हरियाणा के जिला झज्जर की बहादुरगढ़ तहसील के अंतर्गत आने वाले गांव कानौंदा की यह गाथा केवल एक आपदा से मुक्ति की नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक जागृति और निस्वार्थ सेवा की मिसाल है। जहाँ सरकारी तंत्र और प्रशासन किसानों की गुहार सुनकर भी मौन रहा, वहाँ जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज एक मसीहा के रूप में सामने आए। कानौंदा के किसानों के लिए पिछले कुछ साल किसी बुरे सपने से कम नहीं थे, क्योंकि उनकी आजीविका का एकमात्र साधन, उनके खेत, पानी के नीचे दबे हुए थे। इस संकट के समय में संत रामपाल जी महाराज की ‘अन्नपूर्णा मुहिम’ ने न केवल खेतों को सुखाया बल्कि ग्रामीणों के मुरझाए चेहरों पर मुस्कान भी लौटा दी। आइए जानते है कि कैसे संत रामपाल जी महाराज ने बदली इस गांव की तस्वीर।
गांव की वर्तमान स्थिति
कानौंदा गांव के ग्रामीण पिछले 3 से 4 वर्षों से भीषण जलभराव की मार झेल रहे थे। लगभग 300 से 400 एकड़ उपजाऊ कृषि भूमि जलमग्न हो चुकी थी, जिसके कारण फसलें बोना असंभव हो गया था। ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने प्रशासन को कई बार लिखित में आवेदन दिया, एसडीएम और बिजली विभाग के चक्कर लगाए, लेकिन एक साल बीत जाने के बाद भी कोई सुनवाई नहीं हुई। स्थिति इतनी विकट थी कि किसानों की आंखों के सामने उनकी मेहनत पानी में सड़ रही थी और भविष्य अंधकारमय नजर आ रहा था। प्रशासनिक उदासीनता ने किसानों को मानसिक और आर्थिक रूप से तोड़ दिया था।
ग्रामीणों की मार्मिक मांग
जब हर तरफ से निराशा हाथ लगी, तो गांव की पंचायत और सरपंच प्रतिनिधि ने संत रामपाल जी महाराज के चरणों में अर्जी लगाने का निर्णय लिया। उनकी मांग अत्यंत व्यावहारिक थी ताकि पानी को स्थायी रूप से निकाला जा सके:
- 10 HP की 3 शक्तिशाली मोटरें
- 7500 फीट 8-इंच की ड्रेनेज पाइपलाइन
ग्रामीणों ने बरवाला स्थित ट्रस्ट कार्यालय में अपनी पीड़ा रखी और आश्चर्यजनक रूप से उनकी प्रार्थना को पहली ही झलक में स्वीकार कर लिया गया।
संत रामपाल जी महाराज द्वारा दी गई सहायता
जगतगुरु संत रामपाल जी महाराज के दिव्य मार्गदर्शन में यह सहायता इतनी त्वरित थी कि ग्रामीणों के शब्दों में, “परसों हम अर्जी लेकर गए थे और आज सामान गांव पहुंच गया।” मात्र 48 घंटों के भीतर पहुँचाई गई यह राहत सामग्री पूरी तरह से निःशुल्क और स्थायी थी। सामग्री में शामिल था:
- 3 शक्तिशाली मोटरें (10 HP प्रत्येक)
- 7500 फीट उच्च गुणवत्ता वाली 8-इंच पाइपलाइन
- स्टार्टर, केबल, बैंड, नट-बोल्ट और सभी आवश्यक प्लंबिंग फिटिंग्स
संत जी के आदेशानुसार सेवादारों ने हर छोटी-से-छोटी चीज (नट-बोल्ट तक) उपलब्ध कराई ताकि किसानों को बाजार जाने की आवश्यकता न पड़े और तुरंत निकासी कार्य शुरू हो सके।
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विशेष स्वागत: ट्रैक्टरों के काफिले से जयघोष
जब राहत सामग्री का काफिला कानौंदा पहुंचा, तो नजारा देखने लायक था। गांव वालों ने अपनी खुशी और कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए एक विशाल स्वागत समारोह का आयोजन किया। लगभग 20-25 ट्रैक्टरों की कतार बनाकर ग्रामीण गांव के बाहर ही स्वागत के लिए खड़े हो गए। यहाँ का माहौल किसी उत्सव जैसा था, जहाँ ढोल-नगाड़ों की गूंज के साथ-साथ संत रामपाल जी महाराज के जयकारे लग रहे थे। विशेष बात यह थी कि ट्रैक्टरों पर डीजे के शोर के बजाय ‘मंगलाचरण’ और भक्ति संगीत गूंज रहा था, जो इस सेवा कार्य की आध्यात्मिक पवित्रता को दर्शा रहा था। माताओं-बहनों ने भी पुष्प वर्षा कर और फूल मालाएं अर्पित कर संत रामपाल जी महाराज का आभार व्यक्त किया।
