राजस्थान के ग्रामीण अंचलों में भीषण गर्मी, घटते जलस्तर और चारे के अभाव के चलते गौशालाओं के संचालन में गंभीर आर्थिक और भौतिक संकट उत्पन्न हो गया है। इसी पृष्ठभूमि में हनुमानगढ़ और चूरू जिलों की प्रमुख गौशाला प्रबंध समितियों तथा ग्रामीण प्रतिनिधियों ने सतलोक आश्रम पहुंचकर जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज का नागरिक अभिनंदन किया। इस दौरान प्रतिनिधियों ने गोवंश के जीवन रक्षा हेतु आवश्यक चारा, लंबी दूरी की पेयजल पाइपलाइन, ट्यूबवेल और कृषि कार्य के लिए ट्रैक्टर आदि संसाधनों की गुहार लगाई। धामड़ गांव, रोहतक से पंचों, बुजुर्गों और ग्रामीण प्रतिनिधियों का एक शिष्टमंडल भी सतलोक आश्रम पहुंचा और गांव की सार्वजनिक आवश्यकताओं को सामने रखा। संत रामपाल जी महाराज ने सभी मांगों पर तत्परता से संज्ञान लेते हुए एक सप्ताह के भीतर आपूर्ति और स्थायी समाधान का आश्वासन देकर हजारों बेसहारा गोवंश के लिए जीवनदान सुनिश्चित किया है।
खुईयां गौशाला: सूखे चारे और पेयजल संकट का स्थायी समाधान
हनुमानगढ़ जिले के खुईयां गांव से पहुंचे गौशाला प्रधान और ग्रामीणों ने आश्रम में संत रामपाल जी महाराज के समक्ष अपनी व्यथा रखी। प्रधान ने बताया कि उनकी गौशाला में इस समय संसाधनों की भीषण कमी है। सबसे पहली और गंभीर समस्या गोवंश के लिए सूखे चारे की अनुपलब्धता है। दूसरी मुख्य समस्या पीने के पानी की है, जिसके लिए ग्रामीणों को मीलों दूर से पानी ढोना पड़ता है। इसके निवारण हेतु उन्होंने लंबी पाइपलाइन बिछाने का आग्रह किया। इसके साथ ही सामग्री और चारा लाने-ले जाने के लिए एक ट्रैक्टर की दरकार जताई। संत रामपाल जी महाराज ने उनकी बात को धैर्यपूर्वक सुना और लिखित मांग पत्र प्राप्त करते हुए आश्वस्त किया कि राजस्थान के इस क्षेत्र में एक सप्ताह के भीतर आवश्यक चारा और अन्य साधन भिजवा दिए जाएंगे।
रैयाटुण्डा गौशाला: एक दशक पुरानी सेवा को मिला जीवनदान
चूरू जिले के तारानगर तहसील स्थित रैयाटुण्डा गांव की गौशाला प्रबंध समिति के प्रधान और ग्रामीणों ने आश्रम पहुंचकर अपनी बात रखी। समिति के सदस्यों ने बताया कि वे वर्ष 2013 से निरंतर गौशाला का संचालन कर रहे हैं। प्रारंभ में यहां लगभग 1,000 गायों की देखरेख होती थी, लेकिन निरंतर सूखे और चारे की अनुपलब्धता के कारण वर्तमान में केवल 725 गोवंश ही शेष रह गया है। समिति ने स्पष्ट किया कि आर्थिक तंगी के कारण अब वे दैनिक भरण-पोषण करने में असमर्थ हो रहे हैं। संत रामपाल जी महाराज ने समिति द्वारा प्रस्तुत मांग पत्र को बिना विलंब स्वीकृत करते हुए स्पष्ट शब्दों में कहा कि गौशाला के लिए चारा और आवश्यक संसाधन तत्काल भेजे जाएंगे, जिससे उपस्थित ग्रामीणों में हर्ष की लहर दौड़ गई।
रासलाना गौशाला: 500 क्विंटल तूड़ी व पाइपलाइन के बाद अब मिला नया संबल
