महापुरुषों की। आशय है कि गुणयुक्त सन्तान होने का श्रेय गरीबदास जी ने नारी को ही दिया है।

मदर्स डे का इतिहास (History of Mother’s Day in Hindi)

मदर्स डे मनाने की शुरुआत संयुक्त राज्य अमेरिका में साल 1908 में एना जार्विस ने की थी। जिसके बाद एना जार्विस के प्रयासों के कारण 1914 में संयुक्त राज्य अमेरिका में मदर्स डे को हर साल मई के दूसरे रविवार को मनाने की आधिकारिक मान्यता मिली। तब से, मदर्स डे दुनिया भर में मनाया जाने वाला एक लोकप्रिय दिन बन गया।

International Mother’s Day Celebration [Hindi]

हमने जाना कि मदर्स डे (Mother’s Day celebration Hindi) की शुरुआत अमेरिका से प्रारंभ हुई। पाश्चत्य संस्कृति की नकल करते-करते भारत में भी मदर्स डे अपना लिया गया। मदर्स डे बेस्ट तब होता है जब माताओं को उनकी सन्तान उनके त्याग को ध्यान रखते हुए किसी खास एक दिन नहीं बल्कि हर दिन सम्मान दें। माँ का प्रेम हमारे लिए कभी रात-दिन नही देखता बल्कि सदैव बना रहता है। फिर हम क्यों ममता को केवल एक दिन में बांधते हैं? हमें प्रतिदिन उनका सम्मान करना चाहिए। माँ जब हमारे लिये अपना हर दिन देती है तो हम अपने माँ के प्रति प्यार और सम्मान को एक दिन में क्यों बांधें?

International Mothers Day 2023 Special 

सवाल अभी ये है कि जितना प्रेम एक माँ अपने बच्चे से करती है उतना कौन कर सकता है हमें? ब्रह्मा? विष्णु? कृष्ण? शिव? आदिशक्ति? कौन? उत्तर है पूर्ण परमात्मा। एक माँ अपने बच्चे से जितना प्रेम करती है उससे कहीं ज्यादा पूर्ण परमात्मा अपने बच्चे से करते हैं। कहीं ज़्यादा! यानी कल्पना से परे है। ऐसे ही परमात्मा करुणा के सागर नहीं कहे जाते! तो कौन है वो पूर्ण परमात्मा जो माँ से भी अधिक प्रेम अपनी संतान से करते हैं? उत्तर है कबीर जी। जी हाँ कबीर जी। इन्हीं कविर्देव (कबीर परमेश्वर) की स्तुति में कहा जाता है- 

त्वमेव माता च पिता त्वमेव, 
त्वमेव बन्धु च सखा त्वमेव, 
त्वमेव विद्या च द्रविणम् त्वमेव, 
त्वमेव सर्वं मम् देव देव ।

जिसका विस्तृत विवरण ऋग्वेद मण्डल 1 सूक्त 24 और अथर्ववेद कांड नं. 4 अनुवाक नं. 1 मंत्र 7 में है।

Mothers Day Special [Hindi]: कबीर परमात्मा जी अपनी संतान को ऐसे ही प्रेम करते हैं। सृष्टि रचना के अनुसार हमारे माता-पिता, बहन-भाई, पति-पत्नी एवं जीवन में आने वाले सभी लोग एक दूसरे से पुराने ऋण सम्बंध से जुड़े हैं। इतना प्रेम करने वाली माँ, ध्यान रखने वाले पिता आदि सभी हमारे असली माता पिता नही हैं। अध्ययन करने वाले इस बात से परिचित होंगे कि भारतीय आध्यात्म के दर्शन में ये बात कही जा चुकी है। गीता में स्पष्ट है।

एक लेवा एक देवा दूतं, कोई किसी का पिता न पूतं|

ऋण सम्बंध जुड़ा एक ठाठा, अंत समय सब बारह बाटा||

कबीर साहेब जी हमें बताते हैं कि हम सभी एक दूसरे से अपने पिछले ऋण सम्बन्धों से जुड़े हुए हैं। असली पिता हमारा यहाँ से कई शंख दूर है। कबीर साहेब परमात्मा हैं पर कैसे? कहाँ लिखा है? इसके लिए आप प्रमाण देख सकते हैं- कुरान में, गुरु ग्रन्थ साहेब में, वेदों में, बाइबल में। गुरु ग्रन्थ साहेब की तरह ही कबीर सागर भी आदरणीय ग्रन्थ है जिसमे सृष्टि रचना से लेकर वेदों और पुराणों के गूढ़ रहस्य हमे प्राप्त होते हैं।

हम क्यों और कैसे परमात्मा से दूर हुए?

