Bhanwarlal Meghwal Death News: राजस्थान कैबिनेट मंत्री मास्टर भंवर लाल मेघवाल का 72 वर्ष की उम्र में निधन

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Bhanwarlal Meghwal Death News: राजस्थान कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मास्टर भंवर लाल मेघवाल का 72 वर्ष की उम्र में सोमवार को गुरुग्राम, हरियाणा स्थित मेदांता अस्पताल में हुआ निधन। गहलोत सरकार के कैबिनेट मंत्री मेघवाल पिछले कुछ समय से मस्तिष्क रक्तस्राव से पीड़ित थे। साथ ही वे अन्य कई बीमारियों से भी जूझ रहे थे। 18 दिन पहले अक्टूबर महीने की 29 तारीख को ही उनकी बेटी बनारसी मेघवाल का भी निधन हुआ था। पाठक जानेंगे मनुष्य जीवन में क्या होता है आत्मा का लक्ष्य?

भंवरलाल मेघवाल (Bhanwarlal Meghwal) निधन: मुख्य बिंद

  • गहलोत सरकार के वरिष्ठ मंत्री भंवरलाल मेघवाल का 72 साल की उम्र में गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में हुआ निधन।
  • 18 दिन पहले ही भंवरलाल की बेटी बनारसी मेघवाल का हार्ट अटैक के कारण निधन हुआ था।
  • 5 दिनों पहले की भंवरलाल की पत्नी केसर देवी को पंचायत समिति का सदस्य बनाया गया था।
  • राजस्थान के चुरू जिले के सुजानगढ़ से विधायक थे मास्टर भंवरलाल मेघवाल।
  • इंदिरा गांधी के समय से ही कांग्रेस पार्टी से जुड़े थे भंवरलाल मेघवाल।
  • अशोक गहलोत के साथ सन 1980 से ही कर रहे थे काम।
  • राजस्थान सरकार ने भंवरलाल के निधन के बाद 17 नवंबर, मंगलवार को 1 दिन का राजकीय शोक किया घोषित।
  • आत्मा को परम शांति व पूर्ण मोक्ष केवल तत्वदर्शी संत से दीक्षा लेकर पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब की सतभक्ति करने से ही मिल सकता है।

राजस्थान कैबिनेट मंत्री भंवर लाल मेघवाल (Bhanwarlal Meghwal) का निधन

राजस्थान के वरिष्ठ मंत्री मास्टर भंवर लाल मेघवाल जी का 72 वर्ष की उम्र में सोमवार को हरियाणा के गुरुग्राम स्थित मेदांता अस्पताल में निधन हो गया। मेघवाल पिछले कुछ समय से मस्तिष्क रक्तस्राव से पीड़ित थे। साथ ही वे अन्य कई बीमारियों से भी जूझ रहे थे।

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत खुद एयरपोर्ट तक छोड़ने आए थे

भंवरलाल मेघवाल की तबीयत 13 मई से ही खराब चल रही थी। उन्हें ब्रेन हेमरेज हो गया था। जिसके पश्चात इलाज के लिए शुरूआत में उन्हें जयपुर के एक अस्पताल में भर्ती करवाया गया। तबीयत में सुधार न होने पर मंत्री मेघवाल को कुछ दिनों बाद गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में शिफ्ट करवा दिया गया। गुरुग्राम ले जाते समय मुख्यमंत्री अशोक गहलोत खुद एयरपोर्ट पर हाजिर रहे थे। गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भी भंवरलाल कई दिनों से वेंटिलेटर पर थे। सोमवार को उनकी तबियत अचानक से ज्यादा बिगड़ गई, जिसके बाद उन्होंने अस्पताल में ही अपनी आखरी सांस ली।

राजस्थान सरकार का 17 नवंबर, मंगलवार को राजकीय शोक

राजस्थान सरकार ने 17 नवंबर, मंगलवार को मास्टर भंवरलाल जी के निधन पर एक दिवसीय शोक घोषित किया है।

