हरियाणा के जींद जिले के दड़ गांव से करीब 13 लोगों का एक समूह अपने गांव के एक परिवार की परेशानी लेकर संत रामपाल जी महाराज से मिलने पहुंचा। परिवार के सामने सबसे बड़ी चिंता थी एक युवक का किडनी ट्रांसप्लांट। बताया गया कि युवक पिछले करीब तीन वर्षों से डायलिसिस पर है और 22 तारीख को चंडीगढ़ में उसका किडनी ट्रांसप्लांट प्रस्तावित है। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण परिवार के लिए इलाज का खर्च जुटाना लगातार मुश्किल होता जा रहा था।
परिवार और गांव के लोगों ने मदद की गुहार लगाई। मुलाकात के दौरान ₹2 लाख की तत्काल आर्थिक सहायता दी गई और आगे इलाज में लगने वाले खर्च को लेकर भी मदद का आश्वासन दिया गया। साथ ही चंडीगढ़ में इलाज के दौरान रहने और खाने की व्यवस्था में सहयोग की बात कही गई। यह कहानी सिर्फ एक परिवार की आर्थिक परेशानी की नहीं, बल्कि उस समय की है जब बीमारी से जूझ रहे व्यक्ति के साथ पूरा गांव खड़ा होकर उसके लिए मदद का रास्ता तलाश रहा था।
तीन साल से डायलिसिस पर चल रही जिंदगी, अब किडनी ट्रांसप्लांट की बारी
दड़ गांव निवासी अंकित पिछले करीब तीन वर्षों से किडनी की गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं। बातचीत में उन्होंने बताया कि उनकी किडनी फेल है और तीन साल से डायलिसिस चल रही है। लगातार इलाज के बीच परिवार को यह चिंता सताती रही कि आगे का खर्च कैसे चलेगा और ट्रांसप्लांट के लिए आवश्यक रकम कहां से आएगी। अंकित के परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि वे लंबे समय तक महंगे इलाज का खर्च आसानी से उठा सकें। परिवार की ओर से बताया गया कि इलाज का खर्च चलाने के लिए जमीन तक बेचनी पड़ी। हर गुजरते दिन के साथ चिंता बढ़ती जा रही थी।
अंकित ने अपनी स्थिति बताते हुए कहा कि पहले उन्हें लगता था कि शायद किडनी ट्रांसप्लांट कराना संभव नहीं हो पाएगा और जिंदगी इसी तरह डायलिसिस के सहारे गुजर जाएगी। बीमारी के साथ आर्थिक परेशानी ने परिवार के सामने दोहरी चुनौती खड़ी कर दी थी। 22 तारीख को चंडीगढ़ में ट्रांसप्लांट की तारीख नजदीक आने के साथ परिवार की चिंता और बढ़ गई थी। इसी बीच गांव के लोग एकजुट होकर सहायता की उम्मीद लेकर संत रामपाल जी महाराज के पास पहुंचे।
परिवार अकेला नहीं था, गांव के लोग भी साथ लेकर पहुंचे फरियाद
दड़ गांव से आए लोगों ने बताया कि वे करीब 13 लोग थे। इनमें परिवार के सदस्य और गांव के लोग शामिल थे। उनका उद्देश्य किसी व्यक्तिगत लाभ के लिए जाना नहीं, बल्कि एक जरूरतमंद परिवार के इलाज के लिए सहायता मांगना था। परिवार के सदस्य शिव कुमार ने बताया कि अंकित उनके छोटे भाई हैं और करीब तीन वर्षों से बीमारी से परेशान हैं। उन्होंने बताया कि अब तक का समय बेहद मुश्किल रहा है और आगे के इलाज को लेकर भी परिवार डरा हुआ था।
उनके मुताबिक, हर समय यही चिंता रहती थी कि दवाइयों और इलाज का खर्च कहां से आएगा। लेकिन सहायता का आश्वासन मिलने के बाद परिवार को आगे की चिंता कुछ कम महसूस हुई। परिवार के पिता समुंदर सिंह भी इस मुलाकात के दौरान भावुक दिखाई दिए। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने बेटे के इलाज के लिए कई जगह मदद की उम्मीद की थी। बातचीत में उन्होंने स्थानीय नेताओं और जनप्रतिनिधियों से सहायता मांगने के प्रयासों का भी जिक्र किया।
