रोहतक के मदीना गांव में पहलवानों के सपनों को मिलेगी नई उड़ान, संत रामपाल जी महाराज के आशीर्वाद से इंडोर कुश्ती स्टेडियम का निर्माण शुरू

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हरियाणा के रोहतक जिले में हिसार रोड पर मदीना टोल के पास स्थित शिव शंकर कुश्ती अखाड़ा स्पोर्ट्स एकेडमी में 16 अक्टूबर को एक नई उम्मीद की शुरुआत हुई। यहां वर्षों से कुश्ती का अभ्यास कर रहे बच्चों और पहलवानों के लिए इंडोर स्टेडियम के निर्माण कार्य का शुभारंभ किया गया। जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज के आशीर्वाद से शुरू हुई इस पहल का उद्देश्य खिलाड़ियों को बेहतर अभ्यास सुविधाएं उपलब्ध कराना है, ताकि बारिश, खराब मौसम और जगह की कमी के कारण उनकी मेहनत प्रभावित न हो।

इस अवसर पर आसपास के गांवों से आए सरपंच, पंचायत प्रतिनिधि, बुजुर्ग, ग्रामीण, पहलवान और खेल प्रेमी मौजूद रहे। अखाड़े में उत्साह का माहौल था। कहीं ढोल-नगाड़ों के साथ स्वागत की तैयारी थी, तो कहीं युवा पहलवान इस उम्मीद से भरे नजर आए कि अब उन्हें अपने खेल को निखारने के लिए पहले से बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी।

प्रस्तावित इंडोर स्टेडियम का आकार 182 गुणा 62 फीट बताया गया। इसमें 40 गुणा 120 फीट का कुश्ती मैट लगाने की भी योजना है। अखाड़ा संचालक और खिलाड़ियों के अनुसार, इस सुविधा से एक साथ बड़ी संख्या में पहलवान अभ्यास कर सकेंगे। यहां करीब 150 से 200 बच्चों के नियमित अभ्यास करने की बात सामने आई। यह पहल केवल एक भवन के निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि उन युवाओं के सपनों से जुड़ी है, जो कुश्ती के मैदान में मेहनत करके अपने परिवार, गांव, हरियाणा और देश का नाम रोशन करना चाहते हैं।

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मदीना की धरती पर नई शुरुआत, जहां मिट्टी के अखाड़ों से निकलते हैं देश के नामी पहलवान

हरियाणा की पहचान में कुश्ती का खास स्थान रहा है। यहां के गांवों में पहलवानी केवल एक खेल नहीं, बल्कि मेहनत, अनुशासन, साहस और परंपरा का हिस्सा है। रोहतक जिले के मदीना, मोखरा और आसपास के गांवों में भी लंबे समय से कुश्ती का माहौल रहा है। इन गांवों ने देश को कई प्रतिभाशाली खिलाड़ी दिए हैं। ओलंपिक पदक विजेता साक्षी मलिक और दूसरे चर्चित पहलवानों का जिक्र करते हुए ग्रामीणों ने बताया कि इस क्षेत्र की मिट्टी में खेल के प्रति गहरा लगाव है।

गांव के बुजुर्गों और खेल प्रेमियों का कहना है कि यहां प्रतिभा की कमी कभी नहीं रही। बच्चों में मेहनत करने का जज्बा है, उनके भीतर आगे बढ़ने की चाह है और वे घंटों अभ्यास करने के लिए तैयार रहते हैं। परेशानी तब आती है, जब उन्हें बड़े मुकाबलों में इस्तेमाल होने वाले मैट और दूसरी आधुनिक सुविधाओं की जरूरत होती है।

शिव शंकर कुश्ती अखाड़ा स्पोर्ट्स एकेडमी इसी जरूरत को पूरा करने की कोशिश कर रही है। यहां हरियाणा के अलावा उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश और जम्मू जैसे क्षेत्रों से भी बच्चे अभ्यास करने आते हैं। अलग-अलग जगहों से आने वाले इन युवाओं का उद्देश्य एक ही है—अपने खेल में सुधार करना और बड़े स्तर पर अपनी पहचान बनाना।

