झज्जर के बुपनिया गांव में अनमोल मदद: संत रामपाल जी महाराज ने बाढ़ पीड़ित किसानों को दिया नया जीवनदान 

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झज्जर जिले के बुपनिया गांव में दो महीनों से चली आ रही बाढ़ ने लगभग 1500 एकड़ जमीन को डुबो दिया था; खेतों में 6 फीट तक पानी भर गया था और फसलें पूरी तरह खराब हो चुकी थीं। प्रशासन से मिले अनौपचारिक और अपर्याप्त प्रयास (सिर्फ आठ मोटर) और बाद में बिजली कटौती ने ग्रामीणों को लाचार कर दिया। जब आशा के द्वार बंद हो गए, तो सामूहिक रूप से ग्रामवासी सतलोक आश्रम, धनाना धाम (सोनीपत) पहुंचे और संत रामपाल जी महाराज को प्रार्थना-पत्र देकर मदद की गुहार लगाई। मात्र कुछ ही दिनों में संत रामपाल जी महाराज ने अन्नपूर्णा मुहिम के तहत आवश्यक राहत सामग्री भेजकर बुपनिया के खेतों में फिर जीवन की उम्मीद जगा दी।

मुख्य बातें, तत्वदर्शी बाढ़ राहत (संत रामपाल जी महाराज की पहल, हरियाणा)

  • संत रामपाल जी महाराज ने अन्नपूर्णा मुहिम के तहत बुपनिया गांव के लिए तत्काल सहायता भेजी।
  • सहायता में 6 बड़ी 15 HP मोटरें, 1000 फुट 8 इंच पाइपलाइन, 6 स्टार्टर, केबल, फेविकोल, नट-बोल्ट सहित सभी फिटिंग सामग्री शामिल थीं।
  • ग्रामीणों ने 27 सितंबर को सतलोक आश्रम में प्रार्थना देकर डिमांड दी; 29 सितंबर यानी मात्र दो दिन में सारा सामान गांव पहुंच गया।
  • प्रशासन की नाकामी: ग्रामीणों को पहले केवल 8 मोटरें मिलीं और बाद में बिजली भी काट दी गई, जिससे स्थिति और विकट हो गई।
  • सतलोक आश्रम की टीम ने बताया कि अब तक 200 से अधिक गांवों में इसी तरह की राहत सेवा दी जा चुकी है।
  • गुरुजी का निर्देश और आदेश: दिए गए उपकरणों से समय पर पानी नहीं निकाला गया तो आगे की मदद पर पुनर्विचार किया जाएगा; पारदर्शिता के लिए ड्रोन वीडियो रिकॉर्ड किए जाएंगे।

बुपनिया गांव की पृष्ठभूमि और संकट

बुपनिया गांव दो महीने से चारों ओर पानी में घिरा रहा। खेतों में पानी 2–3 फीट से लेकर 6 फीट तक भरा हुआ था, बाजरे व अन्य फसलें सड़ रही थीं और किसान पूरी तरह नुकसान में थे। प्रशासन की ओर से मिली आठ मोटरें पर्याप्त नहीं रहीं; बिजली कटने से हाल और बिगड़ गया। इस स्थिति ने कई परिवारों की रोज़ी-रोटी, पशु चारे और बच्चों की पढ़ाई तक प्रभावित कर दी थी।

प्रार्थना लेकर जाना:  बुपनिया ग्रामवासियों का फैसला

ग्रामवासी सामूहिक रूप से सैकड़ों की संख्या में सतलोक आश्रम, धनाना धाम पहुँचे और ट्रस्ट के भक्तों से बात की। वकीलों के माध्यम से बनवाए गए लेटरहैड पर अपनी माँग (छह मोटर, 1000 फुट पाइप, स्टार्टर व आवश्यक सामान) लिखकर संत रामपाल जी महाराज के चरणों में सौंप दी। उन्होंने गुरुदेव से न केवल सामान की माँग की बल्कि यह भी वचन दिया कि, वे दिए गए संसाधनों का सही उपयोग कर समय पर पानी निकालेंगे और आगामी फसल बोएंगे।

तत्काल राहत — क्या-क्या भेजा गया और कैसे दिया गया

संत रामपाल जी महाराज के आदेश पर शीघ्र ही दर्जनों गाड़ियों में सारा सामान लाकर बुपनिया गांव में हैंडओवर किया गया। सहायता सूची में मुख्य रूप से शामिल था:

  • 6 × 15 HP मोटरें (कम्प्लीट सेट)
  • 1000 फुट × 8 इंच पाइपलाइन (उच्च गुणवत्ता)
  • 6 स्टार्टर, केबल, फिटिंग (नट-बोल्ट, निप्पल), फेविकोल व अन्य जरूरी सामान
  • सामग्री इतनी पूर्ण थी कि गांव वालों को कोई अतिरिक्त खरीददारी न करनी पड़ी ; हर छोटी-बड़ी चीज़ मुहैया कराई गई।

प्रशासन की नाकामी और संत जी की त्वरित कार्रवाई

ग्रामवासी बताते हैं कि प्रशासन ने दो महीनों तक उनकी सुनवाई नहीं की; विधायक या मंत्री तक से मदद न मिली। ऐसे में संत रामपाल जी महाराज की त्वरित कार्रवाई ने जीवनदायिनी भूमिका निभाई। ग्रामीणों ने साफ कहा कि उन्होंने कई बार अधिकारियों के पास गुहार लगाई पर असर नहीं हुआ , परंतु गुरुदेव संत रामपाल जी महाराज जी के आदेश पर मात्र दो दिनों में पूरा सामान पहुंच गया।