इस तत्वज्ञान के अनुसार हम आत्माएं अपने निजस्थान सतलोक में थीं। वहां से इस पृथ्वी पर फंसने की एक लंबी कहानी है। हम स्वयं आसक्त होकर यहां चले आये और काल लोक में अब अपने कर्मों और जन्मों के बंधन से बंध गए। ब्रह्मा, विष्णु व महेश आदि देवता केवल हमे कर्मफल ही प्रदान कर सकते हैं, वे न तो विधि का विधान बदल सकते हैं और न ही भाग्य से अधिक दे सकते हैं। भाग्य से अधिक देने वाला एक पूर्ण परमात्मा ही है जिसने सारी सृष्टि को रचा।

गीता अध्याय 18 के श्लोक 66 में ‘सर्वधर्मान्परित्यज्य माम् एकं शरणं व्रज‘ कहकर उस पूर्ण परमात्मा की शरण मे जाने को कहा है जहां जाने के बाद साधक लौटकर संसार मे नहीं आते। साथ ही अध्याय 15 के श्लोक 1 से 4 में सृष्टि रचना का प्रमाण भी मिलता है जिसे उल्टे वृक्ष के रूप में बताया गया है। जड़ों में पूर्णब्रह्म कबीर परमेश्वर (परम अक्षर ब्रह्म/उत्तम पुरुष), तना अक्षर पुरुष (परब्रह्म), डार काल ब्रह्म (क्षर पुरुष) या ज्योति निरंजन तथा तीन शाखाएं तीन गुणों ब्रह्मा, विष्णु, महेश एवं पत्ते संसार का पर्याय हैं। जिससे स्पष्ट है कि पूर्ण परमात्मा कबीर है जो हमारा माता व पिता दोनों है। हम उस परमपिता की शब्द शक्ति से उत्पन्न हैं और प्रेम, विश्वास, दया आदि गुण हमे अपने पिता से मिले हैं। इस संदर्भ में कबीर परमेश्वर स्वयं बताते हैं –

कबीर, अक्षर पुरुष एक पेड़ है, निरंजन वाकी डार।
तीनों देवा साखा हैं, पात रूप संसार।।
कबीर, हमहीं अलख अल्लाह हैं, मूल रूप करतार।
अनंत कोटि ब्रह्मांड का, मैं ही सृजनहार।।

■ Read in English | Mother’s Day: Know About the One Who Is the Originator of Soul

पाठकों हमारा मानव जीवन भक्ति के लिए है। चार प्रकार के प्राणी होते हैं- जेरज (जेर से पैदा होने वाले जैसे मनुष्य), उद्भज (अपने आप पैदा होने वाले), अंडज (अंडे से पैदा होने वाले) और स्वेदज (पसीने से पैदा होने वाले) जोकि मिलकर 84 लाख योनियों का निर्माण करते हैं जिनमें मानव योनि सर्वोत्तम प्रकार की है जो केवल भक्ति के लिए मिली है। लेकिन आखिर पूर्ण परमात्मा की भक्ति कैसे करें? यह कहाँ लिखी है? इसे कौन बताएगा? हमारे इन्ही सभी प्रश्नों के उत्तर हमारे धर्मग्रन्थ देते हैं।

परमात्मा रूपी माँ से कैसे प्रेम पाएं?

गीता अध्याय, 4 के 34 में लिखा है कि तत्वदर्शी सन्तो को दण्डवत प्रणाम करने से परमात्म ज्ञान की प्राप्ति होती है। तत्वदर्शी सन्त की पहचान अध्याय 15 श्लोक 1 से 4 में दी है कि जो संसार रूपी उल्टे वृक्ष को भली तरह समझा दे वह तत्व को जानने वाला है। तत्वदर्शी सन्त को ही कुरान में बाख़बर कहा गया है जो अल्लाह का पता जानता है। वर्तमान में पूर्ण तत्वदर्शी सन्त पूरे विश्व मे मात्र एक सन्त रामपाल जी महाराज जी हैं

संत रामपाल जी महाराज गीता अध्याय 17 श्लोक 23 के अनुसार “ॐ, तत्, सत्, इति, निर्देशः, ब्रह्मणः, त्रिविधः, स्मृृतः,” अर्थात तीन बार मे नामदीक्षा की प्रक्रिया पूर्ण करते हैं। पूर्ण परमात्मा की शरण मे आने से पाप और कष्ट दूर होते हैं। वेदों के अनुसार पूर्ण परमात्मा साधक की आयु भी बढ़ा सकते हैं। वे विधि का विधान बदलने की क्षमता रखते हैं। हमें काल के छलावों में न पड़कर उनकी भक्ति करनी चाहिए, क्योंकि काल को तो जीवो के भक्षण का श्राप है। वह सामने नहीं आता बल्कि अपनी योगमाया से छिपा रहता है। हमारा असली माँ, जन्मदाता परमपिता है जो हमारे शरीर की रचना करता है।

