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कबीर परमेश्वर निर्वाण दिवस 2023 | मगहर लीला: जब कबीर परमेश्वर मगहर से सशरीर सतलोक गए

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कबीर परमेश्वर निर्वाण दिवस 2023 कबीर साहेब मगहर से सशरीर सतलोक गए

Last Updated on 20 January 2023, 5:24 PM IST: कबीर परमेश्वर निर्वाण दिवस 2023: परमेश्वर कबीर बंदी छोड़ जी के 505वें निर्वाण दिवस के उपलक्ष्य में सतगुरु रामपाल जी महाराज के सानिध्य में 30-31 जनवरी और 01 फरवरी 2023 को अमरग्रन्थ साहेब का 3 दिवसीय अखंड पाठ का आयोजन किया जा रहा है। आज से लगभग 505 वर्ष पूर्व (मास माघ, शुक्ल पक्ष, तिथि एकादशी वि. स. 1575 सन् 1518 को) परमेश्वर कबीर बंदी छोड़ जी ने उत्तरप्रदेश के मगहर कस्बे से लाखों लोगों के सामने सशरीर सतलोक (ऋतधाम) को प्रस्थान किया था। उसी दिन की याद में 9 सतलोक आश्रमों में विशाल भंडारे का आयोजन किया जा रहा है। इसमें निःशुल्क नामदीक्षा, रक्तदान शिविर, दहेज व आडंबर रहित आदर्श विवाह आदि का भी आयोजन किया जा रहा है। आज इस लेख में आप जानेंगे कि कहाँ हैं कबीर या वेदों में वर्णित कविर्देव। जानिए 1 फरवरी कबीर परमेश्वर जी के सह-शरीर सतलोक गमन के विषय में विस्तृत जानकारी।

Table of Contents

कबीर परमेश्वर निर्वाण दिवस 2023: कबीर साहेब परमेश्वर हैं

वास्तविकता यह है कि प्रसिद्ध कवि एवं जुलाहे की भूमिका करने वाले महान सन्त के रूप में विख्यात कबीर साहेब ही पूर्ण परमेश्वर हैं। वेदों (ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद) में वे कविर, कविर्देव कहे गए हैं कुरान में कबीरा, कबीरु, अकबीर, खबीरा, खबीरन (सूरत अल फुरकान आयत 52-59) एवं बाइबल (Iyov 36:5) में कबीर लिखे गए हैं। वेदों में तो यह तक कहा गया है कि पूर्ण परमेश्वर ऊपर से गति करके स्वयं प्रकट होता है एवं निसंतान दम्पत्तियों को मिलता है। वह पृथ्वीलोक में वाणियों, कविताओं के माध्यम से तत्वज्ञान सुनाता है व कवि की उपाधि धारण करता है (ऋग्वेद मंडल 9 सूक्त 96 मन्त्र 18) और अच्छी आत्माओं को मिलता है।

बाईबल में भी स्पष्ट कहा गया है कि पूर्ण परमेश्वर कबीर हैं और कुरान में अल्लाह कबीर द्वारा ही छह दिन में सृष्टि रचना हुई बताया है। वेदों में वर्णन है कि पूर्णब्रह्म कबीर साहेब प्रत्येक युग में प्रकट होते हैं एवं तत्वज्ञान समझाते हैं। सतयुग में सतसुकृत नाम से, त्रेतायुग में मुनीन्द्र नाम से और द्वापरयुग मे करुणामय नाम से प्रकट होते हैं तथा कलियुग में अपने वास्तविक नाम कबीर से प्रकट होते हैं।

यदि कबीर परमेश्वर हैं तो अन्य देवी देवता कौन हैं?

इसके लिए विस्तार से जानने के लिए पढ़ें सृष्टि रचना । इस पृथ्वी पर उपस्थित सभी जीवात्माएं पूर्ण परमेश्वर यानि सत्यपुरुष कबीर परमेश्वर की संतानें है। काल ब्रह्म ने तपस्या की व 21 ब्रह्मांड प्राप्त किये एवं हम सभी आत्माएँ उस पर आसक्त होकर अपना निज निवास छोड़कर सतलोक से काल ब्रह्म के 21 ब्रह्मांड में आ गईं। सतलोक में कर्म का सिद्धान्त नहीं है अर्थात् वहाँ बिना कुछ किये सब प्राप्त होता है। न वहां मृत्यु है, ना मरण, न जरा, न रोग और न ही किसी भी प्रकार का कोई रोग शोक। किन्तु काल ब्रह्म जिसे शास्त्रों में क्षर पुरूष कहा है, इसके लोक में हमें कर्म फल भोगने होते हैं जहां जीव असंख्यों पापों से लदा हुआ है। 

क्षर पुरुष अव्यक्त रहता है कभी दर्शन नहीं देता एवं उसने अपने पुत्रों ब्रह्मा जी, विष्णु जी, शिव जी के हाथों में जीव उत्पत्ति, पोषण और संहार का कार्य सौंप दिया है। किंतु वे तो केवल निमित्त हैं असली पालनहार तो पूर्णब्रह्म कबीर साहेब हैं जो सर्व लोकों में प्रविष्ट होकर सबका धारण पोषण का कार्य करते हैं। पूर्ण परमेश्वर कबीर साहेब ही असंख्य ब्रह्मांडों का ब्रह्मा-विष्णु-महेश है।

कबीर परमेश्वर निर्वाण दिवस 2023 पर विशाल समागम

परमेश्वर स्वरूप सतगुरु रामपाल जी महाराज के सानिध्य में “परमेश्वर कबीर बंदी छोड़ जी के 505वें निर्वाण दिवस” के उपलक्ष्य में 30-31 जनवरी व  01 फरवरी 2023 तक अमरग्रन्थ साहेब का 3 दिवसीय अखंड पाठ किया जा रहा है। आज से लगभग 505 वर्ष पूर्व (मास माघ, शुक्ल पक्ष, तिथि एकादशी वि. स. 1575 सन् 1518 को) परमेश्वर कबीर बंदी छोड़ जी ने उत्तरप्रदेश के मगहर कस्बे से लाखों लोगों के सामने सशरीर सतलोक (ऋतधाम) को प्रस्थान किया था। उसी दिन की याद में 9 सतलोक आश्रमों  — सतलोक आश्रम रोहतक (हरियाणा), सतलोक आश्रम कुरुक्षेत्र (हरियाणा), सतलोक आश्रम भिवानी (हरियाणा), सतलोक आश्रम सोजत (राजस्थान), सतलोक आश्रम शामली (उत्तर प्रदेश), सतलोक आश्रम खमाणों ( पंजाब ), सतलोक आश्रम धुरी (पंजाब), सतलोक आश्रम मुंडका (दिल्ली) तथा सतलोक आश्रम जनकपुर (नेपाल) में विशाल भंडारे का आयोजन किया जा रहा है। इसमें निःशुल्क नामदीक्षा, रक्तदान शिविर, दहेज व आडंबर रहित आदर्श विवाह आदि का भी आयोजन किया जा रहा है। इस विशाल भंडारे में आप सभी सादर आमंत्रित हैं।   

कबीर परमेश्वर निर्वाण दिवस 2023: कलयुग में परमेश्वर कबीर की लीला

परमेश्वर कबीर समर्थ, सर्वशक्तिमान, अचल, अजन्मा, अमर, श्रेष्ठतम परमात्मा है। सारी सृष्टि उन्होंने ही रची है। वे प्रत्येक युग में स्वयं शिशु रूप में प्रकट होते हैं क्योंकि पूर्ण परमेश्वर का जन्म माता से नहीं होता (ऋग्वेद मंडल 10 सूक्त 4 मन्त्र 3) वे स्वयं पृथ्वी पर सशरीर शिशु रूप में प्रकट होकर निसंतान दम्पत्ति को प्राप्त होते हैं। कलियुग में परमात्मा कबीर काशी के लहरतारा तालाब में कमल के पुष्प पर विराजमान हुए थे। इस बात के साक्षी रामानन्द जी के शिष्य ऋषि अष्टानंद जी थे जो वहाँ साधना कर रहे थे।

कबीर परमेश्वर निसंतान दम्पत्ति नीरू और नीमा को मिले जो ब्राह्मण दम्पत्ति थे व अन्य ब्राह्मणों की ईर्ष्या का शिकार हुए थे एवं जबरन धर्म परिवर्तित कर दिए जाने पर कपड़ा बुनकर रोजगार चला रहे थे। बालक कबीर ने कुछ भी खाया पिया नहीं किन्तु जब नीमा का रो रो कर बुरा हाल हो गया तब साहेब कबीर ने कुँवारी गाय के दूध पीने की लीला की। (ऋग्वेद मंडल 9 सूक्त1 मन्त्र 9)। परमेश्वर कबीर ने विवाह नहीं किया जैसा कि ऋग्वेद मंडल 10 सूक्त 4 मन्त्र 4 में वर्णित है कि पूर्ण परमात्मा कभी भी स्त्री से सम्बंध नहीं रखते हैं। पूर्ण परमेश्वर कबीर साहेब सशरीर आये और अनेकानेक लीलाएं करके पुनः सशरीर सतलोक गए क्योंकि पूर्ण परमात्मा कभी भी न जन्म लेता है और न उसकी मृत्यु होती है।

साहेब होकर उतरे, बेटा काहू का नाहीं।

जो बेटा होकर उतरे, वो साहेब भी नाहीं।।

परमेश्वर कबीर साहेब ने जगत की दृष्टि में रामानंद जी को गुरु धारण किया किन्तु वास्तव में परमेश्वर कबीर उनके गुरुदेव थे। आदरणीय गरीबदास जी महाराज ने कहा है-

जाति मेरी जगतगुरु, परमेश्वर है पंथ |

गरीबदास लिखित पढ़े, नाम निरंजन कन्त ||

हे स्वामी सृष्टा मैं, सृष्टि मेरे तीर |

दास गरीब अधर बसूं, अविगत सत कबीर ||

कबीर परमेश्वर जी के “सह-शरीर सतलोक प्रस्थान” की घोषणा

परमेश्वर कबीर साहेब 120 वर्ष तक इस पृथ्वीलोक में रहे और तत्वज्ञान का प्रचार किया। उस समय दिल्ली का बादशाह बहलोल लोदी का पुत्र सिकन्दर लोदी था जिसका पीर गुरु शेखतकी था। कबीर परमेश्वर के तत्वज्ञान एवं चमत्कार के कारण अन्य ब्राह्मण जिनकी नकली दुकानें भोली जनता को गुमराह करके ठगने की बंद हो रही थीं वे परमेश्वर कबीर से ईर्ष्या करने लगे। शेखतकी भी कबीर साहेब से ईर्ष्या करता था। इस कारण अनेकों बार कबीर परमात्मा को नीचा दिखाने व मार डालने की असफल योजनाएं बनाई गईं किन्तु परमेश्वर जो सबका सृजनहार है उसे भला कौन मार सकता है।

गरीब, पानी से पैदा नहीं, श्वासा नहीं शरीर |

अन्न आहार करता नहीं, ताका नाम कबीर ||

कबीर परमेश्वर निर्वाण दिवस 2023: उस समय नकली ब्राह्मणों ने यह भ्रम संसार में फैला रखा था कि जो काशी में मरता है वह सीधा स्वर्ग जाता है और जो मगहर में मरता है वह नरक गमन करता है। जबकि वास्तविकता यह है कि सही विधि से भक्ति करने वाला कहीं भी प्राण त्याग दे वह अपने सही स्थान पर जाता है। तो ब्राह्मणों द्वारा फैलायी इस भ्रांति को तोड़ने के लिए परमेश्वर कबीर साहेब ने काशी के सभी पंडित, ज्योतिषशास्त्रियों से कह दिया कि इस दिन वे मगहर में देह त्याग करेंगे तथा वे अपने-अपने पोथियों में जांच लें कि मैं कहाँ गया हूँ स्वर्ग या उससे भी श्रेष्ठ स्थान सतलोक में।

■ Read in English: Kabir Saheb’s Ascent to Satlok (Maghar Leela)

ऐसा कहकर कबीर साहेब ने काशी में मगहर के लिए प्रस्थान किया। कबीर साहेब के शिष्यों में दोनों धर्मों के लोग थे। राजा बीर सिंह बघेल एवं बिजली खां पठान भी परमेश्वर कबीर के शिष्य थे वे चाहते थे कि अपने गुरुदेव का अपनी धार्मिक रीति से अंतिम संस्कार करें। बीरसिंह भी शरीर न मिलने पर युद्ध के उद्देश्य से अपनी सेना लेकर चल पड़े। अन्य हजारों की संख्या में दर्शक एवं शिष्य मगहर गए।

महान सुधारक कबीर परमात्मा ने अमानवीय काशी करौंत कुप्रथा को समाप्त किया

व्यापक अफवाहों के कारण लोगों में दृढ़ विश्वास पैदा हो गया कि काशी में मरने से स्वर्ग की प्राप्ति होगी और इसके विपरीत मगहर में मरने से नरक में जगह मिलती है और उसके बाद गधे की प्रजाति में जन्म होता है। ये स्वर्ग और नरक की प्राप्ति कर्म के सिद्धांत के विरुद्ध होगी। 

ऐसी कुप्रथा के कारण बड़ी संख्या में वृद्ध लोग जीवन के अन्तिम दिनों में स्वर्ग प्राप्ति की दृष्टि से काशी में आने लगे। ये लोग काशी के झूठे पुरोहितों के पास रहा करते थे। काशी में अपने ही घरों में रहने वाले बुजुर्गों की देखभाल के लिए पुजारी मोटी रकम वसूल रहे थे। धीरे-धीरे वृद्ध लोगों की संख्या में तेजी से वृद्धि होने लगी। पुजारियों के लिए बूढ़ों की बड़ी संख्या की देखभाल करना मुश्किल हो गया।

इस समस्या का पुजारियों ने काशी करौंत (काशी करवट) नाम से एक अमानवीय समाधान बनाया। करौंथ मनुष्य को काटने के लिए एक विशेष प्रकार का ब्लेड है और इसे एक रस्सी की सहायता से एक नदी के किनारे समायोजित किया जाता था। पुजारियों ने काशी में ‘काशी का करौंथ’ के नाम से उसका प्रचार किया। पाखंडी पंडितो ने काशी में यह झूठ फैलाया कि जिनको जल्दी स्वर्ग जाना है उनके लिए परमात्मा ने काशी करौथ बनवाया है जहां ऊपर से करौंतआता है और लोगों ने स्वर्ग जाने के लिए अपनी गर्दन कटवाना भी यह सोचकर शुरू कर दिया कि एक ना एक दिन तो मरना ही है। कई बार रस्सी के अटक जाने से करौथ नीचे नहीं आता था तो पाखंडी पंडित बोलते थे कि अभी भगवान तुम्हें नहीं बुला रहे हैं तुम्हारे पाप कर्म ज्यादा है जिससे लोगों को उनकी इस बात पर विश्वास गहरा हो जाता था कि वास्तव में यह भगवान के द्वारा बनाया गया एक माध्यम है। बाद में वे स्वार्थी पंडित रस्सी को ठीक करके लोगों की नृशंस हत्या का काम फिर से शुरू कर देते थे।

गरीब, काशी करौंथ लेत है, आन कटावे शीश |

बन-बन भटका खात है, पावत न जगदीश ||

परमेश्वर कबीर जी ने काशी करौंत मिथक को लोगों के सामने उजागर किया था। उन्होंने बताया कि भगवान इस दुष्ट प्रक्रिया से अपनी प्यारी आत्माओं को मुक्ति नहीं दे सकते। इसलिए वे अपनी 120 साल की लीला के अंत में मगहर आ गए ताकि लोगो को संदेश दे सके कि अच्छे कर्मों के करने वाले कही भी शरीर त्याग करे उसकी सद्गति होती है। उन्होंने सर्वशक्तिमान ईश्वर को प्राप्त करने के लिए एक पूर्ण संत से तीन चरणों का मंत्र ओम तत् सत् निर्धारित किया। यही पवित्र गीता अध्याय 17 श्लोक 23 में बताया है।

संत गरीबदास जी कहते हैं:

गरीब, बिना भक्ति क्या होत है, भावे काशी करौंत  लेह |

मिते नहीं मन बसना, बहुविधि भरम सन्देह ||

कबीर परमेश्वर द्वारा सूखी पड़ी आमी नदी में जल बहाना

जब बिजली खां पठान को पता चला कि कबीर साहेब यहाँ आ रहे हैं तो उसने भी सेना तैयार कर ली इस उद्देश्य से कि यदि सतगुरु के शरीर को हासिल करने के लिए युद्ध करना पड़े तो करेंगे एवं अपनी धार्मिक रीति से अंतिम संस्कार करेंगे। कबीर साहेब मगहर पहुँचे तो राजा ने कबीर साहेब से स्नान हेतु प्रार्थना की। परमात्मा ने कहा कि वे बहते जल में स्नान करेंगे। तब बिजली खां पठान ने बताया कि उन्होंने कबीर साहेब के लिए पानी की व्यवस्था की तो है लेकिन बहते हुए पानी की नहीं और पास ही सूखी पड़ी आमी नदी के विषय में परमात्मा को बताया। तब परमात्मा कबीर साहेब ने आमी नदी देखने की इच्छा व्यक्त की। आमी नदी को देखकर कबीर साहेब ने हाथ से आगे बढ़ने की ओर इशारा किया उतने में ही नदी जल से प्रवाहित हो गई और बहने लगी। वह नदी आज भी बह रही है जो शिवजी के श्रापवश सूखी पड़ी थी किन्तु परमेश्वर कविर्देव ने उसे पुनः जीवन दिया।

कबीर साहेब का “सह-शरीर सतलोक प्रस्थान”

“सह-शरीर सतलोक प्रस्थान” के समय परमेश्वर कबीर साहेब ने दोनो राजाओं को सेना लाने के लिए फटकार लगाई क्योंकि वे अंतर्यामी थे एवं सब जानते थे। तथा पुनः समझाया कि तुम एक पिता की संतान हो हिन्दू मुस्लिम अलग नहीं हो व झगड़ा करने से मना किया। वास्तव में एक बहुत बड़ा गृहयुद्ध परमात्मा ने टाल दिया। फिर परमात्मा ने एक चादर बिछवाई एवं उसके ऊपर स्वयं लेटकर अन्य चादर ओढ़ ली। कुछ फूल नीचे वाली चादर पर बिछा दिए। ततपश्चात आकाशवाणी हुई कि कोई झगड़ा न करे, इस चादर के नीचे जो भी मिले उसे आप हिन्दू व मुसलमान आधा-आधा बांट लें और परमेश्वर बोले कि वे स्वर्ग से भी ऊँचे स्थान सतलोक में जा रहे हैं। जब चादर हटाई गई तो केवल सुंगधित फूलों के अलावा कुछ न मिला क्योंकि कबीर परमेश्वर सशरीर सत्यलोक चले गए थे।

कबीर परमेश्वर निर्वाण दिवस 2023: वे सह-शरीर आये थे व सह-शरीर चले गए। उस स्थान में रुदन होने लगा। बिना झगड़ा किये दोनों धर्मों ने आधे-आधे फूल बांटे एवं उस पर एक यादगार बना दी। आज भी मगहर में यह यादगार विद्यमान है। आज भी मगहर में कबीर परमेश्वर के आशीर्वाद से हिन्दू व मुस्लिम भाईचारे के साथ रहते हैं व धर्म के नाम पर आपस में कोई झगड़ा नहीं करते हैं।

गरीब दास जी महाराज ने कहा है-

तहां वहां चादरि फूल बिछाये, सिज्या छांडी पदहि समाये |

दो चादर दहूं दीन उठावैं, ताके मध्य कबीर न पावैं ||

अन्य वाणी में गरीबदास जी महाराज ने लिखा है-

चदरि फूल बिछाये सतगुरु, देखै सकल जिहांना हो |

च्यारी दाग सैं रहत जुलहदी, अविगत अलख अमाँना हो ||

मलूक दास जी महाराज जिन्हें परमेश्वर कबीर साहेब मिले एवं अपनी शरण में लिया उन्होंने भी परमेश्वर की महिमा गाई है-

काशी तज गुरु मगहर गए, दोऊ दीन के पीर ||

कोई गाड़ै कोई अग्नि जलावै, नेक न धरते धीर |

चार दाग से सतगुरु न्यारा, अजरो अमर शरीर ||

परमेश्वर कबीर साहेब के परम शिष्य आदरणीय धर्मदास जी ने भी परमेश्वर कबीर की महिमा गाई है:

हिन्दू के तुम देव कहाये, मुसलमान के पीर ||

दोनो दीन का झगड़ा छिड़ गया, टोहे न पाये शरीर ||

कबीर परमेश्वर निर्वाण दिवस 2023: नाम सुमर ले, सुकर्म कर ले

परमेश्वर कबीर सह-शरीर आये और पृथ्वी पर 120 वर्ष रहे तत्वज्ञान समझाया और सबके समक्ष ही सह-शरीर सतलोक वापस चले गए। वे पूर्ण परमेश्वर हैं जिनकी भक्तिविधि कोई पूर्ण तत्वदर्शी सन्त ही बता सकता है। वर्तमान में सन्त रामपाल जी महाराज पूरे विश्व में एकमात्र तत्वदर्शी सन्त हैं। उनसे नामदीक्षा लेकर अपना कल्याण करवाएं अन्यथा मनुष्य जन्म में भक्ति नहीं की तो विभिन्न योनियों में चक्कर काटते रहना पड़ेगा। बन्दीछोड़ कबीर परमेश्वर की स्तुति जो पूर्ण तत्वदर्शी सन्त द्वारा बताई जाए उसी से जीव का मोक्ष सम्भव है। कबीर परमेश्वर ने कहा है-

“क्या माँगूं कुछ थिर न रहाई | देखत नैन चला जग जाई ||

एक लख पूत सवा लाख नाति | उस रावण घर दीया न बाती ||

आदरणीय गरीबदास जी महाराज ने कहा है-

मर्द गर्द में मिल गए, रावण से रणधीर |

कंश केशी चाणूर से, हिरणाकुश बलबीर ||

तेरी क्या बुनियाद है, जीव जन्म धर लेत |

गरीबदास हरि नाम बिना, खाली परसी खेत ||

मनुष्य जीवन क्षणिक है समय रहते भक्ति कर्म में लगना श्रेयस्कर है। धन या नाते रिश्ते कुछ भी साथ नहीं जाने वाला है।

कबीर, लूट सके तो लूट ले, राम नाम की लूट ।

पीछे फिर पछताओगे, प्राण जायेंगे छूट।।

“परमेश्वर कबीर बंदी छोड़ जी के 505 वें निर्वाण दिवस” पर आप क्या करें?

