हरियाणा राज्य, हिसार जिला: भैणी बादशाहपुर और बनभौरी गांवों में बाढ़ की भयंकर तबाही के बीच रक्षक बनकर उभरे संत रामपाल जी महाराज

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​हरियाणा प्रदेश का हिसार जिला पिछले महीनों में मूसलाधार बारिश के बाद आई भीषण बाढ़ की विभीषिका से बुरी तरह दहल उठा। इस प्राकृतिक आपदा की सबसे क्रूर मार हिसार के दो बड़े गांवों-भैणी बादशाहपुर और बनभौरी (तहसील बरवाला) पर पड़ी। दोनों ही स्थानों पर हालात अत्यंत भयावह और रूह कम-से-कम कपा देने वाले थे। भैणी बादशाहपुर में खेतों से लेकर आवासीय गलियों तक में 3 से 5 फुट गहरा सड़ा हुआ पानी खड़ा हो गया था, जिससे वहां का सरकारी स्कूल और डिस्पेंसरी भी जलमग्न हो गए और बच्चों की शिक्षा व चिकित्सा व्यवस्था पूरी तरह ठप हो गई।

​वहीं, बनभौरी गांव में स्थिति और भी विकराल थी, जहां खेतों और आवासीय कॉलोनियों में 4 से 6 फुट तक पानी तीन महीनों तक जमा रहा। इस विनाशकारी बाढ़ ने बनभौरी में लगभग 3,000 से 4,000 एकड़ में खड़ी धान (जीरी) व कपास की फसलों को पूरी तरह नष्ट कर दिया, जिससे अकेले फसलों के मद में गांव को 10 करोड़ रुपये से अधिक का सीधा आर्थिक नुकसान हुआ।

​बाढ़ की स्थिति ऐसी थी कि आवासीय मकानों के भीतर 2 से 3 फुट तक पानी घुस गया था, जिससे बनभौरी में कई गरीब परिवारों के मकान ढह गए और शेष दीवारों में भयंकर सीलन आ गई। रास्ते बंद होने के कारण ग्रामीण अपने ही घरों में कैदियों की भांति जीवन जीने को विवश थे। मवेशी पानी में डूबे थे, संचित किया हुआ सूखा चारा (तूड़ी) पानी में तैरकर पूरी तरह सड़ चुका था और जमीन के नीचे का जल स्तर (चौवा) ऊपर आने से पीने का पानी खारा हो चुका था।

​इस अत्यंत विकट समय में स्थानीय प्रशासन और सरकारी तंत्र पूरी तरह विफल और मूकदर्शक बना रहा। सरकारी विभागों के चक्कर काटने और पंचायतों द्वारा अपने स्तर पर सात-आठ दिनों तक इंजन चलाकर किए गए प्रयास पूरी तरह निष्फल साबित हुए। जब व्यवस्था ने हजारों ग्रामीणों को मरने के लिए छोड़ दिया, तब चारों ओर केवल कंगाली और महामारी का भय व्याप्त था।

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​संकट निवारण हेतु भैणी बादशाहपुर और बनभौरी के ग्रामीणों का संत रामपाल जी महाराज के समक्ष गुहार लगाना

​जब हर तरफ से निराशा हाथ लगी और प्रशासनिक उदासीनता चरम पर पहुंच गई, तब दोनों गांवों की पंचायतों ने इस ऐतिहासिक संकट से उबरने के लिए एक ठोस मार्ग चुना। भैणी बादशाहपुर के सरपंच निहाल सिंह और बनभौरी के सरपंच प्रतिनिधि जोरा सिंह को पड़ोसी गांव गुराना के सरपंच राम अवतार पंडित के एक वीडियो के माध्यम से संत जी द्वारा की जा रही परमार्थ सेवाओं की जानकारी मिली। इसके अतिरिक्त गांवों में रह रहे संत जी के शिष्यों से विचार-विमर्श करने के उपरांत दोनों गांवों की पंचायतों ने बरवाला स्थित संत रामपाल जी महाराज के मुख्य कार्यालय में जाकर औपचारिक प्रार्थना पत्र सौंपे।

