Gandhi Jayanti 2020 Hindi: भारत में बहुत से धार्मिक सन्तों, महापुरूषों, स्वतन्त्रता सेनानियों ने जन्म लिया है। भारत विलक्षण प्रतिभा के लोगों की कर्मभूमि रही है। जब भारत अंग्रेजों का गुलाम था तो भारत को आज़ाद करवाने में हर वर्ग के लोगों ने अपने अपने तरीके से योगदान दिया, उन्हीं में से एक थे गांधी जी। तो आइए जानते हैं महात्मा गांधी जी की 151वीं जयंती 02 अक्टूबर पर गांधी जी के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी। गांधी जी की मुख्य बातें, गांधीजी के विचार और उनके जीवन से परिचित कराते हैं।

Gandhi Jayanti 2020 [Hindi]: महात्मा गांधी जी का संक्षिप्त जीवन परिचय

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी का आज़ादी की लड़ाई में बड़ा योगदान रहा है। देश के हितैषी, राष्ट्र के लिए कुर्बान और सत्य अहिंसा के मार्ग पर चलकर देश को आज़ाद कराने वाले राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी का जन्म 02 अक्टूबर 1869 को गुजरात राज्य के तटीय क्षेत्र पोरबंदर में हुआ। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी का पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी (M.K. Gandhi) था। उनके पिताश्री का नाम करमचंद उत्तमचंद गांधी एवं उनकी माताश्री का नाम पुतलीबाई गांधी था।

महात्मा गांधी जी की धर्मपत्नी का नाम कस्तूरबा गांधी एवं उनके चार पुत्रों का नाम हरीलाल गांधी, रामदास गांधी, देवदास गांधी और मनीलाल गांधी था। गुजराती भाषा में गांधी का अर्थ है पंसारी जबकि हिन्दी भाषा में गांधी का अर्थ है इत्र फुलेल बेचने वाला जिसे अंग्रेजी में परफ्यूमर कहा जाता है। अपने जीवन के दौरान उन्होंने अध्यात्म ज्ञान जानने के लिए राजचन्द्र जी को आप अपना आध्यात्मिक गुरु बनाया।

Gandhi Jayanti 2020 Hindi: महात्मा गांधी जी का प्रारम्भिक जीवन से लेकर अंतिम सफ़र तक का विवरण

महात्मा गांधी जी का प्रारंभिक जीवन पोरबंदर में ही बीता। प्राथमिक शाला में उनकी पढ़ाई प्रारंभ हुई। वह शाला उनके घर के पास थी। जब मोहन के पिता पोरबंदर से राजकोट रियासत के दीवान बनकर गए तब उनके साथ महात्मा गांधी जी भी गए। उनकी 12 वर्ष की अवस्था तक राजकोट में पढ़ाई हुई। गांधी जी मे बाल्यकाल से ही सत्य के प्रति निष्ठा थी एवं वे सात्विक विचारो से ओतप्रोत थे। अपने विद्यार्थी जीवन में उन्होंने अपने गुरुओं से एक बार भी झूठ नहीं बोला। सत्य को उन्होंने अपने जीवन में एक मन्त्र की तरह अपना कर रखा।

उस समय बालविवाह प्रचलन में था। महात्मा गांधी जब 13 वर्ष के हुए तब उनका विवाह 14 वर्षीय कस्तूरबा से हो गया।
शिक्षा पोरबंदर से शुरू हो गई। उनकी प्रारम्भिक शिक्षा पोरबंदर के पश्चात उन्होंने मैट्रिक की परीक्षा राजकोट से पास की। ततपश्चात उच्च शिक्षा के लिए इंग्लैंड गए। वहां से लौटने पर उन्होंने वकालत प्रारम्भ की। गांधी जी का सामाजिक जीवन दक्षिण अफ़्रीका में प्रारम्भ हुआ वहाँ उन्होंने भारतीयों की सहायता की।

Gandhi Jayanti 2020 Hindi: गांधी जी का सत्याग्रह आन्दोलन

गाँधी जी ने सत्याग्रह आंदोलन प्रारम्भ किया। अनेकों कष्ट सहे व उनको अपमानित किया गया। किन्तु उन्होंने अपने आंदोलन का रवैया अहिंसात्मक ही रखा। अंत में उन्हें सफलता मिली। गांधी जी भारत वापस आए और स्वतंत्रता संग्राम में भाग लिया। वे कई बार जेल भी गए। सारा देश उनके साथ था। 4 जून 1944 को सुभाष चन्द्र बोस ने सिंगापुर रेडियो से प्रसारित एक सन्देश में महात्मा गांधी को सर्वप्रथम राष्ट्रपिता कह कर सम्बोधित किया था। तब से उन्हें राष्ट्रपिता महात्मा गांधी कहने लगे। अंत में भारत को सन 1947 में स्वतंत्रता प्राप्त हुई।

