World Aids Day 2021 (Hindi): विश्व एड्स दिवस पर जानिए क्या है एड्स का स्थाई इलाज़?

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Last Updated on 1 December 2021, 12:11 PM IST: World Aids Day in Hindi: हर व्यक्ति चाहता है कि उसे कोई बीमारी ना हो लेकिन जाने अनजाने में कई बीमारियां इस कदर खतरा बन कर आती हैं कि पूरी मानवता भयभीत हो जाती है। आज विश्व एड्स दिवस 2021 के अवसर पर हम बात कर रहे हैं भयानक बीमारी एड्स की और सत्य साधना रूपी कारगर औषधि से उसके समाधान की।

Table of Contents

क्या है विश्व एड्स दिवस?

संयुक्त राष्ट्र संघ (UN) के तत्वाधान में विश्व एड्स दिवस (World Aids Day in Hindi) प्रत्येक वर्ष 1 दिसंबर को मनाया जाता है। यह दुनिया भर के लोगों के लिए एचआईवी के खिलाफ लड़ाई में एकजुट होने, एचआईवी (HIV) से पीड़ित लोगों के लिए समर्थन प्रदर्शित करने और एड्स संबंधित बीमारी से मर चुके लोगों को याद करने का अवसर है। 1988 में स्थापित, विश्व एड्स दिवस को पूरे विश्व के लोग एकजुट होकर मनाते हैं।

एड्स किसे कहते हैं? (What is Aids)

एड्स का पूरा नाम (Full Form) है ‘एक्वायर्ड इम्यूनो डिफिशिएंसी सिंड्रोम।’ एड्स एचआईवी के कारण होता है जो मनुष्य के शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली पर प्रभाव डालता है। यह प्रतिरक्षा प्रणाली की टी कोशिकाओं पर हमला करता है। इस रोग को प्रथम बार वर्ष 1981 में मान्यता दी गई थी और 27 जुलाई 1982 को इसे एड्स के नाम से जाना गया। एड्स का सबसे पहला मामला साल 1959 में अफ्रीका के कांगो में पाया गया था और इससे ग्रस्त व्यक्ति की मौत हो गई थी। इसके बाद उस व्यक्ति के खून की जांच की गई तो पाया कि वह एड्स से पीड़ित था। वर्ष 1980 में यह बीमारी सबके सामने आई।

विश्व एड्स दिवस मनाने का क्या इतिहास रहा है? (History of World AIDS Day)

अगस्त 1987 में ‘जेम्स डब्ल्यू वन’ और ‘थॉमस मैटर’ नाम के दो व्यक्तियों ने सबसे पहले विश्व एड्स दिवस (World AIDS Day) की शुरूआत का कदम आगे बढ़ाया था। यह दोनों ही विश्व स्वास्थ्य संगठन (W.H.O.) के विश्व एड्स ग्लोबल कार्यक्रम के सार्वजनिक सूचना अधिकारी के रूप में जिनेवा व स्विजरलैंड में नियुक्त किये गए थे। उन्हीं के द्वारा विश्व स्वास्थ्य संगठन के ग्लोबल ऑन एड्स के डायरेक्टरेट (निदेशक) डॉक्टर जॉनाथन मनन (Jonathan Mann) के सामने यह सुझाव रखने पर और जोनाथन को यह सुझाव उचित लगने पर 1 दिसंबर 1988 को वर्ल्ड एड्स डे मनाने के लिए इस दिन को चुना गया। तभी से यह दिन विश्व एड्स दिवस (World Aids Day in Hindi) के रूप में मनाया जाने लगा।

वर्ष 2021 में विश्व एड्स दिवस की विषयवस्तु (Theme) क्या है?

प्रत्येक वर्ष  विश्व एड्स दिवस के प्रति जागरूक करने के लिए अभियान चलाए जाते हैं। जिसके लिए प्रत्येक वर्ष अलग-अलग विषय होते हैं। इस वर्ष, विश्व एड्स दिवस की विषयवस्तु “असमानताओं को समाप्त करें, एड्स खत्म करें (End inequalities, end AIDS, end Pandemics)” है। यह थीम हमें वैश्विक स्तर पर एड्स के खिलाफ एकजुट होने और अपनी जिम्मेदारियों को एक समूह में बांटने पर केंद्रित है, क्योंकि हम इस बीमारी से एकजुट होकर और अपनी जिम्मेदारियों को सही तरीके से निभाते हुए ही हरा सकते हैं। तो वहीँ 1988 में पहले विश्व एड्स दिवस की विषयवस्तु (Theme) “Communication (संचार)” थी। 

विश्व एड्स दिवस कैसे मनाया जाता है? 