“परमेश्वर कबीर बंदी छोड़ जी के 505वें निर्वाण दिवस” के उपलक्ष्य में जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज के सत्संग का विशेष प्रसारण 1 फरवरी 2023 को सुबह साधना टीवी पर होगा। इस कार्यक्रम को Youtube- Sant Rampal Ji Maharaj, Facebook – Spiritual Leader Saint Rampal Ji Maharaj पर भी प्रसारित किया जाएगा। उपरोक्त कार्यक्रमों में ऑनलाइन सम्मिलित होकर परमात्मा कबीर साहेब के सतज्ञान को जानकर आध्यात्मिक विकास का लाभ उठाएं। आप सभी सतज्ञान अर्जित करने के उपरांत सतगुरु रामपाल जी महाराज से नाम दीक्षा लेकर मर्यादा में रहकर सतभक्ति करके अपना कल्याण कराएं और अपना मनुष्य जीवन यथार्थ सिद्ध करें।

काशी तज गुरु मगहर गये, दोनों दीन के पीर।

कोई गाड़े कोई अग्नि जरावे, ढुंढा ना पाया शरीर।।

तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज के तत्वज्ञान को कैसे अर्जित करें? 

“परमेश्वर कबीर बंदी छोड़ जी के 505वें निर्वाण दिवस” पर आप तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज द्वारा रचित पवित्र पुस्तकें “ज्ञानगंगा” और “जीने की राह” पढ़ें और संत रामपाल जी महाराज एप्प डाउनलोड करके सत्यज्ञान अर्जित करें। संत रामपाल जी से निःशुल्क नामदीक्षा लेने के लिए या अपने नजदीकी नामदीक्षा सेंटर का पता करने के लिए संपर्क करें :- 8222880541। संत रामपाल जी महाराज द्वारा लिखित पवित्र पुस्तकें (ज्ञान गंगा और जीने की राह) निःशुल्क मंगवाने के लिए अपना पूरा नाम, पूरा पता, पिन कोड और मोबाइल नम्बर हमारे WhatsApp नम्बर पर Message करें :- 7496801825।  

और भी अनेकों पुस्तकें PDF में Download करने के लिए हमारी वेबसाइट JagatguruRampalJi.org के Publications पेज पर Visit करें।  जगतगुरु संत रामपाल जी महाराज के मंगल प्रवचन सुप्रसिद्ध TV चैनल्स पर (भारतीय समयानुसार {GMT+5:30 IST}) साधना चैनल पर शाम 07:30 से 8:30 बजे तक, पॉपकॉर्न मूवीज चैनल पर शाम 07:30 से 8:30 बजे तक, ईश्वर चैनल पर सुबह 06:00 बजे से 07:00 बजे तक, श्रद्दा Mh1 चैनल पर दोपहर 02:00 से 03:00 बजे तक, सुदर्शन न्यूज चैनल पर सुबह 06:00 बजे से 07:00 बजे तक, नेपाल 1 चैनल पर सुबह 06:00 से 07:00 बजे तक और लोकशाही न्यूज़ चैनल पर मराठी में सत्संग सुबह 05:55 से 06:55 बजे तक देखें। 

1 February 2023 “Parmeshwar Kabir’s 505th Emancipation Day (Nirvana Diwas)” – Departure to Satlok (Maghar Leela)

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Kabir Parmeshwar Ji's 505th Emancipation DayNirvan Diwas 2023

Last Updated on 19 January 2023, 6:45 PM IST | Kabir Parmeshwar Ji’s 505th Emancipation Day (Nirvana Diwas): God Kabir went to Maghar in His final times from where He ascended in His Body to Satlok on the Ekadashi of Shukl Paksha in the Magh month of Hindu calendar in 1575 Vikrami Samvat (1518 A.D.) in the presence of Bijali Khan Pathan, Bir Singh Baghel, and other followers. Both Hindus and Muslims wanted to do His final rites according to their religious tradition to which God Kabir denied since He did not want communalism to dominate as we all are His children.

Who Is the Mystic Saint and Poet Kabir?

The entire world is aware about mystic saint and poet Kabir Saheb from India. Through His poems and Couplets, Kabir Saheb influenced both the Hindus and the Muslims and strongly opposed their rituals which did not have a scriptural base. Kabir Saheb strongly opposed idol worship and condemned Hindus and Muslims regarding consumption of alcohol, flesh and living a life that deviates a soul away from Almighty’s grace.

His Speeches are commonly known as Kabir Dohe (couplets). Many of His couplets are also included in the holy book of Sikhism-Shri Guru Granth Sahib Ji. He mainly preached verbally. His dialect consisted of simple Hindi which a common man could easily understand.

Kabir Parmeshwar Ji’s 505th Emancipation Day Celebration

In memory of the same day, Huge Bhandara is being organized at 9 Satlok Ashrams – Satlok Ashram Rohtak (Haryana), Satlok Ashram Kurukshetra (Haryana), Satlok Ashram Bhiwani (Haryana), Satlok Ashram Sojat (Rajasthan), Satlok Ashram Shamli (Uttar Pradesh), Satlok Ashram Khamanon (Punjab), Satlok Ashram Dhuri (Punjab),  Satlok Ashram Mundka (Delhi) and Satlok Ashram Janakpur (Nepal). Free Naam Diksha, blood donation camp, dowry and pomp free Ramaini (ideal marriage) etc. are also being organized. All are invited to attend this huge Bhandara.

Where Was Saint KABIR Born?

There are no exact historical accounts regarding the “BIRTH” of the mystic poet Saint Kabir. Still, a few people believe that He was “BORN” in the year 1398 A.D. in the city of (Kashi) Varanasi, India. There are many versions of legends that surround His birth. One legend says that He was born to a Brahmin widow who left Baby Kabir near the Lahartara pond since she could not support His upbringing. Another legend says that Kabir was born to a Brahmin mother before she got married and due to the fear of societal rejection she left Baby Kabir at the Lahartara pond in Varanasi.

Later, a Muslim weaver couple Neeru and Neema found Baby Kabir, brought Him home and nurtured Him.

Ideologies of God Kabir

Saint Kabir’s ideologies mainly related to the segment of the society that discriminated against people on the basis of economic background and caste. He often criticized the religious preachers of both the Hindu and Muslim sect for not giving information about the True Almighty. He directly commented on the ritualistic practices guided by religious preachers in the name of God. He preached about one Almighty God, how people could attain Him and His grace. Though Saint Kabir was illiterate, His poems were quite strikingly similar to the information contained in the Holy Vedas, Srimad Bhagavad Gita, Holy Quran. He was revered and respected by people from Hindu, Muslim and Sikh communities.

Kabir Saheb —An Introduction

You must be surprised with this heading coming up once again in the middle of the article. Well, whatever you have read above is that part of the information which is commonly available in public libraries and over the internet.

You must have noticed that in the segment where the information regarding His birth is given the word “BIRTH” has been written in blocks and it is not a typo. It is done purposely. The reason for doing so is as follows:-

Kabir Saheb did not take “BIRTH”  from any mother’s womb. He descended on earth from His eternal abode “Satlok” for the welfare of mankind. This is one of the main reasons why there are no exact historical accounts for His birth.

■ Also Read: Kabir Prakat Diwas: Know The Almighty Kabir’s Mystery of Appearance in Kalyug

Almighty never takes birth from a mother’s womb and He is nurtured by maiden cow’s milk. This is clearly written in Holy Rigveda Mandal 10, Sukt 4, Mantra 3. Kabir Saheb did this spectacle and it is mentioned in the literary works of Saint Garibdas ji. As a matter of fact He descends on earth in every yuga.

In His nectar speech Kabir Saheb says;

Satyug mein Satsukrit ka tera 

Treta naam Muninder mera |

Dwapar mein Karunamay kahaya,

Kalyug naam Kabir dharaya ||

In the words of Kabir Saheb, He has said that He is the Supreme Almighty;

Haad chaam lahu na Mere, Koi jaane satnaam upasi |

Taaran taran abhay pad Daata, Main hoon Kabir Avinaashi ||

Great Reformer Kabir Parmeshwar Abolished Inhuman Kashi Karaunth Evil Practice 

Due to widespread rumours, the people developed strong belief that dying in Kashi would yield heaven and dying at Maghar would yield space in hell followed by next birth of donkey specie. These heaven and hell birth will be irrespective of the theory of Karmas. Due to such rumours, a practice developed in which large number of old men and women start coming to Kashi to reside there in their last days of life to go to heaven. 

These people used to stay with false priests of Kashi. The priests were charging huge money to take care of old people in their own houses in Kashi for living. Gradually the old aged people number grew exponentially and it became difficult for priests to manage large numbers.

The priests found an inhuman solution in terms of inventing Kashi Karaunth (kashi Karvat). Karaunth is special kind of a blade to cut humans and by the help of a rope it is adjusted by the side of a river. The priests propagated a myth in Kashi by the name of ‘Kashi ka Karaunth’. It was told to old people that death caused with Karaunth bestows path directly to heaven and helps attaining God in no time. 

The belief was on the name of Lord Shiva. The poor religious people believed the rumour as truth and each old aged parents desired to avail this golden opportunity and a long queue got generated. The people under the name of God were start killing by falling a Karaunth in the name of heaven. The false priests generated huge business from this evil activity. Sant Garibdas Ji has explained it as

Garib, kashi karaunt let hai, aan katave sheesh |

Ban-ban bhatka khaat hai, pavat na Jagdeesh ||

Parmeshwar Kabir Ji had exposed the Kashi Karaunth myth to the people and said that a person having good deeds can go to heaven from any place be it Kashi or Maghar. In order to prove it He went to Maghar to end His 120 year old divine act of Kaliyug to go to Satlok. He prescribed the three stages mantra Om Tat Sat from a complete saint to attain the Almighty God. The same is explained in Holy Geeta Chapter 17 Verse 23.

Sant Garibdas Ji Has said:

Garib, bina bhakti kya hot hai, bhave kashi karaunth leh |

Mite nahi mann basna, bahuvidhi bharam sandeh ||

Parmeshwar Kabir Nirvana Diwas 2023 (Maghar Leela) | Kabir Saheb Ascended to Satlok

This article is focusing upon the incident around the “DEATH” of Kabir Saheb in Maghar or His ascent back to His eternal abode Satlok. Let’s dive into this and get to know the unknown part of Kabir Saheb’s life on earth.

Kabir Parmeshwar 505th Emancipation Day: When Kabir Saheb was 120 years old, He decided to bid goodbye to this world from a place called Maghar, presently in Uttar Pradesh. During that time, the Hindu preachers propagated the belief that those who die in the city of Kashi go to heaven while those who die in the city of Maghar go to hell and become a donkey in the next birth. To refute this belief system, Kabir Saheb decided to go back to Satlok from the city of Maghar.

He used to live in Kashi. Kashi was under the reign of Bir Singh Baghel while Maghar was under the reign of Bijali Khan Pathan and both the kings were Kabir Saheb’s disciples. To demonstrate that place plays no role in attaining heaven, Kabir Saheb started His journey to Maghar on foot. Bir Singh Baghel came along with his army to accompany Kabir Saheb with an intention to claim His dead body for cremation as per Hindu rites. This year (2023) Parmeshwar Kabir Nirvana Diwas is on February 01.

Kabir Parmeshwar Ji’s 505th Emancipation Day 2023 (Maghar Leela) | Departure of God Kabir From Maghar to Satlok

When Bijali Khan learned that Kabir Saheb is coming to Maghar to live His final few days along with Bir Singh Baghel, he made all the necessary arrangements for all of them and even he prepared his army to claim Kabir Saheb’s dead body for final rites as per Islamic traditions. When everyone arrived at the city of Maghar, Kabir Saheb informed Bijali Khan that He wanted to take a bath. Bijali Khan told Kabir Saheb that water was ready.

Kabir Saheb told Bijali Khan that He wished to take a bath in flowing water. Bijali Khan informed Kabir Saheb that due to lord Shiva’s curse the only river in the area called “Aami River” had dried up, so it wouldn’t be possible for Him to have a bath in flowing water. Kabir Saheb asked Bijali Khan to take Him to the river. When they reached the bank of the river Aami, Kabir Saheb made a gesture as if He was calling the water and immediately water started flowing in the river. Then Kabir Saheb took a bath.

Also Read: Kabir Prakat Diwas: Date, Celebration, Events, History

When they came back, both the kings started arguing as to who would take the dead body for final rites. Kabir Saheb got angry with this and told them that no one will fight for His dead body as they would not find one. To resolve the issue, Kabir Saheb asked for two sheets of cloth. He spread one of them on the floor and layed down on it while He used the other to cover Himself. He instructed both the kings to divide whatever they got in between these sheets into equal parts and use them for cremation as per their individual traditions.

Kabir Parmeshwar Ji’s 505th Emancipation Day 2023 (Maghar Leela) | No Dead Body but Only Fragrant Flowers Found

When Kabir Saheb left this planet and ascended back to Satlok He made an ether announcement stating that He is going to Satlok which is far beyond heaven and that there is no body between those sheets. People saw a bright effulgent body of Kabir Saheb ascending into the sky. When they opened the sheet all they found was a bunch of fragrant flowers in the shape of Kabir Sahib’s body. Kabir Saheb went back to Satlok along with His body.

  • When Kabir Saheb left this universe, everyone present there cried bitterly as if they had lost a parent. Both the kings divided those flowers and a sheet each and cremated as per their religious beliefs. Memorial tombs stand there today for both Hindus and Muslims just 100 meters away from each other.
  • Bir Singh Baghel took a few of those flowers to Kashi and made a tombstone for Kabir Saheb’s memory in Kashi as well. 

This is how Kabir Saheb left this place. He did not die as such… He simply left. This event proves that He was not a normal human being but the Supreme Almighty Himself.

Can We Attain the Supreme Almighty?

Yes, we all souls who are in the human form can very easily attain Supreme Almighty Kabir Saheb and go back to our eternal home Satlok by following the True way of worship guided by the only true enlightened Saint Rampal ji Maharaj from Barwala, Hisar, Haryana India. Today He is the true representative of Kabir Saheb or the Satguru who can make us reach our actual father and actual home. 

How To Celebrate “Parmeshwar Kabir Nirvana Diwas 2023”?

On the occasion of “505th Nirvana Day of Parmeshwar Kabir Bandi Chhor Ji”,  a special broadcast of Satsang of Jagatguru Tattvadarshi Sant Rampal Ji Maharaj will be broadcast on Sadhana TV on 1st February 2023. The event will also be broadcast on YouTube – Sant Rampal Ji Maharaj, Facebook – Spiritual Leader Saint Rampal Ji Maharaj. Join the above programs online and take advantage of spiritual uplift by knowing the Eternal Knowledge (Satgyan) of Paramatma Kabir Saheb. After acquiring Satgyan, everyone should take the name initiation from Satguru Rampal Ji Maharaj and stay in dignity and perform devotion (Satbhakti) and excel at their human life’s real purpose.

Kashi tajj guru maghar aaye, Dono deen ke peer l

Koi gade koi agni jarave, Dhundha na paaya shareer ll

How To Acquire The Eternal Knowledge From Sant Rampal Ji Maharaj?

On the 505th Nirvana Day of Parmeshwar Kabir Bandi Chhor Ji,  you should read the holy books “Gyan Ganga” and “Way of Living”  written by Sant Rampal Ji Maharaj and earn Eternal knowledge by downloading the Sant Rampal Ji Maharaj App. To get free Naam Diksha from Sant Rampal ji call to find out your nearest Naam Diksha Center: – 8222880541. To order holy books (Gyan Ganga and Way to Live) written by Sant Rampal Ji Maharaj for free, message your full name, full address, PIN code, and mobile number on our WhatsApp number: – 7496801825

To download many more books in PDF, visit the Publications page of our website JagatguruRampalJi.org. Watch Jagatguru Sant Rampal Ji Maharaj’s discourses on well-known TV channels (GMT+5:30 IST}) on Sadhana Channel from 07:30 pm to 8:30 pm, on Popcorn Movies Channel from 07:30 pm to 8:30 pm, on Ishwar Channel from 06:00 am to 07:00 AM,  on Shraddha MH1 Channel from 02:00 pm to 03:00  pm, Sudarshan News Channel from 06:00 am to 07:00 am, Nepal 1 channel from 06:00  am to 07:00 am and in the Marathi language on Lokshahi News Channel from 05:55 am to 06:55 am. 

JEE Main Result 2023: Know How to Check the Result?

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JEE Main Result 2023 Topper & Link How to Check the Result

The result for JEE Main Session 1 was declared on 7th February 2023. Read the blog to know how to check the result, list of toppers, statistics and other relevant information about the examination.

JEE Main Result 2023 Key Points

  • The result of the Joint Entrance Examination (JEE) main is declared by the National Testing Agency (NTA).
  • Result is available on their official website jeemain.nta.nic.in.
  • Exams of these results were conducted on 24,25,29,30,31 and 1st of February 2023 for B.E./B.Tech Paper 1 and 28th January for Paper 2 B.Arch and B.Planning (Paper 2A & Paper 2B).
  • A total of 2.62 lakh students cleared the examinations for JEE Advanced.
  • Read the book Way of Living to know the desired result to be obtained from this human life.

How to download JEE Main Result 2023?

  • On the homepage of the website click on ‘JEE Main 2023 Session 1 Scorecard’.
  • A new page will be redirected where you need to fill up your credentials to get to the result.
  • The page will ask your Application Number & Date of Birth as the login details.
  • After Login, an online digital copy will be available to download.
  • It is advisable to take a printout and keep it for future references. 

What are the details mentioned on the JEE Main Scorecard?

After successful login and download of the JEE Mains scorecard one can find the following details on his/her scorecard:

  • Candidate’s name
  • Application number
  • Roll number
  • Date of birth
  • Category
  • Total marks obtained
  • Percentile score
  • All India Rank (AIR)
  • State rank
  • Cutoff marks
  • Qualifying status
  • Score in each subject (Physics, Chemistry, Mathematics)
  • Image of the candidate

How is the JEE Mains Score determined?

  • Total marks of Paper 1 & Paper 2 shall be 300 & 400 marks respectively.
  • For each correct answer one gets 4 marks.
  • For each incorrect answer 1 mark is deducted.
  • For an unanswered question no marks are deducted.