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गुरुदेव का सख्त आदेश, पारदर्शिता और ज़िम्मेदारी 

तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज ने स्पष्ट निर्देश दिए कि सहायता का उद्देश्य स्थायी जल निकासी और अगली फसल की समय पर बिजाई सुनिश्चित करना है। साथ ही ट्रस्ट ने कहा कि यदि निर्धारित समय में पानी नहीं निकाला गया और बीजाई नहीं हुई तो आगे से उस गांव को राहत नहीं दी जाएगी। इस पारदर्शिता के लिए ट्रस्ट ने ड्रोन से रिकॉर्डिंग कराई, पहले “पानी भरा गांव”, फिर “पानी निकास के बाद” और अंत में “फसल लहरा रही” की वीडियो दिखाने का वादा किया गया है ताकि दान का उपयोग स्पष्ट रहे।

बुपनिया गांव के लिए भावनात्मक पल :  सम्मान और आभार

संत रामपाल जी महाराज के प्रति गांव वालों का आभार शब्दों में व्यक्त करना मुश्किल था। ग्राम पंचायत ने गुरुदेव को पगड़ी और शील्ड देकर सम्मानित किया। ग्रामीण कहते हैं कि अब वे संत रामपाल जी महाराज को अपना भगवान और मसीहा मानते हैं, क्योंकि वास्तविक सहायता मुश्किल समय में मिली। गांव में खुशी का माहौल था ; लोग लड्डू बाँटते और भविष्य की फसलों के लिए आश्वस्त दिखे।

दी गई सहायता का स्थायी उपयोग: निर्देश और सीख

तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज के सेवादारों ने अपने गुरु जी के आदेश व निर्देश ग्रामीणों को बताते हुए कहा कि मोटरें और पाइपें स्थायी रूप से ज़मीन में लगाकर रखें ताकि भविष्य में होने वाली बाढ़ में तुरंत पानी निकाला जा सके। यह समाधान ग्रामवासियों के लिए दीर्घकालिक सुरक्षा का ज़रिया है, न केवल अस्थायी सहायता, बल्कि परमात्मा कबीर जी की ओर से स्थायी गिफ्ट।

उम्मीद और संदेश : “अब हमें मिल गई है काम की मदद” 

बुपनिया के किसानों के लिए यह सहायता केवल उपकरण नहीं, बल्कि नई उम्मीद, आत्मविश्वास और जीविका की गारंटी है। जब प्रशासन से मदद न मिली, तब तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज ने अन्नपूर्णा मुहिम के तहत त्वरित और समग्र राहत भेजकर साबित कर दिया कि मानवता और सेवा किसी दिखावे के लिए नहीं, बल्कि ज़मीनी स्तर पर प्रभावशाली रूप से करनी चाहिए। अब गांव की जिम्मेदारी भी बढ़ गई है; दिए गए संसाधनों का सही और समय पर उपयोग कर पानी निकालना और फसल बोना। अगर ये सार्थक प्रयास पूरे हों तो बुपनिया की धरती फिर से हरियाली से लहराएगी और यह सब संत रामपाल जी महाराज की करुणा और सतलोक आश्रम की सेवा का प्रत्यक्ष फल है।

अन्नपूर्णा मुहिम: संत रामपाल जी महाराज की करुणामयी पहल ज़रूरतमंदों के लिए

संत सतलोक रामपाल जी महाराज जी अन्नपूर्णा मुहिम के माध्यम से पूरे भारत में ज़रूरतमंद परिवारों की हर संभव सहायता कर रहे हैं। इस मिशन के तहत सतलोक आश्रम से ज़रूरतमंद लोगों को रोटी, कपड़ा, शिक्षा, चिकित्सा और मकान जैसी बुनियादी सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाती हैं। बच्चों को स्कूल की किताबें, यूनिफॉर्म और जूते मिलते हैं, जबकि गंभीर रूप से बीमार और गरीब व्यक्तियों को मुफ्त चिकित्सा सुविधा प्रदान की जाती है।

प्राकृतिक आपदाओं जैसे कि पंजाब, हिमाचल प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में बाढ़ के समय तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज के शिष्यों ने तुरंत प्रभावित क्षेत्रों में पहुँचकर करोड़ों रुपये की राहत सामग्री वितरित की। ग्रामीण बताते हैं कि तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज की मदद की गति, पैमाना और करुणा किसी भी सरकारी राहत कार्य से कहीं अधिक है।

इस मिशन से प्रभावित लोग यह कहते हैं कि अन्नपूर्णा मुहिम ने न केवल उनके जीवन को पुनःस्थापित किया बल्कि उनके परिवारों में आशा और खुशियाँ लौटाई। कुछ लोग तो इतने प्रसन्न हुए कि सामान्य समय से पहले दीवाली जैसी खुशियाँ भी मनाईं।

तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज जी का नारा है:  

रोटी,  कपड़ा, शिक्षा, चिकित्सा और मकान ।

हर ज़रूरतमंद को दे रहा कबीर भगवान ।।

इस मुहिम से जुड़ी आप हर अपडेट के लिए अन्नपूर्णा महिम यूट्यूब चैनल और SA News यूट्यूब चैनल विज़िट कर सकते हैं।

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