अखाड़े में निर्माण कार्य शुरू होने के दौरान बच्चों के चेहरों पर दिखाई दे रही खुशी इस बात का संकेत थी कि उनके लिए यह सुविधा कितनी मायने रखती है। अब उनकी उम्मीद है कि बेहतर जगह और मैट मिलने से वे नियमित रूप से अभ्यास कर सकेंगे और प्रतियोगिताओं की तैयारी अधिक प्रभावी ढंग से कर पाएंगे।

बारिश, जगह की कमी और मिट्टी के अखाड़े की चुनौती से जूझ रहे थे युवा पहलवान

किसी भी खिलाड़ी की सफलता के पीछे वर्षों की मेहनत होती है। सुबह जल्दी उठना, घंटों अभ्यास करना, अपने खान-पान और दिनचर्या का ध्यान रखना तथा हार के बाद दोबारा कोशिश करना—एक पहलवान का जीवन इन सब बातों से मिलकर बनता है। लेकिन जब मेहनत करने के लिए पर्याप्त जगह और जरूरी सुविधाएं न हों, तो खिलाड़ी की राह और कठिन हो जाती है।

शिव शंकर अखाड़े में भी लंबे समय से ऐसी ही परेशानियां सामने आ रही थीं। खिलाड़ियों के अनुसार, पहले उनके पास अभ्यास के लिए सीमित जगह थी और मुख्य रूप से मिट्टी के अखाड़े पर निर्भर रहना पड़ता था। बच्चों की संख्या बढ़ने के कारण सभी को एक साथ अभ्यास करने का अवसर नहीं मिल पाता था। बारिश होने पर परेशानी और बढ़ जाती थी तथा कई बार अभ्यास प्रभावित होता था।

पहलवान सुशांत ने अपनी बात रखते हुए बताया कि प्रस्तावित शेड में तीन मैट लगाए जाने की योजना है। उनके अनुसार, इससे लगभग 150 से 200 बच्चे एक साथ अभ्यास कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि पहले एक ही मैट वाले हॉल में सभी बच्चों का व्यवस्थित अभ्यास कराना मुश्किल था। नई सुविधा बनने के बाद बच्चों को पर्याप्त जगह मिलेगी और वे अपने खेल पर बेहतर तरीके से ध्यान दे सकेंगे।

एक अन्य पहलवान शुभम ने बताया कि वह करीब चार-पांच साल से कुश्ती का अभ्यास कर रहे हैं। उनके अनुसार, पहले मैट की कमी और बारिश के कारण नियमित अभ्यास में बाधा आती थी। उन्होंने उम्मीद जताई कि स्टेडियम तैयार होने के बाद बच्चों को अभ्यास के लिए बेहतर वातावरण मिलेगा।

इन खिलाड़ियों की बातों से साफ होता है कि खेल में प्रतिभा के साथ-साथ उचित संसाधनों की भी जरूरत होती है। किसी युवा के सपनों को आकार देने में परिवार, प्रशिक्षक, अभ्यास और सुविधाएं सभी की अहम भूमिका होती है। ऐसे में इंडोर स्टेडियम का निर्माण उन बाधाओं को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, जिनका सामना खिलाड़ी लंबे समय से कर रहे थे।

कई सालों से अधूरा था सपना, अब निर्माण कार्य शुरू होने से जगी उम्मीद

अखाड़े के संचालक सूबेदार संजय पहलवान सेना से सेवानिवृत्त हैं। वे लंबे समय से बच्चों को कुश्ती का अभ्यास कराने और उन्हें आगे बढ़ाने के प्रयास में जुटे हुए हैं। उनके अनुसार, अखाड़े को बेहतर सुविधाओं से युक्त बनाने का सपना काफी समय से था, लेकिन आर्थिक संसाधनों की कमी के कारण इसे पूरा करना आसान नहीं हो पा रहा था।

