हरियाणा राज्य के झज्जर जिले के अंतर्गत आने वाले गांव सिलानी (जिसे सिलानी जालिम भी कहा जाता है) में पिछले 10 से 15 वर्षों से गंभीर जलभराव की समस्या बनी हुई थी। इस प्राकृतिक और प्रशासनिक उपेक्षा के कारण गांव की लगभग 2000 एकड़ उपजाऊ कृषि भूमि पूरी तरह से पानी में डूबकर एक विशाल झील का रूप ले चुकी थी।
इस जलभराव का प्रभाव केवल कृषि क्षेत्रों तक सीमित नहीं था। वर्षा ऋतु के समय यह दूषित और गंदा पानी बहकर गांव की निचली रिहायशी बस्तियों तथा स्थानीय नागरिकों के घरों के भीतर तक प्रवेश कर जाता था। लंबे समय तक पानी जमा रहने और सीलन के कारण कई रिहायशी मकानों की दीवारों में गहरी दरारें उत्पन्न हो गईं और कुछ मकानों की दीवारें ढह भी गईं।
इस विकट स्थिति के कारण स्थानीय किसान समय पर अपनी फसलों की बिजाई नहीं कर पाते थे और दिसंबर या जनवरी के महीने में अत्यधिक देरी से बहुत पिछती बिजाई करने को मजबूर थे। इस कारण किसानों को प्रतिवर्ष दो-दो फसलों का भारी नुकसान उठाना पड़ रहा था। इसके अतिरिक्त, गांव का मुख्य तालाब (जोहड़) पूरी तरह भरकर ओवरफ्लो हो जाता था, जिससे रास्तों पर घुटनों से ऊपर तक पानी जमा हो जाता था और ग्रामीणों का आवागमन पूरी तरह अवरुद्ध हो जाता था।
प्रशासनिक विफलता और ग्राम पंचायत का निर्णय
इस भीषण जलभराव और 2000 एकड़ भूमि की तबाही को रोकने के लिए गांव के वर्तमान सरपंच महावीर और अन्य ग्रामीणों ने दशकों तक विभिन्न मंत्रियों, विधायकों, सांसदों (एमपी) और प्रशासनिक अधिकारियों के चक्कर काटे। सरपंच महावीर के अनुसार उनके 3 वर्ष के कार्यकाल के दौरान और उससे पूर्व भी राजनीतिक स्तर पर बार-बार गुहार लगाने के बावजूद इस समस्या का कोई समाधान नहीं निकाला गया। गंदे पानी की निकासी के लिए अस्थाई तौर पर नाले और बाईपास बनवाए गए, परंतु वाटर लेवल अत्यधिक ऊपर होने के कारण वे प्रयास पूरी तरह विफल रहे।
अंततः जब प्रशासन और राजनीति के सभी द्वार बंद हो गए, तब गांव सिलानी की पंचायत ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया। सरपंच महावीर और पंचायत के सदस्यों ने इस गंभीर संकट से मुक्ति पाने के लिए संत रामपाल जी महाराज के समक्ष सहायता हेतु अर्जी लगाने का निश्चय किया।
सर्वे टीम का निरीक्षण और तकनीकी आवश्यकताएं
ग्राम पंचायत सिलानी जालिम के प्रतिनिधियों ने संत रामपाल जी महाराज के समक्ष अपने लेटर पैड पर एक लिखित प्रार्थना पत्र सौंपा। इस आवेदन में प्रारंभिक रूप से 20000 फुट पाइप और दो मोटरों की मांग की गई थी ताकि बाढ़ के पानी को निकालकर सुदूर स्थित ड्रेन नंबर आठ (Drain Number 8) तक पहुँचाया जा सके।
प्रार्थना पत्र प्राप्त होते ही संत रामपाल जी महाराज के आदेशानुसार एक विशेष सर्वे टीम ने तुरंत गांव सिलानी का दौरा किया। सर्वे टीम ने धरातल पर जाकर प्रभावित कृषि भूमि, प्रभावित बस्तियों और जलभराव वाले क्षेत्रों का विस्तृत निरीक्षण किया।
टीम ने पाया कि ग्रामीणों की जल निकासी की मांग पूरी तरह जायज है। सर्वे टीम के तकनीकी मूल्यांकन के अनुसार, गांव की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए कुल पांच जल निकासी बिंदु (पॉइंट्स) चिन्हित किए गए। इनमें से प्रथम बिंदु से ड्रेन नंबर आठ की दूरी लगभग 1.25 किलोमीटर (सवा किलोमीटर) पाई गई, जिसके लिए लगभग 3300 से 3400 फीट लंबी लाइन की आवश्यकता थी।