परिवार के अन्य सदस्य

हाल ही में भंवरलाल की बेटी बनारसी देवी की हार्ट अटैक से मृत्यु हो गई थी। भंवरलाल के परिवार में उनकी पत्नी, एक बेटी और एक बेटा है। उनकी पत्नी केसर देवी को 5 दिन पूर्व ही पंचायत समिति का सदस्य बनाया गया हैं। केसर देवी चुरू जिले के सुजानगढ़ में स्थित शोभासर ब्लॉक में पंचायत समिति के सदस्य के रूप में निर्विरोध निर्वाचित हुई हैं।

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इंदिरा गांधी के समय से ही कांग्रेस से जुड़े थे Bhanwarlal Meghwal

पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमति इंदिरा गांधी के समय से ही भंवरलाल मेघवाल कांग्रेस पार्टी से जुड़े थे। जैसे जैसे समय पसार होता रहा, भंवरलाल ने पार्टी और दलितों के बीच अच्छी पैठ बना ली थी। उन्हें कद्दावर दलित नेता के रूप में भी जाना जाता है। बीकानेर और शेखावाटी संभाग के दलित वोट बैंक में उनकी अच्छी खासी पकड़ थी। भंवरलाल के पास फिलहाल सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता और आपदा प्रबंधन मंत्रालय था। भंवरलाल एक बेहतर प्रशासक माने जाते थे। वे मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की पिछली सरकार में भी शिक्षा मंत्री थे। वर्तमान में चुरू की सुजानगढ़ सीट से विधायक थे।

मास्टर भंवरलाल मेघवाल का राजनीतिक सफर

मास्टर भंवरलाल मेघवाल का राजनीतिक सफर 1977 से आरंभ हुआ था। उन्होंने अपने पूरे जीवन काल में चूरू जिले के सुजानगढ़ विधानसभा क्षेत्र से कई चुनाव लड़े। जिसमें से 1980, 1990, 1998, 2008 और 2018 में कुल 5 बार उन्होंने जीत हासिल की। वे हमेशा अपने बयानों से चर्चा में रहे। वे पार्टी के वरिष्ठ नेता होने के कारण मुख्यमंत्री गहलोत से काफी करीब भी रहे।

क्या होता है आत्मा का लक्ष्य?

आम तौर पर मनुष्य अपने जीवन में जन्म से लेकर मृत्यु तक के सफर को देखा देखी में व्यर्थ कर जाता है। बचपन में पढ़ाई फिर जवानी में कमाई, शादी, बच्चे और फिर बच्चों का पालन पोषण। अधिकतर इंसानों का जीवन बस इतना ही सीमित रह जाता है। अपने जीवन में हासिल की कामयाबी जैसे कि संचित धन-दौलत, समाज में मान-सम्मान और प्रतिष्ठा को ही अपनी वास्तविक सफलता समझकर अधिकतर लोग अपना मनुष्य जीवन व्यर्थ कर देते हैं।

पूरे जीवन में की हुई लिखाई पढ़ाई, कमाई, और जायदाद धरी की धरी रह जाती है। मृत्यु के पश्चात इस में से कुछ साथ नहीं चलता। यदि कुछ साथ चलता है तो वह है भक्ति की कमाई। मनुष्य देह हमें केवल भक्ति करने के लिए प्राप्त होती है। ताकि हम पूर्ण संत की खोज करें और उनसे नाम दीक्षा लेकर पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब की सत्य भक्ति साधना करके मोक्ष को प्राप्त कर सके।

आखिर आत्मा को शांति कैसे मिल सकती है?

किसी व्यक्ति के निधन के पश्चात यह देखने में आता है कि हर कोई मरे हुए व्यक्ति की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करते है। लेकिन सिर्फ प्रार्थना करने से किसी की आत्मा को शांति कभी नहीं मिल सकती। आत्मा की शांति के लिए मृत्यु के बाद नहीं बल्कि जीते जी ही कार्य करने होते हैैं। आत्मा को शांति केवल परमात्मा स्वरूप सतगुरू ही दिलवा सकते है। वर्तमान समय में पूरे विश्व में जगतगुरू तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज ही एक केवल एकमात्र सतगुरू है। प्राणी को यदि अपना मोक्ष करवाना है तो बिना समय गवाए संत रामपाल जी महाराज से तत्काल नामदीक्षा लेकर पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब की सत्य भक्ति साधना प्रारंभ कर देनी चाहिए, क्योंकि आत्मा को शांति और मोक्ष प्राप्त करने का केवल यह एक ही मार्ग है।

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