यह प्रश्न सब के मन में उठता है की इतने सारे धर्मों की स्थापना कैसे हुई। जाति और धर्म के नाम पर अनेक संप्रदाय बन गये। अनेक धर्म भी बन गये। लेकिन वह एक भगवान कौन है जो हर जीव का उत्पत्ति करता है फिर चाहे वह इंसान हो या जानवर हो। सभी आत्माओ का जनक एक है जिसे प्राप्त करने के लिए किसी धर्म विशेष की अवश्यकता नही। हर धर्म अपने ईश्वर को सर्वोच्च और सृष्टिकर्ता मानता है लेकिन सच क्या है? मुस्लिमों का अल्लाह, खुदा सबसे बड़ा है या हिंदुओ का निराकार ब्रह्म? या फिर ब्रह्मा,विष्णु शंकर से बड़ा कोई नहीं है ? सिक्ख धर्म मे गुरु नानक जी को ही वाहेगुरु कहकर सर्वोच्च स्थान दिया गया है और ईसाइयो के लिए यीशु ही भगवान के बेटे है ? पर आखिर कौन है सबसे बड़ा ईश्वर और कितने है ईश्वर ?

इस रहस्य से परदा उठाने के लिए ही पूर्ण परमात्मा धरती पर सतगुरु रुप में अवतरित होते हैं या अपना अंश भेजते है। और वर्तमान में भी वही हुआ पूर्ण परमात्मा ने अपने अंश को एक महान संत के रुप मे भेजा है जिसने सर्व सदग्रंथ जैसे गुरुग्रंथ साहेब, वेद शास्त्र पुराण, कुरान शरीफ, बाईबल और भी अन्य धर्म जैसे बौद्ध धर्म, जैन धर्म अदि सदग्रंथो की गहराई में ज्ञान का गोता लगाया और मालूम किया की पूर्ण भगवान तो सिर्फ एक ही है! जीव हमारी जाति है, मानव धर्म हमारा, हिन्दू,मुस्लिम, सिख्ख,ईसाई धर्म नहीं कोई न्यारा। तो आईये हम जानते है की कौन है वह सबसे बड़ा भगवान, जिसे चाहे अल्लाह कहो,सबसे बड़ा GOD कहो, सच्चा वाहेगुरु कहो या सबसे बड़ा भगवान कहो। आईये हम यह भी जाने की जब भगवान एक है तो फिर यह धर्मों का बंटवारा कैसे हुआ ।

दो शक्तियां- सत्य पुरुष और काल ब्रह्म

इस संसार में दो शक्तियां अपना अलग अलग कार्य कर रही है जिसमें एक “काल ब्रह्म” है! वेदांती उसे निराकार ब्रह्म भी कहते है। मुसलमान उसी को बेचुन(निराकार) अल्लाह कहते है। और ईसाई उसे Formless (निराकार) God कहते हैं।

यही है वो एक भगवान जो सबसे बड़ा है

दूसरी शक्ति “सत्य पुरुष” है जिसको गीता जी में परम अक्षर पुरुष, सच्चिदानंद घन ब्रह्म, दिव्य परम पुरुष, तत् ब्रह्म कहा है। असंख्य ब्रह्माण्डो में जितने भी प्राणी है यह सब सत्य पुरुष जी की आत्माएं हैं। जो सतलोक में रहते थे वहाँ से अपनी अल्प बुद्धि के कारण काल ब्रह्म के साथ यहाँ आ गए। वहाँ सतलोक मे सर्व सुख थे, ना वृद्ध अवस्था थी और ना ही मौत थी। पाँच तत्व का शरीर भी नहीं था! यह सृष्टि तो ऐसी ही है पाँच तत्व से बनी है लेकिन वहाँ सतलोक मे एक तत्व, नूर तत्व से बनी सृष्टि है। यहाँ नाशवान है वहाँ अविनाशी है। सत्य पुरुष स्वयं कबीर जी है। उनके शरीर का नाम कबीर है। वेदों ने इन्हे कविर्देव(कबीर) कहा है। कुरान शरीफ ने इन्हे कबिरन् खबिरन् अल्लाह अकबर कहा है! कबीर परमेश्वर जी चाहते है की सर्व जीव मेरे ज्ञान को समझे और मेरे द्वारा बताई शास्त्रानुकुल भक्ति साधना करे। इसलिए वह पूर्ण परमात्मा कबीर जी सतलोक से गति करके यहाँ आते हैं और अपनी आत्माओं को ज्ञान समझाकर काल ब्रह्म के जाल से परिचित कराते हैं।
क्योंकि काल ब्रह्म नहीं चाहता की किसी का भी मोक्ष हो और कोई भी प्राणी सतलोक जा सके।

काल ब्रह्म क्यों नही होने देना चाहता किसी का भी मोक्ष ?