What is JEE Mains Percentage & Percentile Score?

  • A percentage of marks is calculated by dividing marks obtained by the candidate and total number of marks and multiplying the result by 100.
  • On the other hand, percentile is the percentage of the total number of candidates who have scored less than the candidate. It is calculated by dividing the total number of candidates who have scored less than the candidate by the number of candidates and multiplying the result by 100.

Also Read: JEE Main Admit Card 2023 Released: जेईई मेन परीक्षा के एडमिट कार्ड हुए जारी, अभ्यर्थी ऐसे करें डाऊनलोड

JEE Mains 2023: Toppers List

  • ABHINEET MAJETY
  • AMOGH JALAN
  • APURVA SAMOTA
  • ASHIK STENNY
  • BIKKINA ABHINAV CHOWDARY
  • DESHANK PRATAP SINGH
  • DHRUV SANJAY JAIN
  • DNYANESH HEMENDRA SHINDE
  • DUGGINENI VENKATA YUGESH
  • GULSHAN KUMAR
  • GUTHIKONDA ABHIRAM
  • KAUSHAL VIJAYVERGIYA
  • KRISH GUPTA
  • MAYANK SONI
  • N.K.VISHWAJITH
  • NIPUN GOEL
  • RISHI KALRA
  • SOHAM DAS
  • SUTHAR HARSHUL SANJAYBHAI
  • VAVILALA CHIDVILAS REDDY

What are the minimum qualifying marks for JEE Mains 2023?

Minimum qualifying marks or minimum percentage for JEE Mains shall be:

  • General Category: 89.75
  • EWS Category: 78.21
  • OBC-NCL: 74.31
  • SC: 54
  • ST: 44

JEE Main 2023 Statistics 

  • JEE Mains recorded its highest ever attendance in NTA’s record of a total of 95.79%. Out of 8.6 lakh registered candidates 8.22 lakh appeared for the examination. 
  • A total of 20 candidates have scored a total of 100 percentile.
  • No female candidate in Top 20. And No female candidate scored 100 percentile.
  • Female topper is Meesala Pranathi Sreeja with 99.997259 NTA score.
  • The score of 50 candidates are on hold and are under scrutiny.
  • JEE Mains Exams Session 2 will be conducted on 6,8,10,11 and 12. While the reserve dates for exams are 13 and 15 April.
  • The JEE Mains exam was held in 13 languages across 574 centers and 287 cities.
  • A total of 2.62 lakh candidates are considered to be eligible for the JEE advanced exam.

Desired result to be obtained from this human life is salvation

Our human life is given to us to achieve its prime motive which is to attain salvation by worshiping God Kabir through His complete saint. Presently Sant Rampal Ji Maharaj from Haryana, India is one and only Complete Saint present on this planet earth as He has been successful in explaining the meaning of chapter 15 verse 1-4 in accordance with the creation of the universe. We request you to read the book ‘Way of Living‘ written by Him to know about it in detail.

JEE Mains Result 2023: FAQ

Question: What is the validity period of the JEE Main score?

Answer: 1 year

Question: How many students qualified for JEE advanced?

Answer: 2.62 lakh

Question: How many students got 100 percentile?

Answer: 20

Question: What is the website to check updates and notifications?

Answer: jeemain.nta.nic.in

Thousands Killed In The Earthquakes That Hit Turkey-Syria

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Turkey Syria Earthquake Live Updates Thousands Killed, World Offers Aid

Turkey Syria Earthquake Live Updates : More than 3700 people reported dead in the Earthquakes that hit Southern Turkey and Syria. Nearly 12000 people of Turkey and Syria collectively are estimated to be injured due to the quakes. Many more are still trapped under the rubble as rescue continues. Seismologists estimated this 7.8 Magnitude Quake to be the Most Powerful Earthquake of the century. The Quakes caused a huge loss to the property and lives of the people of Turkey as well as Syria. Continue with the blog to know more about the situation. 

Turkey Syria Earthquake Live Updates: Highlights 

  • Earthquakes hit Southern Turkey and Syria.
  • Turkey faces Three Earthquakes in a row in less than 24 hours.
  • According to the US Geological survey, the first 7.8 magnitude tremor struck at around 04:17 local (01:17 GMT) on Monday.
  • The epicenter of the Earthquake centered around 33 kilometers from the Gaziantep province.
  • The Earthquake occurred 18 kilometers deep down.
  • According to the officials more than 2300 people are reported dead in Turkey with more than 11,119  injured. 
  • In Syria, the death toll rises to more than 1400, whereas 1280 are injured.
  • Many people are still under the rubble, struggling to exist as the rescue operation undergoes. 
  • Many countries from around the world are providing aid to the Earthquake hit country, by sending the rescue team, medical squad, equipment, resources etc.
  • Know about the real life savior, who can save us from all the disasters.

Turkey Syria Earthquake  Live Updates: When, Where Did The Tremors Begin?

The Earthquake struck at around 04:17 local time (01:17) GMT. This was the time when most people were in their sleep. According to the U.S. Geological Survey the epicenter of the Earthquake centered around 33 kilometers from the Gaziantep province.This was one of the most powerful earthquakes Turkey experienced after 84 years. Earthquake measured 7.8 on the Richter Scale. The tremors of this quake were experienced as far away as Cyprus (456 km) and Lebanon ( 874 km). This Earthquake centered 18 kilometers deep .

Turkey Syria Earthquake  Live Updates: 24 Hours, Three Earthquakes

On the 6th of February, Turkey was struck by three consecutive devastating earthquakes. The first and largest Earthquake was of the magnitude 7.8. The second measured 7.7 in the Richter scale. This quake originated at a depth of 7km. The third Earthquake measured 6.0 which occurred 4 kilometers South- South East of the Ekinözü town of Kahramanmaraş province. Three Earthquakes hit Turkey within less than 24 hours.

Turkey Syria Earthquake Live Updates: Huge Loss of Lives to The Country

These are among the most devastating earthquakes Turkey has faced in history. More than 2300 people are reported dead, 11,119 injured in Turkey. The Civil War wrecked Syria, mourns the loss of 1400 lives, whereas 1280 people were injured. The search for many more is going on. Many people are still under the rubble, struggling to exist as the rescue operation undergoes. Officials suggest an increase in the death toll and the rescue operation continues. Turkey declared seven days of National Mourning in the country. 

Turkey Syria Earthquake Live Updates: Destructions The Earthquakes Caused 

The Earthquakes caused immense loss to the property of the countries. In Turkey more than 3,000 buildings collapsed due to the shakes. The Earthquake also deteriorated many of the roads, malls, cars etc. One of the Historic Monuments, Yeni Mosque, also collapsed. Along with this the runway of Hatay Airport of Turkey was also torn. A thousand year old castle near Gaziantep also got damaged due to the earthquake. Syria too faced severe damage to the property. Much of the infrastructure of Syria including buildings and other structures got affected due to the Earthquake. 

■ Also Read: Major magnitude earthquake of 7.4 in New Zealand on Thursday, 18 June

Turkey Syria Earthquake Live Updates: World Offers Aid

WHO expressed concerns on the various Earthquakes stricken areas of Turkey. The United States and many other countries turned up to support the Earthquake struck Turkey and Syria. The EU (European Union) has sent rescue teams from Poland, France, Netherlands, Bulgaria, Romania,The Czech Republic and Croatia to help Turkey. Israel sent search and rescue teams and medical help to Turkey. Russia too sent a staff and rescue team to Syria. The U.S. government also said to aid Turkey. India too sent rescue teams, medical squads and other required material to Turkey. Britain is helping Turkey with equipment and other aids. Ukraine has sent their rescue workers to help the fellow country. 

Turkey  Syria Earthquake Live Updates: Reason Behind Earthquakes in Turkey 

Turkey has lots of Earthquakes. The main reason behind Turkey’s proneness to the Earthquakes is its tectonic location. Turkey is located at the intersection point of three tectonic plates namely the Arabian, Eurasian and African tectonic plates. The collision of the former two results in the Anatolian block. This block consists of the North,the South and the East Anatolian Fault Zone. This is the reason for the proneness of Turkey to Earthquakes. The three Earthquakes which took place on 6th February originated within the range of 250 kilometers from the East Anatolian Fault Zones.  

Who is One’s Real Life Savior?

We are aware of the fact that thousands of people keep dying everyday. And nearly this many take birth. This cycle of birth and death continues. We all think that this is what it is. We keep thinking that this is the only final way of living life. To take birth, to have children and make them settled and then die. But in all this, we forget the foremost duty of human life. Human life is the only form of life in which humans can attain God. Human life is provided to us to do the worship of the almighty.

The Almighty, who is the real savior. Who can protect us from the evils and problems in this and the after life. Almighty God Kabir Saheb in his nectar speeches Himself said:

Kabir, Maanush janm pay kar,nahin ratae hari naam।

Jaise kuaan jal bina, Khudvaaya kis kaam ।।

Means as the well without water is useless, similarly human life without worship of the almighty is useless. Kabir Parmeshwar Ji is the Almighty God who came on this earth 600 years ago. Currently the worship of the Almighty God Kabir Saheb Ji is available only with Saint Rampal Ji Maharaj. Take Naam Diksha (Initiation) from Saint Rampal Ji Maharaj to attain complete salvation.

FAQs About Turkey Syria Earthquake

Question: When was the Turkey earthquake?

Answer: Turkey Earthquake was on the 6th February 2023 on Monday.  

Question: Which part of Turkey was hit by an earthquake?

Answer: The Kahramanmaras region of Turkey was hit by an Earthquake of magnitude 7.7. 

Question: Does Turkey have a lot of earthquakes?

Answer: Turkey has lots of Earthquakes. The main reason behind Turkey’s proneness to the Earthquakes is its tectonic location.

Question: Why is Turkey so prone to earthquakes?

Answer: The main reason behind Turkey’s proneness to the Earthquakes is its tectonic location. Turkey is located at the intersection point of three tectonic plates namely the Arabian, Eurasian and African tectonic plates.

Guru Ravidas Jayanti 2023: How Ravidas Ji Performed Miracles With True Worship of Supreme God?

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Guru Ravidas Jayanti 2023 Who Was the Guru of Sant Ravidas Ji

Last Updated on 5 February 2023, 1:38 PM IST: In this blog, we will learn about the birth, life accounts, teachings & Miracles of the great Indian mystic sage and poet Guru Ravidas along with the History, the significance of Ravidas Jayanti on the occasion of Guru Ravidas Jayanti 2023.

Why Is Guru Ravidas Jayanti Celebrated?

Guru Ravidas Jayanti is celebrated to commemorate the birth anniversary of mystic poet saint Guru Ravidas. He was born in village Seer Goverdhanpur presently in Uttar Pradesh to parents Mata Kalsan and Santokh Das in 1450 CE. His parents were cobblers and belonged to the “Chamar Community” and were considered untouchables then. 

How Is Ravidas Jayanti Celebrated?

Guru Ravidas Jayanti is celebrated on a full moon day of the month of Magh which falls in January-February according to the Gregorian calendar. This year Ravidas Jayanti falls on February 5, 2023. On this day, the followers of Ravidas (often called Ravidassias) read the poetic writings of Ravidas and carry out Nagar Keertan processions.

His birth anniversary is celebrated by his followers all over the world with great enthusiasm and devotion. A major celebration event is held every year at Shri Guru Ravidas Janam Asthan Mandir —his birthplace in Uttar Pradesh.

History of Sant Ravidas Ji

History of Saint Ravidas

Ravidas, who was born in a cobbler family, took up the family profession to make a living but was spiritually inclined. Majority of his time was spent in listening to spiritual discourses of saints at banks of river Ganges. Being constantly in the company of saints, he too started writing mystic poems. His literary work is included in Shri Guru Granth Sahib Ji of Sikhs and Panchvani of Dadu Panthis. 41 of his mystic poems are included in the Sacred Book-Shri Guru Granth Sahib ji of the Sikh community.

Who Was the Guru of Saint Ravidas?

Initially, Sant Ravidas took Naam Diksha (initiation) from Ramanand who was a follower of Supreme Almighty Kabir Saheb Ji. Being spiritually inclined, sage Ravidas got deeply engrossed in the way of worship given by Ramanand. Later on God Kabir Saheb gave him initiation and enlightened him about the existence of the True Almighty and the correct way of worship to be adopted to attain Him.

Guru Ravidas Jayanti 2023: Teachings of Saint Ravidas

Since Saint Ravidas was a disciple of Almighty Kabir Saheb, his teachings too focused on the same. Just like Guru Nanak Sahib, he too propagated about true Almighty, how can a soul unite with Him, what way of worship to be adhered to for unite with Almighty, what is the meaning of the word “salvation”, who can grant salvation and who can attain it?

Saint Ravidas Was the Guru Of?

After Kabir Saheb Ji, Saint Ravidas is another Saint Poet who played a crucial role in the Bhakti Movement during the 15th and 16th centuries. Saint Ravidas Ji gave initiation to many pious souls however after coming into the refuge of Almighty God Kabir Saheb Ji, Saint Ravidas was not authorized to give initiation to anyone (as a part of Guru-Shishya Maryada disciples aren’t allowed to give initiation to anyone). Only at special occasions, Saint Ravidas gave initiation on the orders of Kabir Saheb Ji. 

How Did Saint Ravidas Give Naam Diksha (Initiation) to Meera Bai?

People are aware that Saint Ravidas had initiated Meerabai but most of them are unaware about the true incident behind it. Once while going to the temple Meerabai heard Kabir Saheb delivering a spiritual sermon in which He mentioned that Brahma, Vishnu and Shiva are mortals and are in the cycle of birth and death, there is a superior power beyond these gods and only He is capable of granting salvation. 

■ Also Read: मीरा बाई (Meera Bai) ने श्री कृष्ण जी की भक्ति करनी क्यों छोड़ी और किस भक्ति से वे मूर्ति में समाई?

Upon hearing this, Meerabai went to meet Kabir Saheb and she questioned why He called Vishnu a mortal. She informed Him that she meets Shri Krishna in person. Almighty Kabir Saheb told her that since she can talk to Shri Krishna personally, she should ask him about her confusion. That night she spoke to Shri Krishna and during her conversation he confessed that all three gods are mortal and there is a superior power about whom they are unaware.

Sage Ravidas Give Naam Diksha (Initiation) to Meera Bai

The next morning Meerabai went to meet Almighty Kabir Saheb instead of going to the temple. She informed Him that Shri Krishna confessed that he is mortal not Supreme Almighty. She asked Kabir Saheb to give her initiation. To test her devotion Kabir Saheb asked her to take initiation from Saint Ravidas who belonged to the Chamar community because practice of untouchability was at its peak during that era.

■ Also Read: Guru Ravidas Jayanti: Date, Birth Anniversary, Story, Quotes

When Meerabai went to meet Saint Ravidas he advised her that she should think about her decision of making him her guru as he was untouchable. But Meerabai insisted that she doesn’t care about his caste and is seeking her welfare. Saint Ravidas informed Almighty Kabir Saheb about this. He asked Saint Ravidas to initiate her. This is how Meerabai became one of his disciples.

Miracles by Saint Ravidas and Why They Happened?

Miracles by saints happen due to their spiritual powers is something we all are familiar with. However, there are two instances which are widely spoken about and many-a-times even rejected by our religious preachers due to their ignorance about Supreme Almighty Kabir Saheb. Let us take a look at both of those accounts. 

Guru Ravidas Jayanti 2023: Saint Ravidas Taking a Queen in His Refuge 

Once a few people from Saint Ravidas’s village were going to take a bath in the Holy Ganges. They asked Saint Ravidas to join them. Sage Ravidas said he couldn’t join them but asked them to offer one coin to goddess Ganga on his behalf only if she takes it personally, else bring it back. Those people made fun of his condition but took the coin. When they reached the bank of river Ganga, they asked goddess Ganga (Controller of River Ganga) to come and take Sage Ravidas’s coin personally. Immediately two hands appeared from the river.

One was empty and the other hand was holding a gold bangle. One of those people offered the coin and in exchange of that coin goddess Ganga offered him the gold bangle and asked him to give it to Sage Ravidas. After getting the gold bangle, this person became greedy and thought what would a sage like Ravidas do with this bangle? Instead, I will give it to the queen and get some reward for it. When he took the bangle to the queen, the queen insisted on having a pair of those bangles since the bangle was very beautiful. Since it was a present from goddess Ganga, he failed to get the second bangle. The king got agitated and threatened him with his life.

Saint Ravidas Taking a Queen in His Refuge

This scared him to a great extent and compelled him to visit sage Ravidas and narrate the entire story. Sage Ravidas said that he can take a bangle from the vessel he used to keep his thread and leather in water for shoe making. Even though the feeling was gross enough, he immersed his hand in that vessel. He realised that there were many such bangles in that vessel.

Read in Hindi: Sant Ravidas Jayanti [Hindi]: संत रविदास जयंती पर जानिए कौन थे वास्तविक संत रविदास जी के गुरु?

Sage Ravidas told him to take just one out of those and get his problem solved. He took the Bangle and gave it to the queen. He then narrated the entire incident to both the king and queen which made the Queen very much impressed with sage Ravidas and she made him her guru.

Saint Ravidas Taking 700 Brahmins in His Refuge

Once the Queen hosted a community meal for all the Brahmins in her area. In this arrangement she made a special seat for her guru sage Ravidas. When approximately 700 Brahmins were having their meal they realised that even sage Ravidas was sitting amongst them and having a meal. Since sage Ravidas belonged to the untouchable caste, all the Brahmins became very offended and were about to leave when sage Ravidas said that he would sit outside the tent while they could have their meals comfortably without his presence being noticed.

They all agreed to this. While eating they realised that sage Ravidas was sharing a plate with every Brahmin present there. This led to chaos. To calm down the situation sage Ravidas said that by just wearing a janeau (sacred thread) you don’t become Brahmins. If that’s the case then I have a gold janeau under my skin. He made a small incision in his chest and revealed a gold janeau. All the 700 Brahmins became his disciples. Sage Ravidas worshiped the true Almighty (Kabir Sahib) who always stood by his side during times of trials and these miracles happened.

Who Is Imparting True Worship?

Today, there is only one saint on earth who is imparting true worship in accordance with our holy scriptures and His name is Saint Rampal Ji Maharaj from Barwala-Hisar, Haryana, India. He is the only sage who fits the description of an enlightened sage provided in Srimad Bhagavad Gita chapter 15 verses 1-4. To Attain True Worship and know how to attain true Almighty, kindly listen to the Spiritual discourses by Sant Rampal ji Maharaj .

To take initiation from Saint Rampal Ji Maharaj please click here to fill the initiation form. One Can download the Book Gyan Ganga for more information.

Saint Ravidas Ji has predicted that a great Avtari Saint will take birth in India who will make India “Golden Bird” again. The predictions also say that India will become Vishwa Guru under the guidance of a World Victorious Saint. This prediction is about Saint Rampal Ji Maharaj Ji who is working day and night to bring the Golden Era (Satyug in Kalyug). 

FAQs about Guru Ravidas Jayanti

Ques:- Who was Saint Ravidas Ji?

And:- Saint Ravidas Ji was a great saint, poet and follower of Kabir Sahib Ji.

Ques:- When was Saint Ravidas Ji born?

Ans:- Saint Ravidas Ji is said to be born in 1377 C.E in Varanasi, Uttar Pradesh according to some sources.

Ques:- When Saint Ravidas Ji died?

Ans:- According to some sources Saint Ravidas Ji is said to have died in 1540 near Varanasi.

Ques:- Who was the Guru of Saint Ravidas Ji?

Ans:- Saint Ravidas Ji took initiation from Supreme Power Kabir Sahib Ji.

Sant Ravidas Jayanti 2023 [Hindi]: संत रविदास जयंती पर जानिए कौन थे वास्तविक संत रविदास जी के गुरु?