ग्रामीणों की आवाज़
कानौंदा के ग्रामीणों ने भावुक होकर अपने विचार साझा किए, जो संत रामपाल जी महाराज के प्रति उनकी अटूट श्रद्धा को प्रमाणित करते हैं:
- सरपंच/प्रतिनिधि का मानना था कि “धन्य है वह जननी, धन्य है वह गांव धनाना और धन्य है वह भारतवर्ष देश जिसने ऐसे संत रामपाल जी महाराज को जन्म दिया। उन्होंने समाज से दहेज और नशा मिटाया और अब अन्नपूर्णा मुहिम से किसानों को जीवनदान दे रहे हैं।”
- एक ग्रामीण का मानना था कि “हम प्रशासन के पास गए, परसों गुरु जी के पास गए थे और आज सामान हमारे सामने खड़ा है। इतनी फास्ट स्पीड हमने आज तक कहीं नहीं देखी।”
- ग्रामीण सुरेंद्र जी का मानना था कि “महाराज जी ने बहुत बड़ा काम किया है। ऐसा कोई संत नहीं करता जो उन्होंने किया है। सारा क्रेडिट संत रामपाल जी महाराज को जाता है।”
- ग्रामीण शिव नारायण जी का मानना था कि “संत रामपाल जी महाराज बहुत अच्छे आदमी हैं। उन्होंने हमारे गांव के लिए दादालाही (स्थायी) काम कर दिया है।”
- अन्य ग्रामीण का मानना था कि “हम 3-4 साल से पानी से जूझ रहे थे। टीवी पर मुहिम देखी और प्रधान जी के साथ प्रार्थना लेकर गए। उन्होंने हमारी प्रार्थना तुरंत स्वीकार की और आज हम गदगद हैं।”
जवाबदेही और पारदर्शिता
संत रामपाल जी महाराज की ‘अन्नपूर्णा मुहिम’ न केवल सेवा, बल्कि अनुशासन और पारदर्शिता का भी प्रतीक है। राहत सामग्री के साथ पंचायत को एक औपचारिक निर्देश पत्र भी दिया गया, जिसमें स्पष्ट किया गया कि:
- सामग्री का सामूहिक और सही उपयोग होना चाहिए ताकि अगली फसल (गेहूं) की बिजाई समय पर हो सके।
- निकासी प्रक्रिया की तीन चरणों में ड्रोन रिकॉर्डिंग की जाएगी: पानी भरने के समय, निकासी के बाद और फसल तैयार होने पर।
- यह रिकॉर्डिंग सतलोक आश्रमों में दानदाताओं को दिखाई जाएगी ताकि उन्हें विश्वास रहे कि उनके दान का उपयोग मानवता के हित में हो रहा है।
- यदि सामग्री का दुरुपयोग हुआ, तो भविष्य में ट्रस्ट की ओर से कोई सहायता नहीं दी जाएगी।
ग्राम पंचायत ने इन सभी शर्तों पर हस्ताक्षर कर अपनी पूर्ण सहमति जताई और सामग्री को संभालकर रखने का संकल्प लिया।
विश्व उद्धारक और किसान मसीहा: संत रामपाल जी महाराज
आज जहाँ धर्म के नाम पर कई संस्थाएं केवल धन एकत्र करने में लगी हैं, वहीं जगतगुरू तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज के मार्गदर्शन में दान की पाई-पाई जनसेवा में लगाई जा रही है। कानौंदा गांव के ग्रामीणों ने उनकी तुलना कबीर साहिब द्वारा काशी में किए गए ऐतिहासिक भंडारे से की और उन्हें “परमात्मा का स्वरूप” माना। 400 से अधिक गांवों में सफल राहत कार्य यह सिद्ध करता है कि वे ही वर्तमान में एकमात्र तत्वदर्शी संत और विश्व उद्धारक हैं। उन्होंने न केवल खेतों से पानी निकाला है, बल्कि लोगों के दिलों से अंधकार और अंधविश्वास निकालकर उन्हें सत्य भक्ति के मार्ग पर भी अग्रसर किया है। समाज सुधार, नशा मुक्ति और अब ‘अन्नपूर्णा मुहिम’ के माध्यम से वे राष्ट्र निर्माण में अद्वितीय योगदान दे रहे हैं।
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