बाढ़ त्रासदी के बीच संत रामपाल जी महाराज ने सिंधड़ गांव को दी नई उम्मीद

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हिसार, हरियाणा: हरियाणा के हिसार जिले में स्थित बरवाला तहसील के सिंधड़ गांव में हाल ही में आई विनाशकारी बाढ़ ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया था। 29 अगस्त को हुई मूसलाधार बारिश ने खेतों और घरों को जलमग्न कर दिया, जिससे किसानों की नरमा और धान की फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गईं। कई परिवार बेघर हो गए और पशुओं के लिए चारे का संकट खड़ा हो गया। इस गंभीर आपदा के बीच, जब सरकारी मदद पहुंचने में समय लग रहा था, तब संत रामपाल जी महाराज एक देवदूत बनकर सामने आए, उन्होंने 24 घंटे के भीतर गांव को आवश्यक राहत सामग्री उपलब्ध कराकर एक नई आशा जगाई।

सिंधड़ गांव पिछले कई दिनों से बाढ़ की चपेट में था। खेतों से लेकर आवासीय क्षेत्रों तक हर जगह पानी ही पानी था।

गांव के सरपंच सुंदर सिंह के अनुसार, लगभग 80% खेतीबाड़ी पानी में डूब चुकी थी। गांव की महात्मा गांधी कॉलोनी और खेतों की ढाणियां भी जलमग्न थीं। ग्रामीण प्रशासन के दर-दर भटकते रहे, मोटरों और पाइपों की व्यवस्था के लिए प्रयास करते रहे, लेकिन समय पर कोई ठोस सहायता नहीं मिल पाई।

सरपंच सुंदर सिंह ने कहा:


“पंचायत की जो छोटी-मोटी इनकम थी, उसका सहारा लगा रहे थे, लेकिन वह पर्याप्त नहीं था। सरकार से कुछ छोटी-मोटी मदद मिली, पर उससे बात नहीं बन रही थी।”

पूर्व सरपंच कर्मवीर और ग्रामीण बलदेव सिंह ने भी बाढ़ से हुए नुकसान को भयावह बताया। फसलें पूरी तरह से तबाह हो गई थीं और जनजीवन संकट में था। स्कूल और डिस्पेंसरियां भी बंद थीं, जिससे बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं पर बुरा असर पड़ा।

निराशा के माहौल में, सिंधड़ गांव के सरपंच और पंचों को पास के गांवों से संत रामपाल जी महाराज की ‘अन्नपूर्णा मुहिम’ के बारे में जानकारी मिली। यह मुहिम संत रामपाल जी महाराज द्वारा बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में असहाय परिवारों को सहयोग प्रदान करने के उद्देश्य से चलाई जा रही थी।

सिंधड़ ग्राम पंचायत ने तुरंत एक प्रार्थना पत्र तैयार किया, जिसमें 20,000 फीट 8 इंची पाइप, चार 15 HP मोटरें और 1,500 फीट केबल की मांग की गई। यह प्रार्थना पत्र संत रामपाल जी महाराज के भक्तों को सौंपा गया, जिन्होंने इसे तुरंत गुरुदेव तक पहुंचाने का आश्वासन दिया।

ग्राम पंचायत सिंधड़ द्वारा प्रार्थना पत्र दिए जाने के मात्र 24 घंटे के भीतर ही, संत रामपाल जी महाराज ने तत्काल कार्रवाई के आदेश दिए। गुरुदेव के अनुयायियों द्वारा ट्रकों का बड़ा काफिला तैयार किया गया, जो पाइपों और मोटरों से लदा हुआ सिंधड़ गांव पहुंचा।

गांव की मांग के अनुसार सामग्री उपलब्ध कराई गई:

24 घंटे में पहुंची राहत: सिंधड़ गांव में आशा की किरण
  • 20,000 फीट 8 इंची पाइप
  • चार 15 HP मोटरें
  • 1,500 फीट वायर्स और स्टार्टर

इस त्वरित सहायता से गांव में नई उम्मीद जगी।

पंच संजय कुमार ने कहा:


“यह मदद उनके लिए केवल राहत नहीं बल्कि नई जिंदगी का सहारा है। सरकार ने भी कुछ मदद की, लेकिन महाराज जी ने एकदम से जिस हिसाब से हम चाह रहे थे, वैसी मदद करी।”

युवा साथी विकास ने कहा:


“इसके लिए तो कुछ शब्द ही नहीं हैं, पूरा गांव रामपाल जी महाराज का दिल से धन्यवाद करता है।”

