काले कपड़े में ज़रा सा भी दाग हो तो अच्छा नहीं लगता। परंतु यहां काली पैंट और काला ही कोट पहनने वालों को सफेद शर्ट भी बेदाग न कर सकी।
जज का कार्य होता है दोनों पक्षों की सुनकर निर्णय देना।
वकील का कार्य होता है बेकसूर को सज़ा न हो और कसूरवार बच न पाए।
पुलिस का कार्य किसी समाज सेवी से कम नहीं होता है। समाज के प्रत्येक व्यक्ति की शारीरिक सुरक्षा की ज़िम्मेदारी संभालनी होती है।
सरकार की जिम्मेदारी लोकतंत्र की रक्षा करना है। लोकहित और देशहित दोनों का ध्यान रखना है।

दुनिया भर में बैठे न्यायाधीशों में से अधिकांश मेहनती, बुद्धिमान और ईमानदार हैं, यह निर्विवाद है कि कुछ न्यायाधीश अपने निर्णय लेने में अनुचित रूप से प्रभावित होते हैं।
न्यायिक भ्रष्टाचार जनता के विश्वास को तोड़ता है, बल्कि कानून के प्रति सम्मान भी मिटाता है।
जज को परमात्मा का छोटा रूप कहा गया है। जिस व्यक्ति की कलम में जिंदगी व मौत का अधिकार है, वह परमात्मा से कम शक्ति वाला नहीं माना जा सकता। यदि ऐसा ताकतवर व्यक्ति अपनी शक्ति का दुरूपयोग करके निर्दोषों को आजीवन कारावास अंतिम श्वांस तक देता है या मौत की सज़ा देता है, वह जज तो दूर वह तो जल्लाद है।

न्यायपालिका सरकार के दबाव में निर्णय न दें

विश्वसनीय न्यायपालिका में कोई भी कानून से ऊपर और कोई भी कानून से नीचे नहीं होना चाहिए । लॉर्ड एक्टन ने कहा है, “पावर भ्रष्ट और निरपेक्ष सत्ता को पूरी तरह से भ्रष्ट कर देता है।” न्यायाधीशों को उन लोगों की पहुंच से परे होना चाहिए जो अपने फैसलों के कारण उन्हें स्थानांतरित या हटा देते हैं। न्यायाधीश को लालच से परे होना चाहिए। न्यायाधीश को कानून के अनुसार निर्णय लेना चाहिए न कि अपनी इच्छा अनुसार या शक्तिशाली राजनीतिक नेताओं की इच्छा के अनुसार।
जज के हरियाणा सरकार के दबाव में दिए गए गलत फैसले से संत रामपाल जी महाराज तथा अन्य 22 अनुयायियों को दी गई आजीवन कारावास की सज़ा कानून का दुरूपयोग है। विश्वसनीय सूत्रों से पता चला है कि हरियाणा के माननीय मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल खट्टर जी ने अपने वफादार पुलिस अधिकारी अनिल राव के द्वारा माननीय जज श्री देशराज चालिया पर विशेष दबाव देकर उसे टॉर्चर करके और धमकाकर मुकदमा नं. 429/2014 तथा 430/2014 थाना-बरवाला (जिला-हिसार) में हमारे सतगुरु रामपाल जी महाराज तथा अनुयायियों की सजा करवाई है।

शोषण का गढ़ है न्यायालय

अंग्रेजी काल से ही न्यायालय शोषण और भ्रष्टाचार के गढ़ बने हुए हैं। यह आम धारणा बन चुकी है कि जो भी अदालत के चक्कर में पड़ा, वह बर्बाद हो जाता है। भारतीय न्यायपालिका में भ्रष्टाचार बहुत ही साधारण बात है। यहां तक कि सर्वोच्च न्यायालय के कई न्यायधीशों पर महाभियोग की कार्यवाही भी हो चुकी है। न्यायपालिका में व्याप्त भ्रष्टाचार में घूसखोरी, भाई भतीजावाद, बेहद धीमी और बहुत लंबी न्याय प्रक्रिया, बहुत ही ज्यादा मंहगा अदालती खर्च, न्यायालयों की कमी, पारदर्शिता की कमी, कर्मचारियों का भ्रष्ट आचरण, सरकार का दबाव और निर्णय देने और बदलवाने में दखल देना आदि जैसे कारकों की प्रमुख भूमिका है।