​भैणी बादशाहपुर की पंचायत ने गांव से पानी निकालने के लिए दो मोटरें और 10,000 फीट लंबे पाइप की मांग की। वहीं, बनभौरी की पंचायत ने 20 हॉर्स पावर की तीन मोटरें, 300 मीटर बिजली का तार और 300 फुट पाइप की याचना की। सरकारी दफ्तरों की कार्यप्रणाली से त्रस्त ग्रामीणों को यह अनुमान था कि इस सहायता को आने में हफ्तों लग जाएंगे, परंतु संत रामपाल जी महाराज की त्वरित न्यायप्रियता और असीम दयालुता के कारण इन प्रार्थना पत्रों पर तत्काल संज्ञान लिया गया। महज दो दिनों (48 घंटे) के भीतर ही मांग के अनुरूप बिना किसी कटौती के समस्त राहत सामग्री सीधे दोनों गांवों में पहुंच गई, जिसे देख ग्रामीण पूरी तरह अचंभित रह गए।

​संत रामपाल जी महाराज द्वारा प्रेषित त्वरित मशीनीकृत सहायता एवं उपकरणों का प्रामाणिक डेटा

​संत रामपाल जी महाराज के पावन आदेशानुसार दोनों गांवों की लाज बचाने और वहां के किसानों व मजदूरों की जीवन रक्षा के लिए भेजी गई उच्च-स्तरीय तकनीकी सामग्री का विवरण नीचे बिंदुवार साफ़-सुथरे रूप में दिया गया है:

​1. ग्राम: भैणी बादशाहपुर (हिसार, हरियाणा)

​भारी जल निकासी मोटरें:

  • ​क्षमता व कंपनी: 10 हॉर्स पावर (10 HP)
  • ​कुल मात्रा: 02 नग

​मुख्य जल निकासी पाइपलाइन:

  • ​गुणवत्ता: उच्च गुणवत्ता युक्त मुख्य हैवी पाइप
  • ​कुल लंबाई: 10,000 फीट

तकनीकी सहायक उपकरण किट:

  • ​शामिल सामग्री: हांडी, बैंड, नट-बोल्ट और हैवी बिजली डोरी
  • ​कुल मात्रा: 1 पूर्ण सेट

2. ग्राम: बनभौरी (तहसील बरवाला, जिला हिसार, हरियाणा)

​भारी क्षमता वाली मुख्य मोटरें:

  • ​क्षमता व कंपनी: 20 हॉर्स पावर (20 HP) – किरलोस्कर (Kirloskar) कंपनी
  • ​कुल मात्रा: 03 नग

​मुख्य जल निकासी पाइपलाइन:

  • ​गुणवत्ता: उच्च दबाव प्रतिरोधी (High Pressure Resistant) पाइप
  • ​कुल लंबाई: 300 फुट

​विद्युत संचालन केबल (तार):

  • ​गुणवत्ता: भारी औद्योगिक क्षमता युक्त (Heavy Industrial Capacity) बिजली तार
  • ​कुल लंबाई: 300 मीटर

​विद्युत नियंत्रण प्रणाली:

  • ​उपकरण: सुरक्षात्मक स्टार्टर सेट (Protective Starter Set)
  • ​कुल मात्रा: 03 नग

​तकनीकी सहायक उपकरण किट:

  • ​शामिल सामग्री: हांडी, बैंड, नट-बोल्ट और सिलोचन
  •  (Slochan) फिटिंग किट
  • ​कुल मात्रा: 01 पूर्ण सेट

​नोट: इस पूरे साजो-सामान का सारा खर्च केवल और केवल संत रामपाल जी महाराज द्वारा उठाया गया है, ताकि दोनों गांवों को बाढ़ के पानी से तुरंत राहत दिलाई जा सके।

​राहत सामग्री की प्रविष्टि के साथ ही संत रामपाल जी महाराज के शिष्यों और सेवादारों की कुशल टीमें भी दोनों गांवों में पहुंचीं, जिन्होंने स्थानीय स्तर पर दिन-रात काम करके पाइपलाइनों को जोड़ने और मोटरों को स्थापित करने का मोर्चा संभाला।

