February 3, 2026

Indian Army Day 2026 [Hindi]: 15 जनवरी को जयपुर में ऑपरेशन सिंदूर का विशेष प्रदर्शन

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Last Updated on 14 January 2026 IST | Indian Army Day 2026 [Hindi]: फील्ड मार्शल केएम करियप्पा (Field Marshal KM Cariappa) के सम्मान में प्रत्येक वर्ष 15 जनवरी को भारतीय सेना दिवस (Indian Army Day) मनाया जाता है। इस वर्ष भारत 78वां सेना दिवस मना रहा है। इस वर्ष मुख्य परेड राजस्थान की राजधानी जयपुर की जगतपुरा महल रोड पर आयोजित की जा रही है।  इस दिन पूरा देश थल सेना के अदम्य साहस, शौर्य गाथा और बलिदान को याद करता है। आइए इस अवसर पर जानते है कि शूरवीरता के साथ सतभक्ति करने से कैसे पूर्ण मोक्ष की प्राप्ति होती है?

Indian Army Day 2026 के मुख्य बिन्दु

  • प्रत्येक वर्ष 15 जनवरी को सेना दिवस मनाया जाता है
  • फील्ड मार्शल केएम करियप्पा के सम्मान में मनाया जाता है भारतीय सेना दिवस
  • इस वर्ष भारत 78वां सेना दिवस मना रहा है
  • भारतीय सेना दिवस 2026 की आधिकारिक थीम अभी तक सार्वजनिक रूप से घोषित नहीं की गई है। 
  • हालाँकि, जयपुर में सेना दिवस परेड 2026 के कर्टेन रेजर इवेंट को “भारतीय सेना – शौर्य और बलिदान की परंपरा” थीम के तहत आयोजित किया गया । 
  • इस दिवस पर थल सेना के अदम्य साहस, शौर्य गाथा और बलिदान को याद करते हैं
  • भारतीय सेना ने अपने मेजर द्वारा बनाई पहली यूनिवर्सल बुलेटप्रूफ जैकेट ‘शक्ति’ की प्रदर्शित
  • वर्ष 2026 में सेना दिवस परेड पहली बार जयपुर की जगतपुरा महल रोड (सिविलियन क्षेत्र) पर आयोजित होगी। इसमें आधुनिकीकरण और युद्ध तत्परता पर फोकस रहेगा, जिसमें ब्रह्मोस मिसाइल, टैंक्स, ऑपरेशन सिंदूर में उपयोग उपकरणों का प्रदर्शन, फ्लाई-पास्ट, मार्चिंग कंटिंजेंट्स, मार्शल आर्ट्स डिस्प्ले तथा ड्रोन टेक्नोलॉजी डेमॉन्स्ट्रेशन प्रमुख होंगे।
  • शूरवीरता के साथ सतभक्ति करने से पूर्ण मोक्ष की प्राप्ति होती है

कब और क्यों मनाते हैं भारतीय सेना दिवस (Indian Army Day 2026)?

प्रत्येक वर्ष 15 जनवरी को सेना दिवस (Indian Army Day 2026) मनाया जाता है। इस वर्ष भारत में 78वां सेना दिवस मनाया जा रहा है। यह दिवस प्रत्येक वर्ष 15 जनवरी को फील्ड मार्शल के एम करियप्पा (Field Marshal KM Cariappa) के सम्मान में मनाया जाता है। वर्ष 1949 में इसी दिन ब्रिटिश भारत के अंतिम कमांडर-इन-चीफ जनरल सर फ्रांसिस रॉय बुचर (General Sir Francis Bucher) से स्वाधीन भारत के तत्कालीन लेफ्टिनेंट जनरल के एम करियप्पा ने कार्य भार ग्रहण किया। 1947-48 के Indo-Pak युद्ध में करियप्पा ने वेस्टर्न फ्रंट (पश्चिमी मोर्चे) पर भारतीय सेना की कमान संभाली थी और ज़ोजिला, द्रास, कारगिल आदि की पुनरुद्धार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

प्रत्येक वर्ष 15 जनवरी को भारतीय सेना दिवस मनाया जाता है। इस वर्ष भारतीय सेना दिवस की थीम है, “आधुनिकीकरण, समावेशिता और सार्वजनिक सहभागिता”। यह दिवस भारतीय सेना की महत्ता, भारतीय वीरों को सम्मान देने और लोगों को जागरूक करने के लिए मनाया जाता है।

भारतीय सेना दिवस 2026 की आधिकारिक थीम किसी सरकारी घोषणा या विश्वसनीय रिपोर्ट में प्रकाशित नहीं हुई है। हालांकि, 78वें भारतीय सेना दिवस के अवसर पर जयपुर में आयोजित होने वाले परेड और समारोहों में भारतीय सेना की समकालीन क्षमताओं, आधुनिक तकनीक और देश-जन के साथ जुड़ाव को प्रमुखता से प्रदर्शित किया जाएगा। 15 जनवरी 2026 को आयोजित होने वाली परेड में Operation Sindoor जैसे आधुनिक अभियानों का भी प्रदर्शन और “शौर्य संध्या” कार्यक्रम शामिल होगा, जो सेना की बहादुरी और बलिदान की झलक प्रस्तुत करेगा। 

कैसे मनाते हैं भारतीय सेना दिवस?