अखाड़े से जुड़े लोगों ने बताया कि इस सुविधा के लिए अलग-अलग स्तरों पर प्रयास किए गए। खेल सुविधाओं की जरूरत को लेकर संबंधित लोगों और जनप्रतिनिधियों के सामने भी बात रखी गई, लेकिन अपेक्षित समाधान नहीं निकल पाया। इसके बाद अखाड़ा संचालक और संबंधित प्रतिनिधि संत रामपाल जी महाराज के पास अपनी प्रार्थना लेकर पहुंचे।

जानकारी के अनुसार, 10 अक्टूबर को इस संबंध में प्रार्थना रखी गई थी और 16 अक्टूबर को निर्माण कार्य के शुभारंभ का कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस समय अंतराल में मांग को मंजूरी मिलने और फिर निर्माण कार्य शुरू होने से ग्रामीणों तथा खिलाड़ियों में खुशी दिखाई दी।

एक स्थानीय प्रतिनिधि ने बताया कि अखाड़े को तैयार करने के लिए पहले भी प्रयास किए गए थे। जमीन पर मेहनत हुई, लोगों ने सहयोग किया और अपनी क्षमता के अनुसार व्यवस्था बनाने की कोशिश की, लेकिन बड़ा इंडोर स्टेडियम बनाना संभव नहीं हो पाया। अब निर्माण कार्य शुरू होने से वर्षों से देखे जा रहे सपने को पूरा होने की उम्मीद मिली है।

ग्रामीणों का कहना था कि किसी खेल सुविधा के लिए केवल भवन की कल्पना करना पर्याप्त नहीं होता। उसके लिए संसाधन, योजना और लगातार काम करने की जरूरत होती है। ऐसे में निर्माण की शुरुआत उनके लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। अब उनकी नजर इस बात पर है कि स्टेडियम का काम समय पर पूरा हो और बच्चे जल्द से जल्द इसमें अभ्यास शुरू कर सकें।

182 गुणा 62 फीट का इंडोर स्टेडियम और बड़ा कुश्ती मैट

इस परियोजना की सबसे महत्वपूर्ण बात इसका प्रस्तावित आकार और खिलाड़ियों की जरूरतों के अनुसार सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है। कार्यक्रम में बताए गए विवरण के मुताबिक, इंडोर स्टेडियम 182 गुणा 62 फीट का होगा। इसमें 40 गुणा 120 फीट का कुश्ती मैट लगाया जाएगा।

अखाड़े से जुड़े लोगों के अनुसार, इस व्यवस्था में तीन मैट पर अभ्यास कराने की योजना है, जिससे अधिक बच्चों को एक साथ प्रशिक्षण मिल सकेगा। अभी खिलाड़ियों की संख्या के मुकाबले उपलब्ध जगह कम पड़ती थी। नई व्यवस्था से अभ्यास को अधिक व्यवस्थित बनाने और मौसम की बाधाओं को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

मैट पर अभ्यास का महत्व उन खिलाड़ियों के लिए विशेष है, जो प्रतियोगिताओं में भाग लेना चाहते हैं। ग्रामीणों ने बताया कि कई बार बच्चे मिट्टी के अखाड़े में मेहनत करके प्रतियोगिता में पहुंचते हैं, लेकिन वहां मैट पर कुश्ती लड़ने के दौरान उन्हें अलग तरह की परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। यदि उन्हें नियमित रूप से मैट पर अभ्यास करने का अवसर मिले, तो प्रतियोगिताओं के लिए तैयारी बेहतर हो सकती है।