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संत रविदास जयंती 2023 किसकी भक्ति करने से रविदास जी का मोक्ष हुआ

Last Updated on 4 February 2023, 4:48 PM IST: संत रविदास जयंती 2023 (Sant Ravidas Jayanti in Hindi): धरती पर प्रत्येक युग में ऋषि मुनियों, संतों, महंतों, कवियों और महापुरुषों का जन्म होता रहा है। लोगों में भक्तिभाव जीवित रखने में महापुरुषों का विशेष योगदान रहा है। इन महापुरुषों ने समाज सुधारक का कार्य करते हुए संसार के लोगों में भक्तिभाव बढ़ाने, श्रद्धा और विश्वास जगाने का काम किया है। ईश्वर में इनके अटूट भक्तिभाव को देखकर लोगों के अन्दर भी आस्था और श्रद्धा जागृत होती है। ऐसे ही एक महापुरुष संत रविदास जी हुए हैं। जिन्होंने खुद पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब जी की सतभक्ति की और संसार को सतभक्ति के बारे में बताया। संत रविदास जी की विचारधारा से प्रभावित होकर लोग इन्हें अपना गुरु तो मानने लगे परंतु उनके दिखाए मार्ग पर नही चले और उनके जैसी भक्ति भी वे नही कर सके। संतों के दिखाए सतमार्ग पर चलकर ही हम अपने जीवन और समाज की विचारधारा को बदल सकते हैं।

संत रविदास जी ने जीवनपर्यंत सामाजिक भेदभाव को खत्म करने और समाज में सभी वर्ग के लोगों को समान अधिकार और सामाजिक एकता के निर्माण का संदेश दिया। “मन चंगा तो कठौती में गंगा” की सीख से संत रविदास जी ने बताया गंगा में स्नान करने से नहीं बल्कि पूर्ण ब्रह्म की भक्ति करने से उद्धार होता है और मन यदि पवित्र है तो गंगा तुम्हारे पास है। साथ ही जानें संत रविदास जी को इतना महान संत बनाने वाले उनके गुरु कौन थे?

Table of Contents

इस वर्ष संत रविदास जयंती (Sant Ravidas Jayanti) कब है?

भारतीय केलेंडर के अनुसार इस वर्ष संत रविदास जी की 646वीं जयंती 5 फरवरी, 2023 और दिन रविवार को मनाई जाएगी।

क्या आप जानते हैं कि किस कर्म के कारण संत रविदास जी का जन्म चमार जाति में हुआ? 

सत्य कुछ इस प्रकार है, एक सुविचार वाला ब्राह्मण ब्रह्मचर्य का पालन करता हुआ भक्ति कर रहा था। घर त्यागकर किसी ऋषि के आश्रम में रहता था। सुबह के समय काशी शहर के पास से बह रही गंगा दरिया में स्नान करके वृक्ष के नीचे बैठा परमात्मा का चिंतन कर रहा था। उसी समय एक 15-16 वर्ष की लड़की अपनी माता जी के साथ जंगल में पशुओं का चारा लेकर शहर की ओर जा रही थी। उसी वृक्ष के नीचे दूसरी ओर छाया देखकर माँ-बेटी ने चारे की गाँठ (गठड़ी) जमीन पर रखी और सुस्ताने लगी। साधक ब्राह्मण की दृष्टि युवती पर पड़ी तो सूक्ष्म मनोरथ उठा कि कितनी सुंदर लड़की है। पत्नी होती तो कैसा होता। उसी क्षण विद्वान ब्राह्मण को अध्यात्म ज्ञान से अपनी साधना की हानि का ज्ञान हुआ कि :- 

जेती नारी देखियाँ मन दोष उपाय।

ताक दोष भी लगत है जैसे भोग कमाय।। 

अर्थात् मन में मिलन करने के दोष से जितनी भी स्त्रियों को देखा, उतनी ही स्त्रियों के साथ सूक्ष्म मिलन का पाप लग जाता है। इस कारण मन में मलीनता आ ही जाती है, परंतु अध्यात्म में यह भी प्रावधान है कि उसे तुरंत सुविचार से समाप्त किया जा सकता है। एक युवक साईकिल से अपने गाँव आ रहा था। वह पड़ौस के गाँव में गया था। उसने दूर से देखा कि तीन लड़कियाँ सिर पर पशुओं का चारा लिए उसी गाँव की ओर जा रही थी। वह उनके पीछे साईकिल से आ रहा था। उनमें से एक लड़की उन तीनों में अधिक आकर्षक लग रही थी। पीठ की ओर से लड़कियों को देख रहा था। उस लड़के का एक लड़की के प्रति जवानी वाला दोष विशेष उत्पन्न था। उसी दोष दृष्टि से उसने उन लड़कियों से आगे साईकिल निकालकर उस लड़की का मुख देखने के लिए पीछे देखा तो वह उसकी सगी बहन थी।

कुविचार और सुविचार

अपनी बहन को देखते ही सुविचार आया। कुविचार ऐसे चला गया जैसे सोचा ही नहीं था। उस युवक को आत्मग्लानी हुई और सुविचार इतना गहरा बना कि कुविचार समूल नष्ट हो गया। उस नेक ब्रह्मचारी ब्राह्मण को पता था कि कुविचार के पाप को सुविचार की दृढ़ता तथा यथार्थता से समूल नष्ट किया जा सकता है। उसी उद्देश्य से उस ब्राह्मण ने उस लड़की के प्रति उत्पन्न कुविचार को समूल नष्ट करके अपनी भक्ति की रक्षा करनी चाही और अंतःकरण से सुविचार किया कि काश यह मेरी माँ होती। यह सुविचार इस भाव से किया जैसे उस युवक को अपनी बहन को पहचानते ही बहन भाव अंतःकरण से हुआ था। फिर दोष की जगह ही नहीं रही थी। ठीक यही भाव उस विद्वान ब्राह्मण ने उस युवती के प्रति बनाया। वह लड़की चमार जाति से थी।

Sant Ravidas Jayanti in Hindi: ब्राह्मण ने अपनी भक्ति धर्म की रक्षा के उद्देश्य से उस युवती के चेहरे को माँ के रूप में मन में धारण कर लिया। दो वर्ष के पश्चात् उस ब्राह्मण साधक ने शरीर छोड़ दिया। उस चमार कन्या का विवाह हो गया। उस साधक ब्राह्मण का जन्म उस चमार के घर हुआ। वह बालक संत रविदास हुआ।

संत रविदास जी का जन्म कहां और किस जाति में हुआ था?

संत रविदास जी परमेश्वर कबीर जी के समकालीन थे। संत रविदास जी का जन्म भारत के उत्तर प्रदेश के बनारस (काशी) में चंद्रवंशी (चंवर) चर्मकार जाति में हुआ था ।

संत रविदास जी के पिता का नाम संतोष दास और माता जी का नाम कलसा देवी था। जिस दिन रविदास जी का जन्म हुआ उस दिन रविवार था इस कारण उन्हें रविदास कहा गया। रविदास जी चर्मकार कुल में पैदा होने के कारण जीवन निर्वाह के लिए अपना पैतृक कार्य किया करते थे तथा कबीर साहेब जी के परम भक्त होने के नाते सतभक्ति भी करते थे। संत रविदास जी जूते बनाने के लिए जीव हत्या नहीं किया करते थे बल्कि मरे हुए जानवरों की खाल से ही जूते बनाया करते थे। सतभक्ति करने वाला साधक इस बात का खास ध्यान रखता है कि उसके कारण किसी जीव को कभी कोई हानि या दुख न पहुंचे।

कौन थे रविदास जी के वास्तविक गुरू तथा संत शिरोमणि?

परमेश्वर कबीर जी ने काशी के प्रसिद्ध स्वामी रामानन्द जी को यथार्थ भक्ति मार्ग समझाया था। अपना सतलोक स्थान दिखाकर वापिस पृथ्वीलोक में छोड़ा था। अर्थात कबीर साहेब जी ने स्वामी रामानंद जी को सतज्ञान समझाया और उन्हें सतलोक ले कर गए। उससे पहले स्वामी रामानन्द जी केवल ब्राह्मण जाति के व्यक्तियों को ही शिष्य बनाते थे। सतज्ञान से अवगत होने के पश्चात् स्वामी रामानंद जी ने अन्य जाति वालों को भी शिष्य बनाना प्रारम्भ किया था। संत रविदास जी ने स्वामी रामानन्द जी से दीक्षा ले रखी थी। परमेश्वर कबीर जी ने स्वामी रामानन्द जी को प्रथम मंत्र (केवल पाँच नाम वाला) बताया था, उसी को दीक्षा में स्वामी जी देते थे। 

संत रविदास जयंती 2022 पर जानिए किसकी भक्ति करने से रविदास जी का मोक्ष हुआ

संत रविदास जी उसी प्रथम मंत्र का जाप किया करते थे। संत पीपा जी, धन्ना भक्त, स्वामी रामानंद जी और संत रविदास जी के गुरु संत शिरोमणि कबीर साहेब जी (परम अक्षर पुरूष, उत्तम पुरूष, सर्वश्रेष्ठ परमात्मा) ही थे। लेकिन कलयुग में गुरू परम्परा का महत्व बनाए रखने के लिए उन्होंने रामानंद जी को उनका गुरू बनने का अभिनय करने के लिए कहा और पीपा, धन्ना और रविदास जी को रामानंद जी को गुरू बनाने के लिए कहा और मीराबाई को रविदास जी को गुरु बनाने को कहा। लेकिन वास्तव में सबके ऊपर कबीर साहेब जी की ही कृपा दृष्टि थी। संत रविदास जी की वाणी बताती है कि:-

रामानंद मोहि गुरु मिल्यौ, पाया ब्रह्म विसास ।

रामनाम अमी रस पियौ, रविदास हि भयौ षलास ॥

मीराबाई जी के गुरु कौन थे?

संत रविदास जयंती 2023 (Sant Ravidas Jayanti in Hindi) मीराबाई की परीक्षा के लिए कबीर जी ने संत रविदास जी से कहा कि आप ठाकुरों की लड़की, मीरा राठौर को प्रथम मंत्र दे दो। यह मेरा आपको आदेश है। संत रविदास जी ने आज्ञा का पालन किया। संत कबीर परमात्मा जी ने मीरा से कहा कि बहन जी! वो बैठे संत जी, उनके पास जाकर दीक्षा ले लो। बहन मीरा जी तुरंत रविदास जी के पास गईं और बोली, संत जी! दीक्षा देकर कल्याण करो। संत रविदास जी ने बताया कि बहन जी! मैं चमार जाति से हूँ।

आप ठाकुरों की बेटी हो। आपके समाज के लोग आपको बुरा-भला कहेंगे। जाति से बाहर कर देंगे। आप विचार कर लें। मीराबाई अधिकारी आत्मा थी। परमात्मा के लिए मर-मिटने के लिए सदा तत्पर रहती थी। बोली, संत जी! आप मेरे पिता, मैं आपकी बेटी। मुझे दीक्षा दो। भाड़ में पड़ो समाज। कल को कुतिया बनूंगी, तब यह ठाकुर समाज मेरा क्या बचाव करेगा?

सत्संग में बड़े गुरू जी (कबीर जी) ने बताया है कि :-

कबीर, कुल करनी के कारणे, हंसा गया बिगोय।

तब कुल क्या कर लेगा, जब चार पाओं का होय।।

संत रविदास जी उठकर संत कबीर जी के पास गए और सब बात बताई। कबीर साहेब जी के आदेश का पालन करते हुए संत रविदास जी ने बहन मीरा को प्रथम मंत्र नाम दिया। संत रविदास जी से सतभक्ति पाकर मीराबाई जी कहती हैं,

गुरु मिलिया रैदास जी, दीनहई ज्ञान की गुटकी।

परम गुरां के सारण मैं रहस्यां, परणाम करां लुटकी।।

यों मन मेरो बड़ों हरामी, ज्यूं मदमातों हाथी।

सतगुरु हाथ धरौ सिर ऊपर, आंकुस दै समझाती।।

संत रविदास जी छुआछूत के विरोधी थे

चमार जाति में पैदा होने के कारण संत रविदास जी को ऊंच-नींच, छुआछूत, जात-पात का भेदभाव देखने को मिला। संत रविदास जी ने समाज में व्याप्त बुराईयों जैसे वर्ण व्यवस्था, छुआछूत और ब्राह्मणवाद, पाखण्ड पूजा के विरोध में अपना स्वर प्रखर किया।

चमड़े, मांस और रक्त से, जन का बना आकार।

आँख पसार के देख लो, सारा जगत चमार।।

रैदास एक ही बूंद से, भयो जगत विस्तार।

ऊंच नींच केहि विधि भये, ब्राह्मण और चमार।।

कहै रविदास खलास चमारा।

जो हम सहरी सो मीत हमारा।।

संत रविदास जयंती पर जानिए कैसे रविदास जी ने 700 ब्राह्मणों को अपनी शरण में लिया?

एक रानी संत रविदास जी की शिष्या बन चुकी थी। एक दिन रानी ने भोजन भंडारा आयोजित किया, उस भोजन भंडारे में रानी ने 700 ब्राह्मणों को आमंत्रित किया और अपने गुरु संत रविदास जी को भी आमंत्रित किया। ब्राह्मणों ने जब देखा कि एक नीच जाति का संत रविदास हमारे बीच बैठा हुआ है तो उन्होंने रानी से कहा कि हम इस छोटी जाति के व्यक्ति के साथ भंडारा नहीं करेंगे। जात-पात, छुआछूत को सबसे ऊपर मानने वाले ब्राह्मण लोगों ने ज़िद्द की कि संत रविदास जी को भंडार कक्ष से बाहर निकालो।

रानी ने अपने गुरु जी का अपमान होते देखकर उन ब्राह्मणों को चेतावनीवश कहा “हे ब्राह्मणों अगर आप को भोजन करना है तो करें अन्यथा आप जा सकते हैं लेकिन मैं अपने गुरु जी का अपमान नहीं सुन सकती। गुरु का स्थान परमात्मा के समान है और इनका अपमान करना या सुनना पाप है।“ तब संत रविदास जी ने कहा कि हे रानी, आये अतिथियों का अपमान नहीं करते बेटी। मैं नीच जाति का हूं, मेरा स्थान यहां नहीं इनके चप्पलों में है। इतना कहते ही संत रविदास जी ब्राह्मणों के चप्पल रखने के स्थान पर जा कर बैठ गए और भोजन भंडारा करने लगे।

संत रविदास जयंती 2023: संत रविदास जी से 700 ब्राह्मणों ने नाम दीक्षा ली

अब सभी ब्राह्मण भोजन करने लगे। इसी बीच ब्राह्मणों को एक चमत्कार देखने को मिला कि जैसे संत रविदास जी उनके साथ बैठ कर भोजन कर रहे हैं। सभी ब्राह्मण एक-दूसरे को कहने लगे कि देख तुम्हारे साथ नीच जाति का व्यक्ति भोजन कर रहा है तुम तो अछूत हो गये। संत रविदास जी यह सब सुनकर ब्राह्मणों से पूछते हैं कि क्यों झूठ बोल रहे हो ब्राह्मण जी, मैं तो यहां आपके चप्पलों के स्थान पर बैठा हूं। उन्हें जूतों के पास बैठा देखकर सभी ब्राह्मण आश्चर्यचकित होकर सोच में पड़ जाते हैं कि यदि वे वहाँ बैठा है तो उनके साथ बैठ कर भोजन करने वाला कौन है?

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तत्पश्चात संत रविदास जी ब्राह्मणों को बताते हैं कि आप सभी ब्राह्मण तो सूत की जनेऊ पहनते हो लेकिन मैंने तो सोने का जनेऊ पहना है। संत रविदास जी ब्राह्मणों को अपने शरीर के अंदर का सोने का जनेऊ दिखा कर कहते हैं कि वास्तविक संत वह है जिसके पास राम नाम का जनेऊ हो। यह सब सुनने और देखने के बाद सभी ब्राह्मणों ने अपना सिर झुका लिया और हाथ जोड़कर संत रविदास जी से माफी मांगी। इस घटनाक्रम के बाद संत रविदास जी ने पूर्ण परमात्मा कबीर जी की अमृतवाणी का सत्संग किया। इस सत्संग के उपरांत 700 ब्राह्मणों ने संत रविदास जी से नाम दीक्षा लेकर उन्हें अपना गुरु बनाया और पूर्ण परमात्मा की सतभक्ति करके अपना कल्याण कराया।

पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब के शिष्य संत गरीबदास जी ब्राह्मणों के विषय में अपनी वाणी में कहते हैं कि –

गरीब, द्वादश तिलक बनाये कर, नाचै घर घर बाय।

कंनक जनेयू काड्या, संत रविदास चमार।|

रैदास ब्राह्मण मत पूजिये, जो होवै गुणहीन।

पूजिय चरन चंडाल के, जो हौवे गुन परवीन।।

संत रविदास जी 151 वर्ष की आयु तक भौतिक शरीर में रहकर सतभक्ति संदेश देते रहे

संत रविदास जी 151 वर्ष तक जीवित रहे और समाज में प्रचलित जाति व्यवस्था, पाखण्ड पूजा, छुआ-छूत , ऊंच-नीच, असमानता के खिलाफ आवाज़ उठाई और सभी को सतभक्ति करने का संदेश दिया। उन्होंने बताया कि हम सब ‘एक पूर्ण परमात्मा’ के बच्चें हैं तथा केवल एक पूर्ण परमात्मा की सच्ची भक्ति करने का संदेश दिया।

संत रविदास जयंती क्यों मनाते हैं?

संत रविदास जयंती उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण है जो उनकी विचार धारा में विश्वास रखते हैं। अधिकतर लोग गुरु रविदास को अपना आध्यात्मिक गुरु मानते हैं। अपने गुरु के सम्मान और विचारधारा को चलाए रखने के लिए रविदास जी को गुरु मानने वाले इस दिन उनकी याद में नगर कीर्तन, भजन समारोह, सभाओं का आयोजन करते हैं। संत रविदास जी ने पाखंडवाद, जात-पात, ऊंच नीच के भेदभाव को मिटाने का प्रयास किया। सभी को एक सूत्र में बांधने का कार्य किया। संत रविदास जी ने आन उपासना यानी शास्त्र विरुद्ध साधना को भी नकारा। उन्होंने बताया केवल पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब जी ही हैं। उनके अतिरिक्त किसी अन्य देवी-देवताओं की पूजा नहीं करनी चाहिए। इस विषय में संत रविदास जी ने कहा है कि:-

हीरा छाड़ कै, कैरे आन की आस।

ते नर दोजख जाएंगे, सत्य भाखै रविदास।।

किसकी भक्ति करने से संत रविदास जी का मोक्ष हुआ? 

संत रविदास जी परमेश्वर कबीर साहेब जी के साथ रहकर उनके ज्ञान को अच्छे से समझ चुके थे। रामानंद जी से प्रथम चरण की दीक्षा प्राप्त करने के बाद उनकी भक्ति में दृढ़ता को देखकर कबीर साहेब जी ने रविदास जी को सतनाम (दूसरे चरण की दीक्षा) प्रदान किया। कबीर साहेब जी की भक्ति इष्ट देव के रूप में करने से ही संत रविदास जी मोक्ष के अधिकारी हुए। 

पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब के शिष्य संत गरीबदास जी इसी विषय में अपनी वाणी में कहते हैं कि 

गरीब, रैदास खवास कबीर का, जुगन जुगन सत्संग।

मीरां का मुजरा हुआ, चढ़त नबेला रंग। 

गरीब, नौलख नानक नाद में, दस लख गोरख पास।

अनंत संत पद में मिले, कोटि तिरे रैदास।।

संत रविदास जयंती पर पढ़िए उनके द्वारा कही कुछ प्रसिद्ध वाणियां जो समाज से जातिगत भेदभाव को समाप्त करने और एक ईश्वर को पहचानने में मदद करेंगी :

चमड़े, मांस और रक्त से, जन का बना आकार। 

आंख पसार के देख लो, सारा जगत चमार ।।

रविदास जन्म के कारनै, होत न कोउ नीच। 

नर कूँ नीच करि डारि है, ओछे करम की कीच।।

रैदास एक ही बूंद से, भयो जगत विस्तार। 

ऊँच नींच केहि विधि भये, ब्राह्मण और चमार॥

निर्गुण का गुण देखो आई। देही सहित कबीर सियाई ।।

सुरत शब्द जऊ एक हों, तऊ पाइहिं परम अनंद। 

रविदास अंतर दीपक जरई, घट उपजई ब्रह्म आनंद॥

इड़ा पिंगला सुसुम्णा, बिध चक्र प्रणयाम। 

रविदास हौं सबहि छाँड़ियों, जबहि पाइहु सत्तनाम॥

वर्तमान में कौन है कबीर साहेब जी के अवतार?

