Bihar Thunderstorm Today News: क्या है वज्रपात से बचने के उपाय?

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Bihar Thunderstorm Today News Hindi: बिहार में कोविड-19 के बाद वज्रपात (आकाशीय बिजली गिरने) के कारण बहुत दुःखद संकट का सामना करना पड़ रहा है । लगातार हो रही प्राकृतिक आपदाओं से लोग हैरान हैं। कभी कोरोना तो कभी तूफान, और अब बिजली। मृतकों के परिवार शोकाकुल हैं। लोगों के मन में सवाल पर सवाल उठ रहे हैं कि इसका कारण क्या है? आज हम विश्लेषण करेंगे कि ये सब आपदाएं क्यों आ रही हैं?

Bihar Thunderstorm: मुख्य बिंदु

  • बिहार में बरसती आसमानी मौत ने निगले 100 से अधिक जीवन।
  • उत्तरप्रदेश, झारखंड और पश्चिम बंगाल से भी आये मौत के आंकड़े।
  • राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने ट्वीट के माध्यम से व्यक्त की संवेदना।
  • बिहार राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा मृतकों के परिवारों को 4 लाख रुपये मुआवजे की घोषणा।
  • मौसम विभाग ने अगले 72 घण्टों के लिए तेज बारिश की संभावना जताई। 18 जिलों में हाई अलर्ट।
  • बिजली गिरने पर रखी जाने वाली सावधानियों पर एक नज़र।
  • प्राकृतिक आपदाओं में होने वाली जनहानि के कारण और बचने के उपायों पर विवेचन।

Bihar Thunderstorm Hindi News-बिहार में वज्रपात (बिजली) का कहर

Bihar Thunderstorm Today News Hindi: बिहार में इस भयानक वज्रपात का कहर सब पर भारी पड़ा है। क्योंकि 24 घंटो में ही इसने भारी तबाही मचा डाली है । देखा जाए तो बिहार के कुछ जिले है जिनमें लोगों ने इस वज्रपात का सामना किया है। गोपालगंज, पूर्वी चंपारण, सीवान , मधुबनी, पश्चिमी चंपारण, खगड़िया में वज्रपात गिरा जिससे बहुत लोगों की जाने चली गई हैं, संख्या में लगभग 90 लोग बताए गए है । बहुत से लोग घायल भी हुए हैं । सरकार ने मृत लोगों के परिजनों को मुआवजा देने की घोषणा भी की है।

बिहार में आकाशीय बिजली से मौत का कहर

गोपालगंज से सबसे अधिक लोगों की मौत की खबर है। बहुत से लोग इस कहर से झुलस गए हैं । उधर गोपालगंज के जिलाधिकारी ने लोगों को कहा कि अपने घरों में ही रहें और बाहर न निकलें। साथ में बताया कि बारिश से बचने के लिए कोई भी व्यक्ति वृक्षों के नीचे सहारा न ले क्योंकि बिजली गिरने की सबसे ज्यादा सम्भावना पेड़ों पर ही होती है।

Bihar Thunderstorm Today News Hindi: सीवान,मधुबनी भागलपुर,नवादा, पूर्णिया, समस्तीपुर, पूर्वी चंपारण, बांका, सुपौल, कैमूर, बक्सर, किशनगंज, जहानाबाद, शिवहर, सारण, सीतामढ़ी और मधेपुरा से मौत के आंकड़े सामने आए हैं। वहीं जो लोग घायल हुए हैं उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। मधुबनी में हुई मौतों में 4 लोग एक ही परिवार के सदस्य थे, यह खबर सुनते ही परिवार पर दुख का कहर टूट पड़ा है।

यह भी बताया जा रहा है कि मधुबनी के फुलपरास थाना में भी 5 लोगों की मौत हुई है। इसकी चपेट में जो भी आया वह मृत्यु को प्राप्त हो गया है। बिजली गिरने की वजह से भागलपुर के कुछ गाँव जैसे नारायणपुर, मिल्की, अकबरनगर, सुल्तानगंज और परबत्ता से भी मौत का आंकड़ा सामने आया है।