हालांकि, किसी खिलाड़ी की सफलता केवल सुविधाओं पर निर्भर नहीं करती। उसके लिए अनुशासन, प्रशिक्षकों का मार्गदर्शन, निरंतर अभ्यास, पौष्टिक भोजन और प्रतियोगिताओं में भाग लेने के अवसर भी जरूरी हैं। इंडोर स्टेडियम इन जरूरतों को पूरा करने की दिशा में एक आधार तैयार कर सकता है।

स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि यहां प्रशिक्षण लेने वाले बच्चे आगे चलकर राज्य, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन करेंगे। ग्रामीणों ने यह भी कहा कि स्टेडियम का लाभ केवल मदीना गांव के बच्चों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आसपास के कई गांवों के युवा इसका उपयोग कर सकेंगे।

छह गांवों ही नहीं, आसपास के पूरे खेल क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है यह पहल

कार्यक्रम के दौरान इसे आसपास के छह गांवों के लिए एक बड़ी सौगात बताया गया। स्थानीय प्रतिनिधियों के अनुसार, शिव शंकर अखाड़ा क्षेत्र के बीच में स्थित होने के कारण कई गांवों के बच्चों के लिए उपयोगी साबित हो सकता है। कुछ वक्ताओं ने बताया कि आठ-नौ गांवों के बच्चे भी यहां नियमित रूप से अभ्यास करने आते हैं।

ब्लॉक सरपंच एसोसिएशन के प्रधान और बलंभा गांव के सरपंच सतपाल अलावत ने इस पहल पर खुशी जताई। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में कुश्ती का पुराना इतिहास है और यहां के बच्चे मेहनत भी बहुत करते हैं, लेकिन मैट जैसी सुविधाओं का अभाव उनके सामने बड़ी चुनौती था।

उन्होंने अपनी बात रखते हुए कहा कि मिट्टी के अखाड़े में अभ्यास करने वाले बच्चों को मैट पर मुकाबला करते समय कठिनाई होती थी। अब इंडोर स्टेडियम बनने से उन्हें उसी तरह की सुविधा में अभ्यास करने का अवसर मिलेगा, जैसी सुविधा प्रतियोगिताओं में जरूरी होती है। उनके अनुसार, इस अखाड़े का स्थान आसपास के गांवों के लिए सुविधाजनक है। इसलिए यहां बनने वाला स्टेडियम एक गांव की संपत्ति भर नहीं होगा, बल्कि पूरे इलाके के युवा खिलाड़ियों के लिए उपयोगी केंद्र बन सकता है।

ग्रामीणों ने यह भी उम्मीद जताई कि बेहतर सुविधाओं के कारण अधिक बच्चे कुश्ती की ओर आकर्षित होंगे। खेल बच्चों को अनुशासन, धैर्य, मेहनत और हार के बाद दोबारा खड़े होने की सीख देता है। यदि गांवों में ऐसी सुविधाएं बढ़ती हैं, तो युवाओं को अपनी ऊर्जा सही दिशा में लगाने के अवसर मिल सकते हैं।

खिलाड़ियों की आवाज में खुशी और भरोसा, बोले—अब मेहनत को मिलेगा बेहतर अवसर

निर्माण कार्य के शुभारंभ के दौरान खिलाड़ियों से बातचीत की गई तो उन्होंने अपनी उम्मीदों को खुलकर सामने रखा। उनके लिए यह केवल एक नया शेड नहीं, बल्कि वर्षों से चली आ रही परेशानियों को कम करने का अवसर है।

पहलवान सुशांत ने कहा कि पहले एक मैट पर सभी बच्चों का अभ्यास कराना मुश्किल था। अब तीन मैट की व्यवस्था होने से अधिक बच्चों को एक साथ अभ्यास करने का मौका मिलने की उम्मीद है। उन्होंने इस पहल को अपने भविष्य के लिए अच्छी शुरुआत बताया।

पहलवान शुभम ने भी कहा कि पहले बारिश के कारण अभ्यास प्रभावित होता था और मैट की कमी के चलते सभी बच्चों को पर्याप्त अवसर नहीं मिल पाता था। उन्होंने भरोसा जताया कि स्टेडियम बनने के बाद अभ्यास अधिक व्यवस्थित हो सकेगा।