ग्रेट शायरन, मसीहा, बाखबर, तत्वदर्शी, संत, विश्व विजेता संत तथा कबीर परमेश्वर जी का अवतार कहे जाने वाले संत हिंदुस्तान की धरा पर मौजूद, कोई और नहीं संत रामपाल जी महाराज हैं, जो वर्तमान में कबीर साहेब के सच्चे पंथ को आगे बढ़ा रहे हैं। दरअसल कबीर साहेब का पथ ही सच्चा आदि सनातन पंथ (मानव पंथ) है। जिसकी वजह से सभी जाति, धर्म, मज़हब के लोग (हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, अन्य  सभी धर्म) संत रामपाल जी महाराज से नाम दीक्षा लेकर सतभक्ति कर रहे हैं तथा एक छत के नीचे बैठकर प्रेम और भाईचारे से सत्संग सुन पा रहे हैं।

पूर्ण परमात्मा की सही भक्ति विधि, यथार्थ सतज्ञान, वास्तविक मंत्रों का जाप केवल तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज जी के पास है। इनके अतिरिक्त विश्व में किसी के पास यथार्थ भक्ति मार्ग नहीं है। आप सभी से निवेदन है कि मनुष्य जीवन रहते हुए समझिए: 

जीव हमारी जाति है मानव धर्म हमारा।

हिंदू, मुस्लिम,सिख, ईसाई धर्म नहीं कोई न्यारा।।

संत रामपाल जी महाराज जी से नाम दीक्षा लेकर पूर्ण परमात्मा की सतभक्ति आरंभ करें। 

सतज्ञान जानने के लिए पढ़ें सतगुरु रामपाल जी महाराज जी द्वारा लिखित पवित्र पुस्तकें

संत रामपाल जी महाराज विश्व में एकमात्र ऐसे सतगुरु हैं जो कि सभी संतों की वाणियों और पवित्र सदग्रंथों से प्रमाणित ज्ञान दिखा रहे हैं। अधिक जानकारी के लिए आप Sant Rampal Ji Maharaj YouTube Channel पर Visit करें और संत रामपाल जी महाराज जी द्वारा सर्वधर्म ग्रंथों के आधार पर लिखित आध्यात्मिक पुस्तक ज्ञान गंगाको अवश्य पढ़ें।

FAQ about Sant Ravidas Jayanti

संत रविदास की जयंती क्यों मनाई जाती है?

संत रविदास जी तथा उनकी बताई आध्यात्मिक बातों को याद करने के लिए उनकी जयंती मनाई जाती है।

रविदास जी किसकी भक्ति करते थे?

संत रविदास जी परम अक्षर ब्रह्म कबीर परमेश्वर जी की भक्ति करते थे।

संत रविदास जी किस प्रकार के संत थे?

संत रविदास जी सच्चे समाज सुधारक, पाखंड के विरोधी तथा सत भक्ति करने वाले सच्चे संत थे।

संत रविदास जी ने ज्ञान चर्चा में एक बार कितने ब्राह्मणों को हराया था?

700 ब्राह्मणों को।

मीराबाई के गुरु कौन थे?

संत रविदास जी मीराबाई के शुरुआती गुरु थ। बाद में कबीर साहेब ने मीराबाई को दीक्षा दी थी।

मीराबाई को अपनी शिष्या बनाने के लिए संत रविदास जी से किसने कहा था?

मीराबाई को शिष्या बनाने के लिए संत रविदास जी से कबीर साहेब ने कहा था।

Union Budget 2023 (Hindi): निर्मला सीतारमण ने पेश किया भारत का 76वां बजट, जाने क्या है खास!

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Budget 2023 [Hindi] बजट में क्या हुआ सस्ता और क्या हुआ महंगा

Union Budget 2023 (Hindi): 1 फरवरी 2023 को भारत की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने, वर्ष 2023 – 24 के लिए भारत का केंद्रीय बजट पेश किया। यह विश्व की पांचवी बड़ी अर्थव्यवस्था कहें जाने वाले भारत का 76वां बजट है। इस वर्ष 2023- 24 के बजट में सरकार का कुल व्यय 45.03 लाख करोड़ भारतीय रुपए और कुल आय 33.61 करोड़ भारतीय रुपए अनुमानित है।  2023 – 24 का यह बजट मोदी सरकार का पांचवा बजट है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2023-24 सत्र के केंद्रीय बजट को “अमृत काल का पहला बजट” बताया। केंद्रीय सरकार के अनुसार 2023-24 का यह बजट गरीब, मध्यम, महिला व युवा वर्ग के मद्देनजर बनाया गया है। आइए जानते हैं आखिर 2023-24 के बजट में क्या है खास ?

Union Budget 2023 (Hindi): मुख्य बिंदु 

  • केन्‍द्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने 01 फरवरी, 2023 को संसद में केन्‍द्रीय बजट 2023-24 पेश किया
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का था पांचवां बजट
  • पिछले 2 साल के आम बजट की तरह ही ये बजट भी था पेपरलेस
  • रक्षा मंत्रालय को सबसे ज्यादा 5.94 लाख करोड़ रुपये का आवंटन
  • प्रति व्‍यक्ति आय करीब 9 वर्षों में दोगुनी होकर 1.97 लाख रुपये हो गई है
  • भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था विश्‍व की 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्‍यस्‍था बन गई है
  • बजट की सात प्राथमिकताएं ‘सप्‍तऋषि’ – इनमें शामिल हैं: समावेशी विकास, अंतिम छोर-अंतिम व्‍यक्ति तक पहुंच, बुनियादी ढांचा और निवेश, निहित क्षमताओं का विस्‍तार, हरित विकास, युवा शक्ति तथा वित्‍तीय क्षेत्र
  • आत्‍मनिर्भर स्‍वच्‍छ पादप कार्यक्रम का शुभारंभ 2,200  करोड़ रुपये के उच्‍च गुणवत्‍ता वाली बागवानी फसल के लिए रोग-मुक्‍त तथा गुणवत्‍तापूर्ण पौध सामग्री की बढ़ेगी उपलब्‍धता
  • वर्ष 2014 से स्‍थापित मौजूदा 157 चिकित्‍सा महाविद्यालयों में नए नर्सिंग कॉलेज
  • 3.5 लाख जनजातीय विद्यार्थियों के लिए 740 एकलव्‍य मॉडल आवासीय विद्यालयों में 38,800 नई नियुक्‍ति
  • पीएम आवास योजना के लिए परिव्‍यय 66 प्रतिशत बढ़ा अब 79,000 करोड़ रुपये
  • रेलवे के लिए अब तक की सर्वाधिक राशि 2.40 लाख करोड़ रुपये की पूंजीगत निधि का प्रावधान
  • विदेशी आयातों पर बढ़ा टैक्स
  • स्वदेशी निर्माण को बढ़ावा देने वाला बजट
  • सतलोक ही ऐसा लोक है जहां कोई अभाव नही है

Union Budget 2023 (Hindi): बजट 2023-24 की मुख्य विशेषताएं क्या हैं?

केंद्रीय बजट 2023-24 का एक प्रमुख विषय समावेशी विकास है – “सबका साथ, सबका विकास।” इस बजट में किसान, महिला, युवा, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC), दिव्यांगजन (PWD) और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS), वंचितों के लिए समग्र प्राथमिकता, संघ शासित प्रदेशों जम्मू-कश्मीर और लद्दाख और पूर्वोत्तर क्षेत्र (NER) पर भी निरंतर ध्यान केंद्रित किया गया है।

बजट दो-आयामी विकास रणनीति की तर्ज पर है:

  • निजी क्षेत्र को प्रोत्साहन देना रोजगार सृजित करना और विकास को आगे बढ़ाना
  • ‘न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन’ (Minimum Government Maximum Governance); पूंजीगत व्यय (Capex) बढ़ाना और विनिवेश के माध्यम से अधिक राजस्व जुटाना

Union Budget 2023 (Hindi): क्या हैं अमृत काल के सप्त ऋषि ?

वैसे तो सप्तऋषियों के विषय मे हिन्दू धर्म के ग्रंथों मे विस्तार से वर्णन है। परंतु संसद में बजट पेश करते समय वित्त मंत्री, निर्मला सीतारमण ने बताया कि “अमृत काल” के पहले बजट का आधार सप्तऋषि हैं। वित्त मंत्री के अनुसार, यह सप्तऋषि प्लान ही भारत के विकास में कार्यरत होगा। 

  1. समावेशी निवेश 
  2. वंचितों को वरीयता
  3. बुनियादी ढांचे और निवेश
  4. क्षमता विस्तार
  5. हरित विकास
  6. युवा शक्ति 
  7. वित्तीय क्षेत्र 

Union Budget 2023 (Hindi): कितना है विभिन्न मंत्रालयों का बजट? 

अमृत काल के पहले बजट में विभिन्न मंत्रालयों का बजट (लाख करोड़ में) निम्नानुसार है :

  • कृषि एवं कृषक कल्याण मंत्रालय : 1.2
  • परमाणु ऊर्जा विभाग : 0.2
  • आयुष मंत्रालय : 0.03
  • रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय : 1.7
  • कोयला मंत्रालय : 0.001
  • वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय : 0.1
  • संचार मंत्रालय : 1.2
  • उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय : 2.0
  • सहकारिता मंत्रालय : 0.01
  • कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय : 0.007
  • संस्कृति मंत्रालय : 0.03
  • रक्षा मंत्रालय : 5.9
  • पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय : 0.05
  • पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय : 0.03
  • शिक्षा मंत्रालय : 1.12
  • इलेक्ट्रोनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय : 0.1
  • पर्यावरण,जल और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय: 0.03
  • विदेश मंत्रालय : 0.1
  • वित्त मंत्रालय : 16.8
  • मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय : 0.06
  • खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय : 0.03
  • स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय : 0.8
  • भारी उद्योग मंत्रालय : 0.06
  • नागर विमानन मंत्रालय : 0.30
  • गृह मंत्रालय : 1.9
  • आवासन और शहरी कार्यमंत्रालय : 0.7 
  • सूचना तथा प्रसारण मंत्रालय : 0.04
  • जल शक्ति मंत्रालय : 0.9 
  • श्रम और रोजगार मंत्रालय : 0.1
  • विधि और न्याय मंत्रालय : 0.04
  • सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय : 0.2
  • खान मंत्रालय : 0.01
  • अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय : 0.03
  • नवीन तथा नवीनीकरणीय मंत्रालय : 0.1
  • पंचायती राज मंत्रालय : 0.01
  • संसदीय कार्य मंत्रालय : 0.0006
  • कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय : 0.02
  • पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय : 0.4
  • योजना मंत्रालय :0.008
  • पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग परिवर्तन मंत्रालय : 0.02
  • विद्युत मंत्रालय : 0.2
  • राष्ट्रपति,सांसद, संघ लोक सेवा आयोग और उप राष्ट्रपति का सचिवालय : 0.01
  • रेल मंत्रालय : 2.4
  • सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय : 2.7
  • ग्रामीण विकास मंत्रालय : 1.5
  • विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय : 0.1
  • कौशल विकास और उद्यमशीलतामंत्रालय : 0.03
  • सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय : 0.1
  • अंतरिक्ष मंत्रालय : 0.1
  • सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वय मंत्रालय : 0.05
  • इस्पात मंत्रालय : 0.0007
  • वस्त्र मंत्रालय : 0.04
  • पर्यटन मंत्रालय : 0.02
  • जनजातीय कार्य मंत्रालय : 0.1
  • महिला और बाल विकास मंत्रालय : 0.2
  • युवा मामले और खेल मंत्रालय : 0.03

Union Budget 2023 (Hindi): जानिए क्या है नया टैक्स स्लैब ?

वर्ष 2023 के बजट में मध्यम वर्गीय लोगो के लिए खुशखबरी है। नए टैक्स स्लैब के अनुसार 7 लाख तक की आय वाले लोगों को नहीं करना होगा इनकम टैक्स भुगतान। नई टैक्स रेजीम का चयन करने वाले उठा सकेंगे इसका फायदा। जिन लोगों की वार्षिक आय 3 लाख रुपए से कम है, उन्हें नहीं करना होगा इनकम टैक्स का भुगतान। जानिए नए टैक्स स्लैब के अनुसार कितनी आय पर कितना टैक्स लगेगा :

  • वार्षिक आय तीन लाख तक : कोई टैक्स नहीं
  • वार्षिक आय 3-6 लाख तक : 5 फीसदी टैक्स
  • वार्षिक आय 6-9 लाख तक : 10 फीसदी टैक्स
  • वार्षिक आय 9-12 लाख तक : 15 फीसदी टैक्स
  • वार्षिक आय 12-15 लाख तक : 20 फीसदी टैक्स
  • वार्षिक आय 15 लाख से अधिक : 30 फीसदी टैक्स

Union Budget 2023 (Hindi): जानिए किसका भाव गिरा और किसकी हुई बढ़ोतरी?

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2023 के इस बजट में  विदेशी आयात पर रोक और स्वदेशी उत्पादन का समर्थन किया है। आइए जाने, भारत के 2023 के इस बजट के अनुसार क्या हुआ सस्ता और क्या हुआ महंगा? इलेक्ट्रिक वाहन, ऑटोमोबाइल, खिलौने और देसी मोबाइल सस्ते होंगे। वहीं, चिमनी, कुछ मोबाइल फोन और कैमरे के लेंस, सिगरेट, सोना, चांदी, प्लैटिनम महंगा होगा।

Read in English: Union Budget 2023: All Info About Union Budget of India That You Want to Know

ये चीज़ें हुईं सस्‍ती

  • खिलौनों पर सीमा शुल्क को घटाकर 13 प्रतिशत कर दिया है, खिलौने की कीमत में कमी आएगी
  • इलेक्ट्रॉनिक वाहनों में उपयोग की जाने वाली बैटरी पर कस्टम ड्यूटी को माफी, इलेक्ट्रॉनिक वाहन होंगे सस्ते
  • मोबाइल फोन में उपयोग होने वाली लिथियम बैटरी पर भी इंपोर्ट ड्यूटी को किया कम
  • टेलीविजन पैनल पर आयात शुल्क कम कर हुआ 2.5 प्रतिशत
  • श्रिम्प फीड, पूंजीगत वस्तु, साइकिल और बायोगैस से जुड़ी चीजें हुई सस्ती
  • इलेक्ट्रिकल सामान भी होगा सस्ता
  • लैब-निर्मित हीरे के सीड्स पर कस्टम ड्यूटी में छूट
  • रबर में भी ड्यूटी कम की गई है
  • ऑटोमोबाइल सस्ते होंगे

Union Budget 2023 (Hindi): विदेशी आयातों पर बढ़ा टैक्स, ये चीज़ें हुईं महंगी

  • चांदी पर कस्टम ड्यूटी बढ़ाई गई है, चांदी होगी महंगी
  • सिगरेट पर राष्ट्रीय आपदा आकस्मिक शुल्क (NCCD) को अब 16 फीसदी तक बढ़ा दिया गया है
  • किचन में उपयोगी चिमनी पर कस्टम ड्यूटी 15 प्रतिशत हुई
  • पूर्णतः आयातित कार और इलेक्ट्रोनिक वाहनों पर भी टैक्स बढ़ा
  • विदेश से आयातित नकली गहनों पर भी कर बढ़ा
  • आयातित कंपाउंडेड रबर पर भी 25 प्रतिशत बेसिक इंपोर्ट ड्यूटी लगेगी
  • मिट्टी के तेल के दामों में भी इजाफा हुआ

Union Budget 2023 (Hindi): स्वदेशी को बढ़ावा देता नया बजट

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने नए बजट में स्वदेशी को काफी बढ़ावा दिया है। 

  • एमएसएमई को क्रेडिट गारंटी के तहत नौ हजार करोड़ रुपये का बजटीय प्रविधान 
  • एमएसएमई से जुड़े लोगों को दो लाख करोड़ रुपये तक प्रत्याभूति मुक्त ऋण
  • केवाईसी प्रक्रिया को सरल करने का प्रस्ताव
  • पैन का उपयोग हो सकेगा सामान्य पहचान पत्र के रूप में 
  • 30 स्किल इंडिया इंटरनेशनल सेंटर खोलना जोकि कुशल कारीगर तैयार करने में सहायक होगा
  • लिथियम बैटरी, देश मे निर्मित मोबाइल फोन और इलेक्ट्रिक वाहनों पर टैक्स कम करने से निवेश बढ़ेगा और स्वदेशी कंपनियां इनके उत्पाद को प्रोत्साहित होंगी, जिससे सीधे तौर पर स्वदेशी के स्वावलंबी भारत अभियान को बल मिलेगा
  • प्राकृतिक खेती, श्री अन्न की योजना, मछली पालन, बागवानी और गोवर्धन से होंगे दूरगामी परिणाम
  • सहकारी व प्राथमिक मत्स्य समितियां और डेरी सहकारिता समितियों में निवेश से छोटे किसान और भूमिहीन किसान की आय वृद्वि होगी
  • टेक के विकास, कौशल विकास केंद्रित तथा डिजिटल युग की आवश्यकताओं पर आम बजट की घोषणाएं नई दिशा देने वाली है। शिक्षा तथा युवाओं को नवाचारों तथा कौशल विकास से संबद्ध करने से लाभ होगा 
  • एकलव्य विद्यालयों से संबंधित बजट प्रावधानों से सुदूर पूर्वोत्तर राज्यों के छात्रों के लिए उत्तम शिक्षा और विकास के द्वार खुलेंगे
  • जीवाश्म ईंधन के इस्तेमाल को कम से कम करने के लिए, हरित विकास के अंतर्गत ‘हरित हाइड्रोजन अभियान’ में सरकार करेगी 19744 करोड़ रूपए का निवेश। कम हो सकेगा पर्यावरण प्रदूषण। 
  • न्यूनतम बजट के मुताबिक 5g को बढ़ावा देने के लिए, देश भर के इंजीनियरिंग कॉलेजों में लगभग 100 रिसर्च लैब खोले जायेंगे जिनमें 5g से संबंधित नई तकनीकों की खोज संभव हो सकेगी। 
  • Digilocker पर जोर देते हुए वित्त मंत्री ने कहा, कि नए बजट के अनुसार digilocker के आधार को मान्यता दी जाएगी। 

Union Budget 2023 (Hindi): जानिए किस वर्ग के लिए क्या है विशेष ?