उत्तर प्रदेश, झारखंड और पश्चिम बंगाल में भी टूटा मौत का कहर

केवल बिहार ही नहीं बल्कि उत्तरप्रदेश, झारखंड और पश्चिम बंगाल में भी वज्रपात से मौतें हुई हैं। उत्तरप्रदेश में देवरिया, प्रयागराज, बाराबंकी, कुशीनगर, उन्नाव, बलरामपुर, फतेहपुर से कुल 24 लोगों की जानें गई है। झारखंड में पलामू और गढ़वा जिले से 8 और पश्चिम बंगाल में 3 लोगों की मौत के आंकड़े सामने आये हैं। प्रधानमंत्री ने चारों राज्यों पर आयी इस आपदा से हुई मौतों पर गहरा शोक व्यक्त किया है।

क्या होता है वज्रपात?

आकाश में बादलों के बीच टक्कर से विद्युत्स्थैतिक आवेश (electrostatic charge ) उत्पन्न होता है। बिजली की तेज आवाज़ के साथ उसका प्रकाश हमें दिखाई देता है। यह बिजली किसी न किसी माध्यम से पृथ्वी की ओर आती है। यह प्रक्रिया कुछ ही क्षणों की होती है लेकिन इसका विद्युत प्रवाह (current ) इतना अधिक होता है जो किसी की भी जान लेने के लिए पर्याप्त है। इसके गिरने से कई पशु पक्षी भी मारे जाते हैं। इसमें बहुत सावधानियां भी रखनी पड़ती हैं।

Bihar Thunderstorm Today News Hindi: आकाशीय बिजली अधिकतर वर्षा के दिनों में गिरती है। इसकी चपेट में वे लोग आते हैं जो खुले आसमान के नीचे, हरे पेड़ के नीचे, पानी के निकट होते हैं या फिर बिजली और मोबाइल के टॉवर के नजदीक होते हैं। वर्षा होते समय कभी भी लोगों को पानी के पास नहीं जाना चाहिए और पेड़ और मोबाइल के टॉवर के नीचे खड़े नहीं होना चाहिए क्योंकि इन पर बिजली गिरने की ज्यादा संभावना रहती है।

क्यों हुआ वज्रपात?

मौसम विभाग ने अगले 72 घण्टों के लिए कई जिलों में हाई अलर्ट घोषित किया है जिनमें पूर्णिया, पूर्वी व पश्चिमी चंपारण, सीतामढ़ी, सहरसा, मधेपुरा, गोपालगंज, सुपौल, भागलपुर, बांका, मुंगेर, खगड़िया और जमुई शामिल हैं। मध्यप्रदेश और उत्तरी छत्तीसगढ़ में चक्रवाती हवा का दबाव क्षेत्र बना है जो क्रमशः बिहार और उत्तरप्रदेश के तराई इलाकों की ओर बढ़ रहा है। जिस कारण बिहार में भारी बारिश की आशंका जताई जा रही है। मौसम विभाग के अनुसार बिहार के लोगों को 3 दिन बिल्कुल सतर्क (alert) रहना होगा क्योंकि आगामी तीन दिनों में बहुत तेज वर्षा हो सकती है।

मुख्यमंत्री द्वारा मुआवजे की घोषणा

राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने ट्वीट के माध्यम से बिहार में हुई मौतों पर शोक व्यक्त किया है। सरकार की तरफ से भी इस आपदा में झुलसे लोगों की मदद की जा रही है । लेकिन मौत के कहर ने लोगों के दिल और दिमाग को हिला दिया है । उनको डर बैठ गया है कि अब बिजली कुछ ज्यादा प्रबल न हो जाये। बिहार राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की ओर से शोकाकुल परिवारों को चार चार लाख रुपये के मुआवजे की घोषणा की गई है।

Bihar Thunderstorm Today News Hindi: मुख्यमंत्री ने लोगों से सतर्कता बरतने की अपील करते हुए मौसम विभाग की चेतावनियों पर नज़र रखने के लिए कहा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने लोगों से कहा है कि इस वज्रपात के संकट से बचने के लिए सावधानी रखना जरूरी है। मौसम विभाग ने यह भी बताया कि 3 दिन तक वज्रपात की आशंका के कारण लोग अपने घरों में ही रहें। लोगों को साथ मिलकर इस आपदा के संकट से बाहर निकलना होगा और सबको सावधानियों को ध्यान में रख कर कार्य करना होगा ।

