International Day Against Drug Abuse 2026: अंतर्राष्ट्रीय मादक द्रव्य निषेध दिवस पर जानिए, शास्त्र अनुकूल भक्ति करके करोड़ों लोग कैसे अपना नशा छोड़ रहे हैं

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Last Updated on 19 June 2026 | हर साल 26 जून को मनाया जाने वाला अंतर्राष्ट्रीय नशा निषेध दिवस (2026) समाज को नशा मुक्त करने के लिए 1987 में संयुक्त राष्ट्र द्वारा शुरू किया गया था। आज के डिजिटल युग में, सोशल मीडिया का प्रभाव युवाओं को मादक पदार्थों की ओर तेजी से आकर्षित कर रहा है, जिससे युवा जागरूकता (Youth Awareness) इस अभियान का सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ बन गई है। नशा न केवल शारीरिक नुकसान पहुँचाता है, बल्कि व्यक्ति के मानसिक स्वास्थ्य (Mental Health) को भी गंभीर रूप से प्रभावित करता है, जिससे अवसाद और तनाव बढ़ता है। इस संकट से निपटने के लिए समाज में आधुनिक पुनर्वास कार्यक्रमों (Rehabilitation Programs) का विस्तार करना अनिवार्य है, ताकि पीड़ितों को सही उपचार मिल सके। इसके साथ ही, जब तक सशक्त सामुदायिक भागीदारी (Community Participation) के जरिए परिवार और स्थानीय संस्थान एकजुट नहीं होंगे, तब तक इस समस्या की रोकथाम असंभव है। इस दिवस का मुख्य उद्देश्य नई चुनौतियों के खिलाफ समाज के हर वर्ग को जागरूक और एकजुट करना है। 

Table of Contents

International Day Against Drug Abuse 2026: मुख्य बिंदु

  • 26 जून को हर साल अंतर्राष्ट्रीय नशा निषेध दिवस मनाया जाता है।
  • इसका उद्देश्य ड्रग्स की लत और इसके दुष्प्रभावों से होने वाली मौतों से लोगों को बचाना है।
  • अंतर्राष्ट्रीय नशा निषेध दिवस (World Drug Day) 2026 के लिए संयुक्त राष्ट्र (UNODC) द्वारा घोषित आधिकारिक वैश्विक थीम “विश्व दवा समस्या: निरंतर मुद्दे, नई चुनौतियाँ, अभिनव प्रतिक्रियाएँ” (“World drug problem: persisting issues, new challenges, innovative responses”) है। 
  • दुनिया भर में करीब 23.4 करोड़ लोग ड्रग्स का इस्तेमाल करते हैं।
  • हर साल ड्रग्स के कारण करीब 2 लाख लोग जान गंवा बैठते हैं।
  • हिंदुस्तान के एकमात्र तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज जी के आशीर्वाद मात्र से लाखों-करोड़ों युवा हुए नशा मुक्त।

Importance of International Day Against Drug Abuse 2026 (अंतर्राष्ट्रीय नशा निषेध दिवस का महत्व) 

अंतर्राष्ट्रीय नशा निषेध दिवस (International Day Against Drug Abuse 2026) का मुख्य मकसद लोगों को नशे से दूर रखना और नशा तस्करी पर लगाम कसना है ताकि बच्चे और बड़ों का भविष्य उज्ज्वल और स्वर्णिम बने। इस मौके पर कई कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिनमें लोगों को नशे के दुष्प्रभावों से अवगत कराया जाता है। 

नशा करने से न केवल अर्थ यानी धन की क्षति होती है, बल्कि कई बीमारियां शरीर में घर कर जाती हैं इससे मानसिक और शारीरिक सेहत पर बुरा असर पड़ता है। इससे कई लोगों की मौत हो जाती है तो कुछ मानसिक तनाव के कारण स्वयं आत्महत्या कर लेते हैं। यह एक बहुत बुरी लत है जो आसानी से नहीं छूटती है। भारत में भी इसके खिलाफ सख्त कानून बने हैं। हालांकि, सामाजिक सशक्तिकरण और समाज को नशा मुक्त करने के लिए और भी सख्त कदम उठाने की जरूरत है।

