संत रामपाल जी महाराज की सहायता से अभौरा गांव में लौटी खुशहाली, वर्षों से जलभराव की समस्या का मिला स्थायी समाधान

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डीग, राजस्थान – राजस्थान के डीग जिले की ग्राम पंचायत अभौरा में रहने वाले किसान पिछले चार वर्षों से एक गंभीर समस्या का सामना कर रहे थे। लगातार जलभराव के कारण गांव की सैकड़ों बीघा उपजाऊ कृषि भूमि पानी में डूबी हुई थी, जिससे खेती पूरी तरह प्रभावित हो गई थी। जिन खेतों में कभी गेहूं, सरसों और अन्य फसलें लहलहाया करती थीं, वहां केवल पानी ही पानी दिखाई देता था। खेती पर निर्भर अधिकांश परिवारों की आय का मुख्य स्रोत समाप्त हो चुका था और किसानों के सामने आर्थिक संकट लगातार गहराता जा रहा था। कई परिवार कर्ज के बोझ तले दब चुके थे, जबकि अनेक किसानों के लिए अपने परिवार का भरण-पोषण करना भी कठिन होता जा रहा था। वर्षों तक समस्या का समाधान न मिलने के कारण ग्रामीणों में निराशा का माहौल बन गया था और उन्हें भविष्य अंधकारमय दिखाई देने लगा था।

चार वर्षों से जलभराव की मार झेल रहा था गांव

ग्रामीणों के अनुसार अभौरा गांव के लगभग 700 से 800 बीघा कृषि क्षेत्र में लंबे समय से पानी भरा हुआ था। जलभराव की वजह से किसान रबी और खरीफ दोनों मौसमों में खेती नहीं कर पा रहे थे। खेतों में पानी जमा रहने से भूमि की उत्पादक क्षमता भी प्रभावित हो रही थी। ग्रामीणों ने कई बार प्रशासनिक अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और संबंधित विभागों से समस्या के समाधान की मांग की, लेकिन कोई प्रभावी पहल नहीं हो सकी। परिणामस्वरूप हर वर्ष किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता रहा। खेती बंद होने से पशुओं के लिए चारे का संकट भी उत्पन्न हो गया था और गांव की आर्थिक गतिविधियां लगभग ठप पड़ने लगी थीं। किसानों का कहना है कि वर्षों तक उनकी पीड़ा सुनने वाला कोई नहीं मिला, जिससे उनकी परेशानियां और बढ़ती चली गईं।

संत रामपाल जी महाराज से लगाई सहायता की गुहार

जब स्थानीय स्तर पर किए गए सभी प्रयास विफल हो गए और किसानों को समस्या का कोई समाधान दिखाई नहीं दिया, तब ग्राम पंचायत अभौरा के प्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने संत रामपाल जी महाराज से सहायता की अपील की। ग्रामीणों ने अपनी समस्या विस्तार से बताते हुए कहा कि यदि जलभराव की समस्या का समाधान नहीं हुआ तो सैकड़ों किसानों का भविष्य संकट में पड़ जाएगा। ग्रामीणों के अनुसार उनकी अपील को गंभीरता से सुना गया और बहुत कम समय में राहत पहुंचाने का निर्णय लिया गया। गांव के लोगों का कहना है कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि उनकी समस्या पर इतनी शीघ्र कार्रवाई होगी, लेकिन सहायता मिलने के बाद उनके भीतर फिर से आशा का संचार हुआ।

कुछ ही दिनों में गांव पहुंची राहत सामग्री

ग्रामीणों की समस्या को देखते हुए संत रामपाल जी महाराज द्वारा जल निकासी के लिए आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था कराई गई। कुछ ही दिनों के भीतर गांव में 8600 फीट लंबी 8 इंची पाइप लाइन, 10 एचपी की दो शक्तिशाली मोटरें, जनरेटर, पर्याप्त मात्रा में डीजल तथा अन्य आवश्यक उपकरण पहुंचा दिए गए। इतना ही नहीं, मोटरों के संचालन और पाइप लाइन जोड़ने के लिए जरूरी छोटे-बड़े सभी संसाधन भी उपलब्ध कराए गए ताकि कार्य में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न न हो। ग्रामीणों ने बताया कि पूरी व्यवस्था निःशुल्क उपलब्ध कराई गई और इसके लिए ग्राम पंचायत या किसानों से किसी प्रकार का आर्थिक योगदान नहीं लिया गया। इससे किसानों को बड़ी राहत मिली और जल निकासी का कार्य तेजी से शुरू हो सका।