विश्व एड्स दिवस (World Aids Day in Hindi) दुनिया भर में एचआईवी संक्रमित लोगों के साथ एकजुटता दिखाने का अवसर है, अधिकांश लोग इस दिन जागरूकता के लिए लाल रिबन (Red Ribbon) पहनते हैं, यह लाल रिबन ऑनलाइन स्टोर या किसी भी केमिस्ट स्टोर से खरीदे जा सकता हैं। इस साल डिजिटल रेड रिबन भी उपलब्ध हैं। 

  • प्रति वर्ष संयुक्त राष्ट्र की एजेंसियां, सरकारें एवं नागरिक समाज में एचआईवी से संबंधित विशिष्ट विषयों पर चलाए जा रहे अभियानों में शामिल होते हैं।
  • एचआईवी से ग्रस्त लोग अपने जीवन के जरूरी मुद्दों पर अपनी आवाज उठाते हैं । 
  • दुनिया भर में इस दिन इस संक्रमण के प्रति जागरूकता बढ़ाने वाली गतिविधियां की जाती है।

लोग लाल रिबन लगाकर एड्स संक्रमितों का कैसे बढ़ाते हैं उत्साह?

अमेरिकी सैनिकों के सम्मान में पीले रिबन प्रर्दशन से प्रेरित होकर अमेरिका के प्रसिद्ध कलाकारों ने एचआईवी के साथ लड़ने वाले लोगों के लिए समर्थन और एकजुटता के प्रतीक और एड्स संबंधित बीमारियों से मरने वालों को याद करने के लिए एक लाल रिबन प्रर्दशन करने के लिए चुना। जिसे अब वैश्विक स्तर पर पूरे विश्व के लोग पिन कर अपने कपड़ों में लगाते हैं।

एड्स दिवस का महत्व क्या है? (Importance of World Aids Day in Hindi)

नए एचआईवी संक्रमणों को रोकने के लिए वैश्विक प्रयासों का जश्न मनाने, एचआईवी के प्रति लोगों को जागरूक करने और ज्ञान बढ़ाने के साथ में एचआईवी पॉजिटिव के साथ रहने वालों का समर्थन जाहिर करने का भी यह दिन एक अवसर है।

वर्तमान में एड्स की वैश्विक स्थिति

  • इस वायरस की पहचान 1984 में की जा चुकी थी, लेकिन इसके बावजूद भी अब तक एड्स से 3 करोड़ 63 लाख से अधिक लोग अपनी जान गवां चुके हैं
  • पूरे विश्व में प्रतिदिन लगभग 14,000 लोग एच.आई.वी. के शिकार होते हैं।
  • वर्तमान में लगभग 3 करोड़ 77 लाख करीब (करीब 37 मिलियन) लोग एचआईवी के साथ जीवन जी रहे हैं।
  • वर्ष 2020 में तकरीबन 15 लाख लोग एचआईवी से नए संक्रमित हुए।
  • एचआईवी संक्रमण के जोखिम में रहने वाले सभी लोगों तक रोकथाम और उपचार की सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराईं जा सकी है।
  • 680000  से ज्यादा लोग एड्स से संबंधित बीमारियों से मर चुके हैं।

World Aids Day in India: भारत में एड्स की स्थिति

विश्व एड्स दिवस (World Aids Day in Hindi): 2017 के आंकड़ों के अनुसार भारत में एचआईवी संक्रमितों की संख्या 21 लाख थी जिनमें 8.8 लाख की संख्या के साथ 42% महिलाएं संक्रमित थी। 2017 में 88000 नए एचआईवी संक्रमित हुए जबकि 69000 की एड्स से मृत्यु हुई। फिलहाल भारत में 21.40 लाख से ज़्यादा एड्स मरीज़ (AIDS Patients) दर्ज हैं लेकिन यूएनएड्स के एक अनुमान के मुताबिक भारत में एड्स पीड़ितों की संख्या 30 लाख तक होना मुमकिन है। हालांकि पिछले कुछ सालों में एड्स के प्रति जागरूकता अभियानों (Awareness Programs) के ​चलते इस संक्रमण (Infection) पर कुछ हद तक काबू पाया गया है लेकिन कुछ हद तक चुनौतियाँ अब भी बरकरार हैं।

■ यह भी पढ़ें: World Cancer Day 2020 (Hindi) पर जानिए क्या है कैंसर का इलाज? 

एड्स और एच.आई.वी में क्या अंतर है?

एड्स (AIDS) अर्थात ‘एक्वायर्ड इम्यूनो डेफिसिएंशी सिंड्रोम’ (Acquired Immune Deficiency Syndrome) की बीमारी HIV (Human Immunodeficiency Virus) नाम के अतिसूक्ष्म रोग विषाणु के संक्रमण के कारण होती है। एड्स द्वारा अन्य रोगों से लड़ने की प्रतिरोधक क्षमता घटने के कारण अवसरवादी रोग फुफ्फुस प्रदाह, टीबी, कर्क रोग सहज हो जाते हैं जिनका इलाज कठिन होने से रोगी की मौत तक हो सकती है।

World Aids Day: एचआईवी कैसे फैलता है?

एचआईवी फैलने के बहुत से कारण हो सकते हैं, जिनमे से कुछ निम्नलिखित है:

  1. संक्रमित खून आदान प्रदान से या संक्रमित सुई के पुनः उपयोग से 
  2. गर्भ धारण करते समय, प्रसव या स्तनपान द्वारा मां से बच्चों तक
  3. गुदा, योनिक या मौखिक मैथुन द्वारा
  4. शरीर के संक्रमित तरल पदार्थ या ऊतकों द्वारा
  5. एच. आई. वी संक्रमित रक्त के साथ दूषित होने के कारण लार, थूक, आँसू, पसीना, नाक स्राव, मल मूत्र, या उल्टी एच. आई. वी. संक्रमित कर सकते हैं

एड्स कैसे विकसित होता है?

