संत रामपाल जी महाराज ने हरियाणा के हांसी स्थित गांव बड़छप्पर में दशकों पुरानी पेयजल समस्या का किया स्थायी समाधान

Published on

spot_img

हरियाणा के जिला हांसी अंतर्गत तहसील बांस के गांव बड़छप्पर के निवासी पिछले तीन दशकों से गंभीर पेयजल संकट का सामना कर रहे थे। वर्ष 1995 में आई भीषण बाढ़ के बाद से गांव का भूमिगत जल दूषित, अत्यधिक टीडीएस युक्त और खारा हो गया था। स्थानीय डिग्गी और नलों में सीवर व सेम का बदबूदार पानी मिलने के कारण यह पीने योग्य नहीं बचा था। 19 जून 2026 को जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (Public Health Engineering Department) की प्रयोगशाला जांच में भी गांव का पानी आधिकारिक तौर पर पीने के लिए अनुपयुक्त पाया गया।

विभिन्न प्रशासनिक स्तरों पर लंबे समय तक कोई ठोस राहत न मिलने के बाद, गांव की पंचायत और ग्रामीणों ने संत रामपाल जी महाराज के धनाना धाम स्थित दरबार में उपस्थित होकर अपनी व्यथा रखी और स्थायी समाधान की प्रार्थना की। संत रामपाल जी महाराज ने ग्रामीणों की इस गंभीर समस्या को तुरंत स्वीकार करते हुए मौके पर तकनीकी टीम भेजकर परियोजना को स्वीकृति प्रदान की।

गांव बड़छप्पर में जल संकट की पृष्ठभूमि और ग्रामीणों की दैनिक चुनौतियां

गांव बड़छप्पर में स्वच्छ पानी का कोई साधन न होने के कारण ग्रामीणों को प्रतिदिन करीब 3 किलोमीटर दूर स्थित गांव मूला के निजी नलकूपों पर निर्भर रहना पड़ता था। जिन परिवारों के पास मोटरसाइकिल या साइकिल थी, वे बर्तनों और डिब्बों में दूर से पानी ढोकर लाते थे। साधनहीन परिवारों, विशेषकर बुजुर्गों और महिलाओं को अत्यंत कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। दूषित पानी के निरंतर उपयोग से छोटे बच्चों में बीमारियां फैल रही थीं।

Also Read: संत रामपाल जी महाराज ने चरण 2 में हांसी के गांव कुंभा हेतु भेजी राहत सामग्री

स्थानीय निवासियों और पंचायत प्रतिनिधियों के अनुसार, पिछले 20 से 30 वर्षों से पूरा गांव इसी विकट परिस्थिति में जी रहा था और कई पीढ़ियां स्वच्छ जल से वंचित थीं।

संत रामपाल जी महाराज के निर्देश पर तकनीकी सर्वे और परियोजना की रूपरेखा

ग्राम पंचायत द्वारा प्रार्थना प्रस्तुत करने के उपरांत, संत रामपाल जी महाराज के आदेश से एक तकनीकी सर्वे टीम गांव बड़छप्पर पहुंची। टीम ने ग्राम पंचायत द्वारा उपलब्ध करवाई गई सरकारी भूमि, स्थानीय भूजल स्तर और पानी की जांच रिपोर्ट का गहन विश्लेषण किया। सर्वे के आधार पर संत रामपाल जी महाराज ने गांव के लिए एक अत्याधुनिक और सुव्यवस्थित शुद्ध पेयजल संयंत्र स्थापित करने की संपूर्ण स्वीकृति प्रदान की।

स्वीकृत पेयजल संयंत्र की तकनीकी विशेषताएं

घटक (Component)तकनीकी विवरण (Technical Specification)उद्देश्य / उपयोग (Purpose)
बोरवेल (Borewell)10 इंच व्यास, 200 से 300 फुट गहराईभूमिगत जल निष्कर्षण
सबमर्सिबल मोटर10 हॉर्स पावर (HP)निर्बाध जल आपूर्ति संचालन
RO प्लांट क्षमता2000 लीटर प्रति घंटा (LPH)जल शुद्धिकरण एवं टीडीएस नियंत्रण
स्टोरेज टैंक5000 लीटर क्षमताशुद्ध जल का संग्रहण
संयंत्र कक्ष (Plant Room)लगभग 10 × 20 फीट का पक्का निर्माणमशीनरी एवं सिस्टम का संरक्षण

