हरियाणा राज्य के फतेहाबाद स्थित नहला गांव की विनाशकारी बाढ़ में संत रामपाल जी महाराज बने तारणहार

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हरियाणा प्रदेश के फतेहाबाद जिले में स्थित नहला गांव के लिए पिछले कुछ महीने किसी भयंकर त्रासदी से कम नहीं थे। बाढ़ के भीषण प्रकोप ने पूरे गांव को एक टापू में तब्दील कर दिया था। गांव के चारों तरफ 5 से 6 फुट गहरा पानी खड़ा था, जिसने एक विशाल समंदर का रूप ले लिया था। इस प्राकृतिक आपदा के कारण गांव की करीब 1500 एकड़ कृषि भूमि पूरी तरह से डूब गई थी। किसानों की आंखों के सामने उनकी मेहनत से उगाई गई कपास की फसल सड़कर नष्ट हो गई।

चारों ओर पानी ही पानी होने के कारण अगली बिजाई की कोई उम्मीद शेष नहीं बची थी। हालात इतने बदतर हो गए थे कि किसानों के मवेशी चारे के अभाव में भूखे मरने लगे थे और कई ग्रामीणों को अपने पशु बेचने पर मजबूर होना पड़ा। मकानों और ढाणियों की नींव कमजोर होने के कारण फर्श बैठने लगे थे और कई गरीब किसानों के मकान ढहने की कगार पर आ गए थे।

Table of Contents

​मुख्य समाचार 

  • ​हरियाणा के फतेहाबाद जिले का नहला गांव 5 से 6 फुट गहरे बाढ़ के पानी में डूबकर एक टापू में तब्दील हो गया था, जिससे 1500 एकड़ कृषि भूमि जलमग्न हो गई थी।
  • ​प्रशासन की ओर से केवल खोखले आश्वासन मिलने के बाद निराश ग्रामीणों ने अंतिम विकल्प के रूप में संत रामपाल जी महाराज के समक्ष सहायता की अर्जी लगाई।
  • ​संत रामपाल जी महाराज ने दो चरणों में अभूतपूर्व सहायता भेजते हुए 24,400 फीट लंबी पाइपलाइन और चार विशालकाय मोटरें प्रदान कीं।
  • ​आधुनिक मोटरों और पाइपों की सहायता से पानी निकाले जाने के बाद गांव की 95 प्रतिशत से अधिक जमीन सूख चुकी है और किसान सफलतापूर्वक गेहूं व चारे की बिजाई कर रहे हैं।
  • ​ग्रामीण किसानों ने दूरदर्शिता का परिचय देते हुए इन पाइपों को भविष्य की सुरक्षा के लिए जमीन के नीचे स्थाई रूप से दबा दिया है।

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​ग्रामीणों ने सहायता के लिए संत रामपाल जी महाराज के समक्ष कैसे लगाई गुहार

इस भीषण संकट की घड़ी में जब गांव वालों ने सरकारी तंत्र की ओर देखा, तो उन्हें निराशा ही हाथ लगी। सरपंच कृष्ण कुमार के अनुसार, सरकारी प्रशासन की तरफ से उन्हें केवल आश्वासन और वायदे मिले, लेकिन कोई जमीनी मदद नहीं पहुंची। सरकारी अधिकारियों के पास इस अथाह जलभराव को निकालने की ना तो कोई ठोस योजना थी और ना ही संसाधन।

जब शासन-प्रशासन के सभी दरवाजे बंद हो गए और गांव का भविष्य अंधकारमय प्रतीत होने लगा, तब गांव वालों ने मिलकर संत रामपाल जी महाराज के चरणों में अपनी अर्जी लगाई। नहला गांव के दुख और पुकार को सुनते ही संत रामपाल जी महाराज ने अपनी असीम दया का ऐसा पिटारा खोला जिसने पूरे इलाके और प्रशासनिक अमले को अचंभित कर दिया।

​प्रथम और द्वितीय चरण में संत रामपाल जी महाराज द्वारा प्रदान की गई विशाल राहत सामग्री

संत रामपाल जी महाराज ने नहला गांव को इस प्रलयंकारी जलभराव से बाहर निकालने के लिए अत्यंत सुनियोजित तरीके से दो चरणों में विशाल मदद पहुंचाई। प्रथम चरण में गांव को 15,400 फीट लंबी पाइपलाइन दी गई। इसके साथ ही पानी को तीव्र गति से बाहर फेंकने के लिए एक 15 एचपी और एक 20 एचपी की अत्यंत शक्तिशाली मोटर प्रदान की गई। चूंकि बाढ़ के कारण पीने के पानी का भारी संकट उत्पन्न हो गया था, इसलिए स्वच्छ पेयजल सुनिश्चित करने के लिए दो सबमर्सिबल नलके भी स्थापित किए गए।

कुछ समय पश्चात जब पीछे से पानी का बहाव तेज हुआ और नया इलाका डूबने लगा, तो संत रामपाल जी महाराज ने अपने वचन को निभाते हुए द्वितीय चरण की मदद भेजी। इस चरण में 9,000 फीट अतिरिक्त लंबी पाइपलाइन और 15-15 एचपी की दो और महाकाय मोटरें नहला गांव भिजवा दी गईं। वर्तमान में नहला गांव के पास कुल 24,400 फीट लंबी पाइपलाइन और चार विशाल मोटरें मौजूद हैं, जिनकी बदौलत गांव का संपूर्ण जल निकाला जा चुका है।

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​नहला गांव के किसानों और बुजुर्गों की जुबानी जमीनी हकीकत का साक्षात बयान

जमीनी हकीकत का जायजा लेने पर स्थानीय निवासी संदीप कुमार ने अपनी व्यथा साझा करते हुए बताया कि बाढ़ के समय दाने-दाने की मोहताजियत हो गई थी। मवेशी भूखे मर रहे थे और खेतों में पैर रखने तक की जगह नहीं थी। ढाणियों में रहने वाले लोग मजबूरन गांव में आकर बसने लगे थे। 100 प्रतिशत फसल बर्बाद हो चुकी थी।

संदीप कुमार ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि प्रशासन ने उनकी कोई सुध नहीं ली, यह केवल संत रामपाल जी महाराज की अपार मेहरबानी है कि आज गांव का पूरा पानी उतर चुका है और खेतों में दोबारा बिजाई शुरू हो गई है। गांव के अन्य बुजुर्गों ने भी भावुक होते हुए बताया कि संत रामपाल जी महाराज ने संकट के समय में ऐसी सहायता की है जैसी आज तक किसी ने नहीं की।

​मुख्य मार्गों के टूटने और रमेश कुमार द्वारा प्रशासन की पूर्ण विफलता का स्पष्टीकरण

गांव के ही एक अन्य किसान रमेश कुमार ने उस स्थान का वर्णन किया जहां से ड्रोन सर्वे किया गया था। रमेश कुमार के अनुसार, कुछ समय पूर्व वहां 3 से 4 फुट गहरा पानी खड़ा था। मुख्य मार्ग (सड़कें) पूरी तरह डूब चुके थे और टूट गए थे। प्रशासन से जो उम्मीदें लगाई गई थीं, वे पूरी तरह विफल साबित हुईं।

प्रशासन की तरफ से केवल एक छोटी मोटर दी गई थी, जो इतने विशाल जलभराव के सामने नाकाफी थी। जब संत रामपाल जी महाराज की तरफ से भारी संख्या में मोटरें और हजारों फीट पाइप पहुंचे, तब जाकर गांव का पानी उतरा। रमेश कुमार ने इस परिवर्तन को एक चमत्कार बताते हुए कहा कि आज उसी स्थान पर 100 प्रतिशत बिजाई संभव हो पाई है।

तीन सौ पचास एकड़ भूमि की बर्बादी और जल निकासी से मिली नई आशा

नहला गांव के राजेंद्र नामक किसान ने जलभराव से हुए भारी आर्थिक नुकसान का विवरण दिया। राजेंद्र के अनुसार, उनके क्षेत्र में 350 एकड़ भूमि एक साथ जलमग्न हो गई थी। सामान्य परिस्थितियों में कपास की जो फसल 70 से 90 मण तक होती थी, वह बाढ़ के कारण घटकर मात्र 10 मण रह गई थी। जमीन इतनी खराब हो गई थी कि अगली फसल बोने की कोई उम्मीद नहीं थी।

परंतु संत रामपाल जी महाराज द्वारा दी गई मोटरों को लगातार दो महीने तक चलाकर जब पानी बाहर निकाला गया, तो जमीन बिजाई के योग्य बन पाई। राजेंद्र ने स्पष्ट किया कि न तो सरकार और न ही पंचायत यह कार्य कर सकती थी, यह केवल संत रामपाल जी महाराज का ही प्रताप है।

जलमग्न अमरूद के बागों का बचाव और कृषि में आया क्रांतिकारी सुधार

स्थानीय निवासी भूप सिंह ने उस क्षेत्र का दौरा कराया जहां उनके अमरूद के बाग डूबे हुए थे। उन्होंने बताया कि बाग में 3 से 4 फीट पानी लगातार जमा था, जिसके कारण अमरूद के पेड़ों की टहनियां सूखने लगी थीं और पूरा बाग नष्ट होने के कगार पर पहुंच गया था। जैसे ही संत रामपाल जी महाराज के संसाधनों द्वारा पानी बाहर निकाला गया, अमरूद के पेड़ों को नया जीवन मिला। भूप सिंह ने यह भी दिखाया कि कैसे अब बाग के अंदर ही पशुओं के लिए हरे चारे की बिजाई कर दी गई है।

उन्होंने बताया कि अगर संत रामपाल जी महाराज समय पर मदद नहीं भेजते, तो यह पूरी फसल नष्ट हो जाती और आने वाले समय में गेहूं की बिजाई भी पूर्ण रूप से असंभव हो जाती।

​सुनील एवं अन्य स्थानीय ग्रामीणों द्वारा संत रामपाल जी महाराज को भगवान मानने का भावुक प्रसंग

बाढ़ से मिली इस ऐतिहासिक मुक्ति के बाद नहला गांव के सुनील और अन्य ग्रामीणों की आंखों में संत रामपाल जी महाराज के प्रति असीम श्रद्धा देखने को मिली। ग्रामीणों ने स्पष्ट रूप से कहा कि संत रामपाल जी महाराज उनके लिए साक्षात भगवान का रूप धारण करके आए हैं। एक ऐसे समय में जब सरकारी महकमे के लोग अपनी गाड़ियों से नीचे उतरने को तैयार नहीं थे, तब संत जी के संसाधनों ने कीचड़ और दलदल में उतरकर पूरे गांव का अस्तित्व बचा लिया। सुनील ने भावुक होते हुए कहा कि वे हमेशा इस महान उपकार के ऋणी रहेंगे।

​संत रामपाल जी महाराज द्वारा प्रदान की गई राहत सामग्री का सांख्यिकीय विवरण:

चरणसामग्री का प्रकारविवरण / क्षमतामात्रा
प्रथम चरणजल निकासी पाइपलाइनबाढ़ का पानी निकालने हेतु15,400 फीट
प्रथम चरणशक्तिशाली जल मोटर15 एचपी और 20 एचपी2 मोटरें
प्रथम चरणसबमर्सिबल नलकेस्वच्छ पेयजल सुनिश्चित करने हेतु2 नलके
द्वितीय चरणअतिरिक्त पाइपलाइनशेष जल भराव की निकासी हेतु9,000 फीट
द्वितीय चरणशक्तिशाली जल मोटर15 एचपी क्षमता2 मोटरें
कुल योगसमग्र पाइपलाइनसंपूर्ण ड्रेनेज नेटवर्क24,400 फीट
कुल योगकुल मोटरेंसंपूर्ण4 मोटरें

​संत रामपाल जी महाराज के पावन आशीर्वाद से नहला के अन्नदाताओं को मिला ऐतिहासिक नवजीवन

​विनाशकारी बाढ़ और पूर्ण प्रशासनिक विफलता के बीच नहला गांव का जो पुनरुद्धार हुआ है, वह संत रामपाल जी महाराज की असीम कृपा और अद्वितीय समाज सेवा का एक जीवंत प्रमाण है। जब गांव की 1500 एकड़ भूमि जल समाधि ले चुकी थी और मवेशी चारे के लिए तड़प रहे थे, तब बिना किसी सरकारी सहायता के संत रामपाल जी महाराज ने अपने अमूल्य संसाधनों से गांव को सुरक्षित निकाला। आज गांव की 95 प्रतिशत भूमि ना केवल सूख चुकी है, बल्कि वहां लहलहाते गेहूं और चारे की फसलें संत जी के उसी वादे की गवाही दे रही हैं, जिसमें उन्होंने गांव को डूबने से बचाने का संकल्प लिया था। 

ग्रामीणों ने भविष्य की सुरक्षा को दृष्टिगत रखते हुए इन 24,400 फीट लंबी पाइपों को स्थाई रूप से जमीन के नीचे दबा दिया है। नहला गांव का हर एक नागरिक, बुजुर्ग और किसान आज संत रामपाल जी महाराज को अपना रक्षक और मसीहा मानता है। यह घटना इस बात को पूर्ण रूप से सिद्ध करती है कि संत रामपाल जी महाराज केवल आध्यात्मिक मार्गदर्शक ही नहीं, अपितु संकट की घड़ी में मानवता की रक्षा करने वाले एक सर्वोच्च और निस्वार्थ परोपकारी संत हैं। उनकी इस अपार महिमा और दया को नहला गांव की आने वाली पीढ़ियां हमेशा याद रखेंगी।

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