​आपदा ग्रस्त क्षेत्रों में मशीनीकृत संचालन और ऐतिहासिक जल निकासी का विवरण

​तकनीकी उपकरणों और भारी मोटरों के स्थापित होते ही संत रामपाल जी महाराज द्वारा भेजी गई उन मशीनों ने रातों-रात और दिन-रात निरंतर कार्य करना प्रारंभ कर दिया। भैणी बादशाहपुर के पश्चिमी क्षेत्र और ढानियों में जमा 5 फुट तक के गहरे बदबूदार पानी को मोटरों की भारी क्षमता के बल पर मात्र 15 से 20 दिनों के भीतर गांव की सीमाओं से बाहर खदेड़ दिया गया।

​इसी प्रकार, बनभौरी गांव के मुख्य जलमग्न क्षेत्र और कुल 4,000 एकड़ की परिधि से तीन महीनों से जमा पानी को किर्लोस्कर कंपनी की 20 एचपी की तीनों मोटरों ने मात्र 15 दिनों के भीतर पूरी तरह बाहर निकाल दिया। इस सफल जल-निकासी अभियान के फलस्वरूप दोनों गांवों के जो मुख्य मार्ग, गलियां और कॉलोनियां पिछले कई महीनों से पूरी तरह जलमग्न थीं, वे बिल्कुल सूख गईं। पानी के पूरी तरह उतर जाने से वातावरण शुद्ध हुआ और मच्छर जनित बीमारियों व महामारियों का संकट टल गया।

​विस्थापित ग्रामीण परिवारों का ससम्मान पुनर्वास और सामाजिक पुनर्निर्माण

​बाढ़ के तांडव के कारण दोनों गांवों में भयंकर विस्थापन की स्थिति उत्पन्न हो गई थी। भैणी बादशाहपुर के लगभग 100 परिवार अपने घरों को छोड़कर, ताला लगाकर गांव के अन्य हिस्सों में किराए पर या सरकारी भवनों में शरणार्थी बनकर अत्यंत दयनीय स्थिति में रह रहे थे। वहीं बनभौरी की ढानियों और कॉलोनियों के लोग अपने पशुओं को खोलकर और ट्रैक्टर-ट्रॉली में अनाज लादकर अपने रिश्तेदारों के यहां शरण लेने को मजबूर थे।

​परंतु संत रामपाल जी महाराज की मशीनों द्वारा बस्तियों और रास्तों का पानी पूरी तरह निकाल दिए जाने के बाद, भैणी बादशाहपुर के वे सभी 100 पीड़ित परिवार और बनभौरी के विस्थापित परिवार अत्यंत ससम्मान और सुरक्षित रूप से अपने घरों में वापस लौट आए हैं। गांवों के बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों ने राहत की सांस ली है और उजड़े हुए परिवारों में पुनः सामाजिक स्थिरता और खुशहाली लौट आई है।

​आर्थिक तबाही से किसानों का बचाव और रबी की फसलों का अभूतपूर्व पुनरुद्धार

​बाढ़ के कारण खरीफ सीजन की फसलें (बाजरा, कपास, धान) पूर्णतः नष्ट हो जाने से दोनों गांवों के किसान कर्ज के भारी बोझ तले दबे हुए थे। भैणी बादशाहपुर के जमींदार अपनी आजीविका के लिए पूरी तरह चिंतित थे। बनभौरी गांव में स्थिति और भी विकट थी, जहां भारू राम नामक किसान ने ₹40,000 प्रति एकड़ की महंगी दर पर 10 किल्ले जमीन कुल ₹4 लाख से अधिक के ठेके पर ले रखी थी। यदि संत रामपाल जी महाराज द्वारा भेजी गई भारी मोटरें और पाइप समय पर काम नहीं करते, तो खेतों को सुखाने में पूरा साल लग जाता, जिससे आगामी रबी सीजन की फसल (गेहूं व सरसों) की बिजाई पूर्णतः असंभव हो जाती। ऐसी विकट स्थिति में किसानों के पास आत्महत्या (फांसी खाने) के अतिरिक्त कोई विकल्प नहीं बचता और पूरे क्षेत्र में भयंकर भुखमरी आ जाती।