जल निकासी के बाद फिर लहलहाने लगी फसलें

संसाधनों की सहायता से लगातार कई दिनों तक जल निकासी का कार्य किया गया, जिसके परिणामस्वरूप लगभग 700 बीघा भूमि से पानी बाहर निकाल दिया गया। जिन खेतों में वर्षों से जलभराव था, वहां आज फिर से खेती शुरू हो चुकी है। किसानों ने गेहूं और सरसों की बुवाई की है और खेतों में हरियाली दिखाई देने लगी है। गांव के लोगों का कहना है कि यदि यह सहायता नहीं मिलती तो आने वाले वर्षों में भी खेती संभव नहीं हो पाती। कुछ निचले क्षेत्रों में अब भी थोड़ी मात्रा में पानी मौजूद है, लेकिन वहां भी किसानों ने चारा और मूंग जैसी फसलों की बुवाई शुरू कर दी है। इससे पूरे गांव में उत्साह का माहौल है और किसान भविष्य को लेकर आशावान दिखाई दे रहे हैं।

किसानों को करोड़ों रुपये की पैदावार की उम्मीद

ग्राम पंचायत के प्रतिनिधियों और किसानों का अनुमान है कि इस बार गांव की कृषि भूमि से एक से डेढ़ करोड़ रुपये तक की पैदावार हो सकती है। जिन खेतों में पिछले चार वर्षों से एक दाना तक पैदा नहीं हो रहा था, वहीं अब अच्छी फसल की उम्मीद दिखाई दे रही है। किसानों का कहना है कि इस उत्पादन से न केवल उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी बल्कि वर्षों से चला आ रहा कर्ज का बोझ भी कम हो सकेगा। खेती शुरू होने से गांव की आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी और युवाओं को रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे। ग्रामीणों का मानना है कि यह सहायता उनके लिए केवल जल निकासी का कार्य नहीं, बल्कि आर्थिक पुनर्वास का माध्यम बनकर सामने आई है।

ग्रामीणों ने व्यक्त किया आभार

गांव के सरपंच, पूर्व सरपंच और अन्य ग्रामीणों ने संत रामपाल जी महाराज के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि जब उनकी समस्या का समाधान कहीं नहीं हो पा रहा था, तब उन्हें यह सहयोग प्राप्त हुआ। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से जलभराव के कारण जिस भूमि पर खेती असंभव हो चुकी थी, वहां आज फसलें लहलहा रही हैं। उन्होंने इसे किसानों के जीवन में आए बड़े बदलाव के रूप में बताया और कहा कि इस सहायता से गांव के सैकड़ों परिवारों को नई उम्मीद मिली है। ग्रामीणों ने यह भी कहा कि यह सहयोग आने वाली पीढ़ियों के लिए भी लाभदायक साबित होगा क्योंकि इससे कृषि भूमि को दोबारा उपयोग में लाया जा सका है।

अन्नपूर्णा मुहिम के तहत जारी है सेवा कार्य

अभौरा गांव को प्रदान की गई सहायता संत रामपाल जी महाराज द्वारा संचालित अन्नपूर्णा मुहिम का हिस्सा है। इस मुहिम के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों में जरूरतमंद परिवारों, किसानों और आपदा प्रभावित लोगों तक सहायता पहुंचाने का कार्य किया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि इस प्रकार के प्रयास समाज में सहयोग और मानवता की भावना को मजबूत करते हैं तथा जरूरतमंद लोगों को कठिन परिस्थितियों से बाहर निकलने का अवसर प्रदान करते हैं।

नई उम्मीदों की ओर बढ़ता अभौरा

आज अभौरा गांव का दृश्य पूरी तरह बदल चुका है। जहां कभी चारों ओर पानी भरा दिखाई देता था, वहां अब हरी-भरी फसलें किसानों के चेहरों पर मुस्कान ला रही हैं। वर्षों से संकट का सामना कर रहे किसान अब भविष्य को लेकर आश्वस्त नजर आ रहे हैं। ग्रामीणों का मानना है कि यदि इसी प्रकार सहयोग और सामूहिक प्रयास जारी रहे तो गांव एक बार फिर कृषि उत्पादन के क्षेत्र में नई पहचान स्थापित कर सकेगा। अभौरा की यह कहानी केवल जल निकासी की सफलता की कहानी नहीं है, बल्कि यह आशा, सहयोग और मानव सेवा की भावना से आए सकारात्मक परिवर्तन की एक प्रेरणादायक मिसाल भी है।

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