ड्रग्स के नशे के कारण देश और दुनिया में बनी है भयंकर स्थिति 

भारत के घरेलू बाज़ार में ड्रग्स की खपत चिंताजनक रूप से बढ़ रही है। मादक पदार्थों का अवैध कारोबार और सिंथेटिक दवाओं का चलन देश में तेजी से पैर पसार रहा है, जिसकी रोकथाम के लिए भारत सरकार वर्तमान में लगभग 20 लाख लोगों की भागीदारी वाला देशव्यापी ‘राष्ट्रीय औषधि उपयोग सर्वेक्षण 2025-26’ आयोजित कर रही है। 

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संयुक्त राष्ट्र एजेंसी यूएनओडीसी (UNODC) की नवीनतम विश्व ड्रग रिपोर्ट के आंकड़ों के मुताबिक, दुनियाभर में ड्रग्स का इस्तेमाल करने वाले लोगों की संख्या अब बढ़कर करीब 31.6 करोड़ (316 मिलियन) हो चुकी है। मादक पदार्थों के अत्यधिक सेवन और इससे जुड़ी बीमारियों के कारण अब हर साल दुनिया भर में करीब 5 लाख लोग अपनी जान गंवा देते हैं। 

कब हुई थी अंतर्राष्ट्रीय नशा निषेध दिवस की शुरुआत

अंतर्राष्ट्रीय नशा निषेध दिवस की शुरुआत संयुक्त राष्ट्र की आमसभा ने 7 दिसंबर साल 1987 को की थी जिसके अंदर दुनिया को नशे और उसके दुष्प्रभावों से बचाने के लिए 26 जून को अंतर्राष्ट्रीय मादक द्रव्य निषेध (नशा मुक्ति/निवारण) दिवस मनाने का फैसला किया गया। कई लोग यह दिन लिन जेक्स्यू द्वारा ह्यूमेन, गुआंगडोंग, चीन में पहले अफीम युद्ध से पहले अफीम के व्यापार को समाप्त करने के प्रयास के लिए भी जाना जाता है।

Theme of International Day Against Drug Abuse 2026 (अंतर्राष्ट्रीय नशा निषेध दिवस की थीम)

हर साल 26 जून को अंतरराष्ट्रीय नशा निषेध दिवस मनाया जाता है। वर्ष 2026 के लिए संयुक्त राष्ट्र की वैश्विक थीम “विश्व दवा समस्या: निरंतर मुद्दे, नई चुनौतियाँ, अभिनव प्रतिक्रियाएँ” तय की गई है, जबकि भारत सरकार इसे “नशा मुक्त भारत अभियान – विकसित भारत की पहचान” थीम के तहत मना रही है। यह दिवस नशीली दवाओं के दुरुपयोग और अवैध तस्करी के खिलाफ एकजुट होने का संदेश देता है। डिजिटल जागरूकता, नशा मुक्ति केंद्रों के विस्तार और सामाजिक समर्थन के जरिए युवा पीढ़ी को सुरक्षित रखना ही इस अभियान का मुख्य लक्ष्य है। 

हर साल 26 जून को मनाया जाने वाला अंतर्राष्ट्रीय नशा निषेध दिवस वर्ष 2026 में संयुक्त राष्ट्र (UNODC) की आधिकारिक थीम “विश्व दवा समस्या: निरंतर मुद्दे, नई चुनौतियाँ, अभिनव प्रतिक्रियाएँ” (“World drug problem: persisting issues, new challenges, innovative responses”) के तहत मनाया जा रहा है, जिसका पूरक वैश्विक नारा “Break the Cycle #StopOrganisedCrime” है। वहीं, भारत सरकार इसे राष्ट्रीय थीम “नशा मुक्त भारत अभियान – विकसित भारत की पहचान” के अंतर्गत 17 जून से 26 जून 2026 तक देशव्यापी ‘नशा मुक्त सप्ताह’ के रूप में आयोजित कर रही है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य सिंथेटिक दवाओं के उभरते खतरों से निपटना, संगठित अपराध के चक्र को तोड़ना और आधुनिक डिजिटल जागरूकता व सामाजिक सुधारों के जरिए युवा पीढ़ी को नशा मुक्त बनाना है।