हरि दर्जी का मरम न पाया, जिन यह चोला अजब बनाया

पानी की सुई पवन का धागा, नौ दस मास सीमते लागा।

पांच तत्व की गुदड़ी बनाई, चंद सूरज दो थिगड़ी लगाई।

कोटि यत्न कर मुकुट बनाया, बिच बिच हीरा लाल लगाया।

आपै सीवे आप बनावे, प्राण पुरुष को ले पहरावे।

कहे कबीर सोई जन मेरा नीर खीर का करूँ निबेरा।

(चंद सूरज- इला और पिंगला नाड़ियां; मुकुट-सिर; हीरा लाल- हृदय)

International Mothers Day Gift Ideas (Hindi)

International Mothers Day in Hindi [2023]: बच्चे मदर्स डे पर अपनी माँ को ढेरों उपहार देते हैं। आइए इस एक दिन में उपहार देने की परंपरा को हटाकर हम अपनी माँ की सेवा प्रतिदिन करें। जब माँ का चश्मा टूटे उसे बनवा दें, जिस दिन माँ अधिक थकी हो पैर दबा दें, किसी दिन काम में उनका हाथ बटाएं, उनके साथ बैठें और बातें करें। माँ की आंखें वो आईना हैं, जहां औलाद कभी बूढ़ी नहीं होती। आप अपनी मां को आज ही जीने की राह पुस्तक दे या उन्हें ऑडियो बुक से ज्ञान समझाए। 

हम जानते हैं कि पूर्ण परमात्मा ही हमारा भरतार यानी करता धर्ता है इसका ये अर्थ नहीं है कि हमें माँ को भूल जाना है, बल्कि इसका ये अर्थ है कि हमें अपने ऋण सम्बन्धों को ध्यान रखना है। माता, पिता, भाई, पत्नी, बहन, पति सभी का आदर करना है। स्वयं भक्ति करना है और अन्य को भी प्रेरित करना है अन्यथा यहां चौरासी लाख योनियों में फंसे रहेंगे और हम जिन्हें प्रेम करते हैं, जो हमे प्रेम करते हैं, हमारे माता-पिता आदि वे हमसे बिछड़ जाएंगे। 

हम चाहते हैं कि हमारा साथ सदा रहे तो इस बात को ध्यान रखकर पूर्ण सन्त से नामदीक्षा लेकर भक्ति मार्ग में आगे बढ़ें ताकि हम सभी अपने निज स्थान में जाएं जहां सर्व सुख हैं, जन्म-मृत्यु का बंधन नहीं है और पूर्ण परमात्मा का अथाह प्रेम का सरोवर है। ज्ञान समझें और अपने माता पिता बच्चों को भक्ति की ओर अग्रसर करें। यही है सच्चा प्रेम, सच्ची वफ़ा और सच्चा तोहफा जो आप अपने प्रियजनों को दे सकते हैं।

International Mother’s Day 2023 Quotes in Hindi

गरीब नारी नारी क्या करै, नारी सरगुन बेल|

नारी सेती उपजे, दादू भक्त हमेल||

गरीब नारी नारी क्या करै, नारी का प्रकाश|

नारी सेती उपजे, नारदमुनि से दास||

गरीब नारी नारी क्या करै, नारी निर्गुण नेश|

नारी सेती उपजे ब्रम्हा, विष्णु, महेश||

गरीब नारी नारी क्या करै, नारी मूला माय|

ब्रह्म जोगनि आदि है, चरम कमल ल्यौ लाय||

गरीब नारी नारी क्या करै, नारी बिन क्या होय|

आदि माया ऊँकार है, देखौ सुरति समोय|

गरीब शब्द स्वरूपी ऊतरे, सतगुरु सत्य कबीर|

दास गरीब दयाल हैं, डिगे बंधावैं धीर||

अधिक जानकारी के लिए संत रामपाल जी महाराज एप्प डाउनलोड करेंसंत रामपाल जी से नाम दीक्षा लेकर अपना कल्याण कराएं।  

International Mother’s Day 2023 FAQ [Hindi]

Q. इस वर्ष मदर्स डे कब मनाया जायेगा?

14 मई

Q. प्रतिवर्ष मदर्स डे कब मनाया जाता है?

मई महीने के दूसरे रविवार को

Q. मदर्स डे को आधिकारिक मान्यता कब मिली?

साल 1914

Q. मदर्स डे सर्वप्रथम कब और किसके द्वारा मनाया गया?

एना जार्विस द्वारा 1908 में

Q. वह परमात्मा कौन है जिसे “त्वमेव माता च पिता त्वमेव” कहा जाता है?

कविर्देव (कबीर परमेश्वर)

Q. हमारी उत्पत्ति किस परमेश्वर ने की?

पूर्णब्रह्म कविर्देव (कबीर साहेब) ने

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