भारतीय सेना दिवस (Indian Army Day 2026) सैन्य परेड, सैन्य प्रदर्शनियों और अन्य अनेकों कार्यक्रमों के साथ भारतीय राजधानी दिल्ली और सेना मुख्यालयों में धूमधाम से मनाया जाता है। इस अवसर पर पूरा देश थल सेना के अदम्य साहस, शौर्य गाथा और उनके बहादुरों के बलिदान को याद करता है।

वर्ष 1947 में भारत को स्वतंत्रता मिलने के उपरांत देश ने अनेकों प्रशासनिक समस्याओं का सामना किया। तब स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सेना को बुलाया जाना ही समाधान था। भारतीय सेना के बड़े अधिकारी ब्रिटिश नागरिक होते थे। 15 जनवरी 1949 को जब पहले भारतीय कमांडर-इन-चीफ के एम करियप्पा भारतीय सेना प्रमुख बने उस समय भारतीय सेना में केवल 2 लाख सैनिक ही थे।

■ Also Read: Indian Navy Is the World’s 7th Largest Navy: Know All About Indian Navy Day 

फील्ड मार्शल के एम करियप्पा के बारे में

के एम करियप्पा ऐसे पहले अधिकारी थे जिन्होंने फील्ड मार्शल की रैंक प्राप्त की थी। के. एम. करियप्पा भारतीय सेना के दूसरे फील्ड मार्शल थे। पहले फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ थे, जिन्हें यह रैंक 1 जनवरी 1973 को मिली। करियप्पा को यह मानद रैंक 1986 में मिली (राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह द्वारा)। उन्होंने 1947 में भारत-पाक युद्ध में भारतीय सेना का प्रतिनिधित्व भी किया था। वर्ष 1953 में करियप्पा सेवा निवृत्त हुए थे। 94 वर्ष की आयु में वर्ष 1993 में उनका निधन हो गया था। प्रत्येक वर्ष 15 जनवरी को उन्हीं के सम्मान में परेड और झांकियां निकाली जाती हैं।

भारतीय सेना दिवस 2026 की परेड में ऑपरेशन सिंदूर में उपयोग किए गए नवीनतम उपकरणों का विशेष प्रदर्शन होगा। जयपुर की जगतपुरा महल रोड पर आयोजित इस परेड में ब्रह्मोस मिसाइल, टैंक्स, फाइटर जेट्स और हेलीकॉप्टर्स का फ्लाई-पास्ट, मार्चिंग कंटिंजेंट्स, मार्शल आर्ट्स प्रदर्शन तथा ड्रोन टेक्नोलॉजी और मॉडर्न वारफेयर क्षमताओं का डेमॉन्स्ट्रेशन प्रमुख होगा। इसके अलावा, शौर्य संध्या कार्यक्रम में ऑपरेशन सिंदूर पर आधारित लाइट एंड साउंड शो तथा 1000 ड्रोन्स का शानदार प्रदर्शन होगा। जनवरी 8-12 तक ‘नो योर आर्मी’ प्रदर्शनी में भी आधुनिक हथियारों और तकनीकों को जनता के सामने प्रदर्शित किया जाएगा।

भारतीय सेना विश्व की चौथी शक्तिशाली सेना है। पहली बार जयपुर को 15 जनवरी को भारतीय सेना की मेजबानी का अवसर प्राप्त हुआ है। वर्ष 2026 में सेना के रोडमैप में आधुनिकीकरण, युद्व की तत्परता, दक्षिणी कमान परेड ग्राउंड में अर्जून एमके-1ऐ टैंक, के9 व्रज स्व-चालित हॉवित्जर और मेक इन इंडिया के तहत आधुनिक ड्रोन सिस्टम, सेना में महिलाओं की भूमिकाओं को बढ़ावा देना आदि शामिल है। वर्ष 2026 में फोकस आधुनिकीकरण, युद्ध तत्परता, ड्रोन टेक्नोलॉजी और सार्वजनिक सहभागिता पर होगा, जिसमें ऑपरेशन सिंदूर के उपकरणों का प्रदर्शन, ब्रह्मोस मिसाइल तथा अन्य आधुनिक हथियार शामिल हैं।

