झज्जर, हरियाणा: हरियाणा के झज्जर जिले की बहादुरगढ़ तहसील में लोवा कलां नाम का एक गांव है। गांव लोवा कलां में मानवता की एक ऐसी मिसाल पेश की गई है जिसने सरकारी तंत्र की विफलता को उजागर कर दिया है। पिछले 6 महीनों से गांव की लगभग 300 एकड़ भूमि जलमग्न थी, जिससे किसान दाने-दाने को मोहताज हो रहे थे। प्रसाशनिक अधिकारियों के चक्कर काटने के बाद भी जब उम्मीद के अनुसार कोई सुनवाई नहीं हुई, तब संत रामपाल जी महाराज के एक आदेश ने गांव की किस्मत बदल दी। प्रार्थना स्वीकार होने के मात्र 24 घंटे के भीतर राहत सामग्री से लदा काफिला गांव पहुँचा।
संत रामपाल जी महाराज के इस बाढ़ राहत कार्य के मुख्य बिन्दु
- त्वरित समाधान: जहाँ सरकारी फाइलें महीनों नहीं हिलतीं, वहां संत जी के आदेश पर 24 घंटे में भारी मशीनरी और पाइप गांव पहुँच गए।
- पारदर्शिता का अनूठा मॉडल: इस सहायता के सही उपयोग के लिए ‘थ्री-स्टेप वीडियो’ (बाढ़ के समय, पानी की निकासी के बाद और लहलहाती फसल के समय) की प्रक्रिया अनिवार्य की गई है।
- स्थाई संपत्ति: ये पाइप और मोटरें गांव को स्थाई तौर पर भेंट की गई हैं, ताकि भविष्य में कभी भी जलभराव होने पर ग्रामीण आत्मनिर्भर रह सकें।
- किसान रक्षक की भूमिका: विभिन्न किसान यूनियनों और खाप पंचायतों द्वारा ‘किसान रत्न’ से सम्मानित संत रामपाल जी महाराज जी ने सिद्ध किया कि वे ही किसानों के सच्चे मसीहा हैं।
लोवा कलां गांव के सिसकते किसानों का दर्द समझिए
झज्जर के लोवा कलां गांव के लोगों की स्थिति उन डूबते हुए अभागों जैसी थी जिनके पास तिनके तक का सहारा नहीं था । पिछले 6 महीनों से गांव की लगभग 300 एकड़ उपजाऊ भूमि पानी की चादर के नीचे दबी हुई थी। किसानों के लिए उनकी जमीन और फसल ही एकमात्र आजीविका का एकमात्र सहारा थी, जो उनकी आंखों के सामने बर्बाद हो रही थी।
बाढ़ के कारण प्रत्येक किसान को प्रति एकड़ लगभग 2 लाख रुपये का भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा था। खेतों में पानी भरा होने के कारण न केवल फसलें बर्बाद हुईं, बल्कि पशुओं के चारे का भारी संकट खड़ा हो गया और गांव में आने जाने के रास्ते व स्कूल तक बंद हो गए। ग्रामीणों के चेहरों पर हताशा साफ़ देखी जा सकती थी; उन्हें डर था कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो वे कर्ज के ऐसे जाल में फंस जाएंगे जिससे निकलना नामुमकिन होगा। सरकारी तंत्र और जिम्मेदार लोगों की बेरुखी ने उनके इस दर्द को और गहरा कर दिया था, क्योंकि बार-बार गुहार लगाने के बाद भी प्रशासन मौन साधे खड़ा था।
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जब सरकारी तंत्र ने आंखें मूंदी, तब ग्रामीणों ने संत रामपाल जी महाराज के चरणों में लगाई अर्जी
जब चारों ओर अंधेरा छा गया और शासन-प्रशासन से मदद की सारी उम्मीदें टूट गईं, तब लोवा कलां की ग्राम पंचायत और सरपंच राहुल ने एक निर्णायक कदम उठाया। उन्होंने गांव के अस्तित्व को बचाने के लिए संत रामपाल जी महाराज के दरबार में अपनी करुण पुकार (प्रार्थना) भेजी।
ग्रामीणों ने अपनी व्यथा बताते हुए संत जी से गुहार लगाई कि वे ही अब इस डूबते हुए गांव के मसीहा बन सकते हैं। जैसे ही यह प्रार्थना संत रामपाल जी महाराज तक पहुँची, उन्होंने तुरंत सेवादारों को आदेश दिया कि गांव की मदद के लिए सारी मशीनरी झोंक दी जाए। संत रामपाल जी महाराज जी का स्पष्ट संदेश था कि “अन्नदाता” को इस संकट से उबारना ही सबसे बड़ी प्राथमिकता है।
24 घंटे में पहुँचा राहत का काफिला: मसीहा बनकर आए संत रामपाल जी महाराज
