हरियाणा राज्य के जींद जिले की जुलाना तहसील के अंतर्गत आने वाला गांव देवरड़ हाल ही में एक भयंकर प्राकृतिक आपदा का शिकार हुआ। गांव में बाढ़ का कहर इस कदर बरपा कि पूरे गांव का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा पूरी तरह से जलमग्न हो गया। इस जलभराव ने किसानों की खड़ी फसलों को पूरी तरह नष्ट कर दिया। केवल फसलें ही नहीं, बल्कि पशुओं के लिए रखा हुआ हरा चारा भी पानी में डूबकर गल गया।
स्थिति इतनी भयावह हो गई थी कि जिन पशुओं को किसानों ने अपने बच्चों की तरह पाला था, चारे के अभाव में उन्हें बेचने पर मजबूर होना पड़ा। किसान खून के आंसू रो रहे थे। प्रशासन के दफ्तरों के चक्कर काटने के बावजूद समस्या का कोई समाधान नहीं निकल रहा था। ग्रामीणों को यह लगने लगा था कि शायद अब इस जमीन पर कभी दोबारा हरियाली देखने को नहीं मिलेगी।
मुख्य बिंदु (News Highlights):
- हरियाणा के जींद जिले की जुलाना तहसील के गांव देवरड़ का 80 प्रतिशत हिस्सा बाढ़ के कारण पूरी तरह जलमग्न हो गया था।
- फसलें बर्बाद होने और चारा गलने के कारण किसानों को मजबूरी में अपने पशु बेचने पड़ रहे थे।
- प्रशासनिक मदद न मिलने पर गांव की पंचायत ने संत रामपाल जी महाराज से गुहार लगाई।
- संत रामपाल जी महाराज ने आश्रम का निर्माण कार्य रोककर किसानों की सहायता के लिए ऐतिहासिक आदेश दिया।
- राहत सामग्री के रूप में 10,000 फुट 8 इंची पाइप और 20 हॉर्स पावर की मोटर सहित सभी जरूरी उपकरण गांव पहुंचाए गए।
- इस सहायता से गांव से पानी निकालने और अगली फसल की बिजाई करने का स्थाई समाधान सुनिश्चित हुआ।
बाढ़ ग्रस्त ग्रामीणों ने मदद के लिए संत रामपाल जी महाराज से कैसे किया संपर्क
जब प्रशासन विफल साबित हुआ और दुनिया के सारे रास्ते बंद नजर आने लगे, तब गांव के कुछ युवाओं ने इंटरनेट के माध्यम से संत रामपाल जी महाराज द्वारा किए जा रहे बाढ़ राहत कार्यों के वीडियो देखे। इन कार्यों को देखकर डूबते हुए गांव को एक नई उम्मीद की किरण दिखाई दी। बिना किसी देरी के ग्राम पंचायत देवरड़ ने सीधे बरवाला ट्रस्ट ऑफिस पहुंचकर संत रामपाल जी महाराज के दरबार में अपनी अर्जी लगाई। उनकी यह पुकार इतनी शीघ्रता से सुनी गई कि आवेदन देने के मात्र पांचवें दिन ही राहत का एक विशाल काफिला देवरड़ गांव की सीमा पर पहुंच गया।
संत रामपाल जी महाराज द्वारा आश्रम निर्माण रोककर किसानों के हित में लिया गया ऐतिहासिक निर्णय
देवरड़ गांव को इस प्रलय से निकालने के लिए संत रामपाल जी महाराज ने एक ऐसा ऐतिहासिक और अभूतपूर्व फैसला लिया, जिसकी मिसाल मिलना मुश्किल है। उन्होंने स्पष्ट आदेश जारी किया कि उनके सभी आश्रमों में चल रहे निर्माण कार्यों को तुरंत प्रभाव से रोक दिया जाए। उन्होंने निर्देश दिया कि निर्माण कार्य का वह सारा पैसा इन डूबते हुए किसानों की सेवा और जल निकासी के प्रबंध में लगा दिया जाए। पत्थरों के आश्रम बनाने से पहले इंसानियत के घर को बचाना संत रामपाल जी महाराज ने सबसे अधिक जरूरी समझा।