हनुमानगढ़ जिले के रासलाना (दीपसलाना) से गौशाला अध्यक्ष सरवन सिंह के नेतृत्व में पहुंचे दल ने संत रामपाल जी महाराज का विशेष आभार व्यक्त किया। सरवन सिंह ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि पूर्व में जब उनकी गौशाला भुखमरी और जल संकट के मुहाने पर थी, तब संत रामपाल जी महाराज ने 500 क्विंटल तूड़ी (सूखा चारा), 1.5 किलोमीटर लंबी 8-इंची पेयजल पाइपलाइन और ट्यूबवेल बोरिंग करवाकर गौशाला को पुनर्जीवित किया था। उन्होंने कहा कि अनेक तीर्थों और धामों में जाने के बाद भी जो आत्मिक शांति और वास्तविक सहयोग उन्हें यहां मिला, वह अद्वितीय है। इस अवसर पर समिति ने गौशाला की पथरीली व सख्त जमीन पर चारा उत्पादन हेतु 60 एचपी के भारी ट्रैक्टर की मांग रखी, जिस पर संत जी ने सकारात्मक व्यवस्था का भरोसा दिलाया।
धामड़ (रोहतक) के ग्रामीणों की समस्याओं का हुआ समाधान
ग्रामीण क्षेत्रों में मूलभूत नागरिक सुविधाओं और युवाओं के लिए शैक्षणिक संसाधनों की उपलब्धता आज भी एक महत्वपूर्ण आवश्यकता बनी हुई है। इसी कड़ी में हरियाणा के रोहतक जिले के ऐतिहासिक गांव धामड़ से सरपंच प्रतिनिधि, निर्वाचित पंचों और सैकड़ों ग्रामीणों का एक विशाल प्रतिनिधिमंडल सतलोक आश्रम पहुंचा। ग्रामीणों ने जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज का आदरपूर्वक अभिनंदन किया और गांव में जनहित से जुड़ी प्रमुख समस्याओं को दूर करने के लिए लिखित मांग पत्र सौंपा। ग्रामीणों की ओर से सार्वजनिक स्थानों पर स्वच्छ व शीतल जल हेतु वाटर कूलर लगवाने तथा युवाओं की प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए एक सुसज्जित ग्राम्य लाइब्रेरी (पुस्तकालय) स्थापित करने का प्रस्ताव रखा गया। संत रामपाल जी महाराज ने समाज कल्याण और युवा उत्थान से जुड़े इन दोनों प्रस्तावों को तुरंत स्वीकृति प्रदान कर गांववासियों को बड़ी सौगात दी।
संत रामपाल जी महाराज का यह परोपकारी कदम केवल भौतिक सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कबीर साहेब के उस शाश्वत तत्वज्ञान (सतज्ञान) का प्रत्यक्ष व्यावहारिक स्वरूप है, जो सदियों से मानव जाति को प्राणी मात्र पर दया करने की सीख देता रहा है।
संत रामपाल जी महाराज अपने सत्संगों में निरंतर समझाते हैं कि 84 लाख योनियों में भटकने के उपरांत मनुष्य जन्म केवल आत्म-कल्याण और भक्ति के लिए प्राप्त होता है। जब तक मनुष्य के हृदय में मूक और बेजुबान पशु-पक्षियों के प्रति करुणा का भाव जागृत नहीं होता, तब तक परमात्मा की सच्ची भक्ति फलीभूत नहीं हो सकती। संत जी स्पष्ट करते हैं कि गाय अथवा किसी भी अन्य प्राणी को कष्ट में देखना और सामर्थ्य होते हुए भी उसकी अनदेखी करना मनुष्यता के सिद्धांत के विपरीत है।
सच्चा संत वही होता है जो केवल शब्दों से उपदेश न दे, बल्कि धरातल पर उतरकर दुखियों, पीड़ितों और असहाय जीवों का संताप दूर करे। आज जब अनेक संस्थाएं केवल दिखावे तक सीमित रह जाती हैं, तब सतलोक आश्रम द्वारा बिना किसी भेदभाव के राजस्थान के सुदूर गांवों में सैकड़ों क्विंटल चारा, पाइपलाइन और ट्यूबवेल जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराना यह सिद्ध करता है कि पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब का तत्वज्ञान केवल पोथियों का विषय नहीं, अपितु जीवन जीने और विश्व कल्याण का व्यावहारिक विधान है।



