हरियाणा के रोहतक जिले के रिटौली गांव में बंजर खेतों में लौटी मुस्कान: संत रामपाल जी महाराज बने किसानों के ‘किसान मसीहा’

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रोहतक, हरियाणा: हरियाणा के रोहतक जिले का रिटौली गांव आज एक ऐतिहासिक कृषि क्रांति का गवाह बना है। जो खेत पिछले 15 से 20 सालों से पानी में डूबे रहने के कारण स्थाई झील बन चुके थे, आज वहां गेहूं की हरी-भरी फसल लहलहा रही है। यह सुखद बदलाव जगतगुरु संत रामपाल जी महाराज की ‘अन्नपूर्णा मुहिम’ के कारण संभव हुआ है, जिसने डूबती उम्मीदों को नई संजीवनी दी है।

​20 सालों का दर्द और सरकारी तंत्र की विफलता

रिटौली गांव में संत रामपाल जी ने दूर किया 20 साल का जलभराव

​रिटौली गांव के किसानों की लगभग 700 से 800 एकड़ उपजाऊ जमीन पिछले दो दशकों से जलभराव की समस्या से जूझ रही थी। बारिश और नहर का पानी जमा होने के कारण यहाँ न खरीफ की फसल हो पाती थी और न रबी की। गांव के विजेंद्र पहलवान ने बताया कि किसान पूरी तरह बर्बादी की कगार पर थे। ग्रामीणों ने सरकारी दफ्तरों और राजनेताओं के अनगिनत चक्कर काटे, लेकिन प्रशासन ने “बजट नहीं है” या “पाइप नहीं है” कहकर पल्ला झाड़ लिया।

​एक अर्जी और मात्र 7 दिन में समाधान

​जब सरकारी तंत्र से कोई रास्ता नहीं निकला, तब सरपंच प्रतिनिधि मंजीत कुमार और गांव की पंचायत ने एक आखिरी उम्मीद के साथ संत रामपाल जी महाराज के चरणों में अर्जी लगाई। जहाँ सरकारी फाइलें सालों तक दबी रहती हैं, वहां महाराज जी ने संवेदनशीलता दिखाते हुए मात्र 5-6 दिनों के भीतर राहत का पूरा सेट गांव भिजवा दिया।

​भेजी गई राहत सामग्री का विवरण:

संत जी की ओर से भेजी गई सामग्री इतनी मुकम्मल थी कि गांव वालों को एक रुपया भी खर्च नहीं करना पड़ा:

  • ​पाइपलाइन: 6000 फीट लंबी (8 इंची हाई क्वालिटी)।
  • ​शक्तिशाली पंप: 15 HP की दो भारी मोटरें (किर्लोस्कर ब्रांड की उच्च गुणवत्ता)।
  • ​सम्पूर्ण सेट: मोटरों के साथ स्टार्टर, केबल, और यहाँ तक कि पाइप जोड़ने के लिए नट-बोल्ट और फेविकोल भी साथ भेजे गए।

​स्थायी उपहार: सेवादारों ने स्पष्ट किया कि यह सामग्री अब पंचायत की धरोहर है ताकि भविष्य में भी गांव को इस समस्या से न जूझना पड़े।

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​15 साल बाद खेतों में दिखी हरियाली

​आज रिटौली के खेतों का नजारा आंखों को सुकून देने वाला है। संत जी द्वारा दी गई मोटरों ने दिन-रात काम करके 4-5 फुट जमा पानी को खेतों से बाहर निकाला। आज वहां शत-प्रतिशत जमीन पर गेहूं की बिजाई हो चुकी है। खेतों में 6 से 8 इंच की गेहूं की फसल लहलहा रही है और किसान अपनी पहली सिंचाई भी पूरी कर चुके हैं।

यह भी पढ़ें:रोहतक के मसूदपुर के खेतों से 20 साल पुराना समंदर कैसे सूखा, कैसे लहलहाने लगी फसल ?

​ग्रामीणों की जुबानी, सेवा की कहानी (प्रमुख प्रतिक्रि

​सरपंच प्रतिनिधि मंजीत कुमार ने बताया कि जिस 800 एकड़ जमीन के लिए सरकार ने हाथ खड़े कर दिए थे, वहां संत जी की मदद से आज गेहूं की सफल बिजाई हो गई है।

​विजेंद्र पहलवान और अन्य किसानों के अनुसार, पिछले 15-20 वर्षों से यह इलाका एक झील बना हुआ था, जिसे संत जी की मशीनों ने मात्र 15-20 दिनों में सुखा दिया।

​बुजुर्गों ने भावुक होकर संत जी को ‘तारणहार’ कहा क्योंकि उन्होंने किसानों को कर्ज और भुखमरी से बचाकर फिर से अपने खेतों का मालिक बना दिया।

​न स्वार्थ, न दिखावा: केवल जनसेवा और मानवता को समर्पित एक महान पहल

​रिटौली गांव की यह घटना साबित करती है कि सच्ची भक्ति पीड़ित मानवता की सेवा में ही निहित है। जहाँ सरकारी तंत्र प्रक्रियाओं में उलझा रहा, वहीं संत रामपाल जी महाराज ने बिना किसी स्वार्थ के करोड़ों की सहायता प्रदान कर किसानों को आर्थिक तबाही से बचा लिया। आज रिटौली का हर परिवार उन्हें अपना ‘तारणहार’ और ‘मसीहा’ मान रहा है। उनकी यह ‘अन्नपूर्णा मुहिम‘ समाज के लिए एक प्रेरणा बन गई है।

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