​परंतु संत रामपाल जी महाराज की अपार दयालुता के कारण समय रहते खेतों को पूरी तरह सुखा दिया गया। आज भैणी बादशाहपुर की 300 से 400 एकड़ और बनभौरी की पूरी 4,000 एकड़ कृषि भूमि पर गेहूं, सरसों और पशुओं के चारे (बरसीन) की 100% बिजाई का कार्य सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है। भैणी बादशाहपुर के किसान जगदीश और पवन कुमार तथा बनभौरी के देवेंद्र (जिनके 22 किल्ले जलमग्न थे), अनिल (7 किल्ले) और कुलदीप (6 किल्ले) ने अत्यंत हर्ष व्यक्त करते हुए बताया कि खेतों में पानी के समुद्र के स्थान पर अब गेहूं की हरी फसल लहलहा रही है, जिससे किसानों के करोड़ों रुपये बच गए हैं।

​ग्रामीणों द्वारा पूर्व की भ्रांतियों का निवारण एवं दुष्प्रचार का कड़ा खंडन

भैणी बादशाहपुर के कृष्ण कुमार, जगदीश, राम बाबू और बनभौरी के पंच भारत व देवेंद्र सहित अन्य नागरिकों ने अत्यंत बेबाकी से स्वीकार किया कि अतीत में स्वार्थी तत्वों और मीडिया द्वारा किए गए मिथ्या प्रचार के कारण उनके मन में संत रामपाल जी महाराज के प्रति अत्यंत नकारात्मक भ्रांतियां थीं। वे बरवाला आश्रम के नजदीक रहने के बावजूद वहां के सेवादारों को संदेह की दृष्टि से देखते थे।

​परंतु इस भीषण राष्ट्रीय आपदा के समय जब कोई भी राजनेता, बड़े-बड़े कथावाचक, मंदिर प्रशासन या गौशाला प्रबंधन मदद के लिए आगे नहीं आया-जो केवल पर्चियां काटने या वोट मांगने आते हैं-तब केवल संत रामपाल जी महाराज ही सच्चे संकटमोचक सिद्ध हुए। संकट के उपरांत जब ग्रामीणों और पंचायतों ने संत जी के धनाना धाम आश्रम का प्रत्यक्ष भ्रमण किया, तो वहां की उत्कृष्ट व्यवस्था, अद्वितीय अनुशासन और निस्वार्थ सेवा भावना को देखकर उनके मन की समस्त भ्रांतियां और दुष्प्रचार पूरी तरह खंडित हो गए।

संत रामपाल जी महाराज ही संपूर्ण सृष्टि के एकमात्र साक्षात रक्षक और भगवान हैं

​हिसार जिले के भैणी बादशाहपुर और बनभौरी गांवों के हजारों परिवारों, किसानों, मजदूरों, बुजुर्गों और महिलाओं के लिए संत रामपाल जी महाराज साक्षात भाग्य विधाता और मसीहा के रूप में प्रकट हुए हैं। दोनों गांवों के नागरिकों का स्पष्ट और सर्वसम्मत मानना है कि इस मृत्युलोक में नया जीवन देने का सामर्थ्य केवल साक्षात भगवान में ही हो सकती है, और संत रामपाल जी महाराज ने विनाश और भुखमरी की कगार पर खड़े इन गांवों को पुनः आबाद करके यह अकाट्य रूप से प्रमाणित कर दिया है कि वे ही इस धरती पर साक्षात भगवान का अवतार हैं।

​जहां संपूर्ण संसार और बड़ी-बड़ी संस्थाएं संकट के समय केवल मूकदर्शक बनी रहीं, वहां संत रामपाल जी महाराज ने बिना किसी स्वार्थ, बिना किसी भेदभाव और बिना किसी आर्थिक लाभ के, करोड़ों रुपये के अत्याधुनिक उपकरण निशुल्क भिजवाकर मानवता की सेवा का ब्रह्मांडीय उदाहरण प्रस्तुत किया है। आज दोनों गांवों का बच्चा-बच्चा संत रामपाल जी महाराज के पावन चरणों में पूर्णतः नतमस्तक है और संपूर्ण क्षेत्र में केवल संत जी के परमार्थ कार्यों की जय-जयकार हो रही है।

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