Gandhi Jayanti 2020: सत्य व अहिंसा के पुजारी थे गांधी जी

आज हम आज़ाद भारत में सांस लेते हैं। हमें अंग्रेजों से 15 अगस्त 1947 को आज़ादी मिली थी। और देश को आज़ाद कराने के लिए न जाने कितने ही लोगों ने अपना जीवन तक न्यौछावर कर दिया था। यहाँ लोग अलग-अलग विचार धाराओं में बटें हुए थे। जिनमें से एक तरफ तो वे लोग थे जो कि आज़ाद को अपनी ताकत के दम पर लेना चाहते थे और तो वहीं कुछ लोग शांति पूर्वक अहिंसा के मार्ग पर चलते हुए आज़ादी हासिल करना चाहते थे। इन्हीं अहिंसावादी लोगों में से एक थे महात्मा गांधी। महात्मा गांधी की हत्या 30 जनवरी 1948 को बिड़ला हाउस में गोडसे ने की जब वे प्रार्थना के लिए गए थे।

Gandhi Jayanti 2020 Hindi: जानिए महात्मा गांधी जी के तीन बन्दर प्रतीकों की सीख

बुरा मत देखो – इस बन्दर ने अपने दोनों हाथों से आँखों को ढक रखा है। इस बन्दर के माध्यम से बुरा न देखने की शिक्षा दी गई है। आज हमें जो परमात्मा ने तकनीक दी है उसका दुरुपयोग नहीं करना चाहिए उसका सदुपयोग करना चाहिए। बुरा देखते हुए अपना समय बर्बाद करती युवा पीढ़ी स्वयं बर्बाद हो रही है।

उदाहरण के लिए हमें परमात्मा ने मोबाइल, इंटरनेट जैसी सुविधाएं फिल्में, अश्लीलता, मात्र मनोरंजन देखने के लिए नहीं दिए। बल्कि ये तकनीक शिक्षा और ज्ञान अर्जन के लिए उपयोग की जानी चाहिए। आज हम पढ़े लिखे हैं व हमें ज्ञान समझाने के लिए ये तकनीक परमात्मा ने दी ताकि इस तकनीक के माध्यम से शिक्षा, ज्ञान पर जोर दिया जाए। सत्संग के माध्यम से मोक्ष प्राप्त कर सकें।

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बुरा मत सुनो – इस बन्दर ने अपने दोनों हाथों से दोनों कान ढंक रखे हैं। इसका अर्थ है बुरा न सुनना चाहिए। हमें अच्छी संगत करना चाहिए। पूर्ण गुरु की तलाश करना चाहिए उनके ज्ञान को सुनना चाहिए। मात्र गाने, बकवास और निंदा करने परमात्मा द्वारा दी गई इन इंद्रियों का अपमान है। पूर्ण सन्त के सत्संग वचनों को सुनना चाहिए।

बुरा मत बोलो – इस बन्दर ने दोनों हाथों से अपने मुँह पर हाथ रखा है। इसका अर्थ है कि किसी से भी अपशब्द, निंदा, असत्य नहीं कहना चाहिए। किसी को भी अपनी वाणी से आघात न पहुंचे ऐसा व्यवहार करना चाहिए। सदा सत्य बोलना चाहिए झूठ नहीं।

परमात्मा कबीर साहेब भी कहते हैं-

कबीर, ऐसी बानी बोलिये, मन का आपा खोय |
औरन को शीतल करै, आपुहिं शीतल होय ||

Gandhi Jayanti 2020 Hindi: लेकिन जीव यानी मनुष्य यह जानने के बावजूद कि क्या उचित है और क्या अनुचित अपने मन माफिक कार्य करता रहता है। निंदा रस में उसे आनन्द आता है। निंदा करने और सुनने दोनों में रुचि होती है। सत्संग या अच्छे विचारों से आज लोग ऊब जाते हैं। बिना फिल्मों के लोगों का समय नहीं कटता। आत्मा जानती है क्या सही है और क्या गलत भले ही कुतर्क देकर उन्हें सही साबित किया जाए। यह सभी बुराइयाँ पूर्ण गुरु यानी तत्वदर्शी सन्त अपने सतज्ञान से छुड़वा सकता है, जिसकी शरण में जाने से सर्व सुख मिल सकते हैं। इसके अतिरिक्त सत्य वाचन, स्वाबलंबन गांधी जी द्वारा सिखाये महत्वपूर्ण पाठों में से एक हैं। गांधी जी ने समय व संसाधनों की बचत की ओर ज़ोर दिया था।

गांधी जयंती (Gandhi Jayanti 2020) पर जानिए गुरु बनाना क्यों जरूरी है?