परियोजना का शुभारंभ और स्थानीय निवासियों की प्रतिक्रिया

संत रामपाल जी महाराज के आदेशानुसार भारी बोरिंग मशीनरी और तकनीकी दल गांव बड़छप्पर पहुंचे और बोरवेल खुदाई का कार्य शुरू किया गया। कार्य की शुरुआत पर गांव में मंगलाचरण का पाठ हुआ तथा ग्रामीणों ने मिठाइयां और पकौड़े बांटकर अपनी खुशी प्रकट की।

  • सरपंच प्रतिनिधि समुंदर सिंह: उन्होंने बताया कि वर्षों की मांग और लैब परीक्षण में पानी फेल होने के बाद संत रामपाल जी महाराज ने गांव को यह जीवनदायिनी व्यवस्था प्रदान की है, जिसके लिए समस्त ग्रामवासी सदैव उनके ऋणी रहेंगे।
  • ग्रामीण अजमेर दास: उन्होंने कहा कि 1995 से चली आ रही विकट समस्या का निवारण संत रामपाल जी महाराज के परोपकार से ही संभव हो पाया है।
  • महिला ग्रामीण: उन्होंने व्यक्त किया कि दूर-दराज के गांवों से सिर पर पानी ढोने की मजबूरी और बच्चों की बीमारियों से अब हमेशा के लिए मुक्ति मिल गई है।

संत रामपाल जी महाराज की दया और परोपकार से बड़छप्पर को मिला नया जीवन

संत रामपाल जी महाराज बिना किसी भेदभाव के संपूर्ण मानव समाज के कल्याण हेतु निरंतर ऐसे ऐतिहासिक जनकल्याणकारी कार्यों का संचालन कर रहे हैं। गांव बड़छप्पर में शुद्ध पेयजल की यह व्यापक व्यवस्था संत रामपाल जी महाराज के असीम परोपकार, करुणा और जनकल्याण के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता का प्रत्यक्ष प्रमाण है। 

जहां दशकों तक सरकारी महकमे और कोई भी संस्था ग्रामीणों को स्वच्छ जल नहीं दे सकी, वहां संत रामपाल जी महाराज ने मात्र एक प्रार्थना पर संपूर्ण लागत और अत्याधुनिक संयंत्र उपलब्ध करवाकर गांव के हर परिवार को स्वास्थ्य, सम्मान और स्थायी समाधान का उपहार दिया है। ग्रामीण संत रामपाल जी महाराज की इस महती अनुकंपा के लिए उनका कोटि-कोटि आभार और वंदन व्यक्त कर रहे हैं।

Latest articles

गोगटिया बागवातान की गोपाला गौशाला में संत रामपाल जी महाराज की बड़ी सौगात

राजस्थान के चूरू जिले में स्थित गाँव गोगटिया बागवातान की गोपाला गौशाला में बेजुबान...

Haryana Day 2026: हरियाणा दिवस पर जाने कैसे पड़ा हरियाणा का नाम हरियाणा?

हरियाणा दिवस (Haryana Day 2026) हरियाणा वासियों के लिए किसी त्योहार से कम नहीं...

World Vegan Day 2026: Know Why Turning Vegan Is Important 

Every year on November 1st, vegans around the world celebrate World Vegan Day. Louise Wallis, then-Chair of The Vegan Society in the United Kingdom, founded the event in 1994 to commemorate the organization's fiftieth anniversary. In honor of World Vegan Day, here is an overview of how veganism is becoming a trend in the entire world. 
spot_img

More like this

गोगटिया बागवातान की गोपाला गौशाला में संत रामपाल जी महाराज की बड़ी सौगात

राजस्थान के चूरू जिले में स्थित गाँव गोगटिया बागवातान की गोपाला गौशाला में बेजुबान...

Haryana Day 2026: हरियाणा दिवस पर जाने कैसे पड़ा हरियाणा का नाम हरियाणा?

हरियाणा दिवस (Haryana Day 2026) हरियाणा वासियों के लिए किसी त्योहार से कम नहीं...