ग्रामीणों ने इस सहायता को भगवान की कृपा बताया और इसे “कैंसर की बीमारी” को ठीक करने जैसी मदद कहा।

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‘अन्नपूर्णा मुहिम’ केवल सिंधड़ गांव तक सीमित नहीं । हरियाणा के कई अन्य बाढ़ प्रभावित गांवों तक भी इसकी सहायता पहुंची।

कुछ उदाहरण:

  • मंडाना: 10,000 फीट पाइप और तीन 20 HP मोटरें
  • खानपुर (हिसार): 12,000 फीट पाइप, पांच 15 HP मोटरें और 1,000 फीट तार
  • सरसौद (हिसार): 3,500 फीट पाइप और चार 20 HP मोटरें
  • खेदड़ (हिसार): 44,000 फीट पाइप, पांच 15 HP मोटरें और 600 फीट तार
  • ढाणी प्रेमनगर (हिसार): 4,500 फीट पाइप और एक 10 HP मोटर
  • गुराना: 16,500 फीट पाइप, छह 15 HP मोटरें और चार सबमर्सिबल पंप
  • बधावड़: प्रार्थना के 12 घंटे में 300 फीट पाइप, पांच 15 HP मोटरें और दो सबमर्सिबल पंप
  • ढाड़: 7,000 फीट पाइप और छह 15 HP मोटरें
  • लितानी: 15,000 फीट पाइप और दो 20 HP मोटरें
  • ढाणी खान बहादुर: 12,000 फीट पाइप और तीन 10 HP मोटरें
  • बिठमड़ा: 4,000 फीट पाइप, छह 20 HP मोटरें और 1,000 फीट तार
  • ज्ञानपुरा: 20,000 फीट पाइप और पांच 20 HP मोटरें
  • ब्यानाखेड़ा: 15,400 फीट पाइप और चार 15 HP मोटरें
  • सुरेवाला: 9,000 फीट पाइप, दो 20 HP मोटरें और 500 फीट तार
  • नेहला (फतेहाबाद): 15,400 फीट पाइप, दो मोटरें, 600 फीट केबल और दो सबमर्सिबल पंप
  • भीखेवाला (हिसार): 3,000 फीट पाइप और आठ 10 HP मोटरें
  • दौलतपुर (हिसार): 27,000 फीट पाइप और तीन 15 HP मोटरें
  • मतलोड़ा (हिसार): 35,000 फीट पाइप और चार 15 HP मोटरें

मोटरों को चलाने के लिए आवश्यक स्टार्टर, तार और अन्य सामग्री भी दी गई।

यह सहायता केवल हरियाणा तक सीमित नहीं रही, बल्कि पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर जैसे राज्यों में भी खाद्य सामग्री और अन्य आवश्यक सहयोग पहुंचाया गया।

संत रामपाल जी महाराज ने राहत सामग्री के साथ एक विशेष निवेदन पत्र भी भेजा।

पत्र में कहा गया:


“सामान चाहे कितना भी लगे, लेकिन गांव से पानी निकलना चाहिए। यदि समय पर पानी नहीं निकला और बिजाई नहीं हुई, तो भविष्य में कोई मदद नहीं दी जाएगी।”

ग्राम पंचायत सिंधड़ ने इस निवेदन को स्वीकार किया।

सरपंच सुंदर सिंह ने आश्वासन दिया:


“मैं संत रामपाल जी महाराज को पूरा आश्वासन देता हूं, पूरे गांव की तरफ से जो भी सामग्री थी, उसको सही तरीके से यूज़ करेंगे और चाहे कितना भी टाइम लगे, लेकिन बिजाई से पहले इस धरती को बिजाई लायक बना देंगे।”

सिंधड़ गांव की यह कहानी एक अद्वितीय मानवीय सेवा का प्रतीक है। संत रामपाल जी महाराज ने बाढ़ की भयावहता के बीच एक मजबूत सहारा प्रदान किया।

24 घंटे के भीतर लाखों रुपये की राहत सामग्री पहुंचना और गुरुदेव का समाधान-उन्मुख दृष्टिकोण, दोनों ने इसे असाधारण बना दिया। यह केवल भौतिक सहायता नहीं थी, बल्कि मानसिक सहारा भी था, जिसने निराशा को आशा में बदल दिया। ग्रामवासियों ने संत रामपाल जी महाराज को “भगवान का रूप” और “राम उतर के आ गया” कहकर संबोधित किया। यह 

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