ग्वाहों पर भी बनाए गए झूठे मुकदमे

बरवाला कांड करने के साथ हरियाणा की भ्रष्ट सरकार द्वारा बनाए गए झूठे मुकदमों की सच्चाई जानने के बाद भारत का प्रत्येक नागरिक यह सोचने पर मजबूर हो जाएगा की कुर्सी पर बने रहने का लालच और शक्ति के अभिमान में डूबा व्यक्ति कुछ भी कर और करवा सकता है। झूठे मुकदमे नंबर 429 और 430 में सजा हो ही नहीं सकती थी, क्योंकि बरवाला कांड में हुई छह निर्मम हत्याओं की दोषी हरियाणा सरकार और पुलिस है। सभी गवाह जो मरने वालों के पति, पिता, बेटा-बेटी, संबंधी व जानकार थे सबने कोर्ट में बयान देकर बताया कि हमारे व्यक्ति व पत्नी, माँ, बेटी-बेटा, पुत्रवधु जो भी बरवाला आश्रम में मरे हैं, वे पुलिस की बर्बरता से की गई कार्यवाही से मरे हैं। पुलिस ने लाठी मारी, आँसू गैस के गोले मारे, पत्थर मारे। जिस कारण से उनकी मृत्यु हुई। आश्रम के किसी भी अनुयायी तथा गुरू जी संत रामपाल जी महाराज का इनकी मौत में कोई हाथ नहीं है। पुलिस ने खाली कागजों पर हमारे दस्तखत यह कहकर कराए थे कि तुम्हें शव देने हैं। तीन-चार कोरे कागजों पर प्रत्येक के दस्तखत कराए थे। बाद में पता चला कि उन कागजों पर हमारी ओर से झूठी कहानी बनाकर दरखास्त लिखकर दो हत्या के मुकदमे हमारे गुरू जी रामपाल जी तथा 22 अन्य अनुयायियों (स्त्री-पुरूषों) पर बना दिए गए थे। यहां तक की परिवार के सदस्यों जिन्होंने ग्वाही दी थी कि संत रामपाल जी महाराज और उनके शिष्यों का उनके परिजनों की मौत में कोई हाथ नहीं है हरियाणा पुलिस ने उन पर भी झूठे मुकदमे बना दिए।

मुख्यमंत्री के कहने पर जज ने सुनाया गलत फैसला!