आज के समय में युवाओं में नशे की लत तेजी से बढ़ रही है। साथियों का दबाव (Peer Pressure), सोशल मीडिया का प्रभाव, ऑनलाइन ड्रग तस्करी और सिंथेटिक ड्रग्स की आसान उपलब्धता इस समस्या को और गंभीर बना रही है। नशा न केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाता है बल्कि परिवार और समाज पर भी गहरा प्रभाव डालता है। इससे बचाव के लिए जागरूकता, पारिवारिक सहयोग, उचित परामर्श (Counseling) और नशा मुक्ति केंद्रों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। विद्यालयों और महाविद्यालयों में नियमित जागरूकता अभियान चलाकर युवाओं को इसके दुष्प्रभावों से अवगत कराया जाना चाहिए। साथ ही, आत्मसंयम, सकारात्मक संगति और आध्यात्मिक अनुशासन व्यक्ति को बुरी आदतों से दूर रखने में सहायक हो सकते हैं। यदि समाज, परिवार और व्यक्ति मिलकर प्रयास करें, तो नशा मुक्त और स्वस्थ भारत का निर्माण संभव है।

अंतर्राष्ट्रीय नशा निषेध दिवस विचार (International Day Against Drug Abuse 2026 Quotes in Hindi)

  • मदिरा पीवै कड़वा पानी। सत्तर जन्म श्वान के जानी।। -संत गरीबदास जी महाराज 
  • नशा सर्वप्रथम तो इंसान को शैतान बनाता है। फिर शरीर का नाश करता है। -संत रामपाल जी महाराज   
  • सुरापान मद्य मांसाहारी। गमन करै भोगै पर नारी।। सत्तर जन्म कटत है शीशं। साक्षी साहेब है जगदीशं।। -संत गरीबदास जी महाराज
  • नशीली वस्तुओं को तो गाँव-नगर में भी नहीं रखे, घर की बात क्या। सेवन करना तो दूर सोचना भी नहीं चाहिए।  -संत रामपाल जी महाराज 
  • सौ नारी जारी करै, सुरापान सौ बार। एक चिलम हुक्का भरै, डूबै काली धार।। -संत गरीबदास जी महाराज
  • नशा चाहे शराब, सुल्फा, अफीम, हिरोईन आदि किसी का भी करते हो, यह आपके सर्वनाश का कारण बनेगा।  -संत रामपाल जी महाराज 
  • हुक्का हरदम पीवते, लाल मिलांवे धूर। इसमें संशय है नहीं, जन्म पीछले सूअर।। -संत गरीबदास जी महाराज

नशा मानव जीवन का सबसे बड़ा दुश्मन है, जो न केवल शारीरिक स्वास्थ्य को प्रभावित करता है, बल्कि आत्मा की प्रगति में भी रुकावट डालता है। नशा व्यक्ति को अधर्म की ओर ले जाता है, जिससे वह अपने सच्चे उद्देश्य से भटक जाता है। संत रामपाल जी स्पष्ट रूप से कहते हैं कि सच्चे भक्त को किसी भी प्रकार का नशा नहीं करना चाहिए क्योंकि यह ईश्वर की भक्ति में सबसे बड़ा बाधक है।

धार्मिक ग्रंथों में नशा वर्जित

संत रामपाल जी वेदों, गीता, कुरान और बाइबल जैसे पवित्र ग्रंथों का उल्लेख करते हुए कहते हैं कि इनमें नशे की अनुमति नहीं है। यजुर्वेद में साफ लिखा है कि मादक पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए। गीता में भी कहा गया है कि जो व्यक्ति संयमी नहीं है, वह योग का अधिकारी नहीं बन सकता।

सतभक्ति से नशा छूट सकता है

उनका कहना है कि अगर कोई व्यक्ति सच्चे संत से नाम दीक्षा लेकर सतभक्ति करता है, तो वह नशे जैसी बुरी आदत से अपने आप मुक्त हो सकता है। संत रामपाल जी यह भी बताते हैं कि नशे के खिलाफ कोई हिंसा या बल प्रयोग नहीं होना चाहिए, बल्कि इसे प्रेम, ज्ञान और आध्यात्मिक मार्गदर्शन के माध्यम से ही छोड़ा जा सकता है।

कौन है वह परमसंत जिनके आशीर्वाद मात्र से लाखों-करोड़ों युवाओं ने नशा करना छोड़ा? 