2023 का यह बजट मोदी सरकार का पांचवा बजट है। वित्त मंत्री और सरकार का कहना है कि यह बजट सभी वर्गो के अनुकूल बनाया गया है। सरकार का कहना है कि इस बजट में सभी के लिए कुछ विशेष है। आइए जानते है किस वर्ग के लिए क्या है सरकार के नए बजट का तोहफा। 

  • विद्यार्थी : नए बजट के अंतर्गत छात्र छात्राओं के लिए नेशनल डिजिटल लाइब्रेरी की स्थापना होगी। साथ ही 157 मेडिकल कॉलेज के साथ 157 नर्सिंग कॉलेज भी खोले जायेंगे।
  • युवा वर्ग : नया बजट युवाओं के लिए खास तोहफा लेकर आया है। नए बजट के अनुसार भारत में 47 लाख युवाओं को बेरोजगारी भत्ता दिया जायेगा। साथ ही ‘यूनिफाइड स्किल इंडिया डिजिटल’  प्रोग्राम के अंतर्गत ही भारतवर्ष के अनेक राज्यों में 30 स्किल इंडिया सेंटर भी खोले जायेंगे। इसके साथ ही प्रधान मंत्री कौशल विकास योजना 4.0 लॉन्च की जाएगी। जिसके अंतर्गत अनेकों युवाओं को ऑन जॉब ट्रैनिंग भी मिल सकेगी। साथ ही एकलव्य स्कूलों में 38 हजार शिक्षकों की भर्ती भी की जाएगी। 
  •  महिला वर्ग : वित्त मंत्री के अनुसार महिलाओं के लिए बचत पत्र योजना लागू की जाएगी। इस योजना में महिलाओं को 2 लाख की बचत पर 7.5 फीसदी ब्याज मिल पाएगा, जिससे वे अधिक बचत कर सकेंगी। 
  • वरिष्ठ नागरिक : अमृत काल के इस बजट में वरिष्ठ नागरिकों के लिए वरिष्ठ नागरिक खाता स्कीम की सीमा बढ़ा दी जायेगी। वरिष्ठ नागरिक खाता स्कीम की सीमा 9 लाख की जाएगी। 
  • किसान : किसान भाइयों के लिए सरकार नई सौगात लेकर आई है। नए बजट के अनुसार कृषि से संबंधित नए उद्योगों को बढ़ावा दिया जायेगा। कृषि – स्टार्ट उप को बढ़ावा देने के  लिए एग्रीकल्चर एक्सीलरेटर फंड बनाए जाएंगे। साथ ही वैकल्पिक उर्वरकों को बढ़ावा देने हेतु  ‘प्रधान मंत्री प्रणाम योजना की शुरुआत की जाएगी। साथ ही गोबर्धन स्कीम के अंतर्गत 500 नए कारखाने खोले जायेंगे। 
  • पर्यटन क्षेत्र : विभिन्न राज्यों को राजधानी में ‘यूनिटी मॉल’ की स्थापना के लिए सहायता की जाएगी। जिससे की एक जिला, एक उत्पाद और साथ ही हस्तकला वस्तुओं को बढ़ावा दिया जायेगा। साथ ही भारत में 50 पर्यटन स्थलों को विकसित किया जायेगा। 
  • सबके सिर पर छत : प्रधान मंत्री आवास योजना के बजट में 66 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई है। नए बजट के अनुसार इस योजना में कुल 79,000 करोड़ रुपए खर्च किए जायेंगे।  

Union Budget 2023 (Hindi): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बजट को सराहा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2023 – 24 के बजट को सराहते हुए कहा, इस बजट में सरकार पहली बार अनेक प्रोत्साहन योजना लेकर आई है। ट्रेनिंग, टेक्नोलॉजी, क्रेडिट, और मार्केट सपोर्ट की व्यवस्था की गई है। ये बजट, सहकारिता को ग्रामीण अर्थव्यवस्था के विकास की धुरी बनाएगा। सरकार ने को-ऑपरेटिव सेक्टर में दुनिया की सबसे बड़ी अन्न भंडारण योजना बनाई है। बजट में नए प्राइमरी को-ऑपरेटिव्स बनाने की एक महत्वकांक्षी योजना का भी ऐलान हुआ है। 

पीएम-विकास से हमारे करोड़ों विश्वकर्माओं के जीवन में बहुत बड़ा बदलाव आएगा। गांव से लेकर शहर तक में रहने वाली हमारी महिलाओं के जीवन स्तर में बदलाव लाने के लिए कई बड़े कदम उठाए गए हैं, उन्हें अब और ताकत के साथ आगे बढ़ाया जाएगा। अमृत काल का पहला बजट विकसित भारत के विराट संकल्प को पूरा करने के लिए एक मजबूत नींव का निर्माण करेगा। ये बजट वंचितों को वरीयता देता है। ये बजट आज के समाज, गांव, गरीब, किसान, मध्यम वर्ग सभी के सपनों को पूरा करेगा।

Union Budget 2023 (Hindi): सतभक्ति से ही संभव हैं अमृत काल  

‘अमृत काल’ का संबंध उस समय से है जब किसी भी प्रकार की बुराई न हो। वह समय जब संपूर्ण मानव समाज मर्यादा में रहकर सत्भक्ति करे। परंतु वर्तमान में सर्व स्थिति अमृत काल के विपरीत है। वर्तमान समय अमृत काल कहलाने योग्य नहीं हैं। आज संपूर्ण मानव समाज किसी न किसी प्रकार की बुराई में लिप्त है। आज अधिकांश मनुष्य विकारी हो चुके है। भ्रष्टाचार, दुराचार, भ्रूण हत्या, दहेज प्रथा के कारण हत्या जैसे अनेकों दुर्व्यवहार आज के मानव समाज में घर कर चुके है। ऐसे में मानव को कैसे हो सकती है सनातन परम धाम की प्राप्ति जहाँ सर्व वस्तु उपलब्ध है और किसी भी प्रकार की धन धान्य की कोई कमी नही है। आइए जानते हैं।

वह कौन सा लोक है, जहाँ धन की कमी नहीं होती?

गीता जी में वर्णित जो सनातन परम धाम है, उसे सतलोक कहते है। सतलोक स्वप्रकाशित लोक है। सतलोक ही वह लोक है, जहा पर किसी भी प्रकार की कोई कमी नही है। जहा पर किसी भी वस्तु का अभाव नहीं है। सतलोक में दूधों की नदी, सोने, हीरे के पहाड़ है। सतलोक अमर लोक है, जहा जाने के बाद प्राणी का मोक्ष हो जाता है। सतलोक के स्वामी परम अक्षर पुरुष कबीर देव जी है। ये वही कबीर जी है, जो आज से लगभग 120 वर्ष पहले काशी में आए थे। यही पूर्ण परमात्मा है। कबीर जी की सतभक्ति, आज विश्व में केवल संत रामपाल जी महाराज जी के पास है। संत रामपाल जी महाराज जी द्वारा दी गई सतभक्ति से मोक्ष तथा सतलोक प्राप्ति संभव है। विलंभ न कीजिए, जल्द से जल्द संत रामपाल जी महाराज जी से नाम दीक्षा लेकर अपना कल्याण कराइए। 

FAQs About Union Budget 2023

प्रश्न: बजट 2023 में क्या सस्ता और क्या महंगा होगा?

उत्तर: 2023 के बजट के अनुसार खिलौने, स्वदेशी साइकिल, ऑटोमोबाइल, प्रयोगशाला में निर्मित हीरे के आभूषण, मोबाइल फोन, स्वदेशी टी वी और स्वदेशी इलेक्ट्रोनिक वाहन सस्ते होंगे,जबकि सोना, चांदी, सिगरेट और आयातित कार महंगे होंगे। 

प्रश्न: 2023 के लिए सरकारी बजट क्या है?

उत्तर: इस वर्ष 2023- 24 के बजट में सरकार का कुल व्यय 45.03 लाख करोड़ भारतीय रुपए और कुल आय 33.61 करोड़ भारतीय रुपए अनुमानित है।

प्रश्न: भारत का कुल खर्च कितना है?

उत्तर: इस वर्ष 2023 के बजट का कुल खर्च 45.03 करोड़ है। 

प्रश्न: 2023 में भारत के वित्त मंत्री कौन है?

उत्तर: भारत के वित्त मंत्री है निर्मला सीतारमण।  

World Cancer Day 2023: Sat-Bhakti Saves From Deadly Diseases Like Cancer Forever

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World Cancer Day 2023 Know the Sure Cure for Cancer

Last Updated on 3 February 2023, 4:04 PM IST: World Cancer Day 2023: Organized on the 4th of February and led by the Union for International Cancer Control (UICC), World Cancer Day is a global initiative aimed at promoting greater awareness of cancer and movement to better prevent, diagnose and treat the disease. Know its significance, History, Theme for this year, along with a cure for it.

World Cancer Day 2023: Key Points

  • World Cancer Day happens to be on 4th February every year. 
  • This day aims at delivering the right information about cancer to most of the people and thus developing awareness. 
  • The first ever World Cancer Day was celebrated in the year 2000 at the World Summit Against Cancer held in Paris. 
  • World Cancer Day was initiated by the Union for International Cancer Control (UICC). 
  • World Cancer Day 2023 theme is ‘Close The Care Gap’. 
  • Cancer is now curable, True Devotion or Sat-Bhakti of the Supreme God Kabir is the treatment of every such life threatening disease. 

What Is World Cancer Day? 

World Cancer Day is an international worldwide event celebrated annually on the 4th of February. It is an initiative led by the Union for International Cancer Control (UICC) for unifying the entire globe in making awareness about the types of cancer, its causes and thus urging everyone to take precautionary measures for preventing it. 

What Is the Theme of World Cancer Day 2023? 

World Cancer Day 2023: This year’s theme on World Cancer Day is ‘Close The Care Gap‘.

World Cancer Day 2023 marks the first year of a new three-year campaign focusing on the issue of equality. The theme of the ‘Close the Care gap’ campaign recognizes the power of knowledge and the challenges of reflection. This first year of the campaign raises awareness about inequality in cancer care and describes the barriers that many people face in getting the help and care they need – and how these barriers can reduce a person’s chances of surviving cancer. 

■ Also Read: Understanding the true cause of Cancer

What Is the History of World Cancer Day? 

World Cancer Day first came into existence in the year 2000 at the World Cancer Summit held in Paris. This day was initiated by UICC observing the rapid rise in the deaths caused by cancer. 

It has been observed that one out of six people died from cancer which is way more than the combination of HIV/AIDS, tuberculosis and malaria. And every year almost 9 million people lose their lives from cancer. Thus arises a need to make people educated about the do’s and don’ts in order to save them from cancer. 

What Is Done on World Cancer Day? 

  • The cancer community will make their voice heard around the world, generate enthusiasm and action, raise awareness of the need to close the gap in cancer care and ensure universal access to life-saving services,
  • Get the #WorldCancerDay and #CloseTheCareGap leading on social media.
  • Full day live content is broadcasted on the World Cancer Day website and World Cancer Day Facebook and YouTube channels that offer an unusual view of community cancer work.
  • Interviews with specialists and people living with cancer taking a closer look at socio-economic factors, such as cultural backgrounds, gender norms, income and education levels, as well as age-based discrimination and discrimination based on gender, sexual orientation, nationality, disability and lifestyle that makes the difference in cancer prevention, incidence and survival.
  • The second edition of the World Cancer Day Solidarity Challenge, which will see thousands of cyclists, runners and other sports celebrities raise awareness about cancer.
  • For those who are still planning a project, plenty of materials are available for download on the World Cancer Day website.

World Cancer Day 2023 Quotes

  • “Cancer can touch you, but not your soul; neither your thoughts nor your heart.” – Vikrmn.
  • “Adopt Sat-Bhakti by Soul. Cancer will run away.” – SatGuru Rampal Ji Maharaj
  • “Love and laughter are two of the most important universal cancer treatments on the planet. Overdose on them.” – Tanya Masse.
  • “Cancer is not the ultimatum. Almighty has the power to win the battle. Follow Sat-Bhakti.” – SatGuru Rampal Ji Maharaj
  • “You know, once you’ve stood up to cancer, everything else feels like a pretty easy fight.” – David H. Koch.
  • “Cancer is tough, but your bhakti is tougher to eliminate it. Take Naam Initiation.” – SatGuru Rampal Ji Maharaj
  • “We have two options, medically and emotionally: give up or fight like hell.” – Lance Armstrong.
  • “Cancer might be scary, but your true devotion is no joke. Take refuge from a SatGuru to bestow Sat-Bhakti.” 
  • “Cancer is a marathon – you can’t look at the finish line. You take it moment by moment, sometimes breath by breath, other times step by step.” -Shared by Sarah Betz Bucciero.

Wide Success of Last Year’s Campaign Follows This Year

This year follows the success of last year’s campaign in the wake of the epidemic, with more than 840 events occurring in 116 countries. Moreover 152 monuments in 91 cities lit up in color orange on World Cancer Day, more than 20,000 news articles published in 156 countries, and about 700,000 social media platforms have been distributed which include high levels from US President Joe Biden, French President Emanuel Macron and British Prime Minister Boris Johnson. More than 110,000 campaign items have been downloaded from the website, with 50,000 custom posters created by visitors.

Cancer Is Now Curable: Sat Bhakti Is the Solution

Spirituality has always had an upper hand over scientific ways. And has been proved a solution in the case of curing cancer, at any stage of identifying its detection. By doing Sat-Bhakti of the Supreme God  Kabir by the recitation of mantras in accordance with Holy Scriptures, one can get relieved from any sort of deadly disease.

Currently, Saint Rampal Ji Maharaj from the holy land of Haryana, India is one and only true representative of Supreme God Kabir present on this planet earth. And, He is giving us the recitation of mantras as per Holy Book (Scriptures)

Along with this He is guaranteeing that Sat Bhakti (the true mantras) which can cure any of your deadly diseases including cancer if a devotee abides by the rules given by Him.

Can Recitation of Mantras Really Cure Cancer? 

World Cancer Day 2023: In a world of such advanced technology, it is very hard for a common man to believe that with just recitation of mantras the problem of cancer can end, which is a headache for mankind. But it is true and has been proven.

So on this World Cancer day, let us adopt Sat Bhakti by taking Naam Diksha (Initiation) from Saint Rampal Ji Maharaj and remove cancer from its roots.

कबीर परमेश्वर निर्वाण दिवस कार्यक्रम हुआ संपन्न, लाखों लोगों ने की शिरकत

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कबीर परमेश्वर निर्वाण दिवस कार्यक्रम हुआ संपन्न, लाखों लोगों ने की शिरकत

Kabir Parmeshwar Nirvana Diwas Update: 505वें कबीर परमेश्वर निर्वाण दिवस के उपलक्ष्य में भारत समेत नेपाल के 9 सतलोक आश्रमों में संत रामपाल जी महाराज के संचालन में तीन दिवसीय कार्यक्रम संपन्न हुआ। जिसमें अखंड पाठ और अखंड भंडारा हुआ। साथ ही सामाजिक कुरीति जैसे दहेज प्रथा के खात्मा के लिए दहेज मुक्त विवाह और सामाजिक सेवा को ध्यान में रखते हुए रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। आइये जानते हैं कबीर परमेश्वर के निर्वाण दिवस पर हुए कार्यक्रमों को विस्तार से।

Table of Contents

Kabir Parmeshwar Nirvana Diwas Update: मुख्य बिंदु

  • 505वें कबीर परमेश्वर निर्वाण दिवस का तीन दिवसीय कार्यक्रम संत रामपाल जी महाराज के सानिध्य में संपन्न हुआ।
  • निर्वाण दिवस कार्यक्रम के दूसरे दिन हुआ दहेज मुक्त विवाह कार्यक्रम का आयोजन।
  • रक्तदान महादान को ध्यान में रखते हुए रक्तदान शिविर लगाया गया जिसमें कई लोगों ने किया रक्तदान
  • अखंड भण्डारे में किया गया पूरे विश्व को आमंत्रित।

Kabir Parmeshwar Nirvana Diwas: सतलोक आश्रम रोहतक में सफल हुआ विशाल भंडारा

कबीर परमेश्वर का 505वां निर्वाण दिवस, हरियाणा के सतलोक आश्रम रोहतक (Satlok Ashram Rohtak) में 30, 31 जनवरी और 1 फरवरी को तीन दिवसीय कार्यक्रम के रूप में मनाया गया। इस अवसर पर तीन दिवसीय संत गरीबदास जी महाराज के सद्ग्रंथ साहिब (अमरग्रंथ) का अखंड पाठ हुआ और तीन दिवसीय धर्म भंडारे का भी आयोजन किया गया जिसमें विश्व के सभी लोगों को आमंत्रित किया गया था। 

साथ ही कबीर साहेब जी के निर्वाण दिवस के उपलक्ष्य पर संत रामपाल जी महाराज के सानिध्य में सामाजिक कुरीति जैसे दहेज प्रथा के खात्मा के लिए कई दहेज मुक्त विवाह-रमैनी (Dowry Free Marriages-Ramaini) भी संपन्न हुईं जिसमें एक रुपये का भी दहेज का लेनदेन नहीं किया गया। इसके अलावा समाज सेवा के मद्देनजर रक्तदान शिविर (Blood Donation Camp) भी लगाया गया, जिसमें कई युनिट रक्तदान किया गया।


कबीर साहेब का 505वां निर्वाण दिवस मनाया गया सतलोक आश्रम भिवानी में

कबीर साहेब जी का निर्वाण दिवस हरियाणा के सतलोक आश्रम भिवानी (Satlok Ashram Bhiwani) में मनाया गया। इस उपलक्ष्य में तीन दिवसीय अखंड पाठ, तीन दिवसीय धर्म भंडारे, सत्संग का आयोजन किया गया जिसमें सभी को आमंत्रित किया गया था। 

इसके अलावा कबीर परमेश्वर के निर्वाण दिवस (Kabir Parmeshwar Nirvana Diwas) के अवसर पर दहेज प्रथा को जड़ से खत्म करने के लिए सैकड़ों दहेज मुक्त विवाह (रमैनी) भी संपन्न हुए और रक्तदान शिविर भी लगाया गया जिसमें कई अनुयायियों ने रक्त दान किया गया। 


देश की राजधानी में स्थित सतलोक आश्रम मुंडका में भंडारे में पहुंचे लाखों आदमी

भारत की राजधानी दिल्ली में स्थित सतलोक आश्रम मुंडका (Satlok Ashram Mundka) में भी तीन दिवसीय कबीर परमेश्वर निर्वाण दिवस कार्यक्रम मनाया गया, जोकि 1 फरवरी को सम्पन्न हुआ। जिसमें दहेज मुक्त विवाह (रमैनी) का भी आयोजन हुआ।


सतलोक आश्रम कुरुक्षेत्र में हुआ भंडारे का सफल आयोजन

30, 31 जनवरी और 1 फरवरी को कबीर परमेश्वर का 505वां निर्वाण दिवस सतलोक आश्रम कुरुक्षेत्र, हरियाणा (Satlok Ashram Kurukshetra, Haryana) में मनाया गया। इस अवसर पर तीन दिवसीय अखंड पाठ, तीन दिवसीय धर्म भंडारे, सत्संग, दहेज मुक्त विवाह (रमैनी), रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। 

संत रामपाल जी महाराज के संचालन में हुए कबीर परमेश्वर के निर्वाण दिवस (Kabir Parmeshwar Nirvana Diwas) के अवसर पर सैकड़ों जोड़ों के दहेज मुक्त विवाह संपन्न हुए और कई युनिट रक्त दान (Blood Donate) किया गया। 


कबीर परमेश्वर निर्वाण दिवस पर सतलोक आश्रम सोजत में लगा जमावड़ा

संत रामपाल जी महाराज के सानिध्य में राजस्थान के पाली जिले में स्थित सतलोक आश्रम सोजत (Satlok Ashram Sojat) में कबीर परमेश्वर के निर्वाण दिवस का तीन दिवसीय कार्यक्रम बड़े ही हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ। इस उपलक्ष्य पर तीन दिन अमरग्रंथ का अखंड पाठ हुआ जिसकी अमर वाणी तीन दिन तक गूँजी। तीन दिन का विशाल धर्म भंडारा हुआ जिसमें विश्व के सभी लोगों को आमंत्रित किया गया था। यहाँ बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ देखने को मिली। 

वहीं सैकड़ो दहेज मुक्त विवाह, कई युनिट रक्तदान भी हुआ। कबीर साहेब जी के 505वें निर्वाण दिवस कार्यक्रम (Kabir Parmeshwar Nirvana Diwas) के अंतिम दिन यानी 01 फरवरी को सत्संग का भी आयोजन हुआ, जिसमें संत रामपाल जी महाराज ने कबीर परमेश्वर की मगहर लीला (Maghar Leela) को विस्तार पूर्वक बताया।


तीन दिवसीय निर्वाण दिवस का हुआ सफल आयोजन सतलोक आश्रम शामली में

सतलोक आश्रम शामली, उत्तरप्रदेश (Satlok Ashram Shamli) में 30, 31 जनवरी व 1 फरवरी को कबीर परमेश्वर का 505वां निर्वाण दिवस (Kabir Parmeshwar Nirvana Diwas) विशाल स्तर पर मनाया गया। इस अवसर पर अखंड पाठ, विशाल भंडारे, सद्ग्रथों से प्रमाणित सत्संग, दहेज मुक्त विवाह, रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। संत रामपाल जी महाराज के संचालन में हुए कबीर साहेब जी के निर्वाण दिवस के अवसर पर सैकड़ों जोड़ों की दहेज मुक्त शादियाँ (रमैनी) संपन्न हुईं और कई अनुयायियों ने रक्त दान भी किया।


सतलोक आश्रम धुरी में हुआ तीन दिवसीय भंडारे का सफल आयोजन

पंजाब के संगरूर जिले के सतलोक आश्रम धुरी (Satlok Ashram Dhuri) में संत रामपाल जी महाराज के सानिध्य में कबीर परमेश्वर का 505वां निर्वाण दिवस कार्यक्रम बड़े ही हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ। इस तीन दिवसीय कार्यक्रम के दौरान अखंड पाठ, अखंड भंडारा, दहेज प्रथा को खत्म करने के लिए दहेज मुक्त विवाह, समाज सेवा के मद्देनजर रक्तदान शिविर का आयोजन हुआ। इस दौरान बड़ी संख्या में लोगों का हुजूम उमड़ा।


सतलोक आश्रम खमाणों में भंडारे में पहुंचे लाखों लोग

कबीर परमेश्वर निर्वाण दिवस के उपलक्ष्य पर तीन दिवसीय कार्यक्रम सतलोक आश्रम खमाणों, पंजाब (Satlok Ashram Khamano, Punjab) में मनाया गया जिसमें तीन दिवसीय अखंड भण्डारे का आयोजन हुआ। इस धर्म भण्डारे में सभी लोगों को सोशल मीडिया के माध्यम से आमंत्रित किया गया था। इस दौरान संत रामपाल जी महाराज के अनुयायियों समेत कई अन्य लोग भी पहुँचे। इस दौरान दहेज मुक्त विवाह (रमैनी) भी सम्पन्न हुए जोकि समाज में एक मिसाल कायम कर रहे है। साथ ही सैकड़ों युनिट रक्तदान भी हुआ।


नेपाल में भी हुआ अद्भूत विशाल तीन दिवसीय भंडारा

भारत से बाहर पड़ोसी देश सतलोक आश्रम धनुषा, नेपाल (Satlok Ashram Dhanusha, Nepal) में भी कबीर साहेब का निर्वाण दिवस मनाया गया। इस दौरान यहाँ भी अखंड पाठ, अखंड भण्डारे, दहेज मुक्त विवाह, रक्तदान शिविर का आयोजन हुआ। 


संत रामपाल जी महाराज की शिक्षा का प्रभाव

505वां कबीर परमेश्वर निर्वाण दिवस संत रामपाल जी महाराज के सानिध्य में 9 सतलोक आश्रमों में उनके अनुयायियों द्वारा मनाया गया जो समाज में चर्चा का विषय बना हुआ है क्योंकि लाखों लोगों के एक स्थान पर रहने, खाने, सोने, रजाइयों आदि की व्यवस्था करना आम बात नहीं है। सन्त रामपाल जी महाराज के सत्संग का प्रभाव ऐसा होता कि समागमों में बड़ी संख्या में लोगों का हुजूम देखने को मिलता है। 

अनेकों सेवादार निष्काम भाव से आश्रमों में सेवा में दिन रात लगे होते हैं जोकि संत रामपाल जी महाराज की दी गई शिक्षा के आधार पर सेवा देते हैं। सन्त रामपाल जी महाराज ने सत्संगों में मनुष्य जीवन के मूल उद्देश्य एवं समाज के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को स्पष्ट किया हैं। उनके सत्संगों से प्रेरित होकर ही उनके अनुयायियों द्वारा रक्तदान, देहदान एवं दहेज मुक्त विवाह के कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं। अधिक जानकारी के लिए Satlok Ashram यूट्यूब चैनल देखें।

Union Budget 2023: All Info About Union Budget of India That You Want to Know

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Union Budget 2023 Learn Everything About the Union Budget

Last Updated on 2 February 2023, 7:25 PM IST: The Union Budget 2023 was announced by the Finance Minister Nirmala Sitharaman on Wednesday, 1st February 2023 and called it ‘beautifully balanced’. As per the Government, the budget is for the poor, middle class people of the society and farmers. Along with this the budget is a strong foundation for building a developed India. PM Modi calls it the first Amrit Kaal Budget. Let us know about it in detail. 