मुलाकात के दौरान मिली ₹2 लाख की सहायता
परिवार से उनकी आर्थिक स्थिति और उपलब्ध पैसों के बारे में पूछा गया। परिवार ने अपनी क्षमता के अनुसार जानकारी दी। इसके बाद ₹2 लाख की तत्काल सहायता देने की बात कही गई। उन्हें यह भी कहा गया कि चंडीगढ़ के पीजीआई में इलाज से संबंधित बैंक अकाउंट की जानकारी उपलब्ध कराई जाए, ताकि जरूरत के अनुसार इलाज का खर्च सीधे संबंधित खाते में भेजा जा सके।
परिवार का कहना है कि उन्हें आगे के खर्च को लेकर भी आश्वासन दिया गया। बातचीत में इलाज का खर्च 50 लाख रुपये, एक करोड़ रुपये या उससे अधिक होने की स्थिति में भी सहायता करने की बात कही गई। इस सहायता के साथ परिवार को यह संदेश भी मिला कि उन्हें इलाज के दौरान आर्थिक चिंता में अकेला नहीं छोड़ा जाएगा।
चंडीगढ़ में रहने और खाने की व्यवस्था में सहयोग की बात भी सामने आई
किडनी ट्रांसप्लांट जैसी प्रक्रिया केवल अस्पताल के खर्च तक सीमित नहीं होती। मरीज के साथ रहने वाले परिवार के सदस्यों के लिए भी भोजन, ठहरने और आने-जाने जैसी जरूरतें सामने आती हैं। चंडीगढ़ स्थित पीजीआई में इलाज के दौरान परिवार के रहने और खाने की व्यवस्था में भी सहयोग किया जाएगा। वहां एक सेवादार की जिम्मेदारी लगाने की बात भी कही गई, जो परिवार की जरूरतों में सहायता कर सके।
परिवार के लिए यह बात इसलिए महत्वपूर्ण थी क्योंकि बीमारी के इलाज के साथ-साथ अस्पताल के बाहर होने वाला अतिरिक्त खर्च भी उनके लिए चिंता का कारण बना हुआ था। समुंदर सिंह और उनके परिवार ने कहा कि उन्हें सबसे बड़ा सहारा इस बात से मिला कि अब उन्हें अपने बेटे के इलाज को लेकर पहले जैसी आर्थिक चिंता नहीं रही।
अंकित की आंखों में दिखाई दी राहत
मुलाकात के बाद अंकित से जब उनकी भावनाओं के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि उनके लिए ये खुशी के आंसू हैं। तीन साल से डायलिसिस और किडनी फेल होने की स्थिति ने उनके मन में भविष्य को लेकर डर पैदा कर दिया था। अब ट्रांसप्लांट की तारीख नजदीक थी, लेकिन आर्थिक परेशानी सामने खड़ी थी। सहायता का आश्वासन मिलने के बाद उन्होंने कहा कि अब उन्हें डर नहीं लग रहा।
उनके बड़े भाई शिव कुमार ने भी कहा कि पहले आने वाले समय के बारे में सोचकर डर लगता था। दवाइयों और इलाज की व्यवस्था कैसे होगी, यह लगातार चिंता बनी रहती थी। लेकिन अब मिली सहायता और आश्वासन से परिवार को आगे की प्रक्रिया के लिए मानसिक सहारा मिला है। यहां राहत केवल पैसों की नहीं थी। परिवार के लिए यह भरोसा भी महत्वपूर्ण था कि मुश्किल समय में उनके साथ लोग खड़े हैं।
पिता समुंदर सिंह ने व्यक्त किया आभार
