हरियाणा के हिसार जिले की तहसील हांसी का ढाणा कलां गांव इस साल की बाढ़ में सबसे ज्यादा प्रभावित गांवों में से एक बन गया। यह कोई साधारण जलभराव नहीं था, बल्कि ऐसा संकट था जिसने किसानों की आजीविका, बच्चों की पढ़ाई, but the only धार्मिक स्थलों और पूरे सामाजिक जीवन को ठप कर दिया।
1200 से 1500 एकड़ उपजाऊ जमीन पानी में डूबी हुई थी। खेत तालाब बन चुके थे, रास्ते गायब थे और घरों तक पानी पहुंच चुका था। एक किसान जिसने 90 एकड़ जमीन ठेके पर ली थी, उसका अकेले का करीब ₹40 लाख का नुकसान हो चुका था। धान की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई और गेहूं की अगली बिजाई पर भी संकट मंडरा रहा था।
सिर्फ खेत ही नहीं, गांव का मुस्लिम कब्रिस्तान भी पानी में डूब गया था, जिससे अंतिम संस्कार तक करना मुश्किल हो गया था। कन्या स्कूल की इमारत में दीवारों तक पानी चढ़ चुका था और स्कूल गिरने के खतरे में था। बच्चों की पढ़ाई ठप थी, पशुओं के लिए चारा नहीं बचा था और डिस्पेंसरी भी बंद पड़ चुकी थी। पूरा गांव मानो सांस रोककर खड़ा था।
इसी निराशा के बीच ग्राम पंचायत ने फैसला लिया कि वे संत रामपाल जी महाराज से मदद की गुहार लगाएंगे। आसपास के अन्य गांवों की संत रामपाल जी महाराज जी द्वारा मदद देखकर इस गांव में भी कुछ उम्मेद जागी।
पंचायत की प्रार्थना और पहली राहत
इसी निराशा के बीच ग्राम पंचायत ढाणा कलां के सरपंच भूप सिंह सैनी ने हिम्मत जुटाई और पंच सदस्यों के साथ बरवाला स्थित कार्यालय जाकर संत रामपाल जी महाराज के चरणों में प्रार्थना रखी। उन्होंने 5000 फुट लंबी 8 इंच पाइप लाइन और 15 एचपी की मोटर की मांग की ताकि गांव और खेतों से पानी निकाला जा सके। पंचायत को पूरी उम्मीद नहीं थी कि इतनी जल्दी मदद मिलेगी, लेकिन भरोसा गहरा था क्योंकि आसपास के कई गांवों में संत रामपाल जी महाराज की बाढ़ राहत सेवा के बारे में सुना जा चुका था।
हैरानी तब हुई जब बहुत कम समय में सर्वे हुआ, ड्रोन से गांव का निरीक्षण किया गया और तुरंत राहत सामग्री भेजने का आदेश दे दिया गया। पहली खेप में 15 एचपी की मोटर, 5000 फुट पाइप और सभी जरूरी एक्सेसरी गांव पहुंची। जैसे ही यह सिस्टम चालू हुआ, करीब 250–300 एकड़ का पानी निकल गया। किसानों के चेहरों पर पहली बार राहत दिखाई दी और उम्मीद लौटी कि अगली फसल बचाई जा सकती है।
संकट सिर्फ खेतों तक सीमित नहीं
बाढ़ का कहर केवल खेती तक नहीं रुका। गांव का मुस्लिम कब्रिस्तान पूरी तरह पानी में डूब गया था, जिससे अंतिम संस्कार करना लगभग असंभव हो गया था। यह समस्या धार्मिक के साथ-साथ बेहद भावनात्मक भी थी। लोग डर में थे कि अगर किसी की मृत्यु हो गई तो वे अपने प्रियजन को सम्मान के साथ दफना भी नहीं पाएंगे। दूसरी ओर गांव का कन्या स्कूल भी तालाब बन चुका था। पानी दीवारों तक चढ़ आया था और इमारत गिरने का खतरा मंडरा रहा था। बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे थे, अभिभावक चिंतित थे और पूरा गांव असहाय महसूस कर रहा था। डिस्पेंसरी भी बंद पड़ गई थी और पशुओं के लिए चारा तक नहीं बचा था।
गांववालों की आवाज: दर्द, डर और उम्मीद
गांव के किसान बताते हैं कि वे जहर खाने तक की नौबत में थे। जिन लोगों ने कर्ज लेकर खेती की थी, उनके सामने बेइज्जती, कर्ज और भुखमरी का डर था। एक बुजुर्ग किसान ने कहा, “हमने ऐसा संकट पहले कभी नहीं देखा। अगर यह मदद नहीं मिलती तो कई घर टूट जाते। आज पहली बार लगा कि कोई हमारी सुन रहा है।”
मुस्लिम समुदाय के लोग भी भावुक थे। उनके कब्रिस्तान में डेढ़ से दो फुट पानी खड़ा था। एक स्थानीय निवासी ने कहा,