Union Budget 2023 Highlights

  • The budget has introduced changes in custom duties and taxes due to which some items are getting cheaper and some costlier.
  • Targeted Fiscal deficit FY 2024 is 5.9% of GDP.
  • 33% increase in outlay for capital spending to 10 trillion rupees in 2023-24.
  • 790 billion rupees has been allocated in the budget for affordable housing FY 2023-24.
  • Targeted agricultural credit raised to 20 trillion rupees for 2023-24.
  • PM Awas Yojana has been enhanced by 66% to over Rs.79000 crore.
  • Rebate limit of Personal income tax has been increased from 5 lakhs to 7 lakhs per annum.
  • Personal income tax exemption has been increased to 3 lakhs per annum.
  • FY 2023-24, Gross estimated market borrowings are estimated to be 15 lakh crore. 

Budget 2023: Changes in Custom Duties and Taxes

Due to changes in custom duties and taxes, some of the items are getting cheaper while some are getting costlier. The imported items which will get costlier after the announcement of the budget 2023 will be:

  • Cigarettes: taxes hiked by 16%.
  • Kitchen electric chimney: custom duty increased to 15%
  • Imported bicycles and toys
  • Fully imported cars and Electric Vehicles
  • Imitation jewelry
  • Import Compounded rubber: Basic import duty hiked to 25%
  • Silver dore
  • Naphtha

However the items whose custom duty has been slashed by government, thus getting cheaper are mentioned below:

  • Domestically-manufactured TV sets
  • Shrimp feed
  • Fish lipid oil used in manufacturing aquatic feed
  • Seeds for lab-grown diamonds
  • Capital good
  • Machinery for manufacturing lithium ion cells to be used in electric vehicles.

Seven Priorities for ‘first budget in Amrit Kaal’

As per the honorable Finance Minister Nirmala Sitharaman the budget is well balanced and has focused on its seven priorities looking at the needs of the nation. Further she explained that this is the first budget in the post pandemic era and after global slowdown, thus expected to maintain a stable growth. Seven priorities called as ‘Saptrishi’ of the budget are: 

  • Inclusive development
  • Reaching the last mile
  • Infra & investment
  • Unleashing the potential
  • Green growth
  • Youth power
  • Financial sector

“The Indian economy is on the right track, heading to a bright future. Our focus on reforms and sound policies resulting in Jan Bhagidari helped us in trying times, our rising global profile is due to several accomplishments,” FM said.

She added, “It would also be the first normal budget after the Covid pandemic and amid a global slowdown. The priority for Budget 2023 is thus expected to be to maintain a reasonably high but stable growth in the medium term. Alongside, to establish fiscal credibility with a suitable incremental reduction in the fiscal deficit to GDP ratio.”

Budget 2023: Relaxation in Income Tax

Finance Minister Nirmala Sitharaman said that India will lose net tax revenue of Rs. 35000 crore in total from direct and indirect taxes to provide relief to middle income groups.

“Revenue of about Rs. 38,000 crore – Rs. 37,000 crore in direct taxes and Rs. 1,000 crore in indirect taxes – will be forgone while revenue of about Rs. 3,000 crore will be additionally mobilized. Thus, the total revenue forgone is about Rs. 35,000 crore annually,” FM said

  • Further to aid the middle income group the budget has raised the personal income tax rebate from INR 5 lakhs to 7 lakhs per annum. 
  • Exemption limit on personal income tax increased to INR 3 lakhs.
  • Along with this the budget has also revised the tax slabs which are detailed as follows: 
  • Income of Rs 0-3 lakh is nil.
  • Income above Rs 3-6 lakh to be taxed at 5%.
  • Income above Rs 6 lakh to Rs 9 lakh to be taxed at 10%.
  • Income above Rs 12 lakh to Rs 15 lakh to be taxed at 20%.
  • Income above Rs 15 lakh to be taxed at Rs 30%.
  • Highest surcharge rate is also being reduced to 25% resulting in an overall reduction of income tax to 39%.

Budget 2023: Jal Jeevan Mission Boosted

  • Union Budget 2023 allocated a hike of 27% to Jal Jeevan Mission from INR 54,808 crores to INR 69,684 crore this year.
  • Swachh Bharat Mission-Rural also received a hike of 28% from INR 60,000 crore to INR 77,000 crore in this budget 2023.

■ Read in Hindi: Budget: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पेश किया आम बजट, जाने क्या बढ़ा और क्या घटा?

Budget 2023: Allocation of GOBARDhan Scheme

  • GOBARDhan stands for Galvanizing Organic Bio-Agro Resources Dhan which aims at promoting organic resources. 
  • Budget 2023 has allotted Rs. 10,000 crore for it.
  • 500 New ‘waste to wealth’ plants will be established under this scheme which will include:
    • 200 compressed biogas (CBG) plants.
    • 300 community or cluster-based plants.

Budget 2023: Ministry Wise Allocation

Below mentioned is the Ministry wise distribution of the budget FY 2023-24 (in Lakh Crore):

  • Ministry of Defence: 5.94 
  • Ministry of Road Transport & Highways: 2.70
  • Ministry of Railways: 2.40
  • Ministry of Consumer affair, food & Public Distribution: 2.06 
  • Ministry of Home Affairs: 1.96
  • Ministry of Chemical & Fertilizer: 1.78
  • Ministry of Rural development: 1.60
  • Ministry of Agriculture & Farmers welfare: 1.25
  • Ministry of Communication: 1.23
  • Ministry of Education: 1.12
  • Ministry of Health: 0.89

Budget 2023: Other Ministries Budget

  • Ministry of Civil Aviation: Rs. 3113 crore (earlier 9363.70 crore)
  • Information and Broadcasting Ministry: Rs. 4692 crore (earlier 4182 crore)
  • Minority Affairs Ministry: Rs 3097 crore (reduced by 38%)
  • Department of Space: Rs 12,544 crore (slashed by 8%)
  • Ministry of Sports: Rs 3,397.32 crore (highest ever budget)
  • Department of Telecommunications: Rs 97,579.05 crore
  • Postal Projects: Rs 25,814 crore

Budget 2023: Travel & Tourism 

  • A total of 50 destinations will be prepared as a complete package to promote tourism.
  • A dedicated application will be developed to guide tourists about places to visit, food along with virtual and physical connectivity.
  • States will be requested to develop the concept of ‘Unity Mall’ to showcase their products to the visiting tourists.
  • Under the programme of ‘Dekho Desh Apna’ sector specific skilling and entrepreneurship development will be promoted.
  • Infrastructure and amenities of outskirt villages will be promoted under the Vibrant Villages Programme.

Budget 2023: Reaction of Opposition Parties

Various people of opposition parties have different reactions to the Union Budget 2023:

  • Opposition Party Congress President Mallikarjun Kharge said on budget 2023 “big on announcements and short on delivery”
  • Congress Leader Rahul Gandhi said in a tweet ” ‘Mitr Kaal’ Budget has: 
  •   NO vision to create Jobs
  •   NO plan to tackle Mehngai
  •   NO intent to stem Inequality” 
  •  He further said “This Budget proves Govt has NO roadmap to build India’s future.”
  • Congress Leader P. Chidambaram called this budget “callous”.
  • This budget will deprive the poor, said West Bengal Mamta Banerjee.
  • Punjab Chief Minister Bhagwant Mann said that the state of Punjab has been ignored in the Union Budget 2023.
  • Samajwadi Party Chief Akhilesh Yadav has said that this budget has brought ‘nirasha’ rather than ‘asha’.
  • Bahujan Samaj Party leader Mayawati said that this budget will be far better if it is being made for the nation rather than the party itself.
  • Uddhav Thackeray, former chief minister of Maharashtra is not satisfied with the budget and thinks that the central government is taking away state’s resources.

Budget 2023: Estimates

  • The amount of money allocated for a particular ministry or scheme is a Budget estimate.
  • Budget estimates highlight the approach and ambition of the government towards development.
  • Total receipts other than borrowings are Rs. 27.2 lakh crore.
  • Total expenditure is estimated at Rs. 45 lakh crore.
  • The net tax receipts are estimated at Rs. 23.3 lakh crore.
  • Fiscal deficit is estimated to be 5.9 percent of GDP.
  • Net market borrowings from dated securities are estimated to be Rs.11.8 lakh crore.
  • The Gross market borrowings are estimated to be Rs. 15.4 lakh crore.

Other Major Announcements

  • A budget of INR 2.40 lakh crore is given for Railways being the highest ever and 9 times higher than the budget in 2013-14.
  • Rs 9000 crore has been allocated for revamping the credit guarantee scheme for MSME’s which will be applicable from April 1st 2023.
  • Maximum deposit limit for Senior Citizen Saving Scheme is raised to Rs.30 lakhs from 15 lakhs.
  • Rs 15000 crore has been allocated for Pradhan Mantri PVTJ Development Mission for three years under development action plan for scheduled tribes. 
  • Mahila Samman Saving Certificate will be launched which will offer the deposit facility of upto 2 lakhs for a period of 2 years upto March 2025 in the name of women or girl. This scheme will offer an interest rate of 7.5 percent with an option of partial withdrawal.
  • A sum of Rs 19,518 crore has been allotted to metro projects against Rs 19130 crore in the previous budget.
  • Subsidies on Fertilizer and food are Rs 1,75,100 crore (reduced by 22%) and Rs 1,97,350 crore (reduced by 31%) respectively. 
  • Budget has incorporated income tax benefits to startups.
  • 157 nursing colleges will be established along with 157 medical colleges which have already been built since 2014.
  • INR 7000 crore has been allocated for the project of phase 3 of E-courts.
  • The Finance Minister announced that an Agriculture Accelerator Fund will be established for the people of rural areas. The goal is to encourage youth entrepreneurs and agri-startups so as to bring innovative and affordable solutions for the problems faced by farmers.
  • A sum of INR 2200 crore is allocated for Atmanirbhar Clean Plant Programme which will enhance the quality of horticulture crops.
  • Under the PM Matsya Sampada Yojana, a sub scheme will be launched with targeted investment of Rs 6000 crore to uplift and enhance the activities of fishermens, fish vendors and small businesses to expand accordingly.
  • FM also announced that the agriculture credit will also be increased to Rs. 20 lakh crore. 
  • 63,000 Primary Agricultural Credit Societies (PACS) will be computerized by a dedicated investment of INR 2516 crore.
  • To make everyone aware and promote effective use of fertilizers throughout the nation “PM Programme for Restoration, Awareness, Nourishment and Amelioration of Mother Earth” (PM-PRANAM) has been launched.
  • For 5G services based applications, 100 labs will be established to examine scope of opportunities and corresponding business models.
  • Pradhan Mantri Kaushal Vikas Yojana 4.0 shall be launched to enhance the skills of lakhs of youth in the field of robotics, IOT, 3D Printing, drones and soft skills.
  • 30 Skill India International Centres will be established throughout the nation.
  • Ease of doing business has been promoted by reducing 39,000 compliances and decriminalizing 3400 legal provisions.
  • To lower the dependency on fossil fuels annual production of 5 MMT Green Hydrogen Mission to be targeted by 2030.  
  • Budget of INR 35000 crore is allocated for energy security, energy transition and net zero objectives.
  • Budget of INR 20,700 crore is provided for renewable energy grid integration and evacuation from Ladakh.
  • Strict implementation of Amrit Dharohar Scheme is to be done for the next three years to enhance biodiversity, carbon stock and corresponding ecotourism.
  • The budget has allocated the states to continue their 50 year interest free loan for one more year.

Know The Right Way of Living

On declaration of Union Budget 2023 let us know the right way of living to be taken into consideration to attain peace and happiness in one’s life. The right way of living in the present scenario is being given by only Saint Rampal Ji Maharaj from Haryana, India. The way of living given by Him propagates the right way of worship as in the absence of it one cannot attain complete satisfaction. 

It is for us to recognize Him and listen to His spiritual discourses as He is the only Complete Saint and the only one who is extending His hand to save humanity from destruction. For more info order the book ‘Way of Living written by Him. 

Budget 2023: FAQ

Question: Who prepares the budget in India?

Answer: Union Ministry of Finance 

Question: When is the budget prepared?

Answer: Budget making process usually starts in August or September. 

Question: Who presents the Union Budget?

Answer: Union Finance Minister of India 

Question: Who presented the Union Budget 2023?

Answer: Union Finance Minister of India Nirmala Sitharaman will present it in the Parliament.

Question: What are the key documents of the Union Budget?

Answer: There are 14 key documents. These include annual financial statements, demand for grants, Finance Bill etc.

World Cancer Day 2023: सतभक्ति रूपी अचूक दवा है, कैंसर जैसी लाईलाज बीमारी का इलाज

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World Cancer Day in Hindi कैंसर दिवस पर Cancer का अचूक इलाज़

Last Updated on 1 February 2023, 3:28 PM IST: विश्व कैंसर दिवस (World Cancer Day in Hindi): प्रत्येक वर्ष 4 फरवरी के दिन पूरी दुनिया में विश्व कैंसर दिवस मनाया जाता है, इस दिवस को मनाने का मुख्य उद्देश्य है इस लाईलाज बीमारी के प्रति लोगों में अधिक से अधिक जागरूकता लाना। आज हम आप को विश्व कैंसर दिवस (World Cancer Day 2023) पर बताएँगे कि कैसे आप कैंसर जैसी लाइलाज बीमारी से निजात पा सकते है। हम निम्नलिखित बिंदुओं पर आपको जानकारी देंगे।

World Cancer Day 2023 Information (Hindi)

कैंसर (Cancer) का नाम सुनकर लोगों के दिलों दिमाग में एक भयानक डर पैदा हो जाता है, निराशा और मायूसी छा जाती है और रूह कांप जाती है। जब भी किसी को कैंसर की बीमारी का पता चलता है तो उसे लगता है मानो उसका जीवन ही समाप्त हो गया हो। आखिर कैंसर के नाम पर लोगों को इतना डर क्यों लगता है? विश्व कैंसर दिवस (World Cancer Day 2023) पर आप को बताना चाहेंगे कि विश्व स्वास्थ्य संगठन की 2020 की एक रिपोर्ट के मुताबित पूरे विश्व में लगभग 2 करोड़ लोग कैंसर के रोग से जूझ रहे हैं तथा 2040 तक ये आंकड़ा 3 करोड़ तक पहुंच सकता है।

प्रतिवर्ष लगभग 10 लाख लोग कैंसर जैसी असाध्य बीमारी से मर जाते हैं। भगवान ने हमें इतना अच्छा शरीर प्रदान किया है, परंतु उसमें कैंसर जैसी भयावह बीमारी क्यों हो जाती है? तो आइए हम यह जानने का प्रयास करें कि कैंसर क्यों और कैसे होता है? इस लाइलाज बीमारी से कैसे बचा जा सकता है?

World Cancer Day 2023: विश्व कैंसर दिवस 2023 में कब है?

विश्व कैंसर दिवस (World Cancer Day) हर साल 4 फरवरी को लोगो को कैंसर के दुष्परिणामों से चेताने व लोगो को कैंसर के प्रति जागरूक (Awareness About The Dangers Of Cancer) करने के लिए मनाया जाता है। इस वर्ष भी वर्ल्ड कैंसर डे 2023 दिनांक (Date) 4 फरवरी (4th february) को मनाया जाएगा।

World Cancer Day 2023 (Hindi): जानिए कैंसर क्या है?

विश्व कैंसर दिवस (World Cancer Day 2023) पर जानें आखिर क्या होता है कैंसर? जब शरीर में कोशिकाएं असामान्य रूप से विभाजित होकर अनियंत्रित मात्रा में बढ़ने लगती है तथा अन्य ऊतकों पर आक्रमण करती हैं, जिसके बाद ये रक्त और लासिका के माध्यम से शरीर में फैल जाती है। इसी अवस्था को कैंसर कहते हैं। इसे ल्यूकेमिया (विषाणु) के नाम से जाना जाता है। कैंसर अर्थात कर्क रोग होने में जो समय लगता है उस समय को लैटेन्ट पीरियड कहा जाता है।

शरीर में कैंसर कैसे फैलता है?

विशेषज्ञों के अनुसार cancer का मुख्य कारण ट्यूमर है। अब आपको वर्ल्ड कैंसर डे पर बताएंगे कि शरीर में कैंसर कैसे फैलता है? हमारा शरीर विभिन्न कोशिकाओं से मिलकर बना होता है। शरीर में पुरानी कोशिकाएं क्षतिग्रस्त होकर मर जाती हैं इनके स्थान पर नई कोशिकाएं आ जाती है। स्वस्थ शरीर में कोशिकाओं का नियंत्रित विभाजन होता रहता है।

■ यह भी पढ़ें: National Cancer Awareness Day: जानिए कैसे होगा कैंसर का जड़ से खात्मा?

इस व्यवस्थित प्रक्रिया के बिगड़ जाने पर कोशिकाएं अनियंत्रित होकर बढ़ने लगती है। पुरानी कोशिकाएं नहीं मरती और नई कोशिकाएं पैदा होती रहती है जिनकी शरीर को जरूरत नहीं होती। तब ये शरीर के दूसरे हिस्सों को काम करने में बाधा पहुचाती हैं। परिणामस्वरूप कोशिकाएं ऊतक का रूप धारण कर लेती है, कैंसर से प्रभावित कोशिका को नियोप्लाज्मा या ट्यूमर कहा जाता है। यही ट्यूमर घातक होता है जो धीरे-धीरे पूरे शरीर में फैल जाता है, जो आगे चलकर कैंसर का कारण बनता है।

World Cancer Day 2023 in Hindi – कैंसर क्यों होता है?