वे परम संत कोई और नहीं जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज हैं। उनके अनुयाई किसी भी प्रकार का कोई भी नशा नहीं करते और जिन लोगों में पहले से नशा करने की बुरी लत थी, संत रामपाल जी महाराज जी से नाम दीक्षा (निशुल्क) लेने के बाद, उनसे आशीर्वाद प्राप्त करने के बाद उनकी भी नशे की आदत छूमंतर हो गयी। नशा मुक्ति के लिए दुनियाभर की सरकारें तमाम प्रयास कर रही है किंतु सब व्यर्थ साबित हो रहा है। वहीं दूसरी ओर हिंदुस्तान के एक परम संत के आशीर्वाद और सतज्ञान से लाखों-करोड़ों युवा नशा मुक्त हो रहे हैं और स्वस्थ जीवन जी रहे हैं।

यदि आप भी हर प्रकार के नशे से मुक्ति चाहते हैं तो साधना टीवी पर प्रत्येक शाम को 7:30 बजे से 8:30 बजे तक सत्संग सुनें, जब ज्ञान समझ में आ जाए तो नाम दीक्षा लेकर, भक्ति करके अपना जीवन सफल बनाएं। आज ही पढ़े जीने की राह पुस्तक और अपने जीवन को सुखमय बनाए।

संत रामपाल जी महाराज के अनुयायियों का मानना है कि वास्तविक नशा मुक्ति केवल आध्यात्मिक ज्ञान और सतभक्ति से संभव है। उनके सत्संगों में शराब, तंबाकू, गुटखा, अफीम, चरस, गांजा और अन्य सभी प्रकार के नशों को शास्त्र-विरुद्ध और मानव जीवन के लिए विनाशकारी बताया जाता है। अनुयायियों के अनुसार, सत्संग सुनने, सतज्ञान को समझने तथा नामदीक्षा लेकर नियमित भक्ति करने से व्यक्ति के भीतर आत्मसंयम और सकारात्मक सोच विकसित होती है, जिससे नशे की इच्छा स्वतः कम होने लगती है। उनका दावा है कि लाखों लोगों ने इसी आध्यात्मिक मार्ग को अपनाकर नशे की आदत छोड़ी और स्वस्थ पारिवारिक तथा सामाजिक जीवन की ओर लौटे हैं। संत रामपाल जी महाराज की शिक्षाएँ प्रेम, संयम, सदाचार और नशामुक्त जीवन को मानव कल्याण का आधार मानती हैं तथा लोगों को सभी प्रकार के व्यसनों से दूर रहने की प्रेरणा देती हैं।

अंतर्राष्ट्रीय मादक द्रव्य निषेध दिवस से संबंधित FAQ

वर्ल्ड ड्रग दिवस (World Drug Day) कब मनाया जाता है?

वर्ल्ड ड्रग दिवस (World Drug Day) प्रत्येक वर्ष 26 जून को सयुक्त राष्ट्र के ड्रग्स और अपराध कार्यालय द्वारा मनाया जाता है। 

वर्ल्ड ड्रग दिवस (World Drug Day) क्यों मनाया जाता है? 

विश्व ड्रग दिवस, हर साल 26 जून को नशीली दवाओं के दुरुपयोग से दुनिया को मुक्त करने के लिए जागरूकता फैलाने और समाधान के उद्देश्य से  मनाया जाता है। प्रत्येक वर्ष व्यक्ति, समाज, और दुनिया भर के विभिन्न संगठन विश्व ड्रग दिवस मनाने के लिए शामिल होते हैं ताकि अवैध ड्रग्स की बड़ी समस्या को समाप्त किया जा सके।

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