भगवान एक- फिर कैसे बन गए धर्म अनेक | आखिर कौन है वास्तविक ईश्वर या भगवान?

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Last Updated on 5 May 2024 IST | यह प्रश्न सब के मन में उठता है कि इतने सारे धर्मों की स्थापना कैसे हुई। जाति और धर्म के नाम पर अनेक संप्रदाय बन गये। अनेक धर्म भी बन गये। लेकिन  वह एक भगवान कौन (Who is God) है जो हर जीव का उत्पत्ति करता है फिर चाहे वह इंसान हो या जानवर हो। सभी आत्माओ का जनक एक है जिसे प्राप्त करने के लिए किसी धर्म विशेष की अवश्यकता नही। हर धर्म अपने ईश्वर को सर्वोच्च और सृष्टिकर्ता मानता है लेकिन सच क्या है? मुस्लिमों का अल्लाह, खुदा सबसे बड़ा है या हिंदुओ का निराकार ब्रह्म? या फिर ब्रह्मा,विष्णु शंकर से बड़ा कोई नहीं है ? सिक्ख धर्म मे गुरु नानक जी को ही वाहेगुरु कहकर सर्वोच्च स्थान दिया गया है और ईसाइयो के लिए यीशु ही भगवान के बेटे है? पर आखिर कौन है सबसे बड़ा ईश्वर और कितने है ईश्वर?

इस रहस्य से परदा उठाने के लिए ही पूर्ण परमात्मा धरती पर सतगुरु रुप में अवतरित होते हैं या अपना अंश भेजते है। और वर्तमान में भी वही हुआ पूर्ण परमात्मा ने अपने अंश को एक महान संत के रुप मे भेजा है जिसने सर्व सदग्रंथ जैसे गुरुग्रंथ साहेब, वेद शास्त्र पुराण, कुरान शरीफ, बाईबल और भी अन्य धर्म जैसे बौद्ध धर्म, जैन धर्म अदि सदग्रंथो की गहराई में ज्ञान का गोता लगाया और मालूम किया कि पूर्ण भगवान तो सिर्फ एक ही है! 

जीव हमारी जाति है, मानव धर्म हमारा, हिन्दू,मुस्लिम, सिख्ख,ईसाई धर्म नहीं कोई न्यारा। |

तो आईये हम जानते है की कौन है वह सबसे बड़ा भगवान, जिसे चाहे अल्लाह कहो, सबसे बड़ा GOD कहो, सच्चा वाहेगुरु कहो या सबसे बड़ा भगवान कहो। आईये हम यह भी जाने की जब भगवान एक है तो फिर यह धर्मों का बंटवारा कैसे हुआ ।

इस संसार में दो शक्तियां अपना अलग अलग कार्य कर रही है जिसमें एक “काल ब्रह्म” है! वेदांती उसे निराकार ब्रह्म भी कहते है। मुसलमान उसी को बेचून (निराकार) अल्लाह कहते है। और ईसाई उसे Formless (निराकार) God कहते हैं।

दूसरी शक्ति “सत्य पुरुष” है जिसको गीता जी में परम अक्षर पुरुष, सच्चिदानंद घन ब्रह्म, दिव्य परम पुरुष, तत् ब्रह्म कहा है। असंख्य ब्रह्माण्डो में जितने भी प्राणी है यह सब सत्य पुरुष जी की आत्माएं हैं। जो सतलोक में रहते थे वहाँ से अपनी अल्प बुद्धि के कारण काल ब्रह्म के साथ यहाँ आ गए। वहाँ सतलोक मे सर्व सुख थे, ना वृद्ध अवस्था थी और ना ही मौत थी। पाँच तत्व का शरीर भी नहीं था! यह सृष्टि तो ऐसी ही है पाँच तत्व से बनी है लेकिन वहाँ सतलोक मे एक तत्व, नूर तत्व से बनी सृष्टि है। यहाँ नाशवान है वहाँ अविनाशी है। 