एड्स दो प्रकार से विकसित हो सकता है। एक, जब CD4+ टी कोशिकाओं की संख्या 200 कोशिकाएं प्रति μL से कम हो जाए। दूसरा, एचआईवी संक्रमण के कारण कोई रोग व्यक्ति के शरीर में उत्पन्न हो जाता है। यदि समय से एचआईवी संक्रमित का विशिष्ट उपचार नहीं किया जाए तो दस साल में आधे लोगों में एड्स विकसित हो सकता है।

World Aids Day पर जानिए एड्स की पहचान

न्युमोसाईतिस निमोनिया, भूख में कमी, वजन कम होना, मांसपेशियों में खिचाव, थकान, और ग्रास नली और श्वास नलिका में संक्रमण होना एड्स की पहचान हो सकते हैं। एड्स के कारण बैक्टीरिया, वायरस, कवक और परजीवी संक्रमण भी हो सकते हैं।

एड्स से जुड़े रोचक तथ्य (Interesting facts about AIDS)

  • एड्स विषय पर आधारित सबसे पहली हॉलीवुड फिल्म ‘एंड द बैंड प्लेन ऑन’ बनायीं गयी था
  • यदि 60 डिग्री सेल्सियस से ऊपर तापमान होता है तो एचआईवी के विषाणु मारे जा सकते है।
  • वर्ष 1986 में मद्रास में भारत में सबसे पहला एड्स का मामला सामने आया था।

एड्स संबंधित जांचें कौन सी है?

  • एलीसा जांच
  • वेस्टर्न ब्लॉट जांच
  • एचआईवी पी-24 ऐंटीजेन (पी.सी.आर.) जांच
  • सीडी-4 काउंट जांच

एड्स को कैसे ठीक करें?

हम यह तो नहीं कहते कि एड्स का उपचार संभव नहीं है, परन्तु चिकित्सा विज्ञान अब तक इसे जड़ से खत्म करने की दवा बनाने में सफल नहीं हो पाया है। आइये जानते हैं एड्स के रोकथाम के उपायों के बारे में।

मनुष्य के शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने से एड्स नियंत्रित किया जा सकता है। आस पास वातावरण में उपस्थित जीव संक्रमण के कारक के रूप में शरीर के हर अंग प्रणाली को प्रभावित करते हैं। जरूरत है जागरूक होने की कि किस तरह से यह रोग फैलता है। एड्स होने से बचना ही एड्स का सर्वोत्तम उपचार है।

क्या समाधान है एड्स जैसी खतरनाक बीमारियों का?

पृथ्वी पर अनेक प्रकार के कष्टप्रद रोगों से मानव जूझता रहा है, एक बीमारी का समाधान खोजता है तो दूसरी आन खड़ी होती है। एक के बाद एक विकराल बीमारियां या संक्रमण मनुष्य को मौत के मुंह में डाल देते हैं। शास्त्रों के अनुसार मनुष्य को जो भी कष्ट होते हैं उनका आधार उसके प्रारब्ध कर्म ही होते हैं। कर्म के अनुसार ही मनुष्य इन कष्टों को भोगने के लिए विवश होता है और ना चाहते हुए भी काल का ग्रास बन जाता है। वेदों में प्रमाण है कि पूर्ण परमात्मा अपने सत्य साधक को पूर्ण संत द्वारा दी गई सत्य साधना कराता है और उसे किसी भी असाध्य रोग से मुक्त कर देता है। पूर्ण परमात्मा आवश्यकतानुसार सत्य साधक की आयु भी बढ़ा सकता है।

एकमात्र तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज से सत्य साधना लेकर कष्ट मुक्त हों

वर्तमान में पूर्ण परमात्मा की सत्य साधना एकमात्र तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज सतलोक आश्रम बरवाला जिला हिसार हरियाणा वाले बता रहे हैं । उनके द्वारा प्रदान की जाने वाली साधना शास्त्रों के अनुसार है। जिससे साधक के प्रारब्ध कर्म भी कट रहे हैं और बड़े बड़े असाध्य रोग एड्स, कैंसर इत्यादि केवल सत भक्ति करने मात्र से ही ठीक हो रहे हैं। पूर्ण परमात्मा कबीर साहब कहते हैं कि उस संत की शरण में जाना चाहिए जो “भाग्य में सूली हो तो उसे भी कांटे में बदल दे” अर्थात सभी कष्टों को टाल दे। ।सत्य साधना ज्ञान प्राप्त करने के लिए पढ़े पवित्र पुस्तक “जीने की राह” साथ ही सुने साधना चैनल पर 7:30 सायं सत्संग।

कबीर, संत शरण में आने से, आई टलै बला।

जै भाग्य में सूली हो, कांटे में टल जाय। |

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