“हमने कभी नहीं सोचा था कि कोई हमारे कब्रिस्तान के लिए भी इतनी चिंता करेगा। आज हमारा पानी निकल जाएगा, यह हमारे लिए बहुत बड़ी राहत है।”
महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग भी राहत सामग्री देखने पहुंचे। गांव में माहौल किसी मेले जैसा था डर से भरा हुआ लेकिन उम्मीद से रोशन।
संत रामपाल जी महाराज द्वारा भेजे गए पत्र का सार
संत रामपाल जी महाराज द्वारा ग्राम पंचायत ढाणा कलां को भेजे गए पत्र में बहुत स्पष्ट, दृढ़ और साथ ही मानवीय निर्देश दिए गए थे, उन्होंने कहा कि जो भी राहत सामग्री दी जा रही है उसका उद्देश्य केवल दिखावा नहीं बल्कि वास्तविक रूप से गांव का पानी निकालकर किसानों की अगली फसल बचाना है। पत्र में यह भी लिखा था कि यदि उनकी दी गई मोटर-पाइप से तय समय में पानी नहीं निकलता और गेहूं की बिजाई नहीं होती तो भविष्य में ट्रस्ट उस गांव को कोई राहत नहीं देगा, हालांकि साथ ही यह भरोसा भी दिया गया कि आवश्यकता पड़ने पर पंचायत प्रार्थना करके और अधिक मोटर-पाइप ले सकती है क्योंकि “सामान चाहे जितना लगे, पानी निकलना चाहिए।”
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उन्होंने बताया कि गांव का ड्रोन सर्वे पहले ही कर लिया गया है और पानी उतरने के बाद तथा फसल लहराने के समय फिर से वीडियो बनाई जाएगी, जिसे सतलोक आश्रमों में दिखाया जाएगा ताकि दान का सही उपयोग प्रमाणित हो सके।
पत्र में यह भी कहा गया कि यह केवल किसानों का नहीं बल्कि 36 बिरादरी का हित है स्कूल, कब्रिस्तान, पशु-चारा और आम जनजीवन सुरक्षित होना चाहिए। अंत में उन्होंने सख्त लेकिन करुणामय स्वर में निवेदन किया कि पूरे गांव को मिलकर शीघ्र पानी निकालना होगा, क्योंकि यही राहत की असली कसौटी होगी और यही सेवा की आत्मा है।
दूसरी बार की बड़ी मदद: संकट से स्थायी समाधान की ओर
पहली राहत के बाद भी गांव के कई हिस्सों में पानी भरा रहा। इसलिए पंचायत ने दोबारा प्रार्थना की।
इस बार संत रामपाल जी महाराज ने और बड़ी मदद भेजी:
- दो 20 एचपी की मोटरें
- 10,000 फुट अतिरिक्त पाइप
- कब्रिस्तान और कन्या स्कूल के लिए अलग से 5600 फुट पाइप और एक मोटर
पहली राहत के बाद भी गांव के कई हिस्सों में पानी भरा रहा, इसलिए पंचायत ने दोबारा प्रार्थना की। इस बार संत रामपाल जी महाराज ने और भी बड़ी मदद भेजी। दो 20 एचपी की मोटरें, 10,000 फुट अतिरिक्त पाइप और कब्रिस्तान व कन्या स्कूल के लिए अलग से 5600 फुट पाइप तथा एक मोटर उपलब्ध कराई गई। कुल मिलाकर ढाणा कलां को अब तक चार मोटरें और 20,600 फुट पाइप मिल चुके हैं। राहत टीम खुद ट्रकों में सामान लेकर गांव पहुंची और पंचायत को सौंपा। गांववालों ने इसे चमत्कार कहा। युवाओं ने मिलकर पाइप बिछाने में मदद की, मजदूरों को काम मिला और पंचायत पूरी सक्रियता से काम में जुट गई।
अन्नदाता लेता ज़हर का सहारा
गांव के किसानों ने बेहद भावुक होकर बताया कि बाढ़ ने उन्हें पूरी तरह तोड़ दिया था; कई किसान यह स्वीकार करते दिखे कि हालात ऐसे हो गए थे कि मन में जहर खाने तक के विचार आ रहे थे। जिन किसानों ने 90–90 किल्ले जमीन ठेके पर ली थी, उन्होंने कहा कि अकेले उनके लाखों का नुकसान हो चुका था और अगर पानी नहीं उतरता तो गेहूं की अगली फसल भी पूरी तरह चौपट हो जाती। छोटे किसानों ने रोते हुए कहा कि उनके पास मोटर, पाइप या पानी निकालने का कोई साधन नहीं था और वे कर्ज के बोझ तले दबे हुए थे।