राष्ट्रपति जी भी हुए दुःखी

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भी यूपी और बिहार की घटना पर दुख जताया है। उन्होंने कहा कि आंधी-बारिश और बिजली गिरने से जानमाल की हानि की खबर से दुखी हूं। प्रशासन राहत व बचाव कार्य कर रहा है। प्रभावित परिवारों को मेरी तरफ से संवेदना। सभी इस संकट से बचने के लिए सावधानी रखें । अपने घरों में ही रहे, वर्षा के समय बाहर न निकले।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रकट की संवेदना

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिहार में आंधी-तूफान और बिजली गिरने की वजह से हुई मौतों पर ट्विटर माध्यम से संवेदना व्यक्त की है। दुःखी हुए मोदी बोले कि आपदा पर आपदा आ रही है, इस संकट से बचने के लिए सबको मिल कर साथ देना होगा । उन्होंने कहा, बिहार और उत्तर प्रदेश के कुछ जिलों में भारी बारिश और आकाशीय बिजली गिरने से कई लोगों की मौत का समाचार मिलने से बहुत दुःख हुआ है। राज्य सरकारें तत्परता के साथ राहत कार्यों में जुटी हैं। इस आपदा में जिन लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है, उनके परिजनों के प्रति मैं अपनी संवेदना प्रकट करता हूं।

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी जताया दुख

Bihar Thunderstorm Today News Hindi: राहुल गांधी ने बृहस्पतिवार को बिहार के कुछ इलाकों में बिजली गिरने से कई लोगों की मौत होने पर दुख जताया। उन्होंने ट्वीट करके कहा कि बिहार में जिन लोगों की मौतें हुई हैं, उनके परिवारों की सभी कांग्रेस कार्यकर्ताओं को हर संभव मदद करनी है। भगवान उनके परिवारों को दुःख सहने की शक्ति प्रदान करें। इस घटना को सुन कर मुझे बहुत दुख है।

वज्रपात के इतिहास की सबसे खतरनाक घटना

यह घटना पहले की घटनाओं की याद दिलाती है कि बिजली का आवेश कितना निर्दयी होता है जो सबकुछ समाप्त कर देता है। यह कैसा खेल है प्रकृति का जिससे लोगों की रूह तक कांप जाती है.

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1807 में 26 जून को यूरोपियन देश लग्जम्बर्ग में गन पाउडर बनाने वाली फैक्ट्री में बिजली गिरी थी। इस घटना में 300 से ज्यादा लोगों की जान गई थी। इसे इतिहास की सबसे भयावह बिजली गिरने की घटना माना जाता है।

आइए जानते है आकाशीय बिजली के कुछ तथ्य

पृथ्वी पर हर दिन करीब 80 से 90 लाख बार बिजली गिरती है। बिजली गिरने पर तुरंत तापमान 27760 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। एक सामान्य बिजली में 10 करोड़ वोल्ट की बिजली पैदा होती है। लंबाई में मापा जाए तो ये 8 किलोमीटर तक होती है। तो इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि जो भी इसकी चपेट में आया उसका बचना संभव नहीं है क्योंकि इसकी पावर साधारण बिजली की अपेक्षा बहुत ही अधिक है ।

वज्रपात से बचने के उपाय

आकाशीय बिजली लोगों की जान कम से कम जाए उसके लिए कुछ बिंदुओं पर ध्यान रखा जाना जरूरी है।

  • खुले आसमान के नीचे न रहें। किसी बिजली के खम्बे आदि के नीचे न खड़े हों। मोबाइल टॉवर के समीप न जाएं और न ही उसके नीचे खड़े हो।
  • वृक्षों पर बिजली बहुत गिरती है इसलिए वर्षा के पानी से बचने के लिए पेड़ो ने नीचे खड़े न हो।
  • राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन के अनुसार यदि बिजली कड़क रही है और आप बाहर हैं तो सबसे पहले किसी मजबूत स्थान पर आश्रय लें।
  • लोहे इत्यादि धातुओं की चीज़ों से दूरी बनाकर रखें क्योंकि धातुएं बिजली को आकर्षित करती हैं।
  • यदि मजबूत छत ढूंढ़ना सम्भव नहीं है तो दोनों एड़ियों को जोड़कर उकड़ूं (दोनों पैर मोड़कर) बैठें।
  • एक से अधिक लोगों के साथ होने पर दूरी बना लें।
  • कभी भी वर्षा होते समय पानी के करीब न जाये क्योंकि वहाँ बिजली गिरने की बहुत ज्यादा शंका रहती है ।
  • जब भी खुले में जा रहे हो तो बिजली की आवाज होते समय अपने कान बंद कर लें क्योंकि इससे कान का पर्दा फटने की संभावना रहती है।

