दशकों पुरानी जलभराव समस्या का अंत: संत रामपाल जी महाराज की पहल से गोवर्धन के गाँवों में लौटी उम्मीद

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मथुरा, उत्तर प्रदेश – उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले की गोवर्धन तहसील के नगला सबला और नगला शेरा गाँवों के किसानों के लिए बरसात का मौसम लंबे समय तक एक बड़ी आपदा बनकर सामने आता रहा। करीब 1000 एकड़ उपजाऊ जमीन हर वर्ष पानी में डूब जाती थी, जिससे यह क्षेत्र धीरे-धीरे एक स्थायी झील का रूप ले चुका था। इस कारण किसानों की मेहनत और उम्मीदें हर साल पानी में बह जाती थीं, और उनकी आर्थिक स्थिति लगातार खराब होती चली गई।

पीढ़ियों से झेल रहे थे जलभराव का संकट

गाँव के बुजुर्ग बताते हैं कि यह समस्या उनके दादा-परदादा के समय से चली आ रही थी। जैसे ही बरसात का मौसम शुरू होता था, किसानों के घरों में चिंता और निराशा का माहौल बन जाता था, क्योंकि उन्हें पहले से ही पता होता था कि उनकी फसलें इस बार भी पानी में डूबकर नष्ट हो जाएंगी। इस लगातार नुकसान ने न केवल किसानों की आय को प्रभावित किया, बल्कि उनके मनोबल को भी कमजोर कर दिया था।

सरकारी प्रयास रहे नाकाम, नहीं मिला समाधान

ग्रामीणों ने इस समस्या के समाधान के लिए कई बार प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से संपर्क किया। वर्षों तक अधिकारियों के चक्कर लगाए गए, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला और कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया। समय के साथ यह समस्या इतनी जटिल मानी जाने लगी कि सरकारी तंत्र ने भी इसे लगभग असंभव मानकर नजरअंदाज कर दिया।

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संत रामपाल जी महाराज से मिली नई उम्मीद

जब सभी प्रयास विफल हो गए, तब गाँव के लोगों ने संत रामपाल जी महाराज के दरबार में अर्जी लगाई। उनकी प्रार्थना को स्वीकार करते हुए बहुत कम समय में राहत सामग्री गाँव तक पहुँचा दी गई। ग्रामीणों के अनुसार, यह मदद इतनी तेजी से पहुँची कि उन्हें पहली बार लगा कि उनकी वर्षों पुरानी समस्या का समाधान वास्तव में संभव है।

विशाल स्तर पर पहुँची सहायता सामग्री

गोवर्धन के नगला सबला–नगला शेरा में जलभराव समाधान: संत रामपाल जी महाराज की पहल से 1000 एकड़ जमीन को मिली राहत

इस समस्या के समाधान के लिए बड़े पैमाने पर संसाधन उपलब्ध कराए गए। नगला सबला गाँव के लिए लगभग 4000 फीट 8 इंची पाइप, दो 15 हॉर्स पावर की मोटरें और 10150 फीट केबल भेजी गई। वहीं नगला शेरा गाँव के लिए लगभग 700 फीट पाइप, दो अतिरिक्त 15 हॉर्स पावर की मोटरें और 600 फीट केबल उपलब्ध कराई गई। इसके अलावा ऑटोमेटिक स्टार्टर, बैंड, सुंडिया और अन्य सभी जरूरी उपकरण भी साथ भेजे गए, ताकि इस व्यवस्था को तुरंत और सुचारू रूप से शुरू किया जा सके।

राहत से बदली किसानों की जिंदगी

इस पूरी व्यवस्था के लागू होने के बाद अब खेतों में जमा पानी को बाहर निकालने का स्थायी रास्ता तैयार हो गया है। वर्षों से बेकार पड़ी जमीन पर फिर से खेती की संभावना बन रही है। किसान अब अपनी जमीन पर काम करने के लिए उत्साहित हैं और उन्हें विश्वास है कि आने वाले समय में उनकी फसलें फिर से लहलहाएंगी।

अन्नपूर्णा मुहिम के तहत मिल रही स्थायी राहत

यह सहायता संत रामपाल जी महाराज द्वारा चलाई जा रही “अन्नपूर्णा मुहिम” का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य किसानों को केवल तात्कालिक राहत देना नहीं, बल्कि उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान प्रदान करना है। इस पहल से न केवल जलभराव की समस्या दूर हो रही है, बल्कि किसानों को आत्मनिर्भर बनने और बेहतर भविष्य की ओर बढ़ने का अवसर भी मिल रहा है।

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