बच्चों से बातचीत में यह भी सामने आया कि वे अपने प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन में लगातार मेहनत करना चाहते हैं। उनकी इच्छा है कि वे आगे चलकर बड़ी प्रतियोगिताओं में भाग लें और अपने परिवार तथा गांव का नाम रोशन करें।

इन युवा खिलाड़ियों की बातों में भविष्य के प्रति उत्साह दिखाई देता है। हालांकि, स्टेडियम का निर्माण पूरा होने के बाद ही इसकी वास्तविक उपयोगिता का पूरा आकलन किया जा सकेगा, लेकिन निर्माण की शुरुआत ने उन्हें अपनी तैयारी को बेहतर बनाने की नई उम्मीद जरूर दी है।

खिलाड़ियों के लिए जरूरी है कि वे इस अवसर का लाभ उठाते हुए नियमित अभ्यास करें, शिक्षा पर भी ध्यान दें और खेल भावना को बनाए रखें। बेहतर सुविधाओं के साथ मेहनत और सही प्रशिक्षण का मेल उन्हें आगे बढ़ने में मदद कर सकता है।

ग्रामीणों ने जताया आभार, बोले—बच्चों की प्रतिभा को आगे बढ़ने का अवसर मिलना चाहिए

कार्यक्रम में आसपास के कई गांवों के सरपंच, पंचायत प्रतिनिधि, बुजुर्ग और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हुए। लोगों ने निर्माण कार्य की शुरुआत पर प्रसन्नता जताई और इसे युवा खिलाड़ियों के भविष्य से जुड़ी पहल बताया।

एक स्थानीय प्रतिनिधि ने कहा कि इस क्षेत्र में कुश्ती की परंपरा काफी पुरानी है। यहां के बच्चों में प्रतिभा और मेहनत दोनों हैं, लेकिन सुविधाओं की कमी के कारण उन्हें कई बार कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इंडोर स्टेडियम बनने के बाद खिलाड़ियों को बेहतर अवसर मिलेंगे।

कुछ ग्रामीणों ने अपने क्षेत्र में पहले किए गए अन्य सेवा कार्यों का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि जरूरतमंद किसानों की सहायता, जलभराव की समस्या से प्रभावित गांवों में पानी निकालने के लिए पाइप और मोटर उपलब्ध कराने तथा गौशालाओं में चारे की व्यवस्था जैसे कार्यों से भी लोगों को राहत मिली है। इन उदाहरणों को उन्होंने सामाजिक सहयोग के महत्व से जोड़कर देखा।

हालांकि, अलग-अलग सेवा कार्यों का वास्तविक प्रभाव उनके संबंधित गांवों और लाभार्थियों की परिस्थितियों के आधार पर समझा जाना चाहिए। इस कार्यक्रम में ग्रामीणों की प्रमुख अपेक्षा यही थी कि कुश्ती स्टेडियम का निर्माण पूरा हो और बच्चों को इसका लाभ जल्द मिले। लोगों का कहना था कि किसी भी क्षेत्र का विकास तभी सार्थक होता है, जब वहां के बच्चों और युवाओं को आगे बढ़ने के अवसर मिलें। खेल सुविधाओं का विकास इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

संत रामपाल जी महाराज की सेवा पहल: जरूरत को समझकर युवाओं के भविष्य में सहयोग

मदीना गांव में इंडोर स्टेडियम के निर्माण कार्य का शुभारंभ संत रामपाल जी महाराज से जुड़ी उस सेवा पहल के रूप में देखा जा रहा है, जिसके अंतर्गत जरूरतमंद लोगों और समुदायों की समस्याओं के समाधान के लिए सहायता उपलब्ध कराने की बात कही जाती है। इस अवसर पर मौजूद ग्रामीणों और खिलाड़ियों ने उनके प्रति आभार व्यक्त किया।