प्राकृतिक आपदायें होनें का कारण क्या है?

वर्ष 2020 को आपदाओं का वर्ष कहें तो अतिश्योक्ति नहीं होगी। एक के बाद एक आपदाएं अतिथि की भांति चली आ रही हैं जिन्होंने जन-धन की बड़ी मात्रा में हानि की है। क्या इनसे कोई बचाव सम्भव नहीं? क्या परिवार ऐसे ही रोते बिलखते और अपने परिजन खोते रहेंगे? क्या समूचे ब्रह्मांड में ऐसी कोई शक्ति नहीं जो बच्चों को अनाथ होने से, स्त्रियों को विधवा होने से, परिवार टूटने से बचा सके? एकमात्र चारा है! सतभक्ति। लेकिन मंदिर जाने और पूजा करने, पुष्प अर्पित करने को सतभक्ति नहीं कहते। न ही व्रतादि रखना सतभक्ति है। ये सभी कृत्य शास्त्र विरुद्ध हैं। शास्त्र विरुद्ध होने के कारण ऐसी पूजाएं कोई लाभ नहीं दे सकतीं।

गीता अध्याय 6 के श्लोक 16 के अनुसार व्रत शास्त्रानुकूल साधना नहीं है। शास्त्रानुकूल साधना तो तब होगी जब गीता अध्याय 4 के श्लोक 34 के अनुसार तत्वदर्शी सन्त की तलाश करके उससे गीता अध्याय 17 श्लोक 23 के अनुसार तीन बार मे नाम दीक्षा लेंगे। पूर्व जन्म के कर्म बन्धनों से हमारे प्रत्यक्ष के लाभ हानि आदि संचालित होते हैं। जन्म मृत्यु भी पूर्व संस्कारों से जुड़ी होती है। पूर्व संस्कारों का फल रामजी और कृष्ण जी को भी भोगना पड़ा था। तो क्या इसका निदान सम्भव नहीं है? बिल्कुल है। पूर्ण सन्त से नाम दीक्षा लेकर पूर्ण परमेश्वर की भक्ति करने से ये पाप कट जाते हैं। यजुर्वेद अध्याय 8 मन्त्र 13 के अनुसार पूर्ण परमात्मा साधक के घोर पापों को भी नष्ट करते हैं।

क्या है उपाय कहर से बचने का?

सतनाम की महिमा बताते हुए कबीर साहेब कहते हैं-

जब ही सतनाम हृदय धरयो, भयो पाप को नास|
मानौं चिनगी अग्नि की, परी पुराने घास ||

सतनाम से सभी पापों को, कबीर साहेब ने पूर्ण तत्वदर्शी सन्त के द्वारा मिले सतनाम से सूखी घास जैसे जलकर नष्ट होता बताया है। हम नहीं जानते अगले क्षण क्या होने वाला है अतएव सतभक्ति आवश्यक है ताकि हम काल के कहर से बच सकें और पूर्ण परमात्मा की शरण में आएं। पूर्ण परमात्मा बन्दीछोड़ अर्थात काल माया के बन्धनों से मुक्ति कराने वाले हैं। वे इस लोक के सभी बन्धनों से मुक्त कर मोक्ष प्रदान करते हैं। पूर्ण परमात्मा तक केवल तत्वदर्शी सन्त के माध्यम से पहुंचा जा सकता है। वर्तमान में केवल सन्त रामपाल जी महाराज पूरे विश्व में एकमात्र तत्वदर्शी सन्त की भूमिका निभा रहे हैं। उनका ज्ञान समझें और शरण ग्रहण करें क्योंकि मानव के वश में कुछ नहीं है।

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