संत रामपाल जी महाराज जी की अपार दया का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि प्रार्थना के मात्र 24 घंटों के भीतर, राहत सामग्री का एक विशाल काफिला लोवा कलां की चौखट पर खड़ा था। ग्रामीणों की हैरानी का ठिकाना नहीं रहा, क्योंकि उन्होंने ऐसा सोचा ही नहीं था कि ये समान आएगा । लेकिन यहाँ तो दूसरे ही दिन सामान के साथ समाधान भी सामने खड़ा था।

संत रामपाल जी महाराज ने न केवल पाइप और मोटरें भेजीं, बल्कि यह सुनिश्चित किया कि सहायता “पूर्ण” हो, ताकि ग्रामीणों को एक नट-बोल्ट के लिए भी कहीं और न भटकना पड़े।
संत रामपाल जी महाराज द्वारा प्रदान की गई राहत सामग्री का विवरण
| वस्तु का विवरण | मात्रा | विशिष्टताएँ (Specifications) |
| विशाल मोटरें | 02 यूनिट | 15 HP उच्च-शक्ति (औद्योगिक ग्रेड) |
| पाइप | 10,000 फुट | 8-इंच हैवी ड्यूटी डिलीवरी लाइन |
| सहायक उपकरण (Accessories) | पूर्ण सेट | स्टार्टर, बैंड, नट-बोल्ट और बेंड्स |
| सहायता किट | इंस्टालेशन किट | फेविकोल (Adhesives) और आवश्यक औजार |
| ग्रामीणों के लिए लागत | ₹ 0 (शून्य) | 100% निःशुल्क राहत सेवा |
इस अभूतपूर्व मदद के बाद गांव की अर्थव्यवस्था में करोड़ों रुपये की वापसी की उम्मीद जगी है। किसानों का मानना है कि अब वे कर्ज के बोझ से मुक्त हो पाएंगे और उनका जन-जीवन एक बार फिर पटरी पर दौड़ने लगेगा। इस पुण्य कार्य का पूरा श्रेय केवल संत रामपाल जी महाराज को जाता है, जिन्होंने अपनी निस्वार्थ दया से एक और पूरे गांव को उजड़ने से बचा लिया।
ग्रामीणों की आंखों में आंसू और चेहरे पर खुशी: क्या कहा लोवा कलां के लोगों ने?
राहत सामग्री पहुँचने पर गांव का दृश्य किसी उत्सव जैसा था। ढोल-नगाड़ों और पुष्प वर्षा के बीच ग्रामीणों ने अपने दिल की बात साझा की:
- सरपंच राहुल (लोवा कलां): “पांच-छह महीने से पूरा गांव डूबा पड़ा था। हमने सरकार को कई बार गुहार लगाई पर कोई सुनवाई नहीं हुई। लेकिन जब महाराज जी से एक बार प्रार्थना की, तो उन्होंने इतनी ‘मौज’ कर दी कि हम बता नहीं सकते। हम तहे दिल से संत रामपाल जी महाराज का धन्यवाद करते हैं।”
- ग्रामीण जितेंद्र: “मेरे 6 किले बाढ़ के कारण खाली पड़े थे, हम कुछ बो नहीं पा रहे थे। अब संत रामपाल जी महाराज की कृपा से पाइप और मोटर मिल गए हैं, अब हम सक्षम हैं कि अगली फसल बिजाई कर सकें। हमें उम्मीद नहीं थी कि इतनी जल्दी समाधान होगा।”
- ग्रामीण बुजुर्ग और मातृशक्ति: गांव की महिलाओं और बुजुर्गों ने भावुक होकर कहा, “जो काम सरकार और प्रशासन नहीं कर पाया, वह संत जी ने कर दिखाया। वे हमारे लिए भगवान के समान हैं। किसान देश की रीढ़ की हड्डी हैं और संत जी ने उस रीढ़ को टूटने से बचा लिया।”
- स्थानीय निवासी: “आज पूरे हरियाणा में बदलाव दिख रहा है। संत रामपाल जी महाराज निस्वार्थ भाव से समाज और राष्ट्र हित के लिए काम कर रहे हैं। वे सच्चे कर्मयोगी हैं, जिन्होंने जमींदारों के मसीहा के रूप में जन्म लिया है।”
खुशहाली की ओर बढ़ता लोवा कलां
राहत सामग्री पहुँचने पर ग्रामीणों ने संकल्प लिया कि वे संत रामपाल जी महाराज के आदेशानुसार जल्द से जल्द जल निकासी करेंगे। लोगों ने माना कि संत जी केवल बाढ़ से ही नहीं बचा रहे, बल्कि नशा मुक्ति, दहेज मुक्त विवाह (रमैनी) और भ्रष्टाचार मुक्त समाज बनाकर देश का नवनिर्माण कर रहे हैं। ग्रामीणों ने प्रार्थना की कि ऐसे परोपकारी संत जल्द से जल्द हमारे बीच हों ताकि समाज का और अधिक कल्याण हो सके।
आप इस पूरे घटनाक्रम की विडिओ को यहाँ देख सकते हैं :