संत रामपाल जी महाराज से जुड़ी अन्नपूर्णा मुहिम के संदर्भ में जरूरतमंद परिवारों को भोजन, कपड़े, चिकित्सा, शिक्षा और मकान जैसी आवश्यकताओं में सहयोग देने की बात भी कार्यक्रम के दौरान सामने आई। वक्ताओं ने किसानों के लिए सहायता, जलभराव से प्रभावित क्षेत्रों में राहत और गौशालाओं में चारे की व्यवस्था जैसे कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि समाज की जरूरतों को समझना और समय पर सहायता पहुंचाना महत्वपूर्ण है।

इस पहल का एक विशेष पक्ष यह है कि यहां सहयोग का केंद्र युवा खिलाड़ी हैं। अक्सर गांवों में बच्चों के भीतर प्रतिभा होने के बावजूद आर्थिक सीमाओं और संसाधनों की कमी के कारण उनकी तैयारी प्रभावित होती है। ऐसे में खेल सुविधाओं के निर्माण में सहयोग मिलने से उन्हें अपने लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर मिल सकता है।

करुणा और सेवा का महत्व तभी और बढ़ जाता है, जब उसका लाभ उन लोगों तक पहुंचे जिन्हें वास्तव में सहायता की जरूरत है। मदीना के खिलाड़ियों के लिए यह स्टेडियम उसी उम्मीद से जुड़ा है। अब इस पहल की सफलता इस बात से भी आंकी जाएगी कि निर्माण कार्य कितनी अच्छी तरह पूरा होता है और इससे कितने बच्चों को नियमित अभ्यास का लाभ मिलता है। ग्रामीणों ने संत रामपाल जी महाराज और उनकी टीम के प्रति धन्यवाद व्यक्त करते हुए आशा जताई कि भविष्य में भी बच्चों, किसानों और जरूरतमंद परिवारों की आवश्यकताओं पर ध्यान दिया जाता रहेगा।

मदीना में उम्मीद की नींव: बेहतर सुविधाएं मिलें, मेहनत रंग लाए और हरियाणा का नाम रोशन हो

रोहतक के मदीना गांव में शिव शंकर कुश्ती अखाड़ा स्पोर्ट्स एकेडमी के इंडोर स्टेडियम का निर्माण शुरू होना स्थानीय खिलाड़ियों और ग्रामीणों के लिए खुशी का अवसर है। 182 गुणा 62 फीट के प्रस्तावित स्टेडियम और 40 गुणा 120 फीट के कुश्ती मैट की योजना से बच्चों को बेहतर अभ्यास सुविधाएं मिलने की उम्मीद है। जो युवा अब तक जगह की कमी और मौसम की परेशानियों के बीच अभ्यास कर रहे थे, वे अब एक ऐसे वातावरण की आशा कर रहे हैं जहां उन्हें अपनी प्रतिभा निखारने का अधिक अवसर मिले। ग्रामीणों की उम्मीद है कि यहां से निकलने वाले पहलवान राज्य, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाएंगे।

संत रामपाल जी महाराज के आशीर्वाद से शुरू हुई इस पहल को लेकर उपस्थित लोगों ने आभार व्यक्त किया। अब सबसे महत्वपूर्ण चरण निर्माण कार्य को पूरा करना और इस सुविधा का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करना है। मदीना की धरती पर रखी गई यह नींव केवल ईंट-पत्थर के एक भवन की शुरुआत नहीं, बल्कि उन बच्चों की उम्मीदों से जुड़ी है जो कुश्ती के मैदान में अपना भविष्य बनाना चाहते हैं। उनकी मेहनत, प्रशिक्षकों का मार्गदर्शन और बेहतर सुविधाएं मिलकर आने वाले समय में सकारात्मक परिणाम दे सकती हैं। अधिक जानकारी हेतु आप SANewsYoutube channel पर विजिट करें।

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