संपूर्ण पांचों पॉइंट्स को आपस में जोड़कर ड्रेन नंबर आठ तक पानी पहुँचाने के लिए सर्वे टीम द्वारा कुल 13500 फीट लंबे और 8 इंच चौड़े भारी-भरकम पाइप तथा 10-10 एचपी (HP) की पांच विद्युत मोटरों की आवश्यकता को अंतिम रूप से पास किया गया।
महज 12 घंटे के भीतर राहत सामग्री की आपातकालीन आपूर्ति
ग्राम पंचायत द्वारा दोपहर 2:00 बजे (21 तारीख को) संत रामपाल जी महाराज के समक्ष प्रार्थना लगाई गई थी। इसके बाद एक अभूतपूर्व घटनाक्रम में महज 11 से 12 घंटे के भीतर, यानी अगली सुबह 5:00 से 6:00 बजे के बीच ही राहत सामग्री से लदे ट्रकों का एक विशाल काफिला गांव सिलानी के प्रवेश द्वार पर पहुँच गया। पंजाब स्थित फैक्ट्री से सीधे भेजी गई इस सहायता सामग्री की तीव्र गति को देखकर सरपंच महावीर और समस्त ग्रामवासी आश्चर्यचकित रह गए।
संत रामपाल जी महाराज ने चरण 2 की इस आपातकालीन मुहिम के अंतर्गत न केवल पाइप भेजे, बल्कि बिना मांगे ही पाइपों को आपस में जोड़ने के लिए आवश्यक तकनीकी सामग्री जैसे फेविकोल (सॉल्यूशन), नट-बोल्ट और अन्य सभी सहायक उपकरण भी अपनी ओर से साथ भेजे।
इस विशाल काफिले और लाखों रुपये के राहत सामान का स्वागत करने के लिए गांव के बुजुर्ग, नौजवान और महिलाएं हाथों में पुष्पमालाएं लेकर गांव की सीमा पर एकत्रित हुए। संत रामपाल जी महाराज के स्वरूप पर पुष्पमालाएं अर्पित की गईं और मंगल गीतों व मंगलाचरण के साथ सेवादारों द्वारा समस्त सामग्री सिलानी ग्राम पंचायत को आधिकारिक रूप से सुपुर्द (हैंडओवर) की गई।
सिलानी जालिम बाढ़ राहत परियोजना का संक्षिप्त विवरण
| श्रेणी | विवरण और सांख्यिकी आंकड़े |
| प्रभावित क्षेत्र | गांव सिलानी जालिम, जिला झज्जर, हरियाणा |
| समस्या की अवधि | पिछले 10 से 15 वर्षों से निरंतर जलभराव |
| क्षतिग्रस्त कृषि भूमि | लगभग 2000 एकड़ उपजाऊ भूमि (फसल बिजाई में असमर्थता) |
| राहत अभियान | अन्नपूर्णा मुहिम के अंतर्गत चरण 2 (फेज़ 2) |
| स्वीकृत पाइप की लंबाई व आकार | 13,500 फीट लंबी, 8 इंच व्यास (चौड़ाई) के भारी पाइप |
| स्वीकृत विद्युत मोटरें | 10-10 एचपी (HP) क्षमता की 5 शक्तिशाली मोटरें |
| कुल चिन्हित जल निकासी बिंदु | 05 मुख्य लोकेशंस (पॉइंट्स) |
| आपूर्ति की समयावधि | प्रार्थना के महज 11 से 12 घंटे के भीतर (रातों-रात आपूर्ति) |
| सहायक सामग्री | फेविकोल, नट-बोल्ट और पाइप जोड़ने का संपूर्ण सामान |
| अंतिम जल निकासी गंतव्य | ड्रेन नंबर आठ (Drain Number 8) |
| पंचायत का संकल्प | 15 दिनों के भीतर पाइपों को भूमिगत (जमीन में दबाने) करने का लक्ष्य |
आगामी क्रियान्वयन योजना और परियोजना की शर्तें
राहत सामग्री के वितरण के समय संत रामपाल जी महाराज की ओर से सेवादारों ने ग्राम पंचायत के समक्ष एक आवश्यक नीतिगत निर्देश और निवेदन रखा। संत रामपाल जी महाराज का यह स्पष्ट निर्देश है कि प्राप्त हुए 13,500 फीट पाइपों को सबसे पहले ग्राम पंचायत अपनी देखरेख में निर्धारित पांचों पॉइंट्स पर भूमिगत (जमीन के नीचे) दबाने का कार्य पूर्ण करे।