जल निकासी के लिए भेजी गई राहत सामग्री और उपकरणों का विस्तृत विवरण

किसानों की समस्या का पूर्ण निवारण करने के लिए संत रामपाल जी महाराज ने जो मदद भेजी, वह अत्यंत बारीक और मुकम्मल थी। पंचायत की मांग के अनुसार गांव में विशालकाय उपकरण भेजे गए ताकि पानी को गांव से बाहर निकाला जा सके। इस राहत सामग्री में छोटी से लेकर बड़ी हर एक आवश्यक वस्तु शामिल थी।
| क्र. सं. | राहत सामग्री का प्रकार | मात्रा / विवरण |
| 1 | जल निकासी हेतु मुख्य पाइप | 10,000 फुट (8 इंची गोलाई) |
| 2 | भारी क्षमता वाली पानी की मोटर | 1 (20 हॉर्स पावर – 20 HP) |
| 3 | पाइप जोड़ने का रसायन | फेविकोल / एसआर (SR) के डिब्बे |
| 4 | तकनीकी उपकरण व एक्सेसरीज | स्टार्टर, नट-बोल्ट और मजबूत क्लिप्स |
भविष्य के लिए स्थाई समाधान और संत रामपाल जी महाराज द्वारा दिए गए सख्त निर्देश
राहत सामग्री सौंपने के साथ-साथ संत रामपाल जी महाराज ने एक विशेष निवेदन पत्र और सख्त निर्देश भी ग्राम पंचायत को प्रेषित किए। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह सामग्री गांव वालों के लिए एक स्थाई वरदान है। ग्रामीणों को निर्देश दिया गया कि वे इन पाइपों को अपनी जमीन में स्थायी रूप से दबा लें ताकि भविष्य में जब भी अधिक बारिश हो, तो पानी स्वतः निकाला जा सके। इसके साथ ही यह सख्त शर्त भी रखी गई कि इस सामग्री का उपयोग करके ग्रामीणों को अपनी मेहनत से जल्द से जल्द पानी निकालना होगा और अगली फसल की बिजाई सुनिश्चित करनी होगी।
यदि वे ऐसा करने में विफल रहते हैं, तो भविष्य में किसी भी आपदा के समय गांव को कोई मदद नहीं दी जाएगी। संत रामपाल जी महाराज का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि अगली फसल हर हाल में बोई जाए ताकि किसानों और मजदूरों के घरों का चूल्हा जलता रहे।
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पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए अपनाई गई विशेष वीडियो रिकॉर्डिंग प्रक्रिया
दान के पैसे का सदुपयोग प्रमाणित करने के लिए संत रामपाल जी महाराज ने पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी रखा। उन्होंने निर्देश दिया कि गांव में भरे हुए पानी की ड्रोन कैमरे से विस्तृत वीडियोग्राफी की जाए। इसके बाद जब गांव से पानी पूरी तरह निकल जाएगा, तब दूसरी वीडियो बनाई जाएगी।
अंत में जब खेतों में किसानों की फसल लहलहा रही होगी, तब तीसरी वीडियो रिकॉर्ड की जाएगी। इन तीनों वीडियो को आश्रमों और समागमों में प्रोजेक्टर पर चलाकर दिखाया जाएगा, ताकि समाज को यह विश्वास हो सके कि उनके द्वारा किए गए दान से किस प्रकार संत रामपाल जी महाराज के आदेशानुसार लोगों को वास्तविक जीवनदान मिला है।
प्रशासनिक विफलता के बीच संत रामपाल जी महाराज की त्वरित और निस्वार्थ सहायता
देवरड़ के ग्रामीणों का स्पष्ट कहना था कि वे सरकार और प्रशासन के पास बार-बार जाकर थक चुके थे, लेकिन कोई राहत नहीं मिली। ऐसे संकट के समय में जहां एक ओर कुछ कथावाचक समाज से लाखों रुपये ऐंठकर अपनी जेबें भर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर संत रामपाल जी महाराज ने अपने पास आने वाले दान का एक-एक पैसा परमार्थ और जनसेवा में लगा दिया।
इस आपदा में उन्होंने बिना किसी राजनीतिक स्वार्थ के समाज के 36 बिरादरी के लोगों के जान-माल की रक्षा की। जब फसल बर्बाद होने के कारण बच्चों की स्कूल फीस भरना और शादियां करना असंभव हो गया था, तब यह सहायता उनके लिए संजीवनी साबित हुई।
अन्य राज्यों और चार सौ से अधिक जलमग्न गांवों में प्रदान की गई व्यापक राहत
यह सहायता केवल देवरड़ गांव तक ही सीमित नहीं रही। संत रामपाल जी महाराज ने पूरे भारतवर्ष में जहां भी बाढ़ ने तबाही मचाई, वहां बिना किसी भेदभाव के राहत पहुंचाई है। पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर और राजस्थान के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में भी बड़े पैमाने पर पाइप और मोटरें भिजवाई गई हैं। अब तक 400 से अधिक गांवों में यह राहत कार्य सफलतापूर्वक पूरा किया जा चुका है। यह सारा कार्य बिना किसी लोक दिखावे के, पूरी तरह जमीनी स्तर पर किया जा रहा है।
ग्राम पंचायत देवरड़ का संकल्प और ग्रामीणों द्वारा व्यक्त की गई असीम कृतज्ञता
राहत सामग्री प्राप्त करने के पश्चात सरपंच और समस्त ग्राम पंचायत ने संत रामपाल जी महाराज के आदेशों को सहर्ष स्वीकार करते हुए वचन पत्र पर हस्ताक्षर किए। गांव वालों की आंखों में एक अलग ही चमक थी जो किसी चमत्कार के सच होने जैसी प्रतीत हो रही थी। गांव के एक बुजुर्ग ग्रामीण ने भावुक होकर कहा कि इतना तो ऊपर वाला भगवान भी जल्दी नहीं सुनता, जितनी जल्दी संत रामपाल जी महाराज ने हमारी पुकार सुन ली। ग्रामीणों ने एक स्वर में यह स्वीकार किया कि संत रामपाल जी महाराज ने उनके लिए भगवान से भी ऊपर का कार्य किया है।
विपत्ति के समय में भगवान से भी बढ़कर सिद्ध हुए संत रामपाल जी महाराज
देवरड़ गांव की यह पूरी घटना मात्र कुछ उपकरणों और पाइपों के वितरण की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस अटूट भरोसे और निस्वार्थ प्रेम की दास्तान है जिसने एक उजड़ते हुए गांव को फिर से बसने का अवसर प्रदान किया। संत रामपाल जी महाराज ने जिस करुणा और त्वरित गति से किसानों की सहायता की है, उसने समाज के सामने मानवता का एक सर्वोत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया है।
जब चारों ओर त्राहिमाम मचा था, तब संत रामपाल जी महाराज ने अपनी असीम दया दृष्टि से डूबते हुए समाज को एक नई जिंदगी दी। उनका यह कार्य स्पष्ट रूप से यह प्रमाणित करता है कि वे केवल आध्यात्मिक ज्ञान ही नहीं देते, बल्कि समाज के हर दुख-दर्द को अपना समझकर उसका निवारण भी करते हैं। संत रामपाल जी महाराज का यह अतुलनीय योगदान विश्व के हर किसान और मजदूर के लिए एक सुरक्षित भविष्य का अनमोल उपहार है, जिसकी प्रशंसा शब्दों में नहीं की जा सकती।