सद्भक्ति द्वारा पूर्ण मोक्ष और मनुष्य देह की सार्थकता

कामी, क्रोधी, लालची इनसे न भक्ति होय।
भक्ति करे कोई शूरमा जाती बरन कुल खोय।।

एक सैनिक अदम्य साहस से परिपूर्ण होता है यदि वह यह जान ले कि किस उद्देश्य से उसे यह नर तन मिला है तो वह देश के प्रति अपने कर्तव्य को पूरा करने के साथ, पूर्ण गुरु से नामदीक्षा लेकर, सत्भक्ति कर पूर्ण मोक्ष प्राप्त कर सकता है।

पूर्ण परमात्मा कविर्देव जी मनुष्य जन्म की सार्थकता का वर्णन अपनी अमृतमयी वाणी में करते हुए कहते हैं-:

कबीर, या तो माता भक्त जनै, या दाता या शूर।
या फिर रहै बाँझड़ी, क्यों व्यर्थ गंवावै नूर।।

अर्थात पूर्ण परमेश्वर कविर्देव जी ने अपनी अमृतमयी वाणी में इस अनमोल मनुष्य देह के मूल उद्देश्य की सार्थकता का बखान करते हुए बताया है कि या तो माता भक्त को जन्म दे जो शास्त्र में प्रमाण देखकर सत्य को स्वीकार करके असत्य साधना त्यागकर अपना जीवन धन्य करे। या किसी दानवीर बालक को जन्म दे जो दान-धर्म करके अपने शुभ कर्म बनाये।

या फिर किसी शूरवीर बालक को जन्म दे जो परमार्थ के लिए कुर्बान होने से भी न डरता हो। सत्य का साथ देता है, असत्य तथा अत्याचार का डटकर विरोध करता है। उसके चलते या तो वह स्वयं मर जाता है या अत्याचारी की सेना को मार डालता है। अपने उद्देश्य से डगमग नहीं होता है। यदि ऐसी अच्छी सन्तान उत्पन्न न हो तो निसंतान रहना ही अच्छा है।

पूर्ण संत से सद्भक्ति प्राप्त करें

पूर्ण परमात्मा कविर्देव जी कहते हैं कि मनुष्य देह बड़े संस्कारों से प्राप्त होती है और इस मनुष्य देह के प्राप्त होने के बाद अगर सतगुरु मिल जाएं तो तत्पश्चात मनुष्य जीवन का मात्र एक ही उद्देश्य रह जाता है वह उद्देश्य है उन पूर्ण संत से सद्भक्ति अर्थात सतनाम (सच्चानाम) प्राप्त कर अपने जीवन का वास्तविक उद्देश्य प्राप्त करना अर्थात पूर्ण मोक्ष प्राप्त करना।

तज पाखण्ड सत नाम लौ लावै, सोई भव सागर से तरियाँ।
कह कबीर मिले गुरु पूरा, स्यों परिवार उधरियाँ।।

मनुष्य देह की सार्थकता से परिचित होने हेतु देखें, सुनें तथा पढ़ें

प्रिय पाठकजनों से निवेदन है कि इस सम्पूर्ण धरा पर जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी ही एकमात्र पूर्ण संत हैं अतः संत रामपाल जी महाराज जी की अमृतमयी वाणी का श्रवण करने के लिए अवश्य देखें सतलोक आश्रम यूट्यूब चैनल तथा पूर्णसंत रामपाल जी महाराज जी द्वारा लिखित पवित्र पुस्तक ज्ञान गंगा का अवश्य नियमित रूप से पाठन करें। अतः इस स्वर्ण समय का सदुपयोग कर संत रामपाल जी महाराज जी से आज ही निःशुल्क नामदीक्षा प्राप्त करें।

भारतीय सेना दिवस कब मनाया जाता है?

प्रत्येक वर्ष भारतीय सेना दिवस 15 जनवरी को मनाया जाता है।

भारतीय सेना दिवस 2026 की थीम क्या है?

भारतीय सेना दिवस 2026 की आधिकारिक थीम किसी सरकारी घोषणा या विश्वसनीय रिपोर्ट में प्रकाशित नहीं हुई है।

भारतीय सेना दिवस किस के सम्मान में मनाया जाता है?

यह दिवस प्रत्येक वर्ष 15 जनवरी को फील्ड मार्शल के एम करियप्पा (Field Marshal KM Cariappa) के सम्मान में मनाया जाता है।

मनुष्य को पूर्ण मोक्ष की प्राप्ति कैसे हो सकती है?

मनुष्य को पूर्ण मोक्ष की प्राप्ति पूर्ण गुरु से दीक्षा लेकर भक्ति करने से प्राप्त हो सकती है।

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