सरपंच महावीर और सिलानी पंचायत ने सामूहिक रूप से यह संकल्प लिया है कि वे आगामी 15 दिनों के भीतर इन सभी पाइपों को भूमिगत रूप से बिछाने का कार्य पूर्ण कर लेंगे। जैसे ही पाइपलाइन दबाने का कार्य संपन्न हो जाएगा, ग्राम पंचायत द्वारा इसकी सूचना पुनः सेवादारों को दी जाएगी। इसके पश्चात सर्वे टीम एक बार फिर से बिछाई गई लाइन का भौतिक निरीक्षण करेगी।
लाइन दुरुस्त पाए जाने पर तुरंत ही संत रामपाल जी महाराज द्वारा 10 एचपी की पांचों शक्तिशाली मोटरें गांव को उपलब्ध करवा दी जाएंगी, जिन्हें इन पॉइंट्स पर स्थाई रूप से स्थापित कर दिया जाएगा ताकि भविष्य में होने वाली भारी बारिश का सारा गंदा पानी सीधे ड्रेन नंबर आठ में निष्कासित किया जा सके।
अन्नपूर्णा मुहिम के तहत राष्ट्रव्यापी और वैश्विक जनकल्याणकारी कार्य
इस राहत अभियान के दौरान उपस्थित सेवादारों ने स्पष्ट किया कि संत रामपाल जी महाराज द्वारा संचालित यह सभी सामाजिक और परोपकारी सेवाएं पूर्णतः निःस्वार्थ हैं और इनका किसी भी प्रकार के राजनीतिक चुनाव, वोट बैंक या सरकारी सहायता से कोई संबंध नहीं है। संत रामपाल जी महाराज ने अन्नपूर्णा मुहिम के माध्यम से पूरे देश में मानव समाज के कल्याण के लिए बड़े स्तर पर सेवा कार्य चलाए हैं।
इस मुहिम के अंतर्गत समाज के अत्यंत निर्धन और असहाय परिवारों के लिए पक्के मकानों का निर्माण करवाया जाता है। इसके साथ ही ऐसे परिवारों को प्रति माह राशन किट उपलब्ध करवाई जाती है, जिसमें पूरे महीने के भोजन की आवश्यक सामग्री जैसे आटा, दाल, चावल, आलू, नमक, मिर्च, तेल, दूध और अचार आदि शामिल होते हैं।
सिलानी गांव के साथ-साथ इसी चरण में पलवल क्षेत्र के एक अन्य बाढ़ प्रभावित गांव में भी संत रामपाल जी महाराज द्वारा इसी प्रकार पाइप और राहत सामग्री उपलब्ध कराई गई है। इस परोपकारी मुहिम का मुख्य उद्देश्य संपूर्ण समाज को नशा मुक्त बनाना, दहेज जैसी सामाजिक कुप्रथाओं से मुक्त करना और आध्यात्मिक ज्ञान के आधार पर भारत को पुनः सोने की चिड़िया के रूप में स्थापित करना है।
2000 एकड़ कृषि भूमि की बहाली और ग्रामीणों को स्थाई आर्थिक राहत
संत रामपाल जी महाराज द्वारा समय पर की गई इस अभूतपूर्व सहायता से गांव सिलानी जालिम के 2000 एकड़ क्षेत्र में फैले सैकड़ों किसान परिवारों को एक नया जीवनदान मिला है। 85 वर्षीय ग्रामीण बुजुर्ग महावीर सहित अन्य स्थानीय महिलाओं (जैसे खुशी) और पुरुषों ने व्यक्त किया कि जो कार्य बड़े-बड़े राजनेता और सरकारें वर्षों में नहीं कर पाईं, वह कार्य संत रामपाल जी महाराज ने एक ही रात में कर दिखाया।
इस स्थाई जल निकासी व्यवस्था के पूर्ण होने से अब खेतों का गंदा पानी पूरी तरह साफ हो जाएगा, जिससे किसान वर्ष में दो-दो फसलों की सामान्य बिजाई कर सकेंगे। रिहायशी बस्तियों में पानी घुसने की समस्या समाप्त होने से मकानों का ढहना और दीवारों में दरारें आने का खतरा हमेशा के लिए टल गया है, जिससे संपूर्ण गांव में अत्यंत हर्ष और राहत का माहौल व्याप्त है।