आइये World Cancer Day 2023 (Hindi) पर अब जानते है कि आखिर कैंसर का कारण क्या है? विशेषज्ञों के अनुसार, आनुवांशिक कारणों से कैंसर केवल 5%-10% ही होता है। शोधकर्ताओं के अनुसार निम्न कारणों से कैंसर हो सकता है:

  • 70% से अधिक रोगियों के कैंसर होने का कारण उनकी खराब जीवन शैली है।
  • अधिकांश लोगों को मानसिक तनाव
  • शारीरिक व्यायाम की कमी
  • प्रदूषण
  • संक्रमण, विकिरण
  • पौष्टिक आहार की कमी
  • धूम्रपान, तंबाखू, गुटका एवं अन्य नशीले पदार्थों का सेवन और मोटापा इत्यादि के कारण
  • किसी अन्य बीमारी के लिए ली जाने वाली दवाई के दुष्परिणाम के कारण

World Cancer Day 2023 [Hindi]: कैंसर के लक्षण क्या हैं?

अब आप को वर्ल्ड कैंसर डे पर बताते हैं कि कैंसर के लक्षण क्या है? शोधकर्ता बताते है कि कैंसर होने के पहले बहुत से लक्षण प्रकट होते हैं, लेकिन हम उन्हे नजर अंदाज कर देते हैं। कुछ संभावित लक्षणों में:

  1. असामान्य रक्तस्राव
  2. आंतों में रुकावट
  3. भूख में कमी
  4. वजन में अत्यधिक कमी
  5. निमोनिया
  6. अत्यधिक थकान और आलस्य
  7. त्वचा में परिवर्तन
  8. किसी तरह की गांठ का अनियंत्रित बढ़ना
  9. लंबे समय गले में खराश का होना और लंबे समय तक खांसी इत्यादि हैं

इन लक्षणों के पता चलने पर भी रोगी सामान्य बीमारी समझकर इलाज कराता रहता है। इस कारण प्रारम्भिक अवस्था में कैंसर का न तो पता चलता है और न ही इलाज हो पाता है। देरी होने से यह बीमारी भयावह रूप धारण कर लेती है और उस अवस्था में इसका उपचार करना मुश्किल हो जाता है। रक्त जाँच, एक्स-रे, सी.टी. स्कैन, एण्डोस्कोपी तथा बायोप्सी प्रमुख चिकित्सीय परीक्षणों से कैंसर की जांच संभव हैं।

World Cancer Day 2023 Theme | विश्व कैंसर दिवस 2023 की थीम क्या है?

कैंसर अर्थात कर्क रोग के प्रति जागरूकता लाने और चिकित्सा अनुसंधान में तेजी लाने के लिए “यूनियन फॉर इंटरनेशनल कैंसर कंट्रोल” द्वारा स्विट्ज़रलैंड में 1993 में “विश्व कैंसर दिवस (World Cancer Day)” मनाने का निर्णय लिया गया। अब विश्व भर में प्रत्येक वर्ष 4 फरवरी को यह जागरूकता अभियान चलाया जाता है। इसके अतिरिक्त भारतवर्ष में 7 नवंबर को राष्ट्रीय स्तर पर “कैंसर जागरूकता दिवस” भी मनाया आता है। वैश्विक स्तर पर जागरूकता फैलाने के लिए कार्यरत संस्था यूनियन फॉर इंटरनेशनल कैंसर कंट्रोल (यूआईसीसी) द्वारा वर्ष 2023 में विश्व कैंसर दिवस की थीम “क्लोज द केयर गैप (Close The Care Gap)” रखी गई है इसका अर्थ है कि कर्क रोग अर्थात कैंसर से पीड़ित मरीजों की पहचान कर उनकी देखभाल में होने वाली बाधाओं को कम करना। UICC द्वारा दी थीम 3 वर्षो के लिए जारी कैम्पेन के तहत रखी रखी गयी है जो कि 2022, 2023 एवं 2024 तक चलेगी।

World Cancer Day 2023 Quotes in Hindi

  • शास्त्रों में इस बात का स्पष्ट उल्लेख है कि पूर्ण परमात्मा कविर्देव जी सत्यसाधना करने वाले साधक के असाध्य से भी असाध्य रोगों को तत्क्षण स्माप्त कर देते हैं- संत रामपाल जी महाराज
  • शास्त्रानुकूल साधना से ही रोग मुक्त व सुखमय जीवन सम्भव है – जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज
  • तम्बाकू से नाता तोड़ो, स्वस्थ जीवन से नाता जोड़ो
  • यह बीमारी नहीं महामारी है, कैंसर दुनिया पर भारी है।
  • सिगरेट का धुंआ तुझे राख कर रहा है, छोड़ इसे क्यों जिंदगी को खाक बना रहा है।

विज्ञान की क्षमता सीमित है, आध्यात्मिकता की क्षमता असीमित है

एक ओर जहां विज्ञान की सीमा समाप्त होती है और मानव असहाय महसूस करता है, वहीं आध्यात्मिकता में असीमित शक्ति है और हर समस्या का समाधान है। हमें सिर्फ इतना जानना जरूरी है कि हमने मनुष्य जीवन में जन्म लिया है तो हमारा क्या उद्देश्य है। इस जन्म में प्राप्त होने वाले सुख दुख पिछले जन्मों के प्रारब्ध के कारण से होते हैं।

■ Read in English: World Cancer Day: What is the best way to cure cancer?

संचित पाप पुण्य कर्मों के अनुसार मनुष्य कैंसर जैसी बीमारी से पीड़ित होता है। पूर्ण गुरु से उपदेश लेकर उनके नियम मर्यादा में रहकर भक्ति करने वाले साधक के घोर से भी घोर पाप कर्म नष्ट हो जाते हैं और उसे भगवान रोग मुक्त कर देते हैं।

तत्वदर्शी संत से सतभक्ति समझने और सतनाम दीक्षा लेने से पिछले कर्म काटे जा सकते हैं :-

कबीर, जबही सतनाम हृदय धरो, भयो पाप को नाश।

जैसे चिंगारी अग्नि की, पड़ी पुराने घास॥

वर्तमान में पाप नाश कराने वाले तत्वदर्शी संत कौन हैं?

तत्वदर्शी सन्त वह होता है जो वेदों के सांकेतिक शब्दों को पूर्ण विस्तार से वर्णन करता है जिससे पूर्ण परमात्मा की प्राप्ति होती है। वह वेद के जानने वाला कहा जाता है ।

सतगुरु के लक्षण कहु, मधुरे बैन विनोद।

चार वेद, छठ शास्त्र, कहे अठारह बोध।|

वर्तमान में जगतगुरु रामपाल जी महाराज जी ही एकमात्र पूर्ण तत्वदर्शी संत हैं जो सभी शास्त्रों से प्रमाणित ज्ञान देकर सत भक्ति साधना बताते हैं। आज लाखों लोग तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज जी के तत्वज्ञान को सुनकर, समझ कर उनके बताए अनुसार शास्त्र अनुकूल भक्ति साधना कर समस्त प्रकार के दुखों से छुटकारा पा रहे हैं तथा सुखमय जीवन जी रहे हैं।

World Cancer Day in Hindi: आइए जानते हैं कुछ भक्तों के अनुभव 

  • नाम – श्रीमती रूपाली पाटिल , निवासी पूना , महाराष्ट्र
  • रोग :- सरवाईकल कैंसर
  • इलाज :- पूना में

डाक्टरों की राय :- सरवाईकल कैंसर और टीबी और 2 अन्य बीमारियों का परीक्षण

संत रामपाल जी महाराज से सत भक्ति :- हम देवी देवताओं की भक्ति कर रहे थे। मेरे पति ने संत रामपाल जी महाराज से नाम दान लिया। उनके नियम मर्यादाएं पढ़कर मुझे अच्छा लगा। खासतौर पर मद्यपान निषेध वाले नियम ने मुझे बहुत प्रभावित किया। मेरे पति ने शराब पीना छोड़ दिया। मैंने भी सन 2004 में संत रामपाल जी महाराज से नाम दीक्षा ले ली। मुझे एक बार मेडिकल परीक्षण से पता चला कि मुझे सरवाईकल कैंसर और टीबी है। मैंने अंतरात्मा से गुरु जी से प्रार्थना लगाई कि मुझे जीवन दान दे दो। 

गुरुजी का संदेश आया कि आपको कुछ नहीं होगा। शाम को रिपोर्ट आई उसमे सिर्फ वाइरल बुखार निकला। चूंकि मेरे परिवार में कई लोगों को कैंसर हुआ था, मुझे आनुवांशिक कैंसर होने की प्रबल संभावना थी। दूसरा मेरी जन्म कुंडली में भी था कि 40 वर्ष की आयु में मुझे खतरनाक बीमारी होगी और मेरी आयु छोटी होगी। लेकिन संत रामपाल जी महाराज की शरण में आने के कारण सब कुछ छोटे में निपट गया।

सत भक्ति का परिणाम :- जो डॉक्टर पहले कैंसर होने की पक्की बात कर रहे थे, वही डॉक्टर सिर्फ वाइरल बुखार ही बता रहे हैं, यह संत रामपाल जी की भक्ति का कमाल।

  • नाम- श्रीमती रंजना कश्यप
  • जिला- मंडी,हिमाचल प्रदेश।
  • रोग :- कैंसर की गांठ
  • इलाज :- मंडी अस्पताल

डाक्टरों की राय:- 6 माह का जीवन शेष है, आजीवन दवा खाने की सलाह

संत रामपाल जी महाराज से सत भक्ति :- नाम उपदेश 3/6/2012। नाम उपदेश लेने से पहले सभी देवी देवताओं की भक्ति करते थे जैसे कि मंदिरों में जाते थे, और व्रत भी करते थे और बहुत दुखी भी थे उनकी भक्ति करते करते हुए भी और इन पूजाओं से हमें कोई लाभ नहीं मिला। मैं बहुत दुखी थी मेरे घर में सारे बच्चे बीमार रहते थे और पति बीमार रहता था। मैं खुद भी बीमार रहती थी बहुत ज्यादा। मेरे को कैंसर की गांठ थे। और मेरे को हॉस्पिटल में बताया था कि 6 महीने से ज्यादा नहीं जी पाएगी। और मेरे को लगातार दवाई खाने को दे दिए थे। दर्द की दवाई खाने के लिए दी। मेरे खून भी कम होता था उसकी भी दवाई खाने को दिए थे। साथ ही हिदायत दी दवाई लगातार खानी पड़ेगी आपको, जब तक जिंदा है।

जब मंडी हॉस्पिटल में मेरे को कैंसर बताया और मैं घर में आई, सब जोर जोर से रोने लगे और मैं रात को रोते रोते सो गई। रात को मेरे सपने में संत रामपाल जी महाराज जी आए और उन्होंने मेरे को कहा कि बेटा आप नाम उपदेश ले लो आप ठीक हो जाएंगे और मैं सुबह ही नाम उपदेश लेने के लिए तैयार हो गई। संत रामपाल जी महाराज जी से जुड़ने के लिया मैंने बरवाला आश्रम में नाम उपदेश लिया और गुरु जी से कहा कि कैंसर की गांठ बताई हुई है डॉक्टर ने, तो संत रामपाल जी महाराज जी मेरे को बोले कि बेटा आप भक्ति करो और मर्यादा में रहकर भक्ति करो आप ठीक हो जाएंगी। और मैं जब घर आई तो गुरु जी मेरे सपने में आए 4:00 बजे सुबह मैं सोई हुई थी तो गुरु जी ने एक ढक्कन चरणामृत पिलाया, और उसके बाद मेरे को उन गांठों में कभी दर्द नहीं हुआ। संत रामपाल जी महाराज कोई आम इंसान नहीं है वह परमात्मा हैं।

सतभक्ति का परिणाम :- सत भक्ति से, संत रामपाल जी महाराज जी के चरणामृत पीने मात्र से ही कैंसर जैसी बीमारी ठीक हो गई।

संत रामपाल जी से जल्द से जल्द ले नाम दीक्षा

कैंसर जैसी लाइलाज नाना बीमारियों से पीड़ित हजारों लोग हैं जो संत रामपाल जी महाराज जी से शास्त्र अनुकूल भक्ति साधना लेकर भक्ति करने से ठीक हो गए हैं। आप भी सतभक्ति और नामदान दीक्षा उपदेश लेकर पाप मुक्त होकर स्वस्थ सुखी जीवन जियें और अंतिम सांस तक सत भक्ति करके मोक्ष प्राप्त करें।

आध्यात्मिक जानकारी के लिए आप संत रामपाल जी महाराज जी के मंगलमय प्रवचन सुनिए साधना चैनल पर प्रतिदिन 7:30-8.30 बजे। संत रामपाल जी महाराज जी इस विश्व में एकमात्र पूर्ण संत हैं। आप सभी से विनम्र निवेदन है अविलंब संत रामपाल जी महाराज जी से नि:शुल्क नाम दीक्षा लें और अपना जीवन सफल बनाएं। अधिक जानकारी के लिए आप आज ही Sant Rampal Ji Maharaj App डाऊनलोड करें।

FAQ About World Cancer Day 2023 [Hindi]

Q. विश्व कैंसर दिवस किस कब (World Cancer Day Date) मनाया जाता है?

Ans. विश्व कैंसर दिवस प्रत्येक वर्ष 4 फरवरी के दिन मनाया जाता है।

Q. क्या कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी से पूर्ण छुटकारा सम्भव है?

Ans. हां जी, कैंसर जैसी सर्व असाध्य बीमारियों से पूर्ण छुटकारा सिर्फ पूर्ण संत रामपाल जी महाराज जी के द्वारा दी हुई सतभक्ति से ही सम्भव है।

Q. प्रतिवर्ष विश्व कैंसर दिवस मनाने का उद्देश्य क्या है?

Ans. लोगों में कैंसर के प्रति जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से विश्व कैंसर दिवस मनाया जाता है।

Q. कैंसर दिवस कैसे मनाया जाता है?

Ans. सरकारी तथा गैर-सरकारी संगठनों में जागरूकता कार्यक्रम, रैली, भाषण, सेमिनार आदि के माध्यम से प्रतिवर्ष विश्व कैंसर दिवस मनाया जाता है।

Q. पहली बार विश्व कैंसर दिवस कब मनाया गया था?

Ans. साल 1993 में पहली बार कैंसर दिवस मनाया गया था।

Q. पहली बार विश्व कैंसर दिवस कहाँ पर मनाया गया था?

Ans. जिनेवा, स्विजरलैंड में।

Revisiting Kalpana Chawla’s Life, First Indian Woman into Space

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Kalpana ChawlaFirst Indian woman to go into spaceDeath Reason

Last Updated on 30 January 2023, 4:30 PM IST: Kalpana Chawla died on February 1 in 2003 when the space shuttle Columbia was destroyed. The spacecraft broke apart as it re-entered Earth’s atmosphere, killing all seven astronauts on board. Despite the fact that she never returned to Earth, her legacy has endured. In this article, we will briefly describe her life story, which will inspire not only young people but also women who want to pursue their dreams. Her dedication and hard work enabled her to realize her ambitions. Let’s Check it out!

Revisiting Kalpana Chawla’s Life: Highlights

  • On February 1, 2003 the space shuttle Columbia was destroyed along with its seven crew members.
  • Indian Origin Woman Astronaut Kalpana Chawla died while the spacecraft broke apart as it re-entered Earth’s atmosphere, killing all seven astronauts on board.
  • Kalpana Chawla was the first woman astronaut of Indian origin to travel into the Space.
  • Chawla was chosen by NASA to work along with them in the year 1994.
  • Chawla was the part of NASA missions STS-87 and STS-107

Kalpana Chawla: Personal Information

Her Nickname was Montu. She was Born on 17 March 1962. She was born in Karnal, India. She died on 1 February 2003 in a Space Shuttle Columbia over Texas, U.S. Banarasi Lal Chawla and Sanjyothi Chawla were her parents. She had 4 siblings and she was the youngest of four children. She completed her BE from Punjab Engineering College, her MS from University of Texas at Arlington, and her PhD from University of Colorado at Boulder. 

Achievements of Kalpana Chawla

She received the Congressional Space Medal of Honor, The NASA Space Flight Medal, and The NASA Distinguished Service Medal. She was Selected by NASA in December 1994. She was a part of  Missions STS-87 and STS-107.

Career of Kalpana Chawla

She went to Karnal’s Tagore Baal Niketan Senior Secondary School. Punjab Engineering College in India awarded her a Bachelor of Engineering degree in Aeronautical Engineering. She moved to the United States in the 1980s and graduated from the University of Texas at Arlington with a Master of Science in Aerospace Engineering. 

She began working in the field of powered-lift computational fluid dynamics at NASA Ames Research Center in 1988. She focused her research on simulating complex airflows around aircraft, such as the Harrier in “ground-effect” mode.

In 1993, Kalpana Chawla became Vice President and Research Scientist at Overset Methods Inc. in Los Altos, California, to form a team with other researchers specializing in the simulation of moving multiple body problems. Her job was to create and implement efficient aerodynamic optimization techniques. The outcomes of her project work have been published in technical conference papers and journals.

Kalpana Chawla at NASA

She was chosen by NASA in December 1994. In March 1995, she reported to the Johnson Space Center as a candidate for the 15th Group of Astronauts.

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She became a crew representative for the Astronaut Office EVA/Robotics and Computer Branches after completing a year of training. She tested software for the space shuttles and worked with Robotic Situational Awareness Displays.

Space Missions of Kalpana Chawla

Kalpana Chawla’s first trip into space was aboard the space shuttle Columbia on flight STS-87 in November 1997. The shuttle completed 252 orbits of the Earth in just over two weeks. Several experiments and observation tools were carried out on the trip, including a Spartan Satellite, which Chawla launched from the shuttle.

Because of software errors, the satellite that studied the sun’s outer layer failed, and the other two astronauts had to perform a spacewalk to recover it from the shuttle.

Kalpana Chawla Legacy

The Columbia incident was investigated and reported in order to better understand what happened. Also, how to avoid a repeat of the tragedy in future spaceflights, the Columbia Accident Investigation Board, for example, was established in 2003. 

Credit: PIB India

The University of Texas at Arlington College of Engineering dedicated a Kalpana Chawla memorial in 2010. In October 2020, a commercial cargo spacecraft named Kalpana Chawla was launched to the International Space Station. The S.S. Kalpana Chawla was the name given to Northrop Grumman’s Cygnus capsule.

Documentaries on Columbia Crew

“Astronaut Diaries: Remembering the Columbia Shuttle Crew” (2005) and “Space Shuttle Columbia: Mission of Hope” (2006) are two documentaries about the Columbia crew (2013).

What is the Ultimate Life Mission?

The ultimate life mission of every living soul including all the animals, insects, birds, humans, and other creatures is to attain complete salvation. Complete Salvation is riddance from the vicious circle of birth and death, which can only be attained in a Human life. 

How to Get a Ticket to the Space Shuttle to Satlok?

In our precious Human life, we need to take the refuge of an enlightened spiritual teacher who knows the true spiritual knowledge that can make us free from the clutches of death. Presently, Saint Rampal Ji Maharaj is the only one who is enlightened with complete spiritual knowledge that can help us attain complete salvation. By taking naam initiation (Naam Diksha) from Sant Rampal Ji Maharaj and by performing Sat-Bhakti as told by Him until our last breath can ensure our ticket to the Space Shuttle to Satlok. ‘Satlok’ is the eternal abode where there is no birth and death. 

FAQs about Kalpana Chawla

Who was the first Indian woman to fly in space with NASA?

Kalpana Chawla 

How many NASA awards Kalpana Chawla won?

Kalpana Chawla won three Nasa Awards. Congressional Space Medal of Honor, NASA Space Flight Medal and the NASA Distinguished Service Medal.

How many days did Kalpana Chawla live in space?

Kalpana Chawla went on mission STS-87 in 1997 and STS-107 in 2003 and has lived 30 days, 14 hours, and 54 minutes in space.

How did Kalpana Chawla die?

Kalpana Chawla died on February 1 in 2003 when the space shuttle Columbia was destroyed. The spacecraft broke apart as it re-entered Earth’s atmosphere, killing all seven astronauts on board. Despite the fact that she never returned to Earth, her legacy has endured. 

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