कुछ समय पश्चात् तीन मुकदमे 428, 429, 430 श्री देशराज चालिया अतिरिक्त सैशन जज के पास चले गए। विश्वसनीय सूत्रों से यह भी पता चला है कि श्री अनिल राव ( आई जी) ने अपने ऑफिस में कहा कि सरकार के हाथ बहुत लंबे हैं। बाबा रामपाल बचकर कहाँ जाएगा? अनिल राव ने ये झूठे मुकदमें मुख्यमंत्री जी के कहने से बनाये थे। अनिल राव जी सन् 2014-2015 में IG हिसार रेंज थे। इन्हीं की देखरेख में सब झूठे मुकदमे संत रामपाल जी महाराज तथा भक्तों पर बनाए गए थे। अपनी गलती समाज के सामने आने से छुपाने के लिए मुकदमों में सजा करना इन्हीं की मजबूरी बन गई थी। मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने विडियो कान्फ्रैंस की मॉनिटरिंग करते हुए कहा था कि “किसी कीमत पर भी बाबा रामपाल बचना नहीं चाहिए।” यह सब मुकदमों में बरी होता जा रहा है। सरकार की बेइज्जती हो रही है। जिस भी जज के पास उसके मुकदमे जाएं उसे प्रमोशन का लालच देना। नहीं माने तो अन्य तरीका अपनाना, यह काम होना चाहिए। दो मुकदमे फैसले पर हैं। दोनों आजीवन कारावास अंतिम श्वांस तक हों, नोट कर लें। मैं जो कहूँ, वही लिखा जाए। जो कुछ भी जज देशराज जी चालिया ने फैसले में लिखा है, वह अनिल राव ने लिखवाकर दिया था। शब्दाशब्द (word to word) यह लिखना है, कानूनी भाषा आप (जज) बना लेना। यह मुख्यमंत्री जी का सख्त आदेश है। प्रलोभन :- श्री देशराज चालिया (D R Chalia) ADJ no.1 है। जज का अगला प्रमोशन सैशन जज का होगा जिसमें मुख्यमंत्री जी की सिफारिश अहम होती है। बिना मुख्यमंत्री की सिफारिश के किसी भी जज की उन्नति नहीं होती। सैशन जज के बाद अगली उन्नति हाई कोर्ट के जज के तौर पर होती जिसमें भी सरकार की राय ली जाती है।
कानून ऐसा है कि आज न्यायाधीश को गिरफ्तार नहीं कर सकते। यह तो छोड़िए, आप उनके खिलाफ आय से अधिक सम्पत्ति रखने का मुकदमा नहीं बना सकते। कानून ऐसा है कि अगर कोई न्यायाधीश इस प्रकार की स्थितियों में पाया जाए तो उस पर होने वाली कार्रवाई को सार्वजनिक नहीं किया जाता।

संत रामपाल जी महाराज और उनके अनुयायियों को झूठे केसों में फंसाया गया है।

संत रामपाल जी महाराज और अनुयायियों के विरुद्ध 16-17 अक्टूबर, 2018 को वही फैसला जज श्री देशराज चालिया जी ने सुनाया जो मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर चाहते थे। जज श्री देशराज चालिया स्वयं मानता है कि यह मुकदमा जघन्य अपराध की श्रेणी में नहीं आता। विचार करने की बात है कि जज साहब मानते हैं कि ये मुकदमा जघन्य अपराध नहीं है। फिर सरकार के दबाव में सज़ा जघन्य अपराध वाली कर दी कि :- धारा 302 और 120 के तहत प्रत्येक को जब तक मरेगा, कैद में रखा जाए और 1-1 लाख रूपये जुर्माना लिया जाए। यदि जुर्माना न भरे तो दो वर्ष की अतिरिक्त कैद काटेगा। कठिन कारावास दी जाती है। इन्हें कोई राहत न दी जाए यानि सरकार कैदियों को कोई सजा में माफी देती है, वह भी नहीं दी जाए। विवेचन :- इससे सिद्ध है कि जज साहब पर सरकार का इतना दबाव था कि वे अपना विवेक भी खो बैठे। जज साहब ने विचार नहीं किया कि जब व्यक्ति जेल में अंतिम श्वांस लेगा तो संसार से चला जाएगा। वह एक लाख रूपया क्यों देगा?
हरियाणा सरकार ने न्यायपालिका, न्यायाधीशों और न्याय को भले ही बिकाऊ बना दिया है परंतु परमात्मा की चक्की धीमी ज़रूर चलती है पर समय आने पर बिल्कुल महीन पीस देती है। समय का इंतजार भारी ज़रूर लगता है पर ठीक का समय आते ही सब कुछ स्पष्ट दिखाई देने लगता है। यहां अन्याय भी परमात्मा सहन कर रहे हैं और न्याय भी वही करेंगे।
संत रामपाल जी महाराज और उनके अनुयायियों के साथ हो रही हरियाणा सरकार की ज़्यादती की संपूर्ण जानकारी के लिए आज ही डाऊनलोड करें पुस्तक “सरासर अन्याय।”

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