काल ब्रह्म का राज्य इक्कीस ब्रह्मांड का क्षेत्र है जिसे काल लोक कहते हैं। इस काल ब्रह्म को एक लाख मानव शरीर धारी प्राणियों को नित्य आहार करने का श्राप लगा हुआ है जिस कारण ये अधुरा अध्यात्मिक ज्ञान तथा साथ बुराई जैसे माँस, तंबाखु, तीर्थ धाम आदि शास्त्र विरुद्ध साधना करवा कर जीव को मोक्ष नही होने देना चाहता है। जीव से तरह तरह पूजा पाठ व्रत उपवास कराकर एवं भुत प्रेत पुजवाकर जीवआत्माओ को भ्रमित रखता है, वेद, शास्त्रों और अन्य सदग्रंथो मे छुपी पूर्ण परमात्मा को प्राप्त करने की सही जानकारी से यह सर्व ऋषी मुनियों सहित सर्व शंकराचार्य, महामंडलेश्वरो को अनजान रखता है फिर पूर्ण परमात्मा का कोई अंश ही सतगुरु रुप मे आकर इस रहस्य को उजागर करके बताता है।
काल ब्रह्म चाहता है सारे प्राणी मेरे काल जाल मे ही फ़से रहे। बुराई करके पाप ग्रस्त होकर जन्मते मरते रहे। किसी को भी सतलोक का पता ना चले, मेरे तक के ज्ञान को ही माने। इसलिए परमेश्वर कबीर जी की आत्माओ मे से अच्छी आत्माओ को अपना पैगंबर अर्थात संदेशवाहक ग्यान देने के लिए भक्तिदुत बनाकर भेजता है। अपने काल जाल मे फसाये रखने वाला ज्ञान देता है जिससे जीव आत्माएं भ्रमित होकर देवी देवताओं की पूजा पाठ, तीर्थ धाम, दान, धर्म को ही मोक्षमार्ग समझ बैठती है और वास्तविक भक्ति विधि से वंचित रह जाती है इसी काल ब्रह्म ने बाबा आदम, हजरत दाऊद, हजरत मूसा, हजरत ईसा, हजरत मोहम्मद को तथा काल ब्रह्म के पुत्र ब्रहमा, विष्णु महेश एवं उनके अवतारों राम, कृष्ण, आदि शंकराचार्य, ऋषी मुनियों द्वारा अपना नकली प्रचार करा रखा है!
इस काल ब्रह्म ने अलग-अलग धर्मो का जाल फैलाया, बाबा आदम की संतान मे 1 लाख 80 हजार पैगम्बर। हिंदु धर्म के 88 हजार ऋषी तथा अन्य प्रचारक ये अच्छी तथा सच्ची निष्ठा वाले थे जिनको काल ब्रह्म ने अपना प्रचारक बनाया। ऋषियो ने पवित्र वेदो, पवित्र श्री मद् भगवद गीता तथा पुराणो के आधार से स्वयं भी साधना की तथा अपने अनुयाइयों को भी वही साधना करने को कहा। वेदो तथा गीता मे ग्यान तो श्रेष्ठ है परंतु अधुरा है। पुराण जो संख्या मे 18 है ये ऋषियों का अपना अनुभव तथा कुछ कुछ वेद ग्यान है तथा देवी देवताओ की जीवनी लिखी है।
चारों वेदो का ज्ञान काल ने सर्वप्रथम दिया था। चारों वेदो का ग्यान अर्थात संक्षिप्त रुप श्री मद् भगवद् गीता है।

किस तरह अलग-अलग जगह अलग-अलग ग्यान प्रचार किया जिससे अनेक धर्म बट गये।

उसके पश्चात दाऊद जी को जबुर किताब वाला ज्ञान दिया। इसमे सृष्टि की उत्पत्ति का आंशिक ग्यान दिया। इसके पश्चात मूसा जी को तौरेत वाला ज्ञान या तथा इसके पश्चात ईसा जी को इंजिल पुस्तक का ग्यान दिया। फिर बाद मे कुरान शरीफ वाला ज्ञान हजरत मोहम्मत जी को दिया। मूसा जी के अनुयाई यहुदी कहलाते है और ईसा जी के ईसाई।

यहां पर मुसलमानों का विधान गलत सिद्ध होता है।

मोहम्मद जी के अनुयाई मुसलमान कहलाते है। यह उपरोक्त सभी बाबा आदम को अपना प्रथम पुरुष अर्थात सब आदमियो का पिता मानते है। ये मानते है की जब तक सृष्टि चलेगी तब सर्व मानव मरते रहेंगे उनको कब्र में दबाते चलो। जिस समय कयामत (प्रलय) आयेगी उस समय सब व्यक्ति स्त्री पुरुष कब्र से निकलकर जीवित किये जायेंगे। उनके कर्मों का हिसाब होगा जिन्होने चार कतेबो (पुस्तको) मे लिए अल्लाह के आदेश अनुसार कर्म किये है वै जन्नत (स्वर्ग) मे रहेंगे। इसके पश्चात यहाँ की सृष्टि सदा के लिए नष्ट हो जायेगी। मुसलमानो का मानना है की कयामत(प्रलय) से पहले केवल निराकार प्रभु था अब जन्नत मे कोई नहीं है !यदि उपरोक्त बात सत्य है तो जन्नत मे हजरत मोहम्मद जी ने बाबा आदम, मूसा, ईसा, दाऊद, आदि की मंडली को देखा। उनको भी कब्र में रहना चाहिये था। इससे आप मुसलमानो का विधान गलत सिद्ध हुँआ। क्योंकि कब्र में रहने वाले जन्नत कैसे दिखने लगे।

वर्तमान मे कौन है धरती पर सत्यपुरुष का अंश

वह संत रामपालजी महाराज है जो पुर्ण परमात्मा के अंश बनकर आये है, एक संदेश वाहक के रुप मे जीव आत्माओं को सच्चा और शास्त्रअनुकुल ज्ञान समझाकर पूर्ण परमात्मा की जानकारी करा रहे हैं और काल ब्रह्म से भी हमें परिचित कराया।
यही वो सत्यपुरुष कबीर जी का स्वरुप है जिसने छ:दिन मे सृष्टि रची और सातवें दिन तख्त पर जा विराजा!

creation of universe