कई किसानों ने यह भी कहा कि अगर समय पर मदद नहीं मिलती तो उन्हें अपनी जमीन, पशु या घर का सामान बेचने की नौबत आ जाती। वहीं राहत मिलने के बाद किसानों ने कहा कि पहली मोटर चलने के साथ ही उनके दिल में नई जान आ गई, अब उन्हें भरोसा है कि धान कट जाएगा और गेहूं की बिजाई समय पर हो सकेगी। किसानों का कहना था कि संत रामपाल जी महाराज ने उनकी पीड़ा समझी, वरना वे सरकार के चक्कर काट-काटकर थक चुके थे; आज वे इसे केवल मदद नहीं बल्कि “जीवनदान” मानते हैं और पूरे गांव के किसान खुलकर कह रहे हैं कि इस राहत ने उन्हें बर्बादी से बचा लिया है। ग्रामवासियों के अनुसार संत रामपाल जी महाराज ने मदद करने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
संत रामपाल जी ने बढ़ाया सद्भाव
इस राहत अभियान ने गांव में हिंदू-मुस्लिम एकता को और मजबूत किया। दोनों समुदायों ने मिलकर काम किया और किसी तरह का भेदभाव नहीं दिखा। एक युवा ने कहा कि यहां धर्म नहीं, सिर्फ इंसानियत दिखी। गांव के लोगों ने महसूस किया कि आपदा के समय मानवता सबसे बड़ा धर्म होता है। संत रामपाल जी महाराज ने जिस निस्वार्थ भाव से ढाणा कलां और अन्य बाढ़ प्रभावित गांवों की मदद की, वह अद्वितीय है।
उन्होंने केवल संसाधन नहीं दिए, बल्कि व्यक्तिगत रुचि लेकर गांव की स्थिति समझी, सर्वे कराया और त्वरित कार्रवाई की। उनकी अन्नपूर्णा मुहिम और बाढ़ राहत सेवा ने हजारों किसानों और गरीब परिवारों को टूटने से बचाया। वे केवल धार्मिक संत नहीं, बल्कि समाज के सच्चे संरक्षक प्रतीत होते हैं। उनकी करुणा और मानवीय दृष्टिकोण यह दर्शाता है कि सच्ची आध्यात्मिकता सेवा में प्रकट होती है। ढाणा कलां के लिए वे मात्र मददगार नहीं, बल्कि जीवनदायी सहारा बनकर उभरे हैं।
परमेश्वर कबीर के अवतार के रूप में आस्था
गांव के कई लोगों ने कहा है कि संत रामपाल जी महाराज स्वयं परमेश्वर कबीर के अवतार हैं। उनका विश्वास है कि जिस प्रकार कबीर दास ने समाज को सत्य, समानता और करुणा का मार्ग दिखाया, उसी परंपरा को संत रामपाल जी आगे बढ़ा रहे हैं। यह आस्था केवल भक्ति नहीं, बल्कि उनके व्यवहार और सेवा-भाव से पुष्ट होती है। ढाणा कलां के लोगों के लिए यह दृष्टिकोण सांत्वना और शक्ति का स्रोत बना है।
महिलाएं दुपट्टे से आंखें पोंछते हुए बार-बार कहती दिखीं कि “यह इंसान का काम नहीं हो सकता।” जिन लोगों ने अपने सामने फसल डूबते, घर गिरते और बच्चों का भविष्य डगमगाते देखा था, उन्होंने राहत मिलते ही खुले दिल से कहा कि जिस क्षण में सरकारें चुप थीं, उसी क्षण में संत रामपाल जी खड़े दिखाई दिए इसीलिए उनके लिए वे केवल संत नहीं बल्कि भगवान जैसे रक्षक बन गए। मुस्लिम परिवारों ने भी भावुक होकर कहा कि जिसने उनके कब्रिस्तान की चिंता की, वह भेदभाव नहीं करता, इसलिए वह ईश्वर-समान है। युवाओं ने कहा कि फिल्मों में हीरो देखे थे, पर असली हीरो उन्होंने आज जमीन पर देखा।
सरकार और संत: जनता का अनुभव
गांववालों का कहना है कि उन्होंने वर्षों तक सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटे, लेकिन मोटर और पाइप नहीं मिले। जबकि संत रामपाल जी महाराज ने कुछ ही दिनों में राहत पहुंचा दी। एक किसान ने कहा कि सरकार के पास मोटर नहीं थी, लेकिन संत के पास दिल था। यह बयान किसी राजनीतिक आलोचना से ज्यादा जमीनी सच्चाई का प्रतिबिंब था।ढाणा कलां की यह कहानी केवल बाढ़ राहत की नहीं, बल्कि भरोसे, एकता और मानवीय संवेदना की है। जब गांव टूट रहा था, तब संत रामपाल जी महाराज ने सहारा दिया। जब उम्मीद खत्म हो रही थी, तब मदद पहुंची। आज पानी उतर रहा है, खेत सूख रहे हैं और किसानों के चेहरे पर मुस्कान लौट रही है। ढाणा कलां अब सिर्फ बाढ़ का शिकार नहीं, बल्कि परमात्मा की दया की जीत का प्रतीक बन चुका है।