समुंदर सिंह की बातों में अपने बेटे के प्रति चिंता और सहायता मिलने की राहत दोनों दिखाई दीं। उन्होंने कहा कि वह अपने परिवार और पूरे गांव की तरफ से संत रामपाल जी महाराज के प्रति आभार व्यक्त करते हैं। उन्होंने बताया कि वे मदद की उम्मीद लेकर पहुंचे थे, लेकिन जिस तरह से सहायता का आश्वासन मिला, वह उनकी उम्मीद से अलग था। परिवार का कहना है कि उनके सामने सबसे बड़ा सवाल बेटे की जिंदगी और इलाज था। आर्थिक कमजोरी के कारण वे खुद को असहाय महसूस कर रहे थे। ऐसे समय में मिली सहायता ने उनके लिए उम्मीद का रास्ता खोला।
संत रामपाल जी महाराज के सेवा-कार्य को लेकर ग्रामीणों ने जताई कृतज्ञता
मुलाकात के बाद दड़ गांव से आए लोगों ने संत रामपाल जी महाराज द्वारा जरूरतमंदों की सहायता किए जाने की बात कही। ग्रामीणों ने इसे अपने परिवार के लिए कठिन समय में मिला सहयोग बताया। ग्रामीणों के लिए सबसे भावुक क्षण वह था जब तत्काल आर्थिक सहायता के साथ भविष्य के इलाज को लेकर भी सहयोग का भरोसा दिया गया। उन्होंने कहा कि उनके लिए यह मदद उस समय मिली जब परिवार को इसकी सबसे ज्यादा जरूरत थी।
बीमारी से जूझते परिवार के लिए आर्थिक मदद बनी नई उम्मीद
किडनी की बीमारी लंबे समय तक इलाज और नियमित चिकित्सा देखभाल की मांग कर सकती है। ऐसे में आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए बीमारी का सामना करना और कठिन हो जाता है। दड़ गांव के इस परिवार की कहानी भी इसी चुनौती को सामने रखती है। तीन साल की डायलिसिस, इलाज का लगातार खर्च और अब ट्रांसप्लांट की तैयारी—इन सबके बीच परिवार मानसिक और आर्थिक दबाव में था। गांव के लोगों ने परिवार का साथ दिया और सहायता की तलाश में एकजुट होकर आगे आए। मुलाकात के बाद परिवार के चेहरे पर जो राहत दिखाई दी, वह उनके लिए इस सहायता के महत्व को बताती है। उनके लिए यह सिर्फ ₹2 लाख की राशि नहीं, बल्कि आने वाले इलाज को लेकर मिला एक भरोसा था।
अंत में एक उम्मीद—मुश्किल समय में किसी का साथ जिंदगी को आसान बना सकता है
दड़ गांव से चंडीगढ़ तक चल रही इस कहानी में बीमारी, आर्थिक मजबूरी, परिवार की चिंता और गांव के सामूहिक सहयोग की तस्वीर दिखाई देती है। अंकित तीन वर्षों से किडनी की बीमारी से जूझ रहे हैं और अब ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया की ओर बढ़ रहे हैं। परिवार के अनुसार, संत रामपाल जी महाराज से मुलाकात के बाद उन्हें तत्काल आर्थिक सहायता मिली और आगे के इलाज में भी सहयोग का आश्वासन दिया गया। चंडीगढ़ में रहने-खाने और इलाज से जुड़े खर्च में सहायता की बात भी सामने आई। इस पूरे घटनाक्रम ने परिवार के भीतर एक नई उम्मीद पैदा की है। पिता समुंदर सिंह, भाई शिव कुमार और अंकित की बातचीत में बार-बार यही बात सामने आई कि मुश्किल समय में मिला सहारा किसी भी परिवार के लिए बहुत मायने रखता है।
जब बीमारी के साथ आर्थिक मजबूरी भी सामने खड़ी हो, तब किसी जरूरतमंद का हाथ थामना उसके लिए सिर्फ मदद नहीं, बल्कि उम्मीद की एक नई किरण बन सकता है। दड़ गांव के इस परिवार के लिए मिली सहायता ने इसी उम्मीद को मजबूत किया है—कि कठिन वक्त में इंसानियत और सहयोग का हाथ आगे बढ़े तो संघर्ष का रास्ता कुछ आसान हो सकता है। अधिक जानकारी के लिए आप Sant Rampal Ji Maharaj App डॉउनलोड करें।