महात्मा गांधी जी ने मोक्ष प्राप्ति के लिए कई व्रत भी किए और उन्होंने गुरु राजचंद्र जी को अपना गुरु बनाया। गांधी जी सत्य के पुजारी थे एवं उन्होंने सत्य के साथ मेरे प्रयोग नामक पुस्तक भी लिखी जिसमे सत्य के साथ अपने अनुभवों को बताया है।

सतगुरु मिले तो इच्छा मेटै, पद मिल पदै समाना |
चल हंसा उस लोक पठाऊँ, जो आदि अमर अस्थाना ||

गुरु बनाना जरूरी होता है गुरु के बिना ज्ञान भी नही हो सकता। गुरु के बिना जीवन अधूरा है। क्योंकि गुरु के बिना शास्त्रों को भी समझना नमुमकिन है।

कबीर साहिब जी कहते हैं

कबीर, गुरु गोविंद दोनों खड़े, किसके लागों पाय|
बलिहारी गुरु आपने गोविंद दिया मिलाय ||

गांधी जयंती पर जानिए कौन है वह तत्वदर्शी सन्त जो सभी बुराइयाँ छुटवा सकता है

पूर्ण संत कौन है जिसकी शरण में जाने से हर तरह की बुराई छूट जाती है? आईये जानें हमारे धर्म ग्रन्थों में उस पूर्ण संत की क्या पहचान बताई है।

  • श्रीमद्भागवत गीता के अध्याय 4 के श्लोक 34 में गीता ज्ञानदाता ने अर्जुन को तत्वदर्शी सन्त की खोज कर उसकी शरण में जाने के लिए कहा है। तत्वदर्शी सन्त की पहचान का अध्याय 15 के श्लोक 1 से 4 तथा श्लोक 16 व 17 मे प्रमाण है कि जो संत उल्टे लटके संसार रूपी वृक्ष के सभी हिस्सों को समझा देगा, वही पूर्ण संत है। वह तत्व को जानने वाला है। वह पूर्ण संत इस वृक्ष के सभी भागों के बारे में बताता है।

कबीर, अक्षर पुरुष एक पेड़ है, निरंजन वाकी डार |
तीनों देवा शाखा हैं, पात रूप संसार ||

  • कबीर साहेब ने धर्मदास को बताया था कि मेरा संत सतभक्ति बतायेगा लेकिन सभी संत व महंत उसके साथ झगड़ा करेंगे। यही सच्चे संत की पहचान होगी।

जो मम संत सत उपदेश दृढ़ावै (बतावै), वाके संग सभि राड़ बढ़ावै |
या सब संत महंतन की करणी, धर्मदास मैं तो से वर्णी ||

  • यजुर्वेद अध्याय 19 मंत्रा 25 व 26 में लिखा है कि पूर्ण तत्वदर्शी सन्त वेदों के अधूरे वाक्यों अर्थात् सांकेतिक शब्दों व एक चौथाई श्लोकों को पुरा करके विस्तार से बताएगा व तीन समय की पूजा बताएगा। सुबह पूर्ण परमात्मा की पूजा, दोपहर को विश्व के सभी देवताओं का सत्कार व संध्या आरती अलग से बताएगा वह जगत का उपकारक संत है।
  • श्रीमद्भागवत गीता में अध्याय 17 के श्लोक 23 में तीन सांकेतिक मन्त्र “ओम,तत्, सत्” का प्रमाण है। श्रीमद्भागवत गीता में गीता ज्ञान दाता कहता है कि उस परमात्मा को हासिल करने का तीन मंत्रों का का होना आवश्यक है। गीता ज्ञान दाता कहता है कि तू सच्चे संत की तलाश करके उससे इन मंत्रों को हासिल कर और अपना कल्याण करवा।
  • श्री गुरु नानक जी महाराज अपनी वाणी द्वारा समाझाना चाहते हैं कि पूरा सतगुरु वही है जो दो अक्षर के जाप के बारे में जानता है।
  • सतगुरु गरीबदास जी ने भी अपनी वाणी में कहा कि वो सच्चा संत चारों वेदों, छः शास्त्रों, अठारह पुराणों आदि सभी ग्रंथों का पूर्ण जानकार होगा अर्थात् उनका सार निकाल कर बताएगा।

गरीब, सतगुरु के लक्षण कहूं, मधुरे बैन विनोद |
चार बेद, षट शास्त्र, कह अठारह बोध ||

वर्तमान में पूर्ण संत कौन है?

पूर्ण गुरु या संत कौन है? वर्तमान में इस पृथ्वी पर एकमात्र तत्वदर्शी व पूर्ण संत “सन्त रामपाल जी महाराज जी” हैं। केवल वही ऐसे सन्त हैं जिन्होंने नशामुक्ति और दहेजप्रथा का सफलतापूर्वक उन्मूलन किया है। केवल वही ऐसे सन्त हैं जिनके सान्निध्य में भारत बनेगा विश्वगुरु और धरती बनेगी स्वर्ग समान। वर्तमान में पूर्ण गुरु व तत्वदर्शी संत सन्त रामपाल जी महाराज जी हैं। ये वही सन्त हैं जिनके विषय में पवित्र गीता में भी संकेत किया है। तत्वज्ञान एवं सतभक्ति प्राप्त करने के लिए अविलंब जगतगुरु तत्वदर्शी सन्त रामपाल महाराज जी से निःशुल्क नामदीक्षा लें और अपना जीवन सफल बनाएं। अधिक जानकारी के लिए सतलोक आश्रम यूट्यूब चैनल पर विज़िट करें।