पूर्ण परमात्मा सत्य पुरुष स्वयं कबीर जी है। उनके मनुष्य स्वरूप शरीर का नाम कबीर है। वेदों ने इन्हे कविर्देव (कबीर) कहा है। कुरान शरीफ ने इन्हे कबिरन् खबिरन् अल्लाह अकबर कहा है! कबीर परमेश्वर जी चाहते है कि सर्व जीव मेरे ज्ञान को समझे और मेरे द्वारा बताई शास्त्रानुकुल भक्ति साधना करे। इसलिए वह पूर्ण परमात्मा कबीर जी सतलोक से गति करके यहाँ आते हैं और अपनी आत्माओं को ज्ञान समझाकर काल ब्रह्म के जाल से परिचित कराते हैं।

पूर्ण परमात्मा ने अपने मध्य अर्थात् अपने शरीर से अपनी शब्द शक्ति के द्वारा ब्रह्म (क्षर पुरुष/काल) की उत्पत्ति की तथा सर्व ब्रह्मण्डों को ऊपर सतलोक, अलख लोक, अगम लोक, अनामी लोक आदि तथा नीचे परब्रह्म के सात संख ब्रह्मण्ड तथा ब्रह्म के 21 ब्रह्मण्डों को अपनी धारण करने वाली आकर्षण शक्ति से ठहराया हुआ है। 

पूर्ण परमात्मा कबीर परमेश्वर (कविर्देव) ने अपने निजी सेवक अर्थात् सखा श्री धर्मदास जी, आदरणीय संत गरीबदास, वर्तमान में तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज आदि को स्वयं ही सतज्ञान से परिचित कराया।

वही पूर्ण परमेश्वर सत्य साधना करने वाले साधक को उसी पहले वाले स्थान (सत्यलोक) में ले जाता है, जहाँ से बिछुड़ कर आए थे। वहाँ उस वास्तविक सुखदाई प्रभु को प्राप्त करके जीव खुशी से आत्म विभोर होकर मस्ती से स्तुति करता है कि हे परमात्मा असंख्य जन्मों के भूले-भटकों को वास्तविक ठिकाना मिल गया। इसी का प्रमाण पवित्र ऋग्वेद मण्डल 10 सुक्त 90 मंत्र 16 में भी है। आदरणीय गरीबदास जी को इसी प्रकार पूर्ण परमात्मा कविर्देव (कबीर परमेश्वर) स्वयं सत्यभक्ति प्रदान करके सत्यलोक लेकर गए थे, तब अपनी अमृतवाणी में आदरणीय गरीबदास जी महाराज ने आँखों देखकर कहाः-

गरीब, अजब नगर में ले गए, हमकुँ सतगुरु आन।

झिलके बिम्ब अगाध गति, सुते चादर तान।।

यक अर्ज गुफतम पेश तो दर कून करतार।

हक्का कबीर करीम तू, बेएब परवरदिगार।।

श्री गुरु ग्रन्थ साहेब, पृष्ठ नं. 721, महला 1, राग तिलंग) कून करतार का अर्थ होता है सर्व का रचनहार, अर्थात् शब्द शक्ति से रचना करने वाला शब्द स्वरूपी प्रभु, हक्का कबीर का अर्थ है सत् कबीर, करीम का अर्थ दयालु, परवरदिगार का अर्थ परमात्मा है। 

यही सर्व सृष्टी रचनहार प्रभु अपनी रचना के ऊपर के हिस्से में तीनों स्थानों (सतलोक, अलखलोक, अगमलोक) में तीन रूप में स्वयं प्रकट होता है अर्थात् स्वयं ही विराजमान है। यहाँ अनामी लोक का वर्णन इसलिए नहीं किया क्योंकि अनामी लोक में कोई रचना नहीं है तथा अकह (अनामय) लोक शेष रचना से पूर्व का है फिर कहा है कि उसी परमात्मा के सत्यलोक से बिछुड़ कर नीचे के ब्रह्म व परब्रह्म के लोक उत्पन्न हुए और वह पूर्ण परमात्मा खाने वाले ब्रह्म अर्थात् काल से (क्योंकि ब्रह्म/काल विराट श्राप वश एक लाख मानव शरीर धारी प्राणियों को खाता है) तथा न खाने वाले परब्रह्म अर्थात् अक्षर पुरुष से (परब्रह्म प्राणियों को खाता नहीं, परन्तु जन्म-मृत्यु, कर्मदण्ड ज्यों का त्यों बना रहता है) भी ऊपर सर्वत्रा व्याप्त है अर्थात् इस पूर्ण परमात्मा की प्रभुता सर्व के ऊपर है, कबीर परमेश्वर ही कुल का मालिक है। 

जिसने अपनी शक्ति को सर्व के ऊपर फैलाया है जैसे सूर्य अपने प्रकाश को सर्व के ऊपर फैला कर प्रभावित करता है, ऐसे पूर्ण परमात्मा ने अपनी शक्ति रूपी क्षमता को सर्व ब्रह्मण्डों को नियन्त्रित रखने के लिए छोड़ा हुआ है जैसे मोबाईल फोन का टावर एक देशिय होते हुए अपनी शक्ति अर्थात् मोबाइल फोन की रेंज (क्षमता) चहुं ओर फैलाए रहता है। इसी प्रकार पूर्ण प्रभु ने अपनी निराकार शक्ति सर्व व्यापक की है जिससे पूर्ण परमात्मा सर्व ब्रह्मण्डों को एक स्थान पर बैठ कर नियन्त्रित रखता है

काल ब्रह्म का राज्य इक्कीस ब्रह्मांड का क्षेत्र है जिसे काल लोक कहते हैं। इस काल ब्रह्म को एक लाख मानव शरीर धारी प्राणियों को नित्य आहार करने का श्राप लगा हुआ है जिस कारण से ये अधूरा अध्यात्मिक ज्ञान तथा साथ बुराई जैसे माँस, तंबाखु, तीर्थ धाम आदि शास्त्र विरुद्ध साधना करवा कर जीव को मोक्ष नही होने देना चाहता है।

जीव से तरह तरह पूजा पाठ व्रत उपवास कराकर एवं भूत प्रेत पुजवाकर जीवात्माओ को भ्रमित रखता है, वेद, शास्त्रों और अन्य सदग्रंथो मे छुपी पूर्ण परमात्मा को प्राप्त करने की सही जानकारी से यह सर्व ऋषी मुनियों सहित सर्व शंकराचार्य, महामंडलेश्वरो को अनजान रखता है फिर पूर्ण परमात्मा का कोई अंश ही सतगुरु रुप मे आकर इस रहस्य को उजागर करके बताता है। काल ब्रह्म चाहता है सारे प्राणी मेरे काल जाल मे ही फ़से रहे। बुराई करके पाप ग्रस्त होकर जन्मते मरते रहे। क्योंकि काल ब्रह्म नहीं चाहता कि किसी का भी मोक्ष हो और कोई भी प्राणी सतलोक जा सके। 

किसी को भी सतलोक का पता ना चले, उसके तक के ज्ञान को ही माने। इसलिए परमेश्वर कबीर जी की आत्माओ मे से अच्छी आत्माओ को अपना पैगंबर अर्थात संदेशवाहक ज्ञान देने के लिए भक्तिदूत बनाकर भेजता है। अपने काल जाल मे फसाये रखने वाला ज्ञान देता है जिससे जीव आत्माएं भ्रमित होकर देवी देवताओं की पूजा पाठ, तीर्थ धाम, दान, धर्म को ही मोक्षमार्ग समझ बैठती है और वास्तविक भक्ति विधि से वंचित रह जाती है। इसी काल ब्रह्म ने बाबा आदम, हजरत दाऊद, हजरत मूसा, हजरत ईसा, हजरत मोहम्मद को तथा काल ब्रह्म के पुत्र ब्रह्मा, विष्णु, महेश एवं उनके अवतारों राम, कृष्ण, आदि शंकराचार्य, ऋषी मुनियों द्वारा अपना नकली प्रचार करा रखा है!

■ Read in English: Who Is God According To The Holy Scriptures Of Different Religions?

इस काल ब्रह्म ने अलग-अलग धर्मो का जाल फैलाया, बाबा आदम की संतान मे 1 लाख 80 हजार पैगम्बर। हिंदू धर्म के 88 हजार ऋषी तथा अन्य प्रचारक ये अच्छी तथा सच्ची निष्ठा वाले थे जिनको काल ब्रह्म ने अपना प्रचारक बनाया। ऋषियो ने पवित्र वेदो, पवित्र श्रीमद्भगवद गीता तथा पुराणो के आधार से स्वयं भी साधना की तथा अपने अनुयाइयों को भी वही साधना करने को कहा। वेदो तथा गीता मे ज्ञान तो श्रेष्ठ है परंतु अधूरा है। पुराण जो संख्या मे 18 है ये ऋषियों का अपना अनुभव तथा कुछ कुछ वेद ज्ञान है तथा उनमें कुछ देवी देवताओ की जीवनी लिखी है।

चारों वेदो का ज्ञान काल ने सर्वप्रथम दिया था। चारों वेदो का ज्ञान अर्थात संक्षिप्त रुप श्रीमद्भगवद्गीता है। उसके पश्चात दाऊद जी को जबुर किताब वाला ज्ञान दिया। इसमे सृष्टि की उत्पत्ति का आंशिक ज्ञान दिया। इसके पश्चात मूसा जी को तौरेत वाला ज्ञान या तथा इसके पश्चात ईसा जी को इंजिल पुस्तक का ग्यान दिया। फिर बाद मे कुरान शरीफ वाला ज्ञान हजरत मोहम्मद जी को दिया। मूसा जी के अनुयाई यहुदी कहलाते है और ईसा जी के ईसाई।

यहां पर मुसलमानों का विधान गलत सिद्ध होता है

मोहम्मद जी के अनुयाई मुसलमान कहलाते है। यह उपरोक्त सभी बाबा आदम को अपना प्रथम पुरुष अर्थात सब आदमियो का पिता मानते है। ये मानते है की जब तक सृष्टि चलेगी तब तक सर्व मानव मरते रहेंगे उनको कब्र में दबाते चलो। जिस समय कयामत (प्रलय) आयेगी उस समय सब व्यक्ति स्त्री पुरुष कब्र से निकलकर जीवित किये जायेंगे। उनके कर्मों का हिसाब होगा जिन्होने चार कतेबो (पुस्तको) मे लिए अल्लाह के आदेश अनुसार कर्म किये है वे जन्नत (स्वर्ग) मे रहेंगे। इसके पश्चात यहाँ की सृष्टि सदा के लिए नष्ट हो जायेगी। 

मुसलमानो का मानना है कि कयामत (प्रलय) से पहले केवल निराकार प्रभु था अब जन्नत मे कोई नहीं है ! यदि उपरोक्त बात सत्य है तो जन्नत मे हजरत मोहम्मद जी को बाबा आदम, मूसा, ईसा, दाऊद, आदि की मंडली नही दिखनी चाहिए थी। उनको भी तो कब्र में रहना चाहिये था। इससे मुसलमानो का विधान गलत सिद्ध हुँआ। क्योंकि कब्र में रहने वाले जन्नत में कैसे दिखने लगे।

वर्तमान में कौन है सत्यपुरुष का धरती पर अवतार?

वह संत रामपालजी महाराज है जो पूर्ण परमात्मा के अंश बनकर आये है, एक संदेश वाहक के रुप मे जीव आत्माओं को सच्चा और शास्त्रानुकूल ज्ञान समझाकर पूर्ण परमात्मा की जानकारी करा रहे हैं और काल ब्रह्म से भी हमें परिचित करा रहे है। यही वो सत्यपुरुष कबीर जी का स्वरुप है जिसने छ:दिन मे सृष्टि रची और सातवें दिन तख्त पर जा विराजा! संत रामपाल जी महाराज से नाम दीक्षा लेकर अपना कल्याण करवाए

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