January 14, 2026

ISRO का रिकॉर्ड मिशन: LVM3 ने अमेरिकी BlueBird Block-2 सैटेलाइट को कक्षा में पहुंचाया

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भारत की भारी-भरकम लॉन्च क्षमता को एक और मजबूती मिली है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के LVM3 रॉकेट ने बुधवार को अमेरिकी संचार उपग्रह BlueBird Block-2 को सफलतापूर्वक लो-अर्थ ऑर्बिट में स्थापित किया। 6,100 किलोग्राम वजनी यह अब तक भारतीय धरती से लॉन्च किया गया सबसे भारी सैटेलाइट है। 

यह मिशन LVM3 की छठी ऑपरेशनल उड़ान और तीसरी समर्पित व्यावसायिक उड़ान रहा। इस लॉन्च के साथ भारत ने वैश्विक वाणिज्यिक लॉन्च बाजार में अपनी स्थिति और मजबूत की है। यह मिशन इसरो की तकनीकी क्षमता, व्यावसायिक सहयोग और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बढ़ते कदम को दर्शाता है।

BlueBird Block-2 मिशन: प्रमुख बिंदु 

  • LVM3 ने 6,100 किग्रा वजनी अमेरिकी संचार उपग्रह BlueBird Block-2 को सफलतापूर्वक लॉन्च किया
  • यह भारतीय धरती से लॉन्च किया गया अब तक का सबसे भारी उपग्रह
  • मिशन का नाम LVM3-M6, LVM3 की छठी ऑपरेशनल उड़ान
  • उपग्रह को लगभग 520 किमी की वृत्ताकार कक्षा में स्थापित किया गया
  • यह NSIL और अमेरिकी कंपनी AST SpaceMobile के बीच व्यावसायिक समझौते का हिस्सा
  • LVM3 का यह 52 दिनों के भीतर दूसरा लगातार मिशन रहा

LVM3-M6: श्रीहरिकोटा से सफल प्रक्षेपण

बुधवार तड़के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के दूसरे लॉन्च पैड से 43.5 मीटर ऊंचा और 640 टन वजनी LVM3 रॉकेट रवाना हुआ। लॉन्च के लगभग 16 मिनट बाद BlueBird Block-2 उपग्रह को सफलतापूर्वक लो-अर्थ ऑर्बिट में स्थापित कर दिया गया। मिशन के तहत उपग्रह को लगभग 520 किलोमीटर ऊंचाई की वृत्ताकार कक्षा में 53 डिग्री के झुकाव के साथ स्थापित किया गया।

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इसरो के अनुसार, रॉकेट ने 518.5 किलोमीटर की कक्षा हासिल की, जो नियोजित 520 किलोमीटर के बेहद करीब रही।

अब तक का सबसे भारी पेलोड

BlueBird Block-2 का वजन 6,100 किलोग्राम है, जो LVM3 द्वारा अब तक उठाया गया सबसे भारी पेलोड है। इससे पहले LVM3-M5 मिशन में नवंबर में लगभग 4,400 किलोग्राम वजनी कम्युनिकेशन सैटेलाइट-03 को जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट (GTO) में स्थापित किया गया था।

इसरो अध्यक्ष वी. नारायणन ने कहा कि यह भारतीय लॉन्चर द्वारा भारतीय धरती से लॉन्च किया गया सबसे भारी उपग्रह है। उन्होंने यह भी बताया कि यह 52 दिनों के भीतर दूसरा LVM3 मिशन है, जो रॉकेट की विश्वसनीयता को दर्शाता है।

NSIL और AST SpaceMobile के बीच व्यावसायिक सहयोग

यह मिशन न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL) और अमेरिका की AST SpaceMobile (AST & Science LLC) के बीच हुए व्यावसायिक समझौते के तहत किया गया। NSIL, इसरो की व्यावसायिक इकाई है, जो वैश्विक स्तर पर लॉन्च सेवाएं प्रदान करती है।

AST SpaceMobile वैश्विक स्तर पर पहली स्पेस-आधारित सेल्युलर ब्रॉडबैंड नेटवर्क विकसित कर रही है, जिसे सीधे सामान्य स्मार्टफोन पर इस्तेमाल किया जा सकता है। यह नेटवर्क व्यावसायिक और सरकारी दोनों जरूरतों के लिए तैयार किया जा रहा है।

डायरेक्ट-टू-मोबाइल कनेक्टिविटी की दिशा में कदम

BlueBird Block-2, एक वैश्विक लो-अर्थ ऑर्बिट (LEO) कंस्टीलेशन का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य सैटेलाइट के माध्यम से सीधे मोबाइल फोन को कनेक्टिविटी प्रदान करना है। इस कंस्टीलेशन के जरिए 4G और 5G वॉयस कॉल, वीडियो कॉल, वीडियो स्ट्रीमिंग, टेक्स्ट मैसेजिंग और डेटा सेवाएं बिना किसी विशेष ग्राउंड उपकरण के उपलब्ध कराई जाएंगी।

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इस उपग्रह में 223 वर्ग मीटर का फेज्ड-एरे एंटीना लगा है, जो इसे लो-अर्थ ऑर्बिट में तैनात किया गया अब तक का सबसे बड़ा वाणिज्यिक संचार उपग्रह बनाता है।

LVM3 रॉकेट की तकनीकी विशेषताएं

LVM3, जिसे GSLV Mk-III के नाम से भी जाना जाता है, एक तीन-चरणीय रॉकेट है। इसमें क्रायोजेनिक इंजन का उपयोग किया गया है, जिसे इसरो के लिक्विड प्रोपल्शन सिस्टम्स सेंटर ने डिजाइन और विकसित किया है।

लॉन्च के दौरान दो S200 सॉलिड रॉकेट बूस्टरों ने रॉकेट को आवश्यक थ्रस्ट प्रदान किया। इन बूस्टरों का विकास विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर, तिरुवनंतपुरम द्वारा किया गया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रतिक्रिया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस सफल मिशन पर इसरो के वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि LVM3-M6 की सफलता भारत की भारी-भरकम लॉन्च क्षमता को और मजबूत करती है और वैश्विक वाणिज्यिक लॉन्च बाजार में भारत की भूमिका को सुदृढ़ बनाती है।

प्रधानमंत्री ने इसे भारत की अंतरिक्ष यात्रा में एक “गर्व का क्षण” बताते हुए कहा कि यह आत्मनिर्भर भारत के प्रयासों को भी दर्शाता है। उन्होंने युवाओं की भूमिका को भी रेखांकित किया और कहा कि भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम लगातार अधिक उन्नत और प्रभावशाली होता जा रहा है।

वैश्विक उपलब्धि की ओर बढ़ता भारत 

BlueBird Block-2 का सफल प्रक्षेपण भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह मिशन न केवल इसरो की तकनीकी दक्षता को दर्शाता है, बल्कि भारत की बढ़ती व्यावसायिक लॉन्च क्षमता को भी स्थापित करता है। NSIL के माध्यम से किए जा रहे अंतरराष्ट्रीय समझौते भारत को वैश्विक अंतरिक्ष बाजार में एक भरोसेमंद भागीदार बना रहे हैं। LVM3 की लगातार सफल उड़ानें भविष्य के मिशनों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के लिए मजबूत आधार तैयार कर रही हैं, जिससे भारत की अंतरिक्ष उपस्थिति और सशक्त होती जा रही है।

FAQs on BlueBird Block-2 Mission

1. BlueBird Block-2 का वजन कितना है?

BlueBird Block-2 का वजन 6,100 किलोग्राम है।

2. यह मिशन किस रॉकेट से लॉन्च किया गया?

यह मिशन इसरो के LVM3-M6 रॉकेट से लॉन्च किया गया।

3. उपग्रह को किस कक्षा में स्थापित किया गया?

उपग्रह को लगभग 520 किमी की लो-अर्थ ऑर्बिट में स्थापित किया गया।

4. यह मिशन किस व्यावसायिक समझौते का हिस्सा था?

यह NSIL और अमेरिकी कंपनी AST SpaceMobile के बीच समझौते का हिस्सा था।

5. BlueBird Block-2 का मुख्य उद्देश्य क्या है?

इसका उद्देश्य सैटेलाइट के जरिए सीधे मोबाइल फोन को कनेक